कल्याण: दिनेश मीरचंदानी
महाराष्ट्र राज्य आबकारी विभाग के ठाणे-2 (कल्याण) कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों पर कथित मानसिक दबाव को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक, कार्यालय में कार्यरत एक द्वितीय निरीक्षक को अचानक दिल का दौरा पड़ा। उन्हें तत्काल गोरेगांव के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका ICU में उपचार जारी बताया जा रहा है। उनकी स्थिति गंभीर होने की जानकारी सामने आई है।
इस घटना के बाद विभाग के भीतर काम के दबाव और कथित तनावपूर्ण कार्य वातावरण को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सवाल उठ रहा है कि क्या लगातार बढ़ता काम का बोझ और कथित मानसिक दबाव कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है?
⚠️ पहले महिला कर्मचारी, अब द्वितीय निरीक्षक
कल्याण आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। कुछ कर्मचारियों द्वारा अतिरिक्त कार्यभार, कथित मानसिक दबाव, अनुचित व्यवहार, छुट्टी से जुड़े मामलों और अवकाश के दिनों में भी काम करने के लिए बुलाए जाने जैसी शिकायतें किए जाने की जानकारी है।
इसी बीच, पहले एक महिला कर्मचारी की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया था। उस प्रकरण की जांच चल रही है। अब द्वितीय निरीक्षक को दिल का दौरा पड़ने की घटना ने विभागीय कामकाज और कर्मचारियों के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं।
हालांकि, इन स्वास्थ्य संबंधी घटनाओं और कार्यालय में कथित तनाव के बीच सीधा संबंध है या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
🔥 कर्मचारियों में कथित डर और दबाव का माहौल?
विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कुछ अधिकारी और कर्मचारी काम के दौरान मानसिक दबाव महसूस कर रहे हैं। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि कर्मचारी अपनी शिकायतें वरिष्ठ अधिकारियों के सामने खुलकर रखने से हिचकिचाते हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या विभाग में कर्मचारियों की शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था मौजूद है? यदि किसी कर्मचारी को वरिष्ठ अधिकारी की कार्यप्रणाली को लेकर शिकायत हो, तो क्या वह बिना किसी डर के अपनी बात रख सकता है?
🔎 विभागीय जांच जारी
मिली जानकारी के अनुसार, पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी अधीक्षक प्रवीण तांबे को सौंपी गई है। जांच के तहत 31 अगस्त को कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रारंभिक बयान दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच के अगले चरण में 8 सितंबर को विस्तृत बयान दर्ज किए जाने की संभावना है।
जांच में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर ध्यान दिए जाने की उम्मीद है
- कर्मचारियों पर कथित अतिरिक्त कार्यभार की स्थिति;
- कार्यालय के वातावरण और मानसिक दबाव से जुड़ी शिकायतें;
- छुट्टियों से संबंधित शिकायतें;
- अवकाश के दिनों में काम करने के कथित दबाव की जांच;
- अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ व्यवहार संबंधी आरोप;
- महिला कर्मचारी और द्वितीय निरीक्षक की स्वास्थ्य संबंधी घटनाओं का कार्यालयीन परिस्थितियों से कोई संबंध है या नहीं।
⚖️ अब वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप पर नजर
इस पूरे प्रकरण में अब महाराष्ट्र राज्य आबकारी विभाग के आयुक्त डॉ. राजेश देशमुख और विभागीय उपआयुक्त की भूमिका पर भी नजरें टिकी हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जांच केवल विभागीय प्रक्रिया तक सीमित रहेगी या आरोपों की गंभीरता को देखते हुए ठोस प्रशासनिक कार्रवाई भी की जाएगी?
साथ ही यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच के दौरान कर्मचारियों को बिना किसी दबाव या भय के अपनी बात रखने का अवसर मिलता है या नहीं।
🚨 जांच से सामने आएगी असली तस्वीर?
एक के बाद एक कर्मचारियों की तबीयत से जुड़ी गंभीर घटनाओं के सामने आने के बाद कल्याण आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी घटनाओं को सीधे कार्यालयीन तनाव से जोड़ना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।
इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और विस्तृत जांच जरूरी मानी जा रही है, ताकि आरोपों की वास्तविकता सामने आ सके और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनुचित दबाव साबित होता है तो उचित कार्रवाई की जा सके।
संबंधित अधीक्षक उत्तम राजाराम शिंदे और विभागीय प्रशासन का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से शामिल किया जाना अपेक्षित है।
अब निगाहें 8 सितंबर को होने वाली अगली जांच प्रक्रिया और दर्ज किए जाने वाले बयानों पर हैं। जांच का निष्कर्ष क्या निकलता है और वरिष्ठ प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

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