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बांद्रा में फिर समीर वानखेडे!14 अगस्त को गेटी-गैलेक्सी के बाहर ‘भव्य नशामुक्ति अभियान’ होगा, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल होंगे।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

ड्रग्स और नशे के खिलाफ युवाओं में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार की ओर से 14 अगस्त 2026 को मुंबई के बांद्रा में ‘भव्य नशामुक्ति अभियान’ आयोजित किया जा रहा है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में होने वाले इस अभियान में पूर्व NCB अधिकारी समीर वानखेडे भी शामिल होंगे।

कार्यक्रम का आयोजन 14 अगस्त की सुबह 10:30 बजे बांद्रा स्थित गेटी-गैलेक्सी सिनेमा के बाहर किया जाएगा। अभियान में बड़ी संख्या में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों को आमंत्रित किया गया है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे की बढ़ती समस्या के प्रति जागरूक करना और उन्हें ड्रग्स से दूर रहने का संदेश देना है।

बांद्रा और समीर वानखेडे का पुराना कनेक्शन

समीर वानखेडे की बांद्रा में मौजूदगी इसलिए भी चर्चा का विषय बन रही है, क्योंकि कुछ वर्ष पहले अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान से जुड़े ड्रग्स मामले के दौरान वानखेडे राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आए थे। उस मामले की जांच और उससे जुड़ी कार्रवाई को लेकर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस देखने को मिली थी।

अब कई वर्षों बाद उसी बांद्रा इलाके में ड्रग्स के खिलाफ आयोजित एक बड़े जनजागरूकता अभियान में वानखेडे की मौजूदगी एक बार फिर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है।

युवाओं को नशे से दूर रखने पर रहेगा जोर

‘भव्य नशामुक्ति अभियान’ के दौरान विद्यार्थियों और युवाओं को ड्रग्स के स्वास्थ्य, सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाएगा। अभियान के जरिए युवाओं से नशे से दूर रहने और समाज को नशामुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील किए जाने की उम्मीद है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्रों की भागीदारी को देखते हुए इसे युवाओं के बीच नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने की एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

14 अगस्त पर टिकी नजरें

समीर वानखेडे की मौजूदगी के कारण इस कार्यक्रम को लेकर सार्वजनिक और मीडिया स्तर पर भी उत्सुकता बढ़ गई है। हालांकि, कार्यक्रम का घोषित उद्देश्य नशामुक्ति और जनजागरूकता है और फिलहाल किसी नए विवाद या कार्रवाई की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

ऐसे में 14 अगस्त को बांद्रा के गेटी-गैलेक्सी के बाहर होने वाला यह अभियान युवाओं में नशे के खिलाफ जागरूकता के साथ-साथ समीर वानखेडे की मौजूदगी के कारण भी चर्चा में रहने की संभावना है।















उल्हासनगर की सियासत में AKK की तिकड़ी का बढ़ता दबदबा, अरुण आशान, कमलेश निकम और कलवंत सिंह की जोड़ी की शहरभर में चर्चा।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर की स्थानीय राजनीति में इन दिनों AKK की तिकड़ी—अरुण आशान, कमलेश निकम और कलवंत सिंह को लेकर राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच तक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। महानगरपालिका की सत्ता और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में इस तिकड़ी की बढ़ती सक्रियता को लेकर शहर में तरह-तरह की राजनीतिक चर्चाएं सामने आ रही हैं।

स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अरुण आशान, कमलेश निकम और कलवंत सिंह के बीच बढ़ता राजनीतिक तालमेल उल्हासनगर की राजनीति में एक नए समीकरण की ओर इशारा कर रहा है। यही वजह है कि इन तीनों नेताओं की गतिविधियों और उनके बीच दिखाई देने वाली नजदीकियों पर राजनीतिक जानकारों के साथ-साथ आम नागरिकों की भी नजर बनी हुई है।

महानगरपालिका की सत्ता में प्रभाव को लेकर चर्चा

उल्हासनगर महानगरपालिका की सत्ता से जुड़े विभिन्न राजनीतिक फैसलों और गतिविधियों के बीच AKK की तिकड़ी के प्रभाव को लेकर चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं। शहर की स्थानीय राजनीति में यह सवाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि आने वाले समय में यह राजनीतिक समीकरण महानगरपालिका की सत्ता और संगठनात्मक स्तर पर किस तरह की भूमिका निभाता है।

डॉ. श्रीकांत शिंदे के करीबी माने जाने की चर्चा

राजनीतिक हलकों में अरुण आशान, कमलेश निकम और कलवंत सिंह को शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के करीबी नेताओं में भी माना जाता है। इसी राजनीतिक नजदीकी के चलते उल्हासनगर में AKK की तिकड़ी को लेकर चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया है।

हालांकि, इस तिकड़ी की राजनीतिक भूमिका और भविष्य की रणनीति को लेकर अभी कई बातें राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित हैं। आने वाले दिनों में इनके बीच तालमेल और स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों का असर उल्हासनगर की राजनीति पर कितना पड़ता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

फिलहाल, AKK की तिकड़ी उल्हासनगर की राजनीति में चर्चा का नया केंद्र बन गई है और शहर के राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच तक इनके नाम और राजनीतिक समीकरण को लेकर चर्चाएं जारी हैं।


















“15 साल बनाम 5 महीने”: विधायक कुमार ऐलानी पर बरसे शिव सेना नेता कमलेश निकम, विकास कार्यों को लेकर किया बड़ा दावा।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

शिवसेना नेता कमलेश निकम ने उल्हासनगर के विधायक कुमार ऐलानी पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए उनके कार्यकाल और शहर के विकास को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। निकम ने आरोप लगाया कि विधायक कुमार ऐलानी करीब 15 वर्षों से राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन इस लंबे कार्यकाल के बावजूद उल्हासनगर के विकास के लिए कोई उल्लेखनीय काम दिखाई नहीं देता।

कमलेश निकम ने कहा कि महापौर के महज पांच महीने के कार्यकाल में 500 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों को गति दी गई है। उन्होंने दावा किया कि शहर में बुनियादी सुविधाओं, परिवहन और अन्य विकास कार्यों को लेकर महापौर की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

15 अगस्त से 30 नई बस सेवाओं का दावा

निकम ने कहा कि महापौर के प्रयासों से आगामी 15 अगस्त को उल्हासनगर शहरवासियों को 30 नई बस सेवाओं की सौगात मिलने जा रही है। उन्होंने इसे शहर के सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

उन्होंने कहा कि शहर की बढ़ती आबादी और नागरिकों की परिवहन संबंधी जरूरतों को देखते हुए नई बस सेवाएं शुरू होना आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती हैं।

“ऐलानी सिर्फ एंटीलिया और साहूकारों के विधायक”

विधायक कुमार ऐलानी पर निशाना साधते हुए कमलेश निकम ने आरोप लगाया कि “कुमार ऐलानी केवल एंटीलिया इमारत और साहूकारों के विधायक बनकर रह गए हैं।” उन्होंने कहा कि विधायक को शहर के आम नागरिकों, उनकी समस्याओं और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

विधानसभा में उल्हासनगर की आवाज नहीं उठाने का आरोप

निकम ने आगे आरोप लगाया कि महाराष्ट्र विधानसभा के मौजूदा सत्रों में भी विधायक कुमार ऐलानी ने उल्हासनगर के महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रभावी तरीके से नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि शहर में सड़क, यातायात, सार्वजनिक परिवहन, पानी, स्वास्थ्य और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जिन्हें विधानसभा में मजबूती से उठाने की आवश्यकता है।

कमलेश निकम ने कहा कि “उल्हासनगर की जनता अब केवल राजनीतिक दावों पर नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाले विकास कार्यों पर विश्वास करेगी।”

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में शहर की जनता यह तय करेगी कि कौन जनहित के मुद्दों के लिए काम कर रहा है और कौन केवल राजनीति तक सीमित है।

हालांकि, निकम द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर विधायक कुमार ऐलानी की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।


















उल्हासनगर में 'RRR' की तिकड़ी फिर एकजुट, राजेंद्रसिंह भुल्लर, राजेंद्र चौधरी और रमेश चव्हाण के साथ आने से शिवसैनिकों में उत्साह की नई लहर।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर की राजनीति में गुरुवार को उस समय एक भावनात्मक और चर्चित क्षण देखने को मिला, जब वरिष्ठ शिवसैनिक राजेंद्रसिंह भुल्लर (महाराज), राजेंद्र चौधरी और रमेश चव्हाण एक साथ दिखाई दिए। तीनों नेताओं की एक साथ मौजूदगी की तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसके बाद अनेक शिवसैनिकों और समर्थकों ने इसे संगठन की मजबूती और एकता का प्रतीक बताते हुए स्वागत किया।

शिवसैनिकों के बीच यह त्रिमूर्ति लंबे समय से संगठन के संघर्ष, समर्पण और नेतृत्व का प्रतीक मानी जाती रही है। समर्थकों का कहना है कि जब उल्हासनगर में अपराध, दहशत और अस्थिरता का माहौल था, उस दौर में शिवसेना से जुड़ना आसान नहीं था। ऐसे समय में हिंदूहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे के विचारों से प्रेरित होकर तथा धर्मवीर आनंद दिघे के मार्गदर्शन में इन वरिष्ठ नेताओं ने संगठन को मजबूत करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई।

समर्थकों के अनुसार, राजेंद्रसिंह भुल्लर (महाराज), राजेंद्र चौधरी और रमेश चव्हाण ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में शिवसेना का संगठन खड़ा करने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और भगवा विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। उनका दावा है कि वर्षों के संघर्ष, संगठनात्मक मेहनत और नेतृत्व के कारण आगे चलकर उल्हासनगर महानगरपालिका में शिवसेना-भाजपा की सत्ता स्थापित होने की राह भी मजबूत हुई।

शिवसैनिकों का कहना है कि संगठन के शुरुआती दौर में अनेक कार्यकर्ताओं को विरोध, हमलों और धमकियों का सामना करना पड़ा तथा कई वरिष्ठ शिवसैनिकों ने संघर्ष के दौरान बलिदान भी दिया। इसके बावजूद संगठन के प्रति उनकी निष्ठा और संकल्प कमजोर नहीं पड़ा। उस समय "आदेश दिघे साहेब का... और प्रेरणा बाळासाहेब की" का संदेश कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का प्रमुख आधार माना जाता था।

बीते वर्षों में संगठन के भीतर समय-समय पर मतभेदों और दूरियों की चर्चाएं भी सामने आती रहीं। हालांकि, तीनों वरिष्ठ नेताओं के एक साथ दिखाई देने के बाद समर्थकों का मानना है कि यह तस्वीर संगठन में सकारात्मक संदेश देने वाली है। सोशल मीडिया पर कई कार्यकर्ताओं ने इसे "RRR की वापसी" बताते हुए संगठन के लिए शुभ संकेत बताया।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि सत्ता और पद समय के साथ बदलते रहते हैं, लेकिन वरिष्ठ नेताओं की एकजुटता संगठन को नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और दिशा प्रदान करती है। उनका मानना है कि यदि यह एकता आगे भी बनी रहती है तो संगठन को भविष्य में और मजबूती मिलेगी।

समर्थकों ने यह भी आशा व्यक्त की कि हिंदूहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे के विचारों, धर्मवीर आनंद दिघे के संस्कारों तथा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में संगठन की एकजुटता निरंतर बनी रहेगी और कार्यकर्ताओं को इसी प्रकार प्रेरणा मिलती रहेगी।

हालांकि, इस पुनर्मिलन को लेकर संबंधित नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक राजनीतिक घोषणा या संयुक्त बयान सामने नहीं आया है। फिलहाल, उनकी एक साथ आई तस्वीर ने उल्हासनगर के राजनीतिक और संगठनात्मक हलकों में चर्चा का विषय जरूर बना दिया है।



















उल्हासनगर-3 में सप्तध्यान फाउंडेशन व सुरेखा क्रिटिकेयर हॉस्पिटल का संयुक्त स्वास्थ्य अभियान, निःशुल्क नेत्र जांच शिविर 7 अगस्त 2026 को।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

सामाजिक संस्था सप्तध्यान फाउंडेशन द्वारा सुरेखा क्रिटिकेयर हॉस्पिटल के सहयोग से 7 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को निःशुल्क नेत्र जांच एवं मोतियाबिंद स्क्रीनिंग शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक सुरेखा क्रिटिकेयर हॉस्पिटल, इंडियन बैंक के पास, सेंट्रल हॉस्पिटल रोड, उल्हासनगर-3 में आयोजित होगा।

शिविर का उद्देश्य नागरिकों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को समय रहते आंखों की बीमारियों की जांच की सुविधा उपलब्ध कराना तथा मोतियाबिंद जैसी गंभीर समस्या की प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर उचित उपचार के लिए जागरूक करना है।

आयोजकों के अनुसार, नियमित नेत्र जांच से मोतियाबिंद का समय पर पता लगाया जा सकता है, दृष्टि हानि से बचाव होता है, आंखों की रोशनी सुरक्षित रहती है तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है। इसी उद्देश्य के साथ नागरिकों से इस निःशुल्क शिविर का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की गई है।

शिविर में आने वाले मरीजों की विशेषज्ञों द्वारा नेत्र जांच की जाएगी तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें आगे के उपचार और परामर्श की भी जानकारी दी जाएगी।

अपॉइंटमेंट एवं अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:

योगाचार्य सतीश शर्मा: 9011808012

नेत्र विशेषज्ञ (आई स्पेशलिस्ट) डॉ. मनीष मिरानी: 8108098576

सुरेखा क्रिटिकेयर हॉस्पिटल: 8237898959

"अच्छी दृष्टि, बेहतर जीवन" के संदेश के साथ आयोजित इस शिविर के माध्यम से आयोजकों ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे स्वयं भी अपनी आंखों की जांच कराएं और अपने परिवार के बुजुर्गों एवं जरूरतमंद लोगों को भी इस निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करें।

"स्वास्थ्य, शिक्षा और मानवता के लिए साथ मिलकर – आपकी दृष्टि, हमारा मिशन। आज का एक छोटा कदम, कल का उज्ज्वल भविष्य।"



















उल्हासनगर-2 के गोल मैदान क्रिकेट ग्राउंड के कथित ₹1 करोड़ के फर्जी बिल को लेकर विवाद गहराया। यूएमसी के पीडब्ल्यूडी विभाग के डिप्टी इंजीनियर संदीप जाधव पर कथित फर्जी बिल के उपर हस्ताक्षर के आरोप लगे हैं। नागरिकों ने यूएमसी आयुक्त मनीषा आव्हाले से निष्पक्ष जांच कर भुगतान पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका (यूएमसी) के लोक निर्माण विभाग (PWD) में कथित फर्जी बिलों और भुगतान प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर सामने आए तथ्यों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर कई प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। स्थानीय नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा संबंधित बिलों का भुगतान तत्काल प्रभाव से रोकने की मांग महानगरपालिका आयुक्त मनीषा आव्हाले से की है।

प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2022 में उल्हासनगर-2 स्थित गोल मैदान में क्रिकेट ग्राउंड के निर्माण एवं सौंदर्यीकरण कार्य के लिए लोक निर्माण विभाग द्वारा मेसर्स जय भारत कंस्ट्रक्शन को कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) जारी किया गया था। इस परियोजना की स्वीकृत लागत लगभग ₹2.85 करोड़ थी तथा कार्य छह माह में पूरा किया जाना था। दस्तावेजों में पांच वर्ष की दोष दायित्व अवधि (Defect Liability Period) का भी उल्लेख है।

बताया जाता है कि इसी कार्य के संबंध में मेसर्स जय भारत कंस्ट्रक्शन्स ने 26 मई 2026 को लगभग ₹1,00,08,652.94 का बिल प्रस्तुत किया। इसके बाद 13 जुलाई 2026 को उक्त बिल भुगतान की प्रक्रिया के लिए लेखा विभाग को भेज दिया गया। इसी भुगतान प्रक्रिया को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है।

सूत्रों के अनुसार, संबंधित बिल पर पीडब्ल्यूडी विभाग के डिप्टी इंजीनियर संदीप जाधव के कथित फर्जी बिल के उपर हस्ताक्षर किए जाने की आशंका जताई जा रही है। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि संदीप जाधव और शंकर नामक व्यक्ति ने मिलकर विभाग में कई कथित फर्जी बिल तैयार किए हैं। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम जांच एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

स्थानीय नागरिकों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि संबंधित निर्माण स्थल का तत्काल निरीक्षण कराया जाए। उनका आरोप है कि जिस कार्य के लिए करोड़ों रुपये के बिल प्रस्तुत किए गए हैं, उस स्थल पर अपेक्षित निर्माण कार्य दिखाई नहीं देता और साइट की स्थिति पहले जैसी ही बनी हुई है। उनका कहना है कि भुगतान से पहले कार्य की वास्तविक प्रगति का स्वतंत्र तकनीकी सत्यापन कराया जाना आवश्यक है।

सूत्रों का यह भी दावा है कि डिप्टी इंजीनियर संदीप जाधव द्वारा कार्यस्थल का नियमित निरीक्षण नहीं किया जाता। साथ ही, महाराष्ट्र शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्माण कार्य की प्रगति से संबंधित आवश्यक फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी भी कथित रूप से नहीं कराई गई जाती है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो विभागीय कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।

मामले से जुड़े लोगों का यह भी आरोप है कि पिछले कई वर्षों से पीडब्ल्यूडी विभाग का समुचित ऑडिट नहीं हुआ है। उनका मानना है कि यदि स्वतंत्र वित्तीय और तकनीकी ऑडिट कराया जाए तो कई अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। इसी कारण नागरिकों ने आयुक्त मनीषा आव्हाले से पूरे विभाग की व्यापक जांच कराने की मांग की है।

सूत्रों के अनुसार, शंकर नामक व्यक्ति पर पहले भी पीडब्ल्यूडी विभाग के तत्कालीन डिप्टी इंजीनियर महेश सीतलानी के कार्यकाल के दौरान कथित फर्जी बिल तैयार करने में संलिप्त रहने के आरोप लगते रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि आज भी विभाग में कथित फर्जी बिलों के मामलों में शंकर की भूमिका महत्वपूर्ण है और इस पहलू की भी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।

नागरिकों ने मांग की है कि संबंधित बिल का भुगतान जांच पूरी होने तक रोका जाए, कार्यस्थल का संयुक्त निरीक्षण कराया जाए, तकनीकी विशेषज्ञों से निर्माण कार्य का मूल्यांकन कराया जाए तथा यदि किसी स्तर पर अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।

'मंत्रालय टाइम्स' का कहना है कि जनहित से जुड़े इस कथित फर्जी बिल प्रकरण की पड़ताल आगे भी जारी रहेगी। उपलब्ध दस्तावेजों, संबंधित अभिलेखों तथा जांच से जुड़े तथ्यों को क्रमवार प्रकाशित किया जाएगा ताकि पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सके।



















उल्हासनगर महानगरपालिका में अकाउंट ऑफिसर का पदभार अटका, तीन दिनों से नितल लव्हाले को नहीं मिला चार्ज; प्रशासनिक प्रक्रिया पर उठे सवाल।


 
उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) में अकाउंट ऑफिसर के पदभार को लेकर प्रशासनिक स्तर पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। बताया जा रहा है कि नियुक्ति आदेश जारी होने के बावजूद पिछले तीन दिनों से नितल लव्हाले को अब तक अकाउंट ऑफिसर का विधिवत पदभार नहीं सौंपा गया है। इस देरी को लेकर महानगरपालिका के कर्मचारियों और शहर के विभिन्न हलकों में चर्चा का माहौल है।

सूत्रों के अनुसार, अकाउंट ऑफिसर का पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि महानगरपालिका की वित्तीय व्यवस्था, भुगतान, बजट और लेखा संबंधी कार्य इसी विभाग के माध्यम से संचालित होते हैं। ऐसे में पदभार सौंपने में हो रही देरी को लेकर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं।

चर्चाओं के बीच यह सवाल भी सामने आ रहा है कि पूर्व अकाउंट ऑफिसर किरण भिलारे का प्रभाव अब भी बना हुआ है या नहीं। कुछ लोग यह भी प्रश्न उठा रहे हैं कि आखिर नितल लव्हाले को समय पर चार्ज क्यों नहीं दिया जा रहा है और इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से स्पष्टता क्यों नहीं दी जा रही।

हालांकि, इन चर्चाओं और सवालों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। महानगरपालिका प्रशासन या आयुक्त की ओर से इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।

अब कर्मचारियों और नागरिकों की निगाहें महानगरपालिका प्रशासन पर टिकी हैं। सभी यह जानना चाहते हैं कि नितल लव्हाले को अकाउंट ऑफिसर का पदभार कब सौंपा जाएगा और पदभार में हो रही देरी के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं। यदि प्रशासन इस विषय पर आधिकारिक जानकारी जारी करता है, तो स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।





















उल्हासनगर में सियासी चर्चाओं का दौर तेज! क्या 2029 विधानसभा चुनाव की तैयारी में हैं शिवसेना नेता कमलेश निकम.?


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर शहर के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों शिवसेना नेता कमलेश निकम को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। राजनीतिक हलकों में ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि निकम ने वर्ष 2029 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपनी राजनीतिक गतिविधियों को तेज कर दिया है। हालांकि, इस संबंध में अब तक न तो कमलेश निकम और न ही शिवसेना की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि की गई है।

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, कमलेश निकम वर्ष 2029 में शिवसेना के टिकट पर उल्हासनगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के इच्छुक हो सकते हैं। इसी वजह से वे संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बढ़ाने और जनता के बीच अपनी सक्रियता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि चुनावी राजनीति में संभावित उम्मीदवार अक्सर वर्षों पहले से अपनी रणनीति पर काम शुरू कर देते हैं। ऐसे में कमलेश निकम की बढ़ती राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता को भी आगामी विधानसभा चुनाव की संभावित तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

सूत्रों का दावा है कि हाल के समय में कमलेश निकम विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों में लगातार भागीदारी कर रहे हैं तथा आम नागरिकों और कार्यकर्ताओं के साथ उनका संपर्क भी बढ़ा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

उल्हासनगर विधानसभा क्षेत्र हमेशा से राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। चुनाव नजदीक आने के साथ संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाएं तेज होना स्वाभाविक माना जाता है। ऐसे में कमलेश निकम का नाम भी संभावित दावेदारों में प्रमुखता से लिया जा रहा है।

फिलहाल, वर्ष 2029 के विधानसभा चुनाव को लेकर शिवसेना ने किसी भी उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए कमलेश निकम के चुनाव लड़ने की चर्चाओं को फिलहाल केवल राजनीतिक अटकलों और सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

आने वाले समय में यदि शिवसेना या कमलेश निकम की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा की जाती है, तो उल्हासनगर की राजनीति में नए समीकरण और नई राजनीतिक हलचल देखने को मिल सकती है।




















'गोल मैदान' क्रिकेट प्रोजेक्ट पर विवाद गहराया, सामाजिक कार्यकर्ता मनोज साधवानी ने ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए वर्क ऑर्डर रद्द करने, भुगतान रोकने और ब्लैकलिस्ट करने की मांग की।


 









उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) के अंतर्गत 'गोल मैदान' में क्रिकेट मैदान के निर्माण एवं सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। सामाजिक कार्यकर्ता मनोज साधवानी ने महानगरपालिका आयुक्त को विस्तृत शिकायत-पत्र सौंपकर संबंधित वर्क ऑर्डर को तत्काल रद्द करने, ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने तथा करोड़ों रुपये के कथित भुगतान पर रोक लगाने की मांग की है।

शिकायत के अनुसार, वर्क ऑर्डर क्रमांक UMC/PWD/EE/2022-23/230 दिनांक 21 जुलाई 2022 को जारी किया गया था। पत्र में दावा किया गया है कि इस परियोजना के लिए निधि पैनल क्रमांक 5 की पूर्व नगरसेविका गीता साधवानी के प्रयासों से स्वीकृत हुई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ठेकेदार ने वर्क ऑर्डर और निविदा की शर्तों का पालन नहीं किया तथा निर्धारित छह माह की अवधि समाप्त होने के बाद भी परियोजना का 5 प्रतिशत कार्य भी पूरा नहीं किया।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मौके पर जो कार्य किया गया है, वह अत्यंत निम्न गुणवत्ता का है और उसे स्वीकृत एस्टिमेट तथा तकनीकी ड्रॉइंग के अनुरूप नहीं किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि इससे परियोजना की गुणवत्ता और सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

शिकायत-पत्र में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि संबंधित ठेकेदार मेसर्स जय भारत कंस्ट्रक्शन्स ने 26 मई 2026 को लगभग ₹1,00,08,652.94 का बिल प्रस्तुत किया, जिसे 13 जुलाई 2026 को भुगतान के लिए लेखा विभाग भेज दिया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि वास्तविकता में इस मूल्य का कार्य स्थल पर नहीं हुआ है और इसलिए प्रस्तुत बिल पूरी तरह फर्जी एवं बनावटी है।

पत्र में आगे आरोप लगाया गया है कि यह कथित बिल मेसर्स अनिरुद्ध नखावा तथा उल्हासनगर महानगरपालिका के लोक निर्माण विभाग (PWD) के कुछ अभियंताओं और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से तैयार किया गया। शिकायतकर्ता ने इन आरोपों की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराने की मांग भी की है।

मनोज साधवानी ने आयुक्त से मांग की है कि संबंधित वर्क ऑर्डर को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए, ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाए तथा मुख्य लेखा अधिकारी को निर्देश दिए जाएं कि विस्तृत जांच पूरी होने तक किसी भी बिल का भुगतान न किया जाए। उनका कहना है कि यदि जांच से पहले भुगतान किया गया तो इससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंच सकता है और इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों पर होगी।

शिकायत-पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि जांच पूरी किए बिना भुगतान किया गया तो वे इस मामले को माननीय मुंबई उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से उठाएंगे।

शिकायत के साथ कथित तौर पर कार्यस्थल के फोटोग्राफ भी संलग्न किए गए हैं, जिन्हें शिकायतकर्ता ने अपने आरोपों के समर्थन में प्रस्तुत किया है। शिकायत की प्रतिलिपि नगर विकास विभाग, मंत्रालय, जिलाधिकारी ठाणे, उल्हासनगर के महापौर, उप-आयुक्त (मुख्यालय) तथा मुख्य लेखा अधिकारी को भी भेजी गई है।

अब इस पूरे मामले में निगाहें उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है और संबंधित वर्क ऑर्डर तथा भुगतान प्रक्रिया पर क्या निर्णय लिया जाता है।

(नोट: यह समाचार शिकायत-पत्र में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)यदि चाहें, मैं इसे और अधिक अखबार की खोजी (Investigative) शैली या ब्रेकिंग न्यूज़ शैली में भी तैयार कर सकता हूँ।
















UMC के PWD विभाग में डेप्युटी इंजीनियर संदीप जाधव और कर्मचारी दीप्ति लाडे की बदली को लेकर नागरिकों ने आयुक्त मनीषा आव्हाले से पूछा— आखिर उनका तबादला कब होगा?


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) के लोक निर्माण विभाग (PWD) में वर्षों से कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को लेकर एक बार फिर शहर में चर्चा तेज हो गई है। नागरिकों ने आयुक्त मनीषा आव्हाले से सवाल किया है कि PWD विभाग में डेप्युटी इंजीनियर संदीप जाधव और कर्मचारी दीप्ति लाडे का स्थानांतरण आखिर अब तक क्यों नहीं किया गया और उनकी बदली कब होगी?

स्थानीय नागरिकों का दावा है कि दोनों पिछले 20 से अधिक वर्षों से इसी विभाग में कार्यरत हैं। इसे लेकर लोगों का कहना है कि लंबे समय तक एक ही विभाग में पदस्थ रहने से प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उनका मानना है कि समय-समय पर स्थानांतरण होने से प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी और निष्पक्ष बनी रहती है।

नागरिकों का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार के स्थानांतरण संबंधी प्रचलित सरकारी आदेश (GR) के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को तीन वर्ष से अधिक एक ही विभाग या पद पर नहीं रखा जाना चाहिए। निर्धारित कार्यकाल पूरा होने के बाद उसका स्थानांतरण किया जाना अपेक्षित होता है, ताकि प्रशासनिक संतुलन और कार्यप्रणाली की पारदर्शिता बनी रहे।

इसी आधार पर शहर के लोगों का सवाल है कि यदि यह नीति अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों पर लागू होती है, तो PWD विभाग में कार्यरत इन दोनों कर्मचारियों के मामले में अब तक इसका पालन क्यों नहीं किया गया। नागरिकों का कहना है कि यदि किसी विशेष प्रशासनिक कारण से उनका स्थानांतरण नहीं किया गया है, तो इसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए, जिससे किसी प्रकार की भ्रम या चर्चा की स्थिति समाप्त हो सके।

शहर के कई नागरिकों का मानना है कि स्थानांतरण नीति का उद्देश्य केवल कर्मचारियों का तबादला करना नहीं, बल्कि प्रशासन में निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी है। ऐसे में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के लंबे समय तक एक ही विभाग में बने रहने पर स्वाभाविक रूप से सवाल उठना लाज़िमी है।

नागरिकों ने आयुक्त मनीषा आव्हाले से मांग की है कि इस पूरे मामले पर स्पष्ट रुख अपनाया जाए और यह बताया जाए कि संदीप जाधव एवं दीप्ति लाडे की बदली अब तक क्यों नहीं हुई। साथ ही, यदि स्थानांतरण संबंधी नियम लागू होते हैं, तो उनके अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

अब देखना यह होगा कि उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन इस मामले पर क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या स्थानांतरण नीति के अनुरूप आगे कोई कार्रवाई की जाती है। फिलहाल, यह मुद्दा शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और नागरिक प्रशासन के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

















उल्हासनगर महानगरपालिका मुख्यालय बना 'खतरे की इमारत'! 50 साल पुरानी जर्जर बिल्डिंग में रोजाना मेयर, 78 पार्षद और 1,000 अधिकारी-कर्मचारियों की जान जोखिम में।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) का करीब 50 वर्ष पुराना मुख्यालय अब गंभीर रूप से जर्जर और असुरक्षित स्थिति में पहुंच चुका है। इमारत की खराब हालत ने न केवल जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यहां रोजाना आने वाले हजारों नागरिकों के लिए भी बड़ा खतरा पैदा कर दिया है।

उल्हासनगर महानगरपालिका मुख्यालय में प्रतिदिन शहर के मेयर, 78 पार्षद, लगभग 1,000 अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में नागरिक अपने विभिन्न प्रशासनिक कार्यों के लिए पहुंचते हैं। लेकिन भवन की लगातार बिगड़ती स्थिति के कारण किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका जताई जा रही है। कई स्थानों पर दीवारों में दरारें, छत और प्लास्टर के टूटने जैसी समस्याएं भवन की जर्जर हालत को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं।

सूत्रों के अनुसार, इमारत की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने नई  उल्हासनगर महानगर पालिका इमारत के निर्माण की प्रक्रिया को गति देने के साथ-साथ मुख्यालय को अस्थायी रूप से किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की तैयारियां भी तेज कर दी हैं। इसका उद्देश्य कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस भवन से पूरे शहर का प्रशासन संचालित होता है, वही अब सुरक्षा के लिहाज से सबसे बड़ा चिंता का विषय बन गया है। उनका मानना है कि किसी संभावित दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय प्रशासन को तत्काल प्रभाव से आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

अब सभी की उल्हासनगर महानजर पालिका प्रशासन के अगले फैसले पर टिकी है कि नई इमारत का निर्माण और कार्यालय का स्थानांतरण कितनी तेजी से पूरा किया जाता है, ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
















उल्हासनगर मनपा के अधिकारी गणेश शिंपी के खिलाफ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को शिकायत। राष्ट्र कल्याण पार्टी के अध्यक्ष शैलेश राममूर्ति तिवारी ने कार्यप्रणाली, कथित भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की SIT/ACB/ED से स्वतंत्र जांच की मांग की।


 



उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के एक वरिष्ठ अधिकारी को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में एक नया विवाद सामने आया है। राष्ट्र कल्याण पार्टी के अध्यक्ष शैलेश राममूर्ति तिवारी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक विस्तृत शिकायत पत्र भेजकर उल्हासनगर महानगरपालिका के अधिकारी गणेश अरविंद शिंपी के विरुद्ध लगाए गए विभिन्न कथित आरोपों की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

3 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री को भेजे गए इस ज्ञापन में कहा गया है कि संबंधित अधिकारी की कार्यप्रणाली, संवेदनशील पदों पर उनकी नियुक्तियां, कथित प्रशासनिक अनियमितताएं, कथित भ्रष्टाचार, कथित आय से अधिक संपत्ति तथा अन्य संबंधित मामलों की जांच विशेष जांच दल (SIT) अथवा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी सक्षम एजेंसियों से कराई जाए।

ज्ञापन में दावा किया गया है कि संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नागरिकों की ओर से समय-समय पर विभिन्न प्रकार की गंभीर शिकायतें और आरोप सामने आते रहे हैं। साथ ही, यह भी उल्लेख किया गया है कि उनके विरुद्ध जांच या कार्रवाई लंबित होने की चर्चाएं विभिन्न स्तरों पर होती रही हैं। ऐसे में, शिकायतकर्ता का कहना है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद अधिकारी के पास महत्वपूर्ण और संवेदनशील प्रशासनिक जिम्मेदारियां बने रहने से प्रशासन की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि यदि आरोपों में कोई सच्चाई हो तो दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित हो सके और यदि आरोप निराधार हों तो संबंधित अधिकारी को भी स्पष्ट रूप से न्याय मिल सके।

यह मामला अब प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, इस शिकायत में लगाए गए सभी आरोप शिकायतकर्ता के दावे हैं और इनकी आधिकारिक पुष्टि या किसी सक्षम जांच एजेंसी द्वारा सत्यापन होना अभी शेष है। संबंधित अधिकारी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में जांच के निष्कर्ष आने तक इन आरोपों को सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।

















उल्हासनगर मनपा के पीडब्ल्यूडी विभाग में कथित फर्जी बिलों का मामला गरमाया, 'शंकर' और डिप्टी इंजीनियर संदीप जाधव की भूमिका पर उठे सवाल; कनेक्शन की निष्पक्ष जांच की मांग तेज।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में कथित फर्जी बिल घोटाले को लेकर नए आरोप सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे कथित प्रकरण में 'शंकर' नामक एक व्यक्ति की भूमिका अहम बताई जा रही है। दावा किया जा रहा है कि उक्त व्यक्ति लंबे समय से पीडब्ल्यूडी विभाग में कथित फर्जी बिल तैयार कराने और उनसे जुड़े कार्यों में सक्रिय रहा है। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सूत्रों का कहना है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए, तो कई महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा हो सकता है। विशेष रूप से पीडब्ल्यूडी विभाग के डिप्टी इंजीनियर संदीप जाधव और शंकर नामक व्यक्ति की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच किए जाने की मांग उठ रही है। आरोप है कि दोनों के बीच हुई बातचीत और संपर्कों की जांच से कथित फर्जी बिलों के पूरे नेटवर्क की जानकारी सामने आ सकती है।

इतना ही नहीं, सूत्रों का यह भी दावा है कि शंकर नामक व्यक्ति के कार्यालय और निवास स्थान पर कथित फर्जी बिलों, भुगतान संबंधी दस्तावेजों तथा अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड मौजूद हो सकते हैं। ऐसे में संबंधित स्थानों की जांच और दस्तावेजों को जब्त कर उनकी फोरेंसिक जांच कराने की मांग भी की जा रही है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।

सूत्रों के अनुसार, यदि संबंधित व्यक्ति का पीडब्ल्यूडी विभाग में आना-जाना तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाए, तो कथित रूप से फर्जी बिल तैयार होने की प्रक्रिया पर भी रोक लग सकती है। इस कारण जांच पूरी होने तक आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाने की भी मांग की जा रही है।

इस कथित घोटाले को लेकर शहर में विभिन्न स्तरों पर चर्चाओं का दौर जारी है। नागरिकों का कहना है कि यदि आरोपों में सच्चाई है, तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का गंभीर मामला हो सकता है। इसलिए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

उल्हासनगर की जनता ने महानगरपालिका आयुक्त मनीषा आव्हाले से मांग की है कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से विस्तृत जांच कराई जाए। साथ ही, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की कथित अनियमितताओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

नोट: इस समाचार में उल्लिखित सभी आरोप सूत्रों और स्थानीय स्तर पर सामने आए दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।


















अंबरनाथ में शिवसेना की अंदरूनी खींचतान फिर आई सामने, शिवसेना के वरिष्ठ नेता अरविंद वाळेकर ने विधायक डॉ. बालाजी किणीकर पर जमकर निशाना साधा; राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज।


अंबरनाथ: दिनेश मीरचंदानी

अंबरनाथ की राजनीति में शिवसेना (शिंदे गुट) के भीतर बढ़ते मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नगराध्यक्ष अरविंद वाळेकर ने अपने हालिया बयान में बिना किसी का नाम लिए विधायक डॉ. बालाजी किणीकर के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

अरविंद वाळेकर ने कहा कि अंबरनाथ की जनता आज भी पानी, बिजली, सड़क, सफाई और अन्य मूलभूत नागरिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रही है। उनका आरोप है कि जनप्रतिनिधियों का पूरा ध्यान इन समस्याओं के समाधान पर केंद्रित होने के बजाय राजनीतिक गतिविधियों और शक्ति प्रदर्शन पर अधिक दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि जनता विकास और जवाबदेही चाहती है, लेकिन उसे केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं।

वाळेकर ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि लंबे समय तक आम नागरिकों की समस्याओं की अनदेखी करने वाले जनप्रतिनिधियों को अब जनता लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और उचित समय आने पर अपना फैसला सुनाएगी।

उनके इस बयान को शिवसेना के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर संगठन के भीतर नेतृत्व और कार्यशैली को लेकर असंतोष धीरे-धीरे खुलकर सामने आ रहा है। पार्टी के नेताओं के सार्वजनिक बयान संगठन के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकते हैं।

हालांकि शिवसेना नेतृत्व पहले भी अंबरनाथ में किसी प्रकार की गुटबाजी से इनकार करता रहा है, लेकिन समय-समय पर सामने आने वाले नेताओं के बयानों ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अरविंद वाळेकर के ताजा बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा तेज हो गई है कि अंबरनाथ इकाई में सब कुछ सामान्य नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि संगठन के भीतर मतभेदों को समय रहते दूर नहीं किया गया, तो इसका असर आगामी चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है। फिलहाल वाळेकर के बयान ने अंबरनाथ की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और अब सभी की नजरें शिवसेना नेतृत्व की संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।


















विराट अंबे स्पोर्ट्स क्लब के कथित बोर्ड रेजोल्यूशन पर नया विवाद, निदेशक तरुण हिरानंदानी ने हस्ताक्षर बताए फर्जी; 29 मार्च 2025 की बैठक के अस्तित्व पर भी उठाए सवाल।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

विराट अंबे स्पोर्ट्स क्लब के कथित 29 मार्च 2025 के बोर्ड रेजोल्यूशन को लेकर विवाद और गहरा गया है। क्लब के निदेशक तरुण हिरानंदानी ने एक विस्तृत लिखित बयान जारी करते हुए दावा किया है कि उक्त बोर्ड प्रस्ताव पर उनके नाम से दर्शाए गए हस्ताक्षर उनके नहीं हैं, बल्कि पूरी तरह से फर्जी (Forged) हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी भी उस बोर्ड प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए और न ही उसे अपनी स्वीकृति प्रदान की।

तरुण हिरानंदानी ने अपने बयान में स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह 29 मार्च 2025 को कंपनी की किसी भी बोर्ड बैठक के आयोजन से भी पूरी तरह इनकार करते हैं। उनका कहना है कि उनकी जानकारी और विश्वास के अनुसार उस दिन कंपनी की कोई बोर्ड बैठक आयोजित ही नहीं हुई थी। ऐसे में उस बैठक के आधार पर तैयार किए गए किसी भी बोर्ड रेजोल्यूशन की वैधता और प्रामाणिकता स्वतः संदेह के घेरे में आ जाती है।

उन्होंने कहा कि यदि कंपनी यह दावा करती है कि 29 मार्च 2025 को विधिवत बोर्ड बैठक आयोजित हुई थी, तो उसे इस दावे के समर्थन में ठोस और दस्तावेजी साक्ष्य सार्वजनिक करने चाहिए। इसके लिए उन्होंने कंपनी से चार महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत करने की मांग की है।

इनमें सबसे पहले बोर्ड बैठक की कार्यवाही (Minutes of Meeting) की प्रमाणित प्रति, दूसरे यदि उपलब्ध हो तो बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग या वीडियोग्राफी, तीसरे बैठक में उपस्थित निदेशकों और सदस्यों का उपस्थिति रजिस्टर अथवा अन्य कोई दस्तावेज जिससे यह सिद्ध हो सके कि वह स्वयं बैठक में उपस्थित थे, तथा चौथे भवन परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, जिससे यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित हो सके कि 29 मार्च 2025 को उन्होंने कार्यालय परिसर में प्रवेश किया था और कथित बोर्ड बैठक में भाग लिया था।

तरुण हिरानंदानी ने यह भी कहा कि कंपनी का कार्यालय ऐसे भवन में स्थित है जहाँ सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। यदि वास्तव में उस दिन बोर्ड बैठक आयोजित हुई थी और वह उसमें शामिल हुए थे, तो कंपनी के लिए संबंधित सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत करना कठिन नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि ऐसे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य इस पूरे विवाद की सच्चाई सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने अपने बयान में आगे कहा कि यदि कंपनी उपरोक्त में से कोई भी दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहती है, तो यह स्पष्ट माना जाना चाहिए कि 29 मार्च 2025 को कोई बोर्ड बैठक आयोजित नहीं हुई थी। साथ ही उन्होंने दोहराया कि कथित बोर्ड रेजोल्यूशन पर उनके नाम से किए गए हस्ताक्षर पूरी तरह फर्जी, मनगढ़ंत और धोखाधड़ीपूर्वक उनके ज्ञान एवं सहमति के बिना तैयार किए गए हैं।

तरुण हिरानंदानी ने स्पष्ट किया कि वह उक्त बोर्ड प्रस्ताव की वैधता, प्रामाणिकता और सत्यता को पूरी तरह अस्वीकार करते हैं तथा भविष्य में इस संबंध में उपलब्ध कानूनी अधिकारों का उपयोग करने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।

इस मामले में अब सबकी निगाहें कंपनी के आधिकारिक पक्ष पर टिकी हुई हैं। यदि कंपनी बोर्ड बैठक और बोर्ड रेजोल्यूशन की वैधता का दावा करती है, तो उसके समक्ष संबंधित दस्तावेज, उपस्थिति रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण होगा। वहीं, यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो इस कथित बोर्ड रेजोल्यूशन को लेकर उठे सवाल और भी गंभीर हो सकते हैं।

नोट: विराट अंबे स्पोर्ट्स क्लब और सिंघानिया स्कूल के बीच हुए कथित समझौते में कई गंभीर अनियमितताओं और सवालों की बात सामने आ रही है। इस पूरे मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों और दस्तावेजों का खुलासा हमारे अगले अंक में किया जाएगा।



















शिवसेना नगरसेविका डॉ. मीना सोंडे एवं सोहम फाउंडेशन का अनूठा पहल, 'प्रकृति के साथ फ्रेंडशिप डे' पर 100 आशा कार्यकर्ताओं को रेनकोट और 50 पौधों का वितरण।


 




उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

फ्रेंडशिप डे के अवसर पर शिवसेना की नगरसेविका डॉ. मीना सोंडे एवं सोहम फाउंडेशन द्वारा सामाजिक सेवा और पर्यावरण संरक्षण को समर्पित एक विशेष कार्यक्रम "प्रकृति के साथ फ्रेंडशिप डे" का आयोजन किया गया। इस अवसर पर समाज में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली जमीनी स्तर पर कार्यरत 100 आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं को मानसून के दौरान उनकी सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेनकोट वितरित किए गए।

कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य का संदेश देते हुए 50 नीम एवं बेलपत्र के पौधों का भी वितरण किया गया। उपस्थित लोगों से इन पौधों का रोपण एवं संरक्षण करने का आह्वान किया गया, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और हरित वातावरण मिल सके।

इस अवसर पर नगरसेविका डॉ. मीना सोंडे ने कहा कि फ्रेंडशिप डे केवल लोगों के बीच मित्रता का पर्व नहीं है, बल्कि हमें प्रकृति के साथ अपने रिश्ते को भी मजबूत करने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ता हर परिस्थिति में लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का कार्य करती हैं, इसलिए उनका सम्मान और सहयोग करना समाज की जिम्मेदारी है।

उन्होंने नागरिकों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने और पर्यावरण संरक्षण के अभियान से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि "प्रकृति से प्रेम करें, क्योंकि प्रकृति हमारी सबसे बड़ी मित्र है। यदि प्रकृति सुरक्षित रहेगी, तभी हमारा भविष्य भी सुरक्षित रहेगा।"

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता, स्थानीय नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता तथा सोहम फाउंडेशन के पदाधिकारी एवं स्वयंसेवक उपस्थित रहे। सभी ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया।

























पूर्व एनसीबी अधिकारी समीर वानखेड़े ने नव-चयनित IAS, IPS, IRS और IFS अधिकारियों का किया सम्मान, विधान परिषद के उपसभापति सचिन अहीर समेत कई सांसद-विधायक रहे मौजूद।


 










मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवाओं में चयनित नव-नियुक्त IAS, IPS, IRS और IFS अधिकारियों के सम्मान में आयोजित भव्य समारोह में पूर्व एनसीबी के जोनल निदेशक एवं भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के वरिष्ठ अधिकारी समीर वानखेड़े ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। समारोह में विभिन्न राज्यों से चयनित युवा अधिकारियों का सम्मान किया गया और उन्हें राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को पूरी निष्ठा, ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ निभाने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति सचिन अहीर सहित कई सांसद, विधायक, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद और विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद रहीं। सभी अतिथियों ने नव-चयनित अधिकारियों को उनकी ऐतिहासिक सफलता पर बधाई देते हुए कहा कि देश के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत बनाने में युवा अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

मुख्य अतिथि समीर वानखेड़े ने अपने संबोधन में कहा कि सिविल सेवा केवल एक प्रतिष्ठित करियर नहीं, बल्कि संविधान के मूल्यों की रक्षा करते हुए देश और समाज की सेवा करने का सबसे बड़ा दायित्व है। उन्होंने कहा कि एक प्रशासनिक अधिकारी को हर परिस्थिति में निष्पक्षता, पारदर्शिता, ईमानदारी और कानून के शासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने नव-चयनित अधिकारियों से आग्रह किया कि वे अपने पद की गरिमा बनाए रखते हुए आम नागरिकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का हरसंभव प्रयास करें।

वानखेड़े ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने चयनित अधिकारियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने, निरंतर सीखते रहने तथा जनहित को सर्वोपरि रखते हुए कार्य करने की प्रेरणा दी।

इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने भी अपने संबोधन में चयनित अधिकारियों की उपलब्धियों की सराहना की और कहा कि देश की प्रशासनिक व्यवस्था में नई ऊर्जा, नई सोच और जनसेवा की भावना के साथ प्रवेश करने वाले ये युवा अधिकारी भारत के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव साबित होंगे।

समारोह के दौरान सभी नव-चयनित IAS, IPS, IRS और IFS अधिकारियों को स्मृति-चिन्ह एवं सम्मान-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान उत्साह, गौरव और प्रेरणा का वातावरण देखने को मिला। उपस्थित अतिथियों ने चयनित अधिकारियों के साथ संवाद भी किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य और सफल प्रशासनिक जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं।

यह समारोह न केवल नव-चयनित अधिकारियों के सम्मान का अवसर बना, बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा का भी केंद्र रहा। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि सिविल सेवाओं में पहुंचना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति बड़ी जिम्मेदारी का प्रारंभ है। समारोह का समापन सभी अधिकारियों के उज्ज्वल भविष्य और राष्ट्रहित में उत्कृष्ट योगदान की कामना के साथ हुआ।


















समीर वानखेड़े के खिलाफ NCB की विभागीय जांच पर बॉम्बे हाईकोर्ट की रोक, अदालत ने एजेंसी की कार्रवाई पर उठाए गंभीर सवाल।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के पूर्व मुंबई जोनल निदेशक समीर वानखेड़े को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच और पूछताछ की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने इस मामले की सुनवाई के दौरान एनसीबी की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल गुमनाम शिकायतों और उन आरोपियों के बयानों के आधार पर किसी जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि यदि जांच एजेंसियों के अधिकारियों को हर मामले में आरोपियों द्वारा लगाए गए आरोपों या अनाम शिकायतों के आधार पर जांच का सामना करना पड़ेगा, तो वे भविष्य में अपने कर्तव्यों का निष्पक्ष और निर्भीक होकर पालन नहीं कर पाएंगे। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति जांच एजेंसियों के मनोबल और उनकी स्वतंत्र कार्यप्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

समीर वानखेड़े ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि एनसीबी उनके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण और प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई कर रही है। उनका कहना है कि उनके द्वारा पूर्व में संभाले गए चर्चित मामलों के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और विभागीय जांच का उद्देश्य उन्हें परेशान करना है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी अधिकारी के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले उसके समर्थन में ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य होना आवश्यक है। केवल आरोपियों के आरोप या गुमनाम शिकायतें किसी निष्पक्ष जांच का पर्याप्त आधार नहीं बन सकतीं।

अदालत ने फिलहाल समीर वानखेड़े के खिलाफ जारी विभागीय पूछताछ और जांच की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी, जहां अदालत इस पूरे विवाद पर विस्तृत सुनवाई करेगी।

गौरतलब है कि समीर वानखेड़े अपने कार्यकाल के दौरान कई हाई-प्रोफाइल मादक पदार्थ मामलों की जांच को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे थे। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई को लेकर भी लंबे समय से विवाद बना हुआ है। हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश को उनके लिए महत्वपूर्ण कानूनी राहत माना जा रहा है।

















उल्हासनगर के कार गैलेरिया से जुड़े दो कारोबारी भाइयों पर ₹61 लाख की कथित ठगी का मामला, बदलापुर में केस दर्ज।

उल्हासनगर/बदलापुर: दिनेश मीरचंदानी

फ्रेंडली लोन के नाम पर ₹61 लाख की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। बदलापुर पश्चिम पुलिस ने उल्हासनगर स्थित कार गैलेरिया के दो कारोबारी भाइयों के खिलाफ एक बदलापुर निवासी से आर्थिक तंगी का हवाला देकर बड़ी रकम उधार लेने और बाद में वापस नहीं करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता रुपेश इरमाली (35), निवासी राधे पैराडाइज, बदलापुर पश्चिम, ने अपनी शिकायत में बताया है कि उल्हासनगर-4 के सेक्शन 30-ए निवासी नितिन अमरलाल बजाज और बंटी अमरलाल बजाज, जो कार गैलेरिया नाम से व्यवसाय संचालित करते हैं, ने अपने कारोबार में गंभीर आर्थिक संकट होने की बात कहकर उनसे फ्रेंडली लोन के रूप में पैसे मांगे थे।

शिकायत के अनुसार, 1 अप्रैल 2019 से 31 अक्टूबर 2020 के बीच आरोपियों ने अलग-अलग समय पर कुल ₹61 लाख उधार लिए। उन्होंने शिकायतकर्ता को भरोसा दिलाया था कि आर्थिक स्थिति सुधरते ही पूरी रकम वापस कर दी जाएगी। इसी विश्वास के आधार पर शिकायतकर्ता ने उन्हें यह राशि दी।

हालांकि, आरोप है कि निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी आरोपियों ने उधार ली गई रकम वापस नहीं की। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने कई बार पैसे लौटाने की मांग की, लेकिन हर बार टालमटोल की गई। आरोप है कि आरोपियों ने उधार ली गई राशि का उपयोग अपने निजी लाभ के लिए किया और जानबूझकर रकम लौटाने से परहेज किया, जिससे शिकायतकर्ता को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

शिकायत की जांच के बाद बदलापुर पश्चिम पुलिस स्टेशन में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 316(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता के साथ धोखाधड़ी की मंशा से रकम हासिल की थी या नहीं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की आगे की जांच पुलिस उपनिरीक्षक पल्लेवाड कर रहे हैं। जांच के दौरान लेन-देन से जुड़े दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जाएगी। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
























प्रहार संगठन के नेता एडवोकेट स्वप्निल पाटिल ने शुरू से उठाया मामला, तोड़फोड़ के बाद दोबारा निर्माण कराने के आरोप; कई नगरसेवकों के विरोध के बावजूद कार्रवाई पर सवाल।


 



उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

रिजेंसी परिसर में लगभग 30,000 वर्गफुट के कथित अवैध निर्माण को लेकर एक बार फिर प्रशासन की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। इस मामले में अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर अतिरिक्त आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों से विस्तृत एवं स्पष्ट रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने यह स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं कि इतने बड़े पैमाने पर हुए कथित अवैध निर्माण के बावजूद नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं की गई और इसमें किन अधिकारियों की क्या भूमिका रही।

मामले को लेकर नगररचनाकार विकास बिरारी पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि उन्होंने रिजेंसी के कथित अवैध निर्माण को बचाने का प्रयास किया, हालांकि यह प्रयास सफल नहीं हो सका। इस पूरे प्रकरण को लेकर प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय किए जाने की मांग भी तेज हो गई है।

बताया जा रहा है कि इस मामले को प्रहार संगठन के नेता एडवोकेट स्वप्निल पाटिल ने शुरुआत से ही लगातार उठाया। उन्होंने कथित अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन को कई बार शिकायतें दीं और कार्रवाई की मांग की। संगठन के लगातार विरोध और दबाव के बाद संबंधित निर्माण पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई थी।

हालांकि, प्रहार संगठन का आरोप है कि तोड़फोड़ के बाद भी मामला यहीं समाप्त नहीं हुआ। संगठन का दावा है कि नगररचनाकार विकास बिरारी की कथित मंजूरी से उसी स्थान पर दोबारा निर्माण कराया गया, जिससे पूरे मामले की निष्पक्षता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्रहार संगठन का यह भी आरोप है कि कई नगरसेवकों ने इस मामले का विरोध किया और कथित अनियमितताओं की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया, लेकिन उनके विरोध को नजरअंदाज कर दिया गया। संगठन का कहना है कि नगररचनाकार विकास बिरारी ने कथित रूप से नियमों की अनदेखी करते हुए अवैध निर्माण को संरक्षण देने का प्रयास किया।

संगठन ने यह भी दावा किया है कि उसने पूर्व नगररचनाकारों के कार्यकाल में हुई कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को भी लगातार उजागर किया है। प्रहार संगठन का कहना है कि यदि समय रहते इन मामलों पर सख्त कार्रवाई की जाती, तो इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

अब अतिरिक्त आयुक्त द्वारा रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद इस पूरे मामले में प्रशासनिक जिम्मेदारी तय होने और आगे की कार्रवाई को लेकर लोगों की नजरें प्रशासन पर टिकी हुई हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

नगररचनाकार विकास बिरारी के गैरव्यव्हार के खिलाफ संचालक नगररचनाकार पुणे मे सोमवार दिनांक १० अगस्ट २०२६ को होगा प्रहार का आंदोलन।