उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) के लोक निर्माण विभाग (PWD) में वर्षों से कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को लेकर एक बार फिर शहर में चर्चा तेज हो गई है। नागरिकों ने आयुक्त मनीषा आव्हाले से सवाल किया है कि PWD विभाग में डेप्युटी इंजीनियर संदीप जाधव और कर्मचारी दीप्ति लाडे का स्थानांतरण आखिर अब तक क्यों नहीं किया गया और उनकी बदली कब होगी?
स्थानीय नागरिकों का दावा है कि दोनों पिछले 20 से अधिक वर्षों से इसी विभाग में कार्यरत हैं। इसे लेकर लोगों का कहना है कि लंबे समय तक एक ही विभाग में पदस्थ रहने से प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उनका मानना है कि समय-समय पर स्थानांतरण होने से प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी और निष्पक्ष बनी रहती है।
नागरिकों का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार के स्थानांतरण संबंधी प्रचलित सरकारी आदेश (GR) के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को तीन वर्ष से अधिक एक ही विभाग या पद पर नहीं रखा जाना चाहिए। निर्धारित कार्यकाल पूरा होने के बाद उसका स्थानांतरण किया जाना अपेक्षित होता है, ताकि प्रशासनिक संतुलन और कार्यप्रणाली की पारदर्शिता बनी रहे।
इसी आधार पर शहर के लोगों का सवाल है कि यदि यह नीति अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों पर लागू होती है, तो PWD विभाग में कार्यरत इन दोनों कर्मचारियों के मामले में अब तक इसका पालन क्यों नहीं किया गया। नागरिकों का कहना है कि यदि किसी विशेष प्रशासनिक कारण से उनका स्थानांतरण नहीं किया गया है, तो इसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए, जिससे किसी प्रकार की भ्रम या चर्चा की स्थिति समाप्त हो सके।
शहर के कई नागरिकों का मानना है कि स्थानांतरण नीति का उद्देश्य केवल कर्मचारियों का तबादला करना नहीं, बल्कि प्रशासन में निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी है। ऐसे में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के लंबे समय तक एक ही विभाग में बने रहने पर स्वाभाविक रूप से सवाल उठना लाज़िमी है।
नागरिकों ने आयुक्त मनीषा आव्हाले से मांग की है कि इस पूरे मामले पर स्पष्ट रुख अपनाया जाए और यह बताया जाए कि संदीप जाधव एवं दीप्ति लाडे की बदली अब तक क्यों नहीं हुई। साथ ही, यदि स्थानांतरण संबंधी नियम लागू होते हैं, तो उनके अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अब देखना यह होगा कि उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन इस मामले पर क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या स्थानांतरण नीति के अनुरूप आगे कोई कार्रवाई की जाती है। फिलहाल, यह मुद्दा शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और नागरिक प्रशासन के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

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