उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) का करीब 50 वर्ष पुराना मुख्यालय अब गंभीर रूप से जर्जर और असुरक्षित स्थिति में पहुंच चुका है। इमारत की खराब हालत ने न केवल जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यहां रोजाना आने वाले हजारों नागरिकों के लिए भी बड़ा खतरा पैदा कर दिया है।
उल्हासनगर महानगरपालिका मुख्यालय में प्रतिदिन शहर के मेयर, 78 पार्षद, लगभग 1,000 अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में नागरिक अपने विभिन्न प्रशासनिक कार्यों के लिए पहुंचते हैं। लेकिन भवन की लगातार बिगड़ती स्थिति के कारण किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका जताई जा रही है। कई स्थानों पर दीवारों में दरारें, छत और प्लास्टर के टूटने जैसी समस्याएं भवन की जर्जर हालत को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं।
सूत्रों के अनुसार, इमारत की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने नई उल्हासनगर महानगर पालिका इमारत के निर्माण की प्रक्रिया को गति देने के साथ-साथ मुख्यालय को अस्थायी रूप से किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की तैयारियां भी तेज कर दी हैं। इसका उद्देश्य कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस भवन से पूरे शहर का प्रशासन संचालित होता है, वही अब सुरक्षा के लिहाज से सबसे बड़ा चिंता का विषय बन गया है। उनका मानना है कि किसी संभावित दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय प्रशासन को तत्काल प्रभाव से आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
अब सभी की उल्हासनगर महानजर पालिका प्रशासन के अगले फैसले पर टिकी है कि नई इमारत का निर्माण और कार्यालय का स्थानांतरण कितनी तेजी से पूरा किया जाता है, ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

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