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उल्हासनगर मनपा के PWD विभाग में करोड़ों के कथित फर्जी बिलों का खेल, 'शंकर' नामक व्यक्ति पर नेटवर्क संचालित करने का आरोप।


उल्हासनगर | दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) में कथित तौर पर करोड़ों रुपये के फर्जी बिलों से जुड़े एक बड़े घोटाले की चर्चा जोर पकड़ रही है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि "शंकर" नाम का एक व्यक्ति इस पूरे नेटवर्क का प्रमुख संचालक है, जो लंबे समय से कथित रूप से जाली बिलों के माध्यम से सरकारी धन के दुरुपयोग में शामिल रहा है।

जानकारी के अनुसार, इस मामले में विभाग के कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि ठेकेदारी कार्यों से जुड़े भुगतान के नाम पर फर्जी बिल तैयार किए गए और इसके एवज में कथित रूप से कमीशन का लेन-देन भी हुआ।

कार्यालय और आवास की जांच से हो सकते हैं बड़े खुलासे

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, यदि संबंधित व्यक्ति के कार्यालय और निवास स्थान की गहन एवं निष्पक्ष जांच की जाए, तो कथित फर्जी बिलों, संदिग्ध दस्तावेजों तथा वित्तीय लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आ सकते हैं। सूत्रों का यह भी दावा है कि हाल के दिनों में संबंधित व्यक्ति ने अपना कार्यालय दूसरे स्थान पर स्थानांतरित कर लिया है, जिससे मामले को लेकर और भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने उठाई जांच की मांग

मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

सरकारी धन के उपयोग पर उठे सवाल

इस कथित घोटाले ने महानगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली और सरकारी धन के उपयोग को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि आरोपों में सच्चाई है, तो यह सार्वजनिक धन और जनविश्वास दोनों के साथ गंभीर खिलवाड़ है।

फिलहाल मामले में संबंधित अधिकारियों या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसियां और प्रशासन इस प्रकरण में क्या कदम उठाते हैं।














महाराष्ट्र में प्रीपेड स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं, महावितरण ने हाईकोर्ट में दी जानकारी।


नागपुर: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र में प्रीपेड इलेक्ट्रिक स्मार्ट मीटरों को लेकर चल रहे विरोध और आशंकाओं के बीच महावितरण (MSEDCL) ने मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए स्पष्ट किया है कि वर्तमान में राज्य में किसी भी उपभोक्ता के लिए प्रीपेड स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं हैं। कंपनी ने अदालत को बताया कि प्रीपेड मीटर केवल उन्हीं ग्राहकों को उपलब्ध कराए जाएंगे जो स्वयं इसकी मांग करेंगे।

महावितरण के इस बयान को लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि पिछले कुछ महीनों से राज्य के विभिन्न हिस्सों में स्मार्ट मीटरों को लेकर विरोध प्रदर्शन और जनजागरण अभियान चलाए जा रहे हैं।

जनहित याचिका के बाद अदालत में सुनवाई

यह मामला विदर्भ वीज ग्राहक संगठन द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से अदालत के समक्ष पहुंचा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रीपेड मीटर लागू करने का निर्णय बिना पर्याप्त अध्ययन और जनहित के व्यापक मूल्यांकन के लिया गया है।

न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की खंडपीठ के समक्ष हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता ने कहा कि प्रीपेड मीटर व्यवस्था से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा। यदि रिचार्ज समाप्त हो जाता है तो बिजली आपूर्ति स्वतः बंद हो सकती है, जिससे आम नागरिकों, वरिष्ठ नागरिकों और ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

याचिका में यह भी कहा गया कि राज्य के सभी नागरिक डिजिटल भुगतान या ऑनलाइन लेनदेन करने में सक्षम नहीं हैं। बड़ी संख्या में लोगों के पास स्मार्टफोन या इंटरनेट की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा स्मार्ट मीटर व्यवस्था के कारण मीटर रीडिंग लेने और बिजली बिल वितरित करने वाले हजारों कर्मचारियों के रोजगार पर भी असर पड़ सकता है।

फिलहाल केवल पोस्टपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं

महावितरण ने अदालत को बताया कि वर्तमान में राज्यभर में केवल पोस्टपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। इन मीटरों के माध्यम से उपभोक्ता पहले की तरह बिजली का उपयोग कर बाद में बिल का भुगतान करते हैं।

जानकारी के अनुसार राज्य में ठेकेदार कंपनियों द्वारा अब तक एक करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। बिजली मीटर तकनीक के विकास की प्रक्रिया में पहले इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक मीटर, फिर इलेक्ट्रॉनिक मीटर, उसके बाद डिजिटल और कम्युनिकेशन आधारित मीटर लगाए गए और अब स्मार्ट मीटरों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है।

उपभोक्ताओं के अधिकारों पर हाईकोर्ट के अहम सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने उपभोक्ताओं के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए। अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या किसी उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर लगाने से इनकार करने का कानूनी अधिकार प्राप्त है? क्या स्मार्ट मीटर स्थापित करने से पहले उपभोक्ता की अनुमति लेना अनिवार्य है? क्या ऐसा कोई स्पष्ट वैधानिक प्रावधान मौजूद है?

खंडपीठ ने इन सभी सवालों पर याचिकाकर्ता को आगामी सोमवार तक विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल आशंकाओं और निराधार आरोपों के आधार पर किसी योजना का विरोध करना उचित नहीं माना जा सकता।

राज्यभर में बहस तेज

स्मार्ट मीटरों को लेकर महाराष्ट्र में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है। विपक्षी दलों और विभिन्न उपभोक्ता संगठनों ने स्मार्ट मीटर योजना पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार और महावितरण इसे बिजली वितरण व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रहे हैं।

अब सभी की नजरें हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां उपभोक्ताओं के अधिकारों, स्मार्ट मीटरों की वैधता और प्रीपेड व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है।














उल्हासनगर मनपा और पुलिस के दावों की खुली पोल, फर्जी डॉक्टर अब भी कर रहे इलाज।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर शहर में फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान और दर्जनों शिकायतों के बावजूद अवैध चिकित्सा का कारोबार खुलेआम जारी रहने का मामला सामने आया है। आरोप है कि पुलिस में मामले दर्ज होने और महानगरपालिका द्वारा कार्रवाई के दावे किए जाने के बावजूद कई कथित फर्जी डॉक्टर अब भी बिना मान्यता प्राप्त डिग्री और आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता के मरीजों का उपचार कर रहे हैं। इससे नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, शहर में ऐसे कई व्यक्तियों की पहचान की गई थी जो बिना वैध मेडिकल लाइसेंस के क्लीनिक संचालित कर रहे थे। इनमें से कई के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई गईं और कुछ मामलों में पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज की। इसके बावजूद संबंधित क्लीनिकों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से नागरिकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

26 फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ शिकायतें, फिर भी जारी है प्रैक्टिस

जानकारी के मुताबिक, शहर में करीब 26 कथित फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ शिकायतें की गई थीं। जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। आरोप है कि इनमें से कुछ लोग बिना किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सा डिग्री के मरीजों को दवाइयां लिख रहे हैं, बीमारियों का उपचार कर रहे हैं और चिकित्सा परामर्श भी दे रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित दिखाई देती है, जबकि वास्तविकता में कई क्लीनिक आज भी संचालित हो रहे हैं। इससे लोगों का प्रशासन पर भरोसा कमजोर पड़ रहा है।

महानगरपालिका प्रशासन पर उठे सवाल

फर्जी डॉक्टरों के मामले में महानगरपालिका प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर कार्रवाई और निरीक्षण के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।

सामाजिक संगठनों और नागरिकों का आरोप है कि यदि प्रशासन ने समय रहते कठोर कदम उठाए होते, तो लोगों की जान और स्वास्थ्य से जुड़े ऐसे गंभीर जोखिमों को रोका जा सकता था।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जताई चिंता

चिकित्सा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि बिना योग्य डॉक्टरों द्वारा किया जाने वाला उपचार मरीजों के लिए घातक साबित हो सकता है। गलत निदान, अनुचित दवाइयों का उपयोग और आपातकालीन परिस्थितियों में सही चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण मरीजों की जान तक खतरे में पड़ सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में केवल एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अवैध क्लीनिकों को तत्काल सील कर दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

कड़ी कार्रवाई की मांग

शहर के नागरिकों ने राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन से मांग की है कि फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर सभी अवैध क्लीनिकों की जांच की जाए। साथ ही दोषियों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई की जाए जिससे भविष्य में कोई भी व्यक्ति लोगों की जान से खिलवाड़ करने का साहस न कर सके।

फिलहाल यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और नागरिक प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं।














उल्हासनगर शाहाड भूमि विवाद में बड़ा एक्शन: कारोबारी नंद जेठानी समेत चार पर धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर के चर्चित भूमि विवाद मामले में एक बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। हिल लाइन पुलिस स्टेशन ने विवादित भूमि के सर्वेक्षण और कथित कब्जे से जुड़े मामले में प्रमुख व्यवसायी नंद जेठानी, धीरज जेठानी सहित चार आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के गंभीर आरोपों के तहत मामला दर्ज किया है। इस कार्रवाई के बाद शहर के व्यावसायिक और रियल एस्टेट जगत में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 465, 467, 468 (जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग), 426 (नुकसान पहुंचाना) और 34 (सामूहिक आपराधिक मंशा) के तहत एफआईआर दर्ज की है।

शिकायतकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप

यह मामला उल्हासनगर निवासी और निर्माण व्यवसायी अनिल आहूजा की शिकायत पर दर्ज किया गया है। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने कथित रूप से एक ऐसी पावर ऑफ अटॉर्नी का उपयोग किया, जिसकी वैधता समाप्त हो चुकी थी, और उसी के आधार पर विवादित भूमि का सरकारी सर्वेक्षण कराकर उस पर कब्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया को अंजाम दिया।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस कथित कार्रवाई से न केवल उन्हें आर्थिक और संपत्ति संबंधी नुकसान हुआ, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड और प्रक्रियाओं का भी दुरुपयोग किया गया, जिससे शासन को भी हानि पहुंची।

शाहाड स्थित 25 गुंठा भूमि को लेकर विवाद

एफआईआर के अनुसार, विवादित संपत्ति शाहाड गांव, उल्हासनगर स्थित सर्वे नंबर 171/C की लगभग 25 गुंठा भूमि है। शिकायतकर्ता का दावा है कि यह जमीन उनके परिवार की संपत्ति है।

मामले में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2001 में शिकायतकर्ता के पिता स्वर्गीय श्रीचंद भुलचंद आहूजा और उनके चाचा प्रकाश आहूजा ने भूमि के प्रबंधन संबंधी अधिकार नंद रामचंद जेठानी को पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से प्रदान किए थे।

पावर ऑफ अटॉर्नी की वैधता पर विवाद

शिकायतकर्ता का कहना है कि पावर ऑफ अटॉर्नी देने वाले दोनों व्यक्तियों के निधन के बाद उक्त दस्तावेज स्वतः प्रभावहीन और अवैध हो गया था। इसके बावजूद आरोपियों ने कथित रूप से उसी दस्तावेज का उपयोग करते हुए 21 मार्च 2022 को सिटी सर्वे कार्यालय में भूमि सर्वेक्षण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया।

इसके बाद 13 मई 2022 को भूमि का सर्वेक्षण कराया गया और शिकायतकर्ता के अनुसार, इसी प्रक्रिया के माध्यम से संपत्ति पर कब्जा प्राप्त करने का प्रयास किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पूरी कार्रवाई भ्रामक दस्तावेजों और गलत तथ्यों के आधार पर की गई।

चार आरोपियों के खिलाफ मामला

एफआईआर में जिन लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनमें:

धीरज जेठानी

नंद जेठानी

जगेश रघुनाथ गायकवाड़

एक अज्ञात व्यक्ति

शामिल हैं।

सरकारी प्रक्रिया के दुरुपयोग की भी जांच

पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले में यह भी जांच की जा रही है कि भूमि सर्वेक्षण और उससे संबंधित राजस्व प्रक्रिया के दौरान किन-किन दस्तावेजों का उपयोग किया गया तथा क्या संबंधित अधिकारियों को सही जानकारी उपलब्ध कराई गई थी या नहीं। जांच के दौरान दस्तावेजों की वैधता, पावर ऑफ अटॉर्नी की कानूनी स्थिति और भूमि स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड की भी समीक्षा की जाएगी।

पुलिस ने शुरू की विस्तृत जांच

हिल लाइन पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और जांच प्रारंभ कर दी गई है। इस प्रकरण की जांच पुलिस उपनिरीक्षक सुरवाडे कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि सभी दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
















उल्हासनगर-5 के जींस मार्केट में एक कारोबारी संकट की चर्चाएं तेज, सट्टेबाजी में नुकसान और बकाया भुगतान को लेकर उठे सवाल।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर-5 स्थित देश के प्रमुख रेडीमेड एवं जींस व्यापार केंद्रों में से एक जींस मार्केट इन दिनों एक व्यापारी परिवार को लेकर चल रही चर्चाओं के कारण सुर्खियों में है। बाजार के व्यापारिक गलियारों में पिछले कुछ समय से एक प्रमुख जींस व्यापारी और उसके परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं सुनने को मिल रही हैं। हालांकि, इन चर्चाओं और दावों की अभी तक किसी भी आधिकारिक स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है।

व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, संबंधित व्यापारी के पुत्र को कथित तौर पर IPL सट्टेबाजी में भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। बाजार में चर्चा है कि इस नुकसान का प्रभाव परिवार के व्यवसाय पर भी पड़ा है, जिसके कारण कारोबारी गतिविधियों और वित्तीय लेन-देन पर दबाव बढ़ गया है।

सूत्रों का कहना है कि डेनिम रोड क्षेत्र के कई कपड़ा व्यापारियों का भुगतान लंबे समय से लंबित बताया जा रहा है। इसी वजह से व्यापारिक समुदाय के बीच संबंधित कारोबारी की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। कुछ व्यापारियों का दावा है कि बढ़ते आर्थिक दबाव के कारण संबंधित व्यापारी गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है और भविष्य में उसके सामने दिवालियापन जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।

बाजार में यह चर्चा भी जोरों पर है कि उक्त व्यापारी पहले अपनी दुकान का संचालन "K" अक्षर से शुरू होने वाले एक नाम से करता था और अब उसने उसी अक्षर से शुरू होने वाले नए नाम के साथ व्यापारिक गतिविधियां प्रारंभ की हैं। व्यापारिक हलकों में इसे लेकर भी कई तरह की चर्चाएं और अटकलें लगाई जा रही हैं।

सूत्रों के अनुसार, संबंधित दुकान दूध नाका रोड और आश्रम रोड के बीच स्थित क्षेत्र में, डिस्को टी के आसपास संचालित होने की चर्चा है। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि अगले महीने रीजेंसी एंटीलिया में आयोजित होने वाले बड़े जींस व्यापार मेले में उक्त कारोबारी नए नाम और नई पहचान के साथ भाग लेने की तैयारी कर रहा है।

"इस पूरे घटनाक्रम के बीच जींस मार्केट के एक अन्य बड़े कारोबारी का नाम भी चर्चा में है। व्यापारिक हलकों में कहा जा रहा है कि उनके नाम की शुरुआत 'के' अक्षर से होती है, हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है"। कुछ व्यापारियों का दावा है कि संबंधित पक्षों के बीच पूर्व में कारोबारी साझेदारी अथवा वित्तीय संबंध रहे हैं। हालांकि, इन संबंधों की प्रकृति और वर्तमान स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। बाजार में इस विषय को लेकर विभिन्न प्रकार की अटकलें और चर्चाएं जारी हैं।

व्यापारिक जानकारों का मानना है कि यदि बाजार में चल रही चर्चाओं में किसी प्रकार की सच्चाई है, तो इसका प्रभाव केवल एक व्यापारी या परिवार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे जींस व्यापार क्षेत्र में विश्वास और लेन-देन की व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। दूसरी ओर कई व्यापारी यह भी कह रहे हैं कि बिना आधिकारिक दस्तावेजों और पुष्ट जानकारी के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

फिलहाल, संबंधित व्यापारी, उसके परिवार अथवा अन्य चर्चित पक्षों की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। न ही किसी सरकारी एजेंसी, बैंक अथवा न्यायिक मंच द्वारा दिवालियापन या वित्तीय अनियमितता से जुड़ी कोई पुष्टि की गई है।

अस्वीकरण: यह समाचार व्यापारिक सूत्रों, बाजार में चल रही चर्चाओं और अपुष्ट दावों पर आधारित है। समाचार में उल्लिखित तथ्यों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित पक्षों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।














कुंभ 2027 की तैयारियों में बड़ा फैसला: मुख्यमंत्री कार्यालय के OSD रामेश्वर नाईक बने विशेष समन्वयक, संत समाज और प्रशासन के बीच निभाएंगे अहम भूमिका।


 

मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र सरकार ने वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले विश्व प्रसिद्ध नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार मुख्यमंत्री कार्यालय में कार्यरत विशेष कार्य अधिकारी (OSD) रामेश्वर नाईक को कुंभ मेले के लिए विशेष समन्वयक (Coordinator) नियुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री की स्वीकृति से जारी इस आदेश को कुंभ मेले की तैयारियों के लिए एक महत्वपूर्ण और रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

22 जून 2026 को जारी आदेश में कहा गया है कि कुंभ मेले की सफलता में साधु-संतों, महंतों और विभिन्न अखाड़ों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस विशाल धार्मिक आयोजन को सुचारु, सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए संत समाज, अखाड़ों, कुंभमेला प्राधिकरण, स्थानीय प्रशासन तथा राज्य शासन के बीच प्रभावी संवाद और समन्वय बनाए रखना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से रामेश्वर नाईक को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

संत समाज, अखाड़ों और प्रशासन के बीच बनेंगे प्रमुख कड़ी

सरकारी आदेश के अनुसार रामेश्वर नाईक साधु-संतों, विभिन्न अखाड़ों, कुंभमेला प्राधिकरण और राज्य सरकार के बीच संवाद स्थापित करने का कार्य करेंगे। कुंभ मेले से जुड़े धार्मिक, प्रशासनिक और व्यवस्थागत विषयों पर समन्वय बनाए रखने के साथ-साथ वे विभिन्न पक्षों की मांगों और सुझावों को संबंधित विभागों तक पहुंचाने तथा उनके समाधान की प्रक्रिया को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

कुंभ मेले जैसे विशाल आयोजन में कई बार धार्मिक परंपराओं, व्यवस्थाओं और प्रशासनिक आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती होती है। ऐसे में सरकार द्वारा एक समर्पित समन्वयक की नियुक्ति को दूरदर्शी निर्णय माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री सचिवालय से जारी हुआ आदेश

मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा जारी आदेश पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. श्रीकर परदेशी के हस्ताक्षर हैं। आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यह नियुक्ति मुख्यमंत्री की मंजूरी से की गई है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि राज्य सरकार ने कुंभ 2027 की तैयारियों को प्राथमिकता देते हुए प्रारंभिक स्तर से ही समन्वय तंत्र को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।

राज्य के शीर्ष अधिकारियों को भेजी गई प्रतिलिपि

इस आदेश की प्रतिलिपि महाराष्ट्र शासन के मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव, दोनों उपमुख्यमंत्रियों के कार्यालयों, नगर विकास विभाग, जलसंपदा विभाग, नासिक विभागीय आयुक्त, नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभमेला प्राधिकरण, नासिक महानगरपालिका, जिलाधिकारी कार्यालय, पुलिस आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस अधीक्षक सहित सभी प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों को भेजी गई है।

इससे स्पष्ट है कि सरकार कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर बहुस्तरीय समन्वय व्यवस्था विकसित करना चाहती है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या व्यवस्थागत बाधा उत्पन्न न हो।

करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना

नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला देश ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है। इस आयोजन में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु, साधु-संत, महंत और अखाड़ों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। ऐसे में सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल, आवास और बुनियादी सुविधाओं की व्यापक व्यवस्था करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि धार्मिक संगठनों और प्रशासन के बीच समय रहते प्रभावी संवाद स्थापित हो जाए तो आयोजन को अधिक सुचारु और व्यवस्थित बनाया जा सकता है। रामेश्वर नाईक की नियुक्ति को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा

सरकार के इस फैसले को राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि कुंभ 2027 को लेकर सरकार अब तैयारी के अगले चरण में प्रवेश कर चुकी है और आने वाले महीनों में बुनियादी ढांचे, सड़क विकास, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े कई बड़े निर्णय लिए जा सकते हैं।

कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा रामेश्वर नाईक को कुंभ मेले का समन्वयक नियुक्त किए जाने का निर्णय आगामी नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ 2027 की तैयारियों को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इस नियुक्ति से संत समाज, अखाड़ों और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा और दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक आयोजनों में से एक कुंभ मेला सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा सकेगा।















कला भारती के सदस्य अभिषेक कोली भाजपा में शामिल, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ भव्य कार्यक्रम संपन्न।


 


नवी मुंबई: दिपिका पारकर

राष्ट्रसेवा, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को केंद्र में रखकर मुंबई में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान कला भारती एसोसिएशन के सदस्य अभिषेक कोली ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में औपचारिक रूप से प्रवेश किया। इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार, उद्यमिता विकास और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्यापक मार्गदर्शन दिया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कलाकारों और उद्यमियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल राजनीतिक विस्तार तक सीमित नहीं था, बल्कि महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सशक्त बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस प्रयास करना भी था। इस दौरान महिलाओं को आर्थिक साक्षरता, केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं, GEM पोर्टल, मुद्रा योजना, स्वरोजगार के अवसर, उद्यमिता विकास, स्वास्थ्य एवं पोषण जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करना ही इस पहल का प्रमुख लक्ष्य है।

इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशिष शेलार, मुंबई भाजपा अध्यक्ष एवं विधायक अमित साटम, विधान परिषद सदस्य उमा खापरे, मुंबई भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष योजना ठोकले, विधान परिषद सदस्य माधवी नाइक, भाजपा के पदाधिकारी तथा अन्य कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के आयोजन में कला भारती एसोसिएशन की संस्थापक एवं अध्यक्ष उषा बाजपेयी के मार्गदर्शन में नगरसेविका स्वप्ना म्हात्रे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशिष शेलार ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा राष्ट्रहित और समाजसेवा की भावना से कार्य करने वाले लोगों का स्वागत करती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश ने विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए हैं और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित लोगों के लिए भाजपा एक सशक्त मंच है। उन्होंने कला भारती एसोसिएशन के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था महिलाओं को सशक्त बनाकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने का सराहनीय प्रयास कर रही है।

वहीं, मुंबई की महापौर ऋतु तावड़े ने युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए कहा कि भाजपा हमेशा नई पीढ़ी को अवसर देने और उन्हें नेतृत्व की मुख्यधारा से जोड़ने में विश्वास रखती है। उन्होंने अभिषेक कोली के भाजपा में प्रवेश का स्वागत करते हुए कहा कि युवा नेतृत्व समाज और राजनीति दोनों के लिए नई ऊर्जा लेकर आता है। उन्होंने उन्हें जनसंपर्क बढ़ाने, संगठन के साथ मिलकर कार्य करने और जमीनी स्तर पर जनता के बीच अपनी पहचान मजबूत करने का संदेश दिया।

महापौर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व की भी सराहना करते हुए कहा कि राज्य में युवाओं को अधिक अवसर प्रदान करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं रविंद्र चव्हाण, अमित साटम और चित्रा वाघ के योगदान की भी प्रशंसा की।

कला भारती एसोसिएशन की संस्थापक एवं अध्यक्ष उषा बाजपेयी ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल एक नारा नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की बुनियादी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को शिक्षा, आर्थिक अवसर, प्रशिक्षण और उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। उनके अनुसार विकसित भारत के सपने को साकार करने में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

भाजपा में शामिल होने के बाद अभिषेक कोली ने कहा कि राष्ट्रसेवा की भावना से प्रेरित होकर उन्होंने भाजपा का दामन थामा है। उन्होंने कहा कि कला भारती एसोसिएशन और भाजपा मिलकर समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर कलाकारों और युवाओं के लिए नए अवसर उपलब्ध कराने का कार्य करेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संगठन के माध्यम से समाजहित और राष्ट्रहित के कार्यों को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सकेगा।

कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक आकर्षण “उड़ान” दिव्यांग संगीत समूह (ब्लाइंड ऑर्केस्ट्रा) की प्रस्तुति रही। समूह के कलाकारों ने अपने संगीत और प्रतिभा से उपस्थित लोगों को भावुक और प्रेरित किया। कार्यक्रम में इस समूह का विशेष सम्मान भी किया गया। आयोजकों ने कहा कि यह सम्मान समाज में प्रतिभा और दृढ़ इच्छाशक्ति के महत्व को रेखांकित करने का प्रयास है।

इसके अलावा देश के विभिन्न राज्यों से आए महिला एवं पुरुष उद्यमियों, हस्तशिल्प कलाकारों और समाजसेवियों को भी सम्मानित किया गया। गुजरात, महेश्वर, संभाजीनगर, पुणे सहित विभिन्न क्षेत्रों की पारंपरिक कला, हस्तकला और महिला उद्यमिता को मंच प्रदान कर स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया गया।

कार्यक्रम का समापन महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समरसता और राष्ट्रसेवा के संकल्प के साथ हुआ। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की पहलें समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के साथ-साथ महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।














FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे को मिल सकती है Z+ सुरक्षा, सख्त कार्रवाईयों के बीच सुरक्षा बढ़ाने पर मंथन।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त एवं वरिष्ठ IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे को Z+ श्रेणी की सुरक्षा दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियां उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीरता से विचार कर रही हैं तथा इस संबंध में उच्च स्तर पर चर्चा जारी है।

जानकारी के मुताबिक, हाल के महीनों में तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में FDA ने राज्यभर में गुटखा, तंबाकू, निकोटीनयुक्त पान मसाला और अन्य प्रतिबंधित उत्पादों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया है। कई जिलों में बड़े पैमाने पर छापेमारी, जब्ती और कानूनी कार्रवाई के कारण अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर दबाव बढ़ा है। इसी पृष्ठभूमि में उनकी सुरक्षा को लेकर समीक्षा किए जाने की बात सामने आ रही है।

सूत्रों का कहना है कि विभिन्न एजेंसियों द्वारा प्राप्त इनपुट और सुरक्षा आकलन रिपोर्टों के आधार पर मुंढे की सुरक्षा बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो उन्हें Z+ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की जा सकती है, जो देश में उपलब्ध सबसे उच्च सुरक्षा श्रेणियों में से एक मानी जाती है।

तुकाराम मुंढे अपनी कठोर प्रशासनिक कार्यशैली, पारदर्शिता और नियमों के कड़ाई से पालन के लिए जाने जाते हैं। अपने प्रशासनिक करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए भ्रष्टाचार, अवैध कारोबार और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। FDA आयुक्त के रूप में भी उन्होंने राज्यभर में कई चर्चित कार्रवाईयों को अंजाम दिया है, जिसके चलते वे लगातार सुर्खियों में रहे हैं।

हाल ही में प्रतिबंधित गुटखा और तंबाकू उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे। इसके अलावा अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। माना जा रहा है कि इसी कारण सुरक्षा एजेंसियां उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं।

हालांकि, Z+ सुरक्षा को लेकर अभी तक राज्य सरकार, गृह विभाग अथवा संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी होने और आवश्यक प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो तुकाराम मुंढे उन चुनिंदा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की सूची में शामिल हो जाएंगे जिन्हें विशेष सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है। फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।














उल्हासनगर में सेवा और समर्पण का अनूठा उदाहरण: संपादक शिव कुमार मिश्रा का जन्मदिन सामाजिक सरोकारों के साथ धूमधाम से मनाया गया।


 






उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी उल्हास जनपथ के संपादक शिव कुमार मिश्रा का जन्मदिन सामाजिक सेवा और जनकल्याण के कार्यों के साथ अत्यंत उत्साह एवं भव्यता से मनाया गया। जन्मदिन के अवसर पर उल्हास जनपथ कार्यालय में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और शिव कुमार मिश्रा को शुभकामनाएं एवं बधाइयां दीं।

कार्यक्रम की सबसे विशेष बात यह रही कि जन्मदिन को केवल उत्सव तक सीमित न रखते हुए इसे समाजसेवा से जोड़ा गया। इस अवसर पर आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद विद्यार्थियों को स्कूल बैग, पुस्तकें एवं पेंसिल सेट वितरित किए गए, ताकि उनकी शिक्षा में किसी प्रकार की बाधा न आए और वे बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर हो सकें।

इसके साथ ही जरूरतमंद महिलाओं को दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं से युक्त राशन किट प्रदान की गईं, जबकि वरिष्ठ नागरिकों को मानसून को ध्यान में रखते हुए छतरियां वितरित की गईं। इस पहल की उपस्थित लोगों ने जमकर सराहना की और इसे समाज के प्रति संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

कार्यक्रम का सबसे आकर्षक और भावुक क्षण तब देखने को मिला जब सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत प्रथम एवं द्वितीय कक्षा की बालिकाओं के लिए विशेष लकी ड्रॉ आयोजित किया गया। लकी ड्रॉ के माध्यम से चयनित छात्राओं को साइकिलें भेंट की गईं। इस उपहार से बालिकाओं और उनके अभिभावकों के चेहरे खुशी से खिल उठे। उपस्थित लोगों ने कहा कि इस प्रकार की पहल न केवल बेटियों को प्रोत्साहित करती है, बल्कि शिक्षा के प्रति समाज में सकारात्मक संदेश भी देती है।

कार्यक्रम में मौजूद सामाजिक, शैक्षणिक, धार्मिक और विभिन्न क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने शिव कुमार मिश्रा को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, सुखद एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। साथ ही समाजहित में लगातार किए जा रहे उनके कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सेवा, सहयोग और मानवता की भावना को मजबूत करते हैं।

जन्मदिन समारोह सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों का संदेश देते हुए संपन्न हुआ। उपस्थित लोगों ने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी शिव कुमार मिश्रा इसी तरह समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्गों के लिए प्रेरणादायी कार्य करते रहेंगे।























सामाजिक सेवा और राष्ट्र निर्माण में उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को मिला प्रतिष्ठित "भारत भूषण सम्मान 2026"


नई दिल्ली: दिनेश मीरचंदानी

देश के सामाजिक, मानवीय और राष्ट्रहित से जुड़े कार्यों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले प्रतिष्ठित समाजसेवी एवं जनहितैषी व्यक्तित्व डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित "भारत भूषण सम्मान" से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें सामाजिक सुधार, श्रमिक कल्याण, नैतिक सुशासन, राष्ट्र निर्माण, जनसेवा तथा मानव एवं पशु कल्याण के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय और प्रभावशाली योगदान के लिए प्रदान किया गया है।

भारत गौरव फाउंडेशन द्वारा प्रदान किया जाने वाला यह सम्मान देश के उन विशिष्ट व्यक्तित्वों को समर्पित है जिन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने, नागरिक जागरूकता बढ़ाने तथा राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डॉ. घाडगे का चयन उनके वर्षों से चले आ रहे समर्पित सामाजिक कार्यों, जनहित के मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए किए गए प्रयासों को ध्यान में रखते हुए किया गया।

डॉ. सागर प्रकाश घाडगे ने अपने कार्यकाल के दौरान सामाजिक न्याय, समान अवसर, श्रमिक अधिकारों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण तथा जनकल्याण से जुड़े अनेक विषयों पर सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने, जागरूकता फैलाने तथा सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य किया है। उनके नेतृत्व में संचालित विभिन्न जनहितकारी अभियानों ने अनेक लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

विशेष रूप से मानव और पशु कल्याण के क्षेत्र में उनके प्रयासों की व्यापक सराहना की गई है। समाज के कमजोर एवं जरूरतमंद वर्गों के प्रति उनकी संवेदनशीलता तथा सेवा भाव ने उन्हें एक जिम्मेदार और प्रेरणादायी सामाजिक नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित किया है। उनके कार्यों में सदैव पारदर्शिता, नैतिकता, ईमानदारी और राष्ट्रहित सर्वोपरि रहा है।

इस अवसर पर जारी आधिकारिक प्रशस्ति में कहा गया है—

"सामाजिक सुधार, श्रमिक कल्याण, नैतिक सुशासन, राष्ट्र निर्माण और मानवीय सेवा के प्रति उनकी असाधारण प्रतिबद्धता तथा एक अधिक समावेशी, न्यायसंगत और प्रगतिशील समाज के निर्माण में उनके अनुकरणीय योगदान के लिए डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को भारत भूषण सम्मान 2026 से सम्मानित किया जाता है।"

भारत भूषण सम्मान को देश के प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक माना जाता है, जिसका उद्देश्य ऐसे व्यक्तित्वों को सम्मानित करना है जिनकी सेवाएं व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित न रहकर व्यापक समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। डॉ. घाडगे का यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियों का प्रतीक है, बल्कि समाजसेवा और जनकल्याण के क्षेत्र में कार्यरत हजारों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में जब समाज को संवेदनशील, जिम्मेदार और दूरदर्शी नेतृत्व की आवश्यकता है, तब डॉ. सागर प्रकाश घाडगे जैसे व्यक्तित्व नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का कार्य करते हैं। उनका जीवन और कार्य यह संदेश देता है कि समर्पण, सेवा, साहस और नैतिक मूल्यों के आधार पर समाज में सार्थक एवं स्थायी परिवर्तन संभव है।

देश के विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक और जनसेवी संगठनों ने डॉ. घाडगे को इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान के लिए बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और निरंतर जनसेवा की कामना की है।

डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को "भारत भूषण सम्मान 2026" प्राप्त होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

"समाज सेवा • न्याय के प्रति प्रतिबद्धता • राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पण'














उल्हासनगर के कथित बोगस सनद मामले में पत्रकार दिलीप मालवणकर ने मुख्यमंत्री और महसूल मंत्री से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने मामले में हजारों करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर शहर में कथित बोगस सनद (फर्जी प्रमाणपत्र) प्रकरण को लेकर एक बार फिर राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। पत्रकार एवं अन्याय विरोधी संघर्ष समिति के अध्यक्ष दिलीप मालवणकर ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि वर्षों से चल रही कथित अनियमितताओं के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है।

मालवणकर का आरोप है कि उल्हासनगर महानगरपालिका का टाउन प्लानिंग विभाग लंबे समय से विवादों के घेरे में रहा है। बिना वैध अनुमति निर्मित इमारतों को नियमित करने, एफएसआई (फ्लोर स्पेस इंडेक्स) में कथित हेरफेर तथा टीडीआर (ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स) से जुड़े मामलों में समय-समय पर गंभीर आरोप सामने आते रहे हैं। उनका कहना है कि विभाग में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति और पदस्थापन को लेकर भी प्रतिस्पर्धा रहती है तथा इन पदों के लिए बड़े पैमाने पर लेनदेन होने की चर्चाएं लंबे समय से होती रही हैं।

पूर्व प्रशासक के कार्यकाल पर सवाल

दिलीप मालवणकर ने आरोप लगाया कि पूर्व प्रशासक जगतसिंह गिरासे के कार्यकाल के दौरान कथित रूप से सैकड़ों गैरकानूनी सनदें जारी की गईं, जिनकी विभागीय जांच अब तक पूरी नहीं हो सकी है। उनका दावा है कि इन मामलों में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने बाकी हैं और जांच लंबित रहने से अनेक प्रश्न अनुत्तरित बने हुए हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान प्रांत अधिकारी (एसडीओ) विजयानंद शर्मा के कार्यकाल में भी कथित रूप से इसी प्रकार की प्रक्रिया जारी है। मालवणकर का कहना है कि यदि पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हो सकते हैं।

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणपत्र जारी होने का आरोप

मालवणकर के अनुसार, कई मामलों में प्रस्तुत दस्तावेजों की प्रामाणिकता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। उनका आरोप है कि कथित रूप से फर्जी या संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणपत्र जारी किए गए, जिससे सरकारी नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन हुआ। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ मामलों में अपील स्तर तक कथित लेनदेन की व्यवस्था होने की चर्चाएं सामने आई हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के दुरुपयोग का आरोप

दिलीप मालवणकर ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2005 से पूर्व के लंबित मामलों के निपटारे को लेकर दिए गए निर्देशों का कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से दुरुपयोग किया गया। आरोप है कि इसी प्रावधान का सहारा लेकर संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर आवेदन प्रस्तुत किए गए और बाद में प्रमाणपत्र प्राप्त किए गए।

मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय जांच की मांग

मालवणकर ने मुख्यमंत्री तथा राज्य के महसूल मंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि पूर्व प्रशासक जगतसिंह गिरासे और वर्तमान प्रांत अधिकारी विजयानंद शर्मा के कार्यकाल में जारी सभी सनदों और प्रमाणपत्रों की विस्तृत जांच कराई जाए। उन्होंने संबंधित कार्यालयों की सीसीटीवी फुटेज की जांच, दस्तावेजों का सत्यापन, आर्थिक लेनदेन की पड़ताल तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल इन आरोपों को लेकर संबंधित अधिकारियों या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, इस मुद्दे ने शहर की राजनीति, प्रशासनिक व्यवस्था और नागरिकों के बीच नई बहस को जन्म दे दिया है। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तो यह मामला उल्हासनगर के सबसे बड़े कथित प्रशासनिक और राजस्व घोटालों में से एक साबित हो सकता है।














आरटीओ की नोटिस के बाद भी नहीं बदली तस्वीर! उल्हासनगर आयुक्त की सरकारी गाड़ी पर फिर दिखी लाल-नीली फ्लैशिंग बत्ती, नियमों की अनदेखी पर उठे सवाल।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

देशभर में वीआईपी संस्कृति पर लगाम लगाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय और केंद्र सरकार द्वारा वर्षों पहले वाहनों पर लाल-नीली बत्तियों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। इसके बावजूद ठाणे जिले के उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन में नियमों की अनदेखी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त मनीषा आव्हाले की सरकारी गाड़ी पर प्रतिबंधित फ्लैशिंग लाल-नीली बत्ती लगाए जाने का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि कुछ समय पहले इसी मुद्दे पर कल्याण क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) द्वारा दंडात्मक कार्रवाई की जा चुकी है। इसके बावजूद आयुक्त की सरकारी गाड़ी पर कथित रूप से वही ‘जिगजैग’ फ्लैशिंग बत्ती दिखाई देने से प्रशासनिक व्यवस्था और नियमों के पालन को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

आरटीओ की कार्रवाई के बाद भी नहीं हटी बत्ती

जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले कल्याण आरटीओ ने आयुक्त की सरकारी गाड़ी पर अनधिकृत फ्लैशिंग बत्ती लगाए जाने के मामले में कार्रवाई करते हुए जुर्माना लगाया था। उम्मीद की जा रही थी कि इसके बाद संबंधित वाहन से प्रतिबंधित उपकरण हटा दिए जाएंगे, लेकिन हाल की घटनाओं ने इस उम्मीद पर पानी फेर दिया।

सोमवार को कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठक में शामिल होने के लिए आयुक्त मनीषा आव्हाले जिस सरकारी वाहन से पहुंचीं, उस पर फिर वही फ्लैशिंग लाल-नीली बत्ती देखी गई। इस घटना ने यह संकेत दिया कि पूर्व में की गई कार्रवाई के बावजूद स्थिति में कोई विशेष बदलाव नहीं आया है।

कल्याण आरटीओ ने जारी की आधिकारिक नोटिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए कल्याण उप प्रादेशिक परिवहन कार्यालय ने तत्काल हस्तक्षेप किया है। उप प्रादेशिक परिवहन अधिकारी आशुतोष बारकुल द्वारा उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त को आधिकारिक नोटिस जारी की गई है।

नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि वाहन क्रमांक MH-05-FP-9445 पर लाल एवं नीली फ्लैशिंग बत्तियों का उपयोग किया जा रहा है। आरटीओ ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 108 में किए गए संशोधनों का हवाला देते हुए कहा है कि आपातकालीन सेवाओं से जुड़े वाहनों को छोड़कर अन्य किसी भी सरकारी वाहन पर इस प्रकार की फ्लैशिंग बत्तियों का उपयोग वैध नहीं है।

नोटिस के माध्यम से संबंधित वाहन से फ्लैशिंग बत्ती तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही इसकी प्रतिलिपि महानगरपालिका के वाहन विभाग के उप आयुक्त को भी भेजी गई है, ताकि आदेश का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

क्या कहते हैं नियम?

केंद्र सरकार ने 1 मई 2017 से वीआईपी संस्कृति समाप्त करने के उद्देश्य से देशभर में लाल बत्ती के उपयोग पर व्यापक प्रतिबंध लागू किया था। इस निर्णय का उद्देश्य सरकारी पद और शक्ति प्रदर्शन की मानसिकता को समाप्त करना तथा आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच समानता का संदेश देना था।

वर्तमान नियमों के अनुसार केवल एम्बुलेंस, अग्निशमन विभाग और पुलिस जैसी आपातकालीन सेवाओं के वाहनों को ही लाल अथवा नीली फ्लैशिंग बत्तियों के उपयोग की अनुमति है। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा भारत के मुख्य न्यायाधीश जैसे सीमित संवैधानिक पदों को छोड़कर किसी भी मंत्री, जनप्रतिनिधि अथवा प्रशासनिक अधिकारी को अपने वाहन पर ऐसी बत्ती लगाने की अनुमति नहीं है।

जनता के बीच चर्चा का विषय बना मामला

इस पूरे प्रकरण ने आम नागरिकों के बीच भी चर्चा छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि जब प्रशासनिक अधिकारी स्वयं नियमों का पालन नहीं करेंगे तो आम जनता से कानून का सम्मान करने की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। नागरिकों का मानना है कि नियम सभी के लिए समान होने चाहिए और उनका पालन भी बिना किसी अपवाद के किया जाना चाहिए।

अब सबकी नजर अगले कदम पर

आरटीओ द्वारा जारी नोटिस के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन इस आदेश का तत्काल पालन करेगा? क्या आयुक्त की सरकारी गाड़ी से प्रतिबंधित फ्लैशिंग बत्ती हटाई जाएगी, या फिर यह विवाद आगे और बढ़ेगा?

फिलहाल आरटीओ की सख्त नोटिस के बाद प्रशासनिक गलियारों में इस मुद्दे की चर्चा तेज हो गई है और आम जनता की नजरें अब आयुक्त कार्यालय की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।














उल्हासनगर में बढ़ रही जनआक्रोश की भावना: आयुक्त मनीषा आव्हाले से मुलाकात नहीं होने पर नागरिकों ने जताई नाराजगी.!


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका की आयुक्त मनीषा आव्हाले से आम नागरिकों की नियमित मुलाकात नहीं हो पाने के कारण शहर में असंतोष का माहौल बनता दिखाई दे रहा है। नागरिकों का कहना है कि महानगरपालिका प्रशासन द्वारा प्रत्येक मंगलवार को दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक आयुक्त से मिलने का समय निर्धारित किया गया है, ताकि लोग अपनी समस्याएं, शिकायतें और सुझाव सीधे प्रशासन के सर्वोच्च अधिकारी तक पहुंचा सकें। हालांकि, पिछले कई सप्ताहों से नागरिकों को आयुक्त से मुलाकात का अवसर नहीं मिल पा रहा है।

शिकायत लेकर महानगरपालिका मुख्यालय पहुंचने वाले नागरिकों का आरोप है कि कई बार उन्हें आयुक्त कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा बताया जाता है कि आयुक्त मंत्रालय में किसी बैठक के लिए गई हैं, जबकि कुछ अवसरों पर अन्य सरकारी कार्यों में व्यस्त होने का कारण बताया जाता है। इसके चलते दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले नागरिकों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है।

शहर के कई नागरिकों का कहना है कि वे जलापूर्ति, सड़क मरम्मत, सफाई व्यवस्था, अवैध निर्माण, संपत्ति कर, स्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों को लेकर आयुक्त से मिलने पहुंचते हैं, लेकिन लगातार मुलाकात नहीं हो पाने से उनकी समस्याओं के समाधान में देरी हो रही है। इससे लोगों में यह भावना बढ़ रही है कि उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं है।

नागरिकों के बीच अब यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि यदि महानगरपालिका आयुक्त से ही मुलाकात संभव नहीं हो पा रही है, तो वे अपनी समस्याओं और शिकायतों के निराकरण के लिए किस अधिकारी के पास जाएं। कई लोगों का मानना है कि जनसुनवाई की व्यवस्था का उद्देश्य नागरिकों और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करना होता है, लेकिन यदि निर्धारित समय पर भी अधिकारी उपलब्ध नहीं रहते, तो इस व्यवस्था का महत्व कम हो जाता है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों का कहना है कि महानगरपालिका प्रशासन को इस विषय पर स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। यदि आयुक्त किसी कारणवश निर्धारित समय पर उपलब्ध नहीं हैं, तो नागरिकों की शिकायतें सुनने और उन पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए किसी वरिष्ठ अधिकारी को अधिकृत किया जाना चाहिए। साथ ही नागरिकों को पूर्व सूचना देने की व्यवस्था भी होनी चाहिए, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

इस पूरे मुद्दे को लेकर शहर में चर्चा का माहौल है और नागरिक उम्मीद कर रहे हैं कि महानगरपालिका प्रशासन जनसुनवाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाएगा, ताकि आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो सके और प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत बना रहे।















उल्हासनगर के ज्वलंत मुद्दों को लेकर FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे से मुलाकात की तैयारी, सामाजिक संगठन और बुद्धिजीवी होंगे एकजुट।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर के कई सामाजिक संगठन, नागरिक मंच और शहर के कुछ प्रमुख बुद्धिजीवी जल्द ही FDA आयुक्त Tukaram Munde से मुलाकात कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि इस प्रस्तावित बैठक में शहर से जुड़े विभिन्न जनहित के मुद्दों, प्रशासनिक चुनौतियों तथा नागरिकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल शहर में खाद्य सुरक्षा, अवैध गुटखा कारोबार, जनस्वास्थ्य से जुड़े विषयों तथा आम नागरिकों को प्रभावित करने वाले अन्य मुद्दों पर आयुक्त का ध्यान आकर्षित करेगा। इसके अलावा, विभिन्न संगठनों द्वारा तैयार किए गए शिकायत पत्र और सुझाव भी आयुक्त के समक्ष प्रस्तुत किए जा सकते हैं।

सूत्रों का कहना है कि हाल के दिनों में FDA द्वारा राज्यभर में चलाए जा रहे सख्त अभियान और आयुक्त तुकाराम मुंढे की सक्रिय कार्यशैली को देखते हुए स्थानीय संगठनों ने सीधे संवाद का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है। इस मुलाकात के माध्यम से शहर की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कार्रवाई की मांग किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि, इस प्रस्तावित बैठक की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन शहर के सामाजिक और नागरिक संगठनों के बीच इसे लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। यदि यह बैठक होती है, तो उल्हासनगर से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को राज्य स्तर पर प्रभावी ढंग से उठाने का अवसर मिल सकता है।

फिलहाल सभी की निगाहें इस संभावित मुलाकात पर टिकी हैं, जिससे शहर की विभिन्न समस्याओं के समाधान को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।














भारत गौरव एक्सीलेंस अवॉर्ड 2026 से सम्मानित हुए डॉ. सागर प्रकाश घाडगे समाजसेवा, श्रमिक कल्याण, मानवाधिकार संरक्षण एवं राष्ट्रहित में उत्कृष्ट योगदान को मिली राष्ट्रीय पहचान।


नई दिल्ली/मुंबई : दिनेश मीरचंदानी

समाजसेवा, श्रमिक कल्याण, मानवाधिकार संरक्षण, जनजागरण तथा राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में अपने उल्लेखनीय और प्रेरणादायी योगदान के लिए अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त समाजसेवक, श्रमिक नेता, मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं बहु-विश्व रिकॉर्ड धारक डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को प्रतिष्ठित "भारत गौरव एक्सीलेंस अवॉर्ड 2026" से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान समाज और राष्ट्र के प्रति उनके दीर्घकालिक समर्पण, उत्कृष्ट नेतृत्व तथा जनकल्याण के लिए किए गए अथक प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति और सराहना का प्रतीक है।

डॉ. घाडगे को प्राप्त यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए भी गौरव का विषय है जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए निरंतर कार्यरत हैं।

समाज परिवर्तन के सशक्त सूत्रधार

डॉ. सागर प्रकाश घाडगे ने अपना जीवन समाज के वंचित, पीड़ित, श्रमिक, उपेक्षित और जरूरतमंद वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित किया है। श्रमिक अधिकारों की रक्षा, मानवाधिकार संरक्षण, उपभोक्ता जागरूकता, सामाजिक न्याय और जनकल्याण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उन्होंने उल्लेखनीय कार्य करते हुए समाज में एक विशिष्ट पहचान स्थापित की है।

उनके नेतृत्व में अनेक जनहितकारी अभियानों, जागरूकता कार्यक्रमों और सामाजिक पहलों को सफलतापूर्वक संचालित किया गया, जिनसे हजारों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट कर सामाजिक सद्भाव, जनसहभागिता और सामुदायिक विकास को नई दिशा प्रदान की है।

नशामुक्ति, अपराध नियंत्रण और आतंकवाद विरोधी जनजागरण में महत्वपूर्ण योगदान

डॉ. घाडगे ने सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध प्रभावी जनजागरण अभियान चलाकर समाज को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विशेष रूप से नशामुक्ति अभियान, अपराध विरोधी जागरूकता अभियान तथा आतंकवाद विरोधी जनजागरण कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने युवाओं और नागरिकों को राष्ट्रहित, सामाजिक उत्तरदायित्व और कानून के प्रति सम्मान का संदेश दिया है।

उनके प्रयासों ने अनेक युवाओं को नशे, अपराध और असामाजिक गतिविधियों से दूर रहकर सकारात्मक जीवन मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया है। सामाजिक सुरक्षा, राष्ट्रीय एकता और जनजागरूकता के क्षेत्र में उनका योगदान अत्यंत सराहनीय माना जाता है।

उल्लेखनीय उपलब्धियाँ

डॉ. सागर प्रकाश घाडगे की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं—

• श्रमिकों के अधिकारों, सम्मान और कल्याण के लिए निरंतर संघर्ष एवं प्रभावी नेतृत्व।

• मानवाधिकार संरक्षण और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय जनजागरण अभियान।

• उपभोक्ता अधिकारों और नागरिक जागरूकता को बढ़ावा देने हेतु उल्लेखनीय कार्य।

• वंचित एवं उपेक्षित वर्गों के सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयास।

• नशामुक्ति, अपराध नियंत्रण और आतंकवाद विरोधी जनजागरण अभियानों में सक्रिय योगदान।

• पशु कल्याण एवं पर्यावरण संरक्षण से संबंधित सामाजिक उपक्रमों में महत्वपूर्ण सहभागिता।

• युवाओं में नेतृत्व क्षमता, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने हेतु प्रेरणादायी कार्य।

• राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न सामाजिक पहलों के माध्यम से जनजागरूकता और सकारात्मक परिवर्तन को बढ़ावा देना।

• बहु-विश्व रिकॉर्ड धारक के रूप में समाजहित से जुड़े नवाचारपूर्ण अभियानों का सफल संचालन।

राष्ट्रीय सम्मान से बढ़ा गौरव

"भारत गौरव एक्सीलेंस अवॉर्ड 2026" देश के प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक है, जो विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को प्रदान किया जाता है। डॉ. घाडगे को यह सम्मान मिलना समाजसेवा और जनकल्याण के क्षेत्र में उनके अथक प्रयासों की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मान्यता माना जा रहा है।

सामाजिक, शैक्षणिक, औद्योगिक तथा मानवाधिकार क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तियों, संगठनों और नागरिकों ने इस उपलब्धि पर डॉ. घाडगे को शुभकामनाएँ देते हुए उनके योगदान की भूरि-भूरि प्रशंसा की है।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

डॉ. सागर प्रकाश घाडगे की दूरदृष्टि, संघर्षशीलता, नेतृत्व क्षमता और समाजहित के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने उन्हें एक प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया है। उनका जीवन इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि समर्पण, सेवा और दृढ़ संकल्प के माध्यम से समाज में व्यापक एवं स्थायी परिवर्तन लाया जा सकता है।

समाज के सर्वांगीण विकास, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक न्याय और जनकल्याण के लिए उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी एवं मार्गदर्शक सिद्ध होगा।

"आपकी दृष्टि हमारी प्रेरणा है, आपकी सेवा समाज की शक्ति है।"

भारत गौरव एक्सीलेंस अवॉर्ड 2026 की इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए अनंत शुभकामनाएँ।














उल्हासनगर में विकास पर ब्रेक! प्रशासन और नगरसेवकों के बीच बढ़ी खींचतान, विकास कार्यों की रफ्तार थमी, वार्डों में अटकी योजनाएं; जनता में बढ़ रहा असंतोष।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका में इन दिनों प्रशासन और नव-निर्वाचित नगरसेवकों के बीच बढ़ती खींचतान का सीधा असर शहर के विकास कार्यों पर दिखाई देने लगा है। विभिन्न वार्डों में सड़क मरम्मत, नाला सफाई, पानी आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कई प्रस्ताव लंबित पड़े हैं, जिससे नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, कई नगरसेवकों का आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर फाइलों को जानबूझकर धीमी गति से आगे बढ़ाया जा रहा है, जबकि अधिकारियों का कहना है कि नियमों और वित्तीय प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक है। इसी टकराव के चलते अनेक विकास योजनाओं की मंजूरी और कार्यादेश अटक गए हैं।

नगरसेवकों का दावा है कि चुनाव के दौरान जनता से किए गए विकास के वादों को पूरा करने में प्रशासनिक अड़चनें सबसे बड़ी बाधा बन रही हैं। कई जनप्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा उनके सुझावों और प्रस्तावों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पारदर्शिता और नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। बिना तकनीकी और वित्तीय मंजूरी के किसी भी काम को जल्दबाजी में शुरू नहीं किया जा सकता। अधिकारियों का यह भी तर्क है कि पिछली कई परियोजनाओं में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने के बाद सतर्कता बढ़ाई गई है।

इस खींचतान का सबसे अधिक असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। कई इलाकों में अधूरे विकास कार्य, खराब सड़कें, जलभराव और सफाई समस्याओं को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच चल रही रस्साकशी में शहर का विकास पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले समय में यह विवाद और गहरा सकता है। वहीं, शहर के नागरिक अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से टकराव खत्म कर विकास कार्यों को गति देने की मांग कर रहे हैं।














उल्हासनगर मनपा में चुनावी घोटाले की चर्चा तेज, आयुक्त ने अधिकारियों-कर्मचारियों को जारी किया ‘कारण बताओ नोटिस’


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के आम चुनाव के लिए खरीदी गई चुनावी सामग्री में करोड़ों रुपये के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आने से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान खरीदी गई सामग्री को बाजार मूल्य से कहीं अधिक दरों पर खरीदने तथा चुनाव समाप्त होने के बाद उसे महानगरपालिका के रिकॉर्ड और कब्जे में जमा न कर निजी स्तर पर ठिकाने लगाने के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए महानगरपालिका आयुक्त मनीषा आव्हाले ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर जवाब तलब किया है।

सूत्रों के अनुसार, चुनाव विभाग के माध्यम से कंप्यूटर, कैमरे, पेन-कागज, टेबल-कुर्सियां, डस्टबिन, मंडप, पानी की बोतलें समेत अन्य आवश्यक सामग्री की बड़े पैमाने पर खरीद की गई थी। आरोप है कि इन वस्तुओं की खरीद में नियमों को दरकिनार करते हुए बाजार भाव से अधिक कीमतें दिखाई गईं, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया।

सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह सामग्री महानगरपालिका के स्वामित्व में वापस जमा होना अपेक्षित था, लेकिन बड़ी मात्रा में सामग्री का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इससे यह आशंका गहरा गई है कि कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से चुनावी सामग्री का गैरकानूनी तरीके से निपटारा किया गया।

बताया जा रहा है कि चुनाव विभाग के खर्चों का नियमित ऑडिट न होने का फायदा उठाकर वित्तीय गड़बड़ियों को अंजाम दिया गया। जब यह मामला आयुक्त मनीषा आव्हाले के संज्ञान में आया, तब उन्होंने तत्काल उस समय चुनाव विभाग में कार्यरत अतिरिक्त आयुक्त, उपायुक्त, संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस जारी कर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा।

आयुक्त की इस कार्रवाई के बाद महानगरपालिका परिसर में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक और आपराधिक कार्रवाई की मांग उठाई है।

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में यदि अनियमितताएं साबित होती हैं, तो प्रशासन दोषियों पर कितनी सख्त कार्रवाई करता है और करोड़ों रुपये के कथित घोटाले की परतें कब तक खुलती हैं।














मराठवाड़ा में भाजपा का बड़ा दांव? क्या विधान परिषद जाएंगे डॉ. ओमप्रकाश शेटे, मुखमंत्री देवेंद्र फडणवीस की नई रणनीति पर चर्चा तेज।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े राजनीतिक समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है। आगामी बीड, लातूर और धाराशिव स्थानीय स्वराज्य संस्था विधान परिषद चुनाव को लेकर भाजपा के भीतर रणनीतिक हलचल दिखाई दे रही है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, बीड जिले के भूमिपुत्र और भाजपा से जुड़े प्रमुख चेहरे डॉ. ओमप्रकाश शेटे को विधान परिषद में भेजे जाने की संभावना को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis अपनी चर्चित “सरप्राइज रणनीति” के तहत मराठवाड़ा में भाजपा का नया राजनीतिक समीकरण तैयार कर सकते हैं। स्वर्गीय Vinayak Mete के बाद मराठवाड़ा और विशेष रूप से बीड जिले में नेतृत्व के नए चेहरे की तलाश के बीच डॉ. शेटे का नाम तेजी से उभरकर सामने आ रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने हमेशा संगठन और प्रशासनिक स्तर पर काम करने वाले भरोसेमंद सहयोगियों को आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। इससे पहले अभिमन्यु पवार, सुमित वानखेड़े और Shrikant Bharatiya जैसे नेताओं को महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसर दिए जा चुके हैं। ऐसे में अब डॉ. ओमप्रकाश शेटे को भी भाजपा नेतृत्व की “गुडबुक” में माना जा रहा है।

मराठवाड़ा में भाजपा का नया चेहरा बनने की चर्चा

सूत्रों की मानें तो भाजपा आगामी स्थानीय निकाय और विधान परिषद चुनावों के जरिए मराठवाड़ा में अपनी पकड़ और मजबूत करने की तैयारी में है। बीड, लातूर और धाराशिव क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने के लिए नए नेतृत्व को आगे लाने की रणनीति पर काम चल रहा है। इसी कड़ी में डॉ. शेटे का नाम गंभीरता से लिया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि भाजपा डॉ. शेटे को विधान परिषद का मौका देती है, तो यह केवल एक राजनीतिक नियुक्ति नहीं बल्कि मराठवाड़ा की राजनीति में नए शक्ति संतुलन का संकेत माना जाएगा।

प्रशासनिक जिम्मेदारी और सरकारी आदेशों पर भी उठे सवाल

इस बीच खबर में प्रशासनिक प्रक्रियाओं और सरकारी आदेशों में होने वाली त्रुटियों को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है। कानूनी और प्रशासनिक दस्तावेजों में छोटी-छोटी लिपिकीय गलतियों के कारण कई बार गंभीर परिणाम सामने आते हैं। इससे आम नागरिकों को न्याय मिलने में देरी होती है और सरकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होते हैं।

ऐसे मामलों को देखते हुए सरकारी आदेश जारी करने से पहले अधिक सतर्कता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग जोर पकड़ रही है। अब जनता की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासनिक लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।

भाजपा की अगली चाल पर सबकी नजर

फिलहाल मराठवाड़ा की राजनीति में भाजपा किसे आगे बढ़ाती है और विधान परिषद चुनाव में कौन सा नया चेहरा सामने आता है, इस पर राजनीतिक गलियारों में उत्सुकता बढ़ गई है। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री फडणवीस का फैसला मराठवाड़ा की राजनीति की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।














प्रॉपर्टी टैक्स बकाया पर दुकान-गोदाम सील नहीं कर सकती उल्हासनगर महानगर पालिका - बॉम्बे हाईकोर्ट


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी वैधानिक प्रावधान के अभाव में नगर निकाय बकाया संपत्ति कर वसूलने के लिए किसी परिसर को सील नहीं कर सकते। अदालत ने मंगलवार को उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) को निर्देश दिया कि वह कथित टैक्स बकाया के कारण सील किए गए एक फास्ट-फूड आउटलेट और गोदाम को तुरंत खोल दे।

जस्टिस गौतम अंखाड और जस्टिस संदीप डी. पाटिल की अवकाशकालीन पीठ ने यह आदेश दुकान मालिक लछमन दुसेजा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। दुसेजा की संपत्तियों को 30 मार्च को सील किया गया था।

पीठ ने कहा,

“प्रतिवादी निगम के वकील हमें ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं दिखा सके, जो संपत्ति कर का भुगतान न होने पर परिसर सील करने का अधिकार देता हो।”

अदालत ने UMC को दुसेजा के गोदाम और दुकान को तुरंत अनसील करने का आदेश दिया।

दुसेजा के अनुसार, UMC अधिकारियों ने 30 मार्च को उनके परिसरों का दौरा किया और दोनों संपत्तियों को सील करने से पहले अटैचमेंट आदेश जारी किया। निगम ने गोदाम पर ₹5.64 लाख और दुकान पर ₹1.30 लाख संपत्ति कर बकाया होने का दावा किया था।

दुसेजा की ओर से पेश अधिवक्ता एस.बी. राव ने दलील दी कि महाराष्ट्र म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट, 1949 और उसके तहत बनाए गए नियम नगर निकायों को संपत्ति कर वसूली के लिए परिसर सील करने का अधिकार नहीं देते। उन्होंने इस मुद्दे पर हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों का भी हवाला दिया।

अदालत ने यह दलील स्वीकार कर ली, क्योंकि UMC के वकील सुरेश कांबले इस कार्रवाई के समर्थन में कोई वैधानिक प्रावधान पेश नहीं कर सके।

दुसेजा ने अदालत को बताया कि वह संपत्ति कर चुकाने को तैयार हैं, लेकिन नगर निकाय द्वारा लगाए गए जुर्माने और विलंब शुल्क का विरोध कर रहे हैं।

हाईकोर्ट ने उन्हें बकाया कर जमा करने की अनुमति दी और मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को तय की।














उल्हासनगर में बिजली चोरी पर बड़ा खुलासा, MSEDCL अधिकारी पर रिश्वत लेकर कनेक्शन जोड़ने का आरोप।


 


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (MSEDCL) में कथित भ्रष्टाचार और बिजली चोरी को संरक्षण देने का गंभीर मामला सामने आया है। उल्हासनगर-3 स्थित स्नेहदीप अपार्टमेंट्स में हुई कार्रवाई के दौरान MSEDCL के एक वरिष्ठ अधिकारी पर बिजली चोरी पकड़ने के बाद कथित रूप से रिश्वत लेकर दोबारा बिजली कनेक्शन जोड़ने का आरोप लगा है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो और फोटो सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है।

सोसायटी प्रशासन का आरोप है कि 22 मई 2026 को MSEDCL उल्हासनगर डिवीजन के अतिरिक्त कार्यकारी अभियंता श्री भास्कर कोले अपनी टीम के साथ स्नेहदीप अपार्टमेंट्स पहुंचे थे। सोसायटी द्वारा लंबे समय से फ्लैट नंबर 105 (A-विंग) और फ्लैट नंबर 204 (B-विंग) में बड़े पैमाने पर बिजली चोरी और अवैध बिजली उपयोग की शिकायत की जा रही थी।

बिना मीटर चल रही थी भारी बिजली खपत

सोसायटी के अनुसार दोनों फ्लैटों में बिना मीटर के भारी बिजली उपयोग किया जा रहा था, जो बिजली अधिनियम की धारा 126 और 135 का उल्लंघन है। आरोप है कि इन फ्लैटों पर लाल पंजाबी और गोविंद पंजाबी नामक व्यक्तियों ने अवैध कब्जा कर रखा है। बताया गया कि मूल फ्लैट मालिकों की वर्षों पहले मृत्यु हो चुकी है।

शिकायत के बाद MSEDCL की टीम मौके पर पहुंची और कथित रूप से अवैध बिजली लाइन काटी गई। लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने पूरे मामले को विवादों में ला दिया।

“30 मिनट की बंद कमरे की डील” का आरोप

सोसायटी सदस्यों का आरोप है कि बिजली लाइन काटने के तुरंत बाद अधिकारी श्री भास्कर कोले अपनी टीम और एक निजी मध्यस्थ के साथ आरोपी फ्लैट के अंदर गए। करीब 30 मिनट तक टीम फ्लैट के भीतर रही और इस दौरान किसी भी सोसायटी सदस्य को अंदर नहीं आने दिया गया।

आरोप यह भी है कि मौके पर कोई पंचनामा तैयार नहीं किया गया और बाहर आने के बाद FIR दर्ज करने की बजाय उसी बिजली लाइन को दोबारा जोड़ दिया गया जिसे कुछ मिनट पहले अवैध बताते हुए काटा गया था।

रिश्वत लेकर मामला दबाने का आरोप

स्थानीय सूत्रों और सोसायटी प्रशासन का दावा है कि बंद कमरे में हुई बातचीत के दौरान करीब ₹25,000 की रिश्वत देकर मामले को दबा दिया गया। हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कथित फोटो और वीडियो अब सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर तेजी से चर्चा में हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब स्थानीय नागरिकों ने अधिकारी से सवाल किया कि बिजली चोरी करने वालों को संरक्षण क्यों दिया जा रहा है, तो उन्होंने कथित रूप से कहा:

“अब यह मामला लीगल डिपार्टमेंट का है, मेरा काम खत्म हो गया।”

इसके बाद अधिकारी अपनी टीम के साथ मौके से रवाना हो गए।

Vigilance और ACB को भेजे गए सबूत

सोसायटी सचिव भूषण बलदेव खत्री ने दावा किया है कि पूरे घटनाक्रम से जुड़े फोटो और दस्तावेज मुंबई स्थित चीफ विजिलेंस ऑफिसर (CVO), ठाणे एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), मुख्यमंत्री कार्यालय और ऊर्जा मंत्रालय को भेज दिए गए हैं।

सोसायटी का यह भी आरोप है कि कार्रवाई के दौरान इस्तेमाल की गई MSEB की गाड़ी को जानबूझकर बिल्डिंग से दूर खड़ा किया गया ताकि पूरी कार्रवाई सार्वजनिक नजरों से दूर रहे।

“सरकारी खजाने की खुली लूट” – सोसायटी प्रशासन

सोसायटी प्रशासन ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि:

“यह सरकारी खजाने की खुलेआम लूट है। जिन अधिकारियों को बिजली चोरी रोकने की जिम्मेदारी दी गई है, वही आरोपियों को संरक्षण देते नजर आ रहे हैं। यदि 48 घंटे के भीतर FIR दर्ज कर कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की जाएगी।”

मीडिया को सौंपे गए दस्तावेज

सोसायटी प्रशासन ने मीडिया को निम्न दस्तावेज उपलब्ध कराने का दावा किया है:

MSEDCL को दी गई प्रारंभिक शिकायतों की प्रतियां

मौके पर ली गई तस्वीरें और कथित वीडियो

अधिकारी और टीम की मौजूदगी के फोटो

कथित अवैध बिजली इंस्टॉलेशन से जुड़े रिकॉर्ड

अब इस पूरे मामले में MSEDCL, Vigilance विभाग और ACB की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।