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उल्हासनगर टीडीआर घोटाले पर मंत्रालय में हाईलेवल बैठक: डीआरसी क्रमांक 14, 17 और 18 स्थगित, दोषियों पर होगी कठोर कार्रवाई।


 



उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

उल्हासनगर में उजागर हुए बहुचर्चित टीडीआर घोटाले को लेकर गुरुवार को मंत्रालय में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता राज्य के पूर्व राज्यमंत्री बच्चू भाऊ कडू ने की। इस दौरान नगरविकास विभाग के प्रधान सचिव श्री असीम गुप्ता ने उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त को स्पष्ट निर्देश दिए कि टीडीआर/आरसीसी/डीआरसी क्रमांक 14, 17 और 18 को जांच पूरी होने तक पूरी तरह स्थगित रखा जाए।

इसके साथ ही इन टीडीआर की खरीद-बिक्री पर तत्काल रोक लगाने के आदेश दिए गए। इतना ही नहीं, यदि किसी निर्माण अनुमति में ये टीडीआर पहले से समाविष्ट किए गए हैं तो उन निर्माण अनुमतियों को भी तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का निर्णय लिया गया है।

प्रधान सचिव श्री गुप्ता ने कहा कि जांच 10 दिनों के भीतर पूरी की जाएगी और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उल्हासनगर में टीडीआर घोटाला हुआ है और इसे उजागर करने का श्रेय अधिवक्ता स्वप्निल पाटील को जाता है। गुप्ता ने सवाल उठाते हुए कहा – “जब एक समाजसेवक यह घोटाला सामने ला सकता है, तो जिम्मेदार अधिकारी इस अनियमितता से अनजान क्यों रहे? उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।”

बैठक में राष्ट्र कल्याण पार्टी के अध्यक्ष श्री शैलेश तिवारी ने उल्हासनगर आयुक्त की कार्यप्रणाली पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि 4 मार्च को दिए गए आदेशों का पालन न करना आयुक्त की गंभीर लापरवाही और निष्क्रियता को दर्शाता है।

इस हाईलेवल बैठक में माननीय राज्यमंत्री बच्चू भाऊ कडू, नगरविकास विभाग के प्रधान सचिव श्री असीम गुप्ता, अवर सचिव श्री निर्मलकुमार चौधरी, सचिव नवी-12 श्री मोरे, उल्हासनगर महानगरपालिका की आयुक्त श्रीमती मनीषा आव्हाळे, राष्ट्र कल्याण पार्टी के अध्यक्ष श्री शैलेश तिवारी, प्रहार जनशक्ति पार्टी के जिलाध्यक्ष अधिवक्ता स्वप्निल पाटील, समाजसेवक श्री वासू कुकरेजा तथा ठाणे जिला संपर्क प्रमुख श्री हितेश जाधव उपस्थित रहे।

👉 मंत्रालय स्तर पर हुई इस बैठक के बाद अब उल्हासनगर टीडीआर घोटाले की जांच तेज होने की संभावना है और आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे तथा सख्त प्रशासनिक कार्रवाई सामने आ सकती है।












लालबाग का राजा दर्शन व्यवस्था पर मचा बवाल, भक्तों ने उठाई आवाज – ‘शिर्डी-तिरुपति जैसी हो सिस्टम’


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी 

देश की सबसे भव्य और लोकप्रिय गणेश मंडलियों में से एक लालबाग का राजा इन दिनों चर्चा के केंद्र में है। गणेशोत्सव के दौरान लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन इस बार भक्तों की भीड़ के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

सूत्रों के मुताबिक, कई श्रद्धालुओं की शिकायतें आ रही हैं कि दर्शन के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। भक्तों का कहना है कि उन्हें बिना पैसे दिए सुचारू रूप से दर्शन कर पाना मुश्किल हो रहा है। इन आरोपों के बाद अब मंडल की व्यवस्था और पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।

विकलांग और सीनियर सिटीजन के लिए भी अलग से दर्शन की लाइन की व्यवस्था होनी चाहिए।

भक्तों की मांग – ‘पैड व फ्री दर्शन की आधिकारिक व्यवस्था’

भक्तों का मानना है कि लालबाग का राजा मंडल को शिर्डी साईं बाबा और तिरुपति बालाजी की तर्ज पर दर्शन व्यवस्था लागू करनी चाहिए।

फ्री दर्शन लाइन: सभी आम श्रद्धालुओं के लिए बिना किसी शुल्क के।

पैड दर्शन लाइन: उन भक्तों के लिए जो जल्दी दर्शन करना चाहते हैं और इसके लिए आधिकारिक टिकट खरीद सकते हैं।

श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि यह व्यवस्था लागू की जाती है तो:

1. अव्यवस्था और अवैध वसूली पर रोक लगेगी।

2. भ्रष्टाचार समाप्त होगा और व्यवस्था पारदर्शी बनेगी।

3. मंडल की आधिकारिक आय में बढ़ोतरी होगी, जिससे समाजसेवा और लोकहितकारी कार्यों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे।

विशेषज्ञों की राय

सामाजिक कार्यकर्ताओं और धार्मिक मामलों के जानकारों का कहना है कि लाखों की भीड़ को संभालने के लिए आधुनिक और पारदर्शी दर्शन व्यवस्था अनिवार्य है। उनका मानना है कि यदि मंडल इस दिशा में कदम उठाता है तो भक्तों का विश्वास और अधिक मजबूत होगा और लालबाग का राजा की प्रतिष्ठा भी नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगी।

आगे की राह

अब सभी की निगाहें लालबाग का राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल पर टिकी हैं। क्या मंडल भक्तों की इस मांग पर विचार करेगा? क्या आने वाले समय में यहां शिर्डी और तिरुपति जैसी ऑफिशियल फ्री और पैड दर्शन व्यवस्था देखने को मिलेगी? इसका फैसला जल्द ही सामने आ सकता है।



















उल्हासनगर-5 जींस मार्केट में 25 से 30 लाख का संदिग्ध सौदा, विकी के खिलाफ शिकायत की तैयारी – पुलिस जांच के आसार


(फाइल इमेज)

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

उल्हासनगर-5 का जींस मार्केट एक बार फिर सुर्खियों में है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मार्केट से जुड़ा एक बड़ा आर्थिक मामला प्रकाश में आया है। बताया जा रहा है कि विकी नामक व्यक्ति ने बीते तीन से चार दिनों के भीतर लगभग 25 से 30 लाख रुपये मूल्य का माल बेचा है। यह सौदा उल्हासनगर-5 स्थित 444 धागे वाले क्षेत्र के आसपास संपन्न हुआ।

व्यापारी वर्ग और सूत्रों की मानें तो इस लेन-देन में कई तरह की अनियमितताओं और संदिग्ध गतिविधियों की आशंका जताई जा रही है। बाजार के जानकारों का कहना है कि यदि जल्द ही इस मामले में स्पष्टता नहीं आती है, तो इसकी औपचारिक शिकायत पुलिस थाने में दर्ज कराई जा सकती है।

मार्केट एसोसिएशन ने भी मामले पर करीबी नजर रखी हुई है और प्राथमिक स्तर पर इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। व्यापारियों का मानना है कि यदि इस पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में मार्केट का माहौल प्रभावित हो सकता है।

फिलहाल पुलिस जांच की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है और व्यापारी वर्ग सख्त कानूनी कदमों की उम्मीद लगाए बैठा है।













उल्हासनगर-5 जींस मार्केट में करोड़ों की ठगी! व्यापारी तरुण फरार, पुलिस में शिकायत की तैयारी..?


(फाइल इमेज)

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

उल्हासनगर-5 के जींस मार्केट से एक बड़े आर्थिक घोटाले का मामला सामने आया है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, तरुण नामक व्यापारी ने मार्केट के कई व्यापारियों से करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी की है। बताया जा रहा है कि तरुण बीते कुछ समय से जींस के कपड़े (रोल) के कारोबार में सक्रिय था और इसी कारोबार के बहाने उसने बड़े पैमाने पर व्यापारियों से धन वसूला।

सूत्रों की मानें तो धोखाधड़ी का शिकार हुए व्यापारी अब पुलिस थाने में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराने की तैयारी में हैं। इस घोटाले ने पूरे मार्केट में सनसनी फैला दी है और व्यापारी वर्ग में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग भी सतर्क हो गया है और जल्द ही जांच शुरू होने की संभावना है। उधर, व्यापारियों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाती हैं बल्कि बाजार की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती हैं।

👉 विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो ऐसे घोटाले शहर के व्यापारिक माहौल पर गहरा असर डाल सकते हैं।












उल्हासनगर-5 जींस मार्केट में 4 करोड़ की ठगी! व्यापारी तरुण फरार, पर्दे के पीछे कौन – जल्द होगा खुलासा


(फाइल इमेज)

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

उल्हासनगर-5 के जींस मार्केट से करोड़ों रुपये की ठगी का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है। सूत्रों के अनुसार, तरुण नामक व्यापारी, जो लंबे समय से जींस के कपड़े (रोल) का कारोबार करता था, अचानक मार्केट के व्यापारियों से लगभग 4 करोड़ रुपये लेकर फरार हो गया है। तरुण करीब 7 साल पहले भी बाजार के कई व्यापारियों से 15 से 17 करोड़ रुपए लेकर गायब हो चुका था।

जानकारी के मुताबिक, तरुण पहले कुछ महीनों से मार्केट में कारोबार कर रहा था और इस दौरान उसने स्थानीय व्यापारियों का भरोसा जीता। लेकिन हाल ही में उसने एकाएक बड़े पैमाने पर पैसे लेकर कारोबारियों को चूना लगाया और फरार हो गया।

व्यापारियों का आरोप है कि यह कोई सामान्य धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़े स्तर पर मिलीभगत और षड्यंत्र हो सकता है। हालांकि, अभी तक इस मामले में किसी भी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 

इस घटना के बाद जींस मार्केट के सैकड़ों व्यापारी गहरे आर्थिक संकट में फंस गए हैं। कई व्यापारियों ने बताया कि उनकी सालों की मेहनत और पूंजी तरुण के धोखे से बर्बाद हो गई है। मार्केट में अब भय, आक्रोश और असुरक्षा का माहौल है।

👉 जल्द होगा खुलासा: तरुण के फरार होने के पीछे किसका हाथ है, इसका खुलासा बहुत जल्द किया जाएगा।












जॉली LLB 3 पर विवाद: हाईकोर्ट के वकीलों ने CBFC में दर्ज कराई शिकायत, न्यायपालिका की गरिमा भंग करने का आरोप।


 






मुंबई: दिनेश मीरचंदानी 

बॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित फिल्म जॉली LLB 3 अपने रिलीज़ से पहले ही विवादों में घिर गई है। फिल्म के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष राय और पंकज मिश्रा ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि फिल्म की सामग्री न्यायपालिका की गरिमा को आहत करती है और वकील समुदाय की छवि को हास्यास्पद रूप में प्रस्तुत करती है।

शिकायत के मुख्य बिंदु:

फिल्म जॉली LLB 3 का रिलीज़ 19 सितंबर को प्रस्तावित है।

हाल ही में जारी टीज़र में वकीलों को “जोकर” की तरह लड़ते-झगड़ते दिखाया गया है, जिससे वकीलों की पेशेवर छवि को नकारात्मक रूप से पेश किया गया है।

फिल्म के संवाद और दृश्य अदालत की कार्यप्रणाली को मजाकिया ढंग से दिखाते हैं, जो न केवल वकीलों की प्रतिष्ठा बल्कि न्यायपालिका की गरिमा पर भी सीधा प्रहार माना जा रहा है।

इससे पहले फिल्म श्रृंखला की पिछली कड़ियों (जॉली LLB और जॉली LLB 2) में भी अदालतों और वकीलों को हास्य और व्यंग्य के माध्यम से चित्रित किया गया था।

शिकायतकर्ताओं की मांग:

शिकायत में स्पष्ट कहा गया है कि फिल्म निर्माता और कलाकार जानबूझकर न्यायिक संस्थानों की साख को ठेस पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। उनका उद्देश्य न्यायपालिका का मज़ाक उड़ाकर व्यावसायिक लाभ कमाना है।

फिल्म को रिलीज़ से पहले दोबारा सेंसर किए जाने की मांग की गई है।

साथ ही, फिल्म को प्रमाणन या किसी भी प्रकार की मान्यता देने पर रोक लगाने का आग्रह भी किया गया है।

न्यायपालिका की गरिमा बनाम मनोरंजन

वकीलों का कहना है कि अदालत और न्यायिक कार्यप्रणाली समाज में विश्वास और न्याय की नींव हैं। ऐसे में, फिल्मों के माध्यम से इस गरिमा को भंग करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत है।

अब देखना यह होगा कि CBFC इस शिकायत पर क्या रुख अपनाता है और क्या जॉली LLB 3 नियोजित तारीख पर रिलीज़ हो पाएगी या नहीं।




















उल्हासनगर-5 जींस मार्केट में करोड़ों की ठगी, व्यापारी तरुण फरार – राजस्थान की कपड़ा मिलों को भी लगाया चूना।


(फाइल इमेज)

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

उल्हासनगर-5 के जींस मार्केट से करोड़ों रुपए की ठगी का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। सूत्रों के अनुसार, तरुण नामक व्यापारी ने स्थानीय व्यापारियों को लगभग 4 करोड़ रुपए का चूना लगाया है। बताया जा रहा है कि तरुण जींस के कपड़े (रोल) का व्यापार करता था और इसी व्यापार के नाम पर उसने बड़ी रकम वसूली।

10 साल पहले भी कर चुका है बड़ा घोटाला

जांच में सामने आया है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। करीब एक दशक पहले भी तरुण ने स्थानीय व्यापारियों को 15 से 17 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया था। लंबे समय तक गायब रहने के बाद उसने पुनः कारोबार शुरू किया और दोबारा व्यापारियों को अपने जाल में फंसा लिया।

राजस्थान की मिलें भी बनीं शिकार

जानकारी के मुताबिक, तरुण ने राजस्थान के भीलवाड़ा की प्रतिष्ठित कपड़ा मिलों से माल उठाया और उसका भुगतान नहीं किया। अब मिल मालिक भी बकाया रकम की मांग को लेकर सामने आए हैं। यह घोटाला स्थानीय स्तर तक सीमित न रहकर अब टेक्सटाइल इंडस्ट्री के बड़े वर्ग को प्रभावित कर रहा है।

आरोपी फरार, व्यापारियों में आक्रोश

फिलहाल, आरोपी तरुण फरार बताया जा रहा है।वहीं दूसरी ओर व्यापारियों में भारी आक्रोश है। पीड़ित कारोबारी प्रशासन से सख्त कार्रवाई और जल्द न्याय की मांग कर रहे हैं।

👉 यह मामला न केवल उल्हासनगर के कारोबारियों को झटका दे रहा है, बल्कि राजस्थान की कपड़ा इंडस्ट्री को भी प्रभावित कर रहा है। इससे टेक्सटाइल व्यापार जगत में गहरी चिंता व्याप्त है।






















गणेशोत्सव पर राज्यव्यापी " श्रीगणेशा आरोग्याचा "अभियान के तहद समुदाय आरोग्य शिबीर का आयोजन।


 

मुंबई: दिनेश मीरचंदानी 

गणेशोत्सव के पावन अवसर पर महाराष्ट्र सरकार ने एक व्यापक जनकल्याणकारी पहल की घोषणा की है। मुख्यमंत्री सचिवालय अंतर्गत मुख्यमंत्री सहाय्यता निधी कक्ष तथा धर्मादाय रुग्णालय मदत कक्ष के समन्वय से पूरे राज्य में "श्रीगणेशा आरोग्य" अभियान के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे।

यह अभियान 27 अगस्त 2025 से 5 सितंबर 2025 तक सभी जिलों में चलाया जाएगा। इन शिविरों के माध्यम से नागरिकों को केंद्र व राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। साथ ही चिकित्सा सेवा, निदान, परामर्श और उपचारात्मक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।

मुख्यमंत्री सहाय्यता निधी कक्ष ने जिला प्रशासन से अपील की है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय से संबद्ध मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टर, मेडिकल विद्यार्थी और पैरा मेडिकल स्टाफ इन शिविरों में सक्रिय सहयोग दें। इसके साथ ही आवश्यक चिकित्सा संसाधन, दवाइयाँ और उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएँ।

इन शिविरों के सफल आयोजन के लिए धर्मादाय अस्पताल, महात्मा ज्योतिबा फुले जन आरोग्य योजना से संबद्ध अस्पताल, जिला सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग की अधीनस्थ संस्थाएँ, HLL, STEMI नेटवर्क, अन्न व औषधि प्रशासन, और सामाजिक संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा।

सरकार का मानना है कि यह सामुदायिक स्वास्थ्य अभियान न केवल गणेशोत्सव को सामाजिक-सेवा के रूप में सार्थक करेगा बल्कि नागरिकों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगा।

👉 मुख्यमंत्री सहाय्यता निधी कोष एव धर्मादाय रुग्णालय मदत कक्ष के दायित्व मे होगा।

यदि आपको किसी भी प्रकार का कार्य हो तो आप इस नंबर 022 2202 0045 पर संपर्क कर सकते हैं।















उल्हासनगर राशन कार्यालय में दलालों का कब्ज़ा, आम जनता त्रस्त – प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

उल्हासनगर शहर का राशन कार्यालय इन दिनों दलालों की पकड़ में जकड़ा हुआ है। सरकारी योजनाओं के अंतर्गत सस्ते दाम पर अनाज और आवश्यक वस्तुएं पाने वाले गरीब एवं जरूरतमंद नागरिक दलालों की मनमानी और शोषण से बेहाल हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि राशनकार्ड से जुड़ा कोई भी कार्य – चाहे नया कार्ड बनवाना हो, नाम जोड़ना/हटाना हो, या फिर कार्ड पर नियमित रूप से अनाज प्राप्त करना – दलालों की मदद के बिना लगभग असंभव हो गया है। बताया जा रहा है कि हर छोटे-बड़े कार्य के लिए नागरिकों से भारी-भरकम रकम वसूली जाती है।

लोगों का आरोप है कि इस पूरे खेल में विभागीय अधिकारी और कर्मचारी भी मौन हैं, जिससे दलालों का नेटवर्क और मजबूत होता जा रहा है। नतीजा यह है कि आम जनता को अपने हक का राशन पाने के लिए महीनों तक दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।

सामाजिक संगठनों ने इस स्थिति पर गहरी नाराज़गी जताई है और चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन एवं जनप्रतिनिधि इस समस्या पर तुरंत संज्ञान नहीं लेते, तो नागरिक आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

वर्तमान में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि गरीबों को उनका हक दिलाने और दलालों पर लगाम कसने के लिए निर्णायक कदम उठाएंगे या फिर आम जनता यूं ही शोषण का शिकार होती रहेगी।












उल्हासनगर में पानी बिल वृद्धि पर रोक: उल्हास सिटिज़न्स फ़ोरम की तीन महीने की जंग रंग लाई, अब स्थायी रद्दीकरण की मांग तेज़।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

उल्हासनगर में पानी के बिलों में की गई वृद्धि पर फिलहाल रोक लगा दी गई है, हालांकि इसे स्थायी रूप से रद्द नहीं किया गया है। इस मुद्दे पर उल्हास सिटिज़न्स फ़ोरम के अध्यक्ष नरेश कुमार ताहिलरामाणी और उनकी टीम पिछले तीन महीनों से लगातार जनजागृति और संघर्ष कर रहे हैं।

फ़ोरम ने तीन महीने पहले एक वीडियो संदेश के माध्यम से UMC कमिश्नर से अपील की थी कि पानी के बिलों में वृद्धि न की जाए, पानी की पाइप लाइन लीकेज को तुरंत बंद करवाया जाए और स्वच्छ व समान जल वितरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी उजागर किया कि “ब्लू लाइन” प्रोजेक्ट फेल हो जाने के कारण आज भी GI पाइप से पानी की सप्लाई की जा रही है।

मिडक (MIDC) द्वारा भेजे गए ₹550 करोड़ के बिल को सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने कम करवाया था, फिर भी पानी के बिल बढ़ाने का निर्णय जनता के लिए अनुचित बताया गया। फ़ोरम का कहना है कि UMC के लगभग ₹1000 करोड़ के कर्ज़ की वसूली इस तरह करना गलत है।

इससे पहले तीन विधायकों ने भी पानी बिल वृद्धि न करने की सिफारिश की थी, लेकिन असर नहीं हुआ। पांच दिन पहले उल्हास सिटिज़न्स फ़ोरम ने फिर एक वीडियो, सोशल मीडिया बैनर और इंस्टाग्राम के माध्यम से इस ‘ज़ुल्म’ के खिलाफ मोर्चा खोला। इसके बाद राजनीतिक पार्टियां सक्रिय हुईं और अब इस मुद्दे का श्रेय लेने की कोशिश कर रही हैं।

फ़ोरम ने यह भी मांग की है कि होटल, कंस्ट्रक्शन वर्क जैसी व्यावसायिक गतिविधियों पर सही तरीके से पानी का बिल लगाया जाए। उनका कहना है कि दिन-ब-दिन लोग बोतलबंद पानी पीने को मजबूर हैं — यहां तक कि UMC ऑफिस में भी — जो बताता है कि पानी की गुणवत्ता कितनी सुरक्षित है। साथ ही टैक्सपेयर्स के फंड का दुरुपयोग रोकने, शहर में चालिया साहिब पर फाउंटेन शुरू करने और गड्ढे भरने जैसे कार्यों का श्रेय जागरूक जनता को दिया जाना चाहिए।

नरेश कुमार ताहिलरामाणी का कहना है, "यह हमारी आधी जीत है। हमें फिलहाल स्टे मिला है, लेकिन स्थायी रद्दीकरण के लिए हमारी आवाज़ और तेज़ होगी।"












IRS अधिकारी समीर वानखेड़े का नशामुक्ति संदेश गूंजा कल्याण में, ‘मिशन व्यसनमुक्ति’ अभियान बना जनआंदोलन की शुरुआत।


 




कल्याण: दिनेश मीरचंदानी 

कल्याण के के.सी. गांधी ऑडिटोरियम में शनिवार को एक ऐतिहासिक सामाजिक पहल की गूंज सुनाई दी, जब भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के जांबाज और निडर अधिकारी समीर वानखेड़े ने ‘मिशन व्यसनमुक्ति’ अभियान में शिरकत की। यह अभियान कल्याण विकास फाउंडेशन और यंग इंडिया की संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य नशे की लत से जूझ रहे समाज को नई राह दिखाना है।

इस कार्यक्रम में श्री अभिनव गोयल (IAS), आयुक्त, KDMC और श्री नरेंद्र पवार, पूर्व विधायक भी मंच साझा करते नज़र आए। कार्यक्रम का वातावरण प्रेरणादायक नारों, जागरूकता गीतों और उत्साही युवाओं के जोश से गूंज उठा।

समीर वानखेड़े ने अपने जोशीले संबोधन में कहा—

“व्यसनमुक्त महाराष्ट्र का सपना तभी साकार होगा जब हम सब एकजुट होकर इस लत के खिलाफ जंग छेड़ेंगे। युवाओं को नशे से बचाना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। ‘Say No To Drugs & Yes To Life’ केवल शब्द नहीं, बल्कि एक जीवन दर्शन है।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि नशा सिर्फ व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज का विनाश करता है। इस दिशा में हर नागरिक की भूमिका अहम है, चाहे वह माता-पिता हों, शिक्षक हों या प्रशासन।

कार्यक्रम के दौरान नशामुक्ति पर प्रेरणादायक नाट्य प्रस्तुति, पोस्टर प्रदर्शन और युवाओं द्वारा शपथ ग्रहण भी किया गया। सैकड़ों की संख्या में मौजूद नागरिकों, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नशा छोड़ने और नशा छोड़ने वालों की मदद करने का संकल्प लिया।

‘मिशन व्यसनमुक्ति’ के इस कदम ने कल्याण में सामाजिक परिवर्तन की एक नई लहर पैदा कर दी है, और उम्मीद है कि यह आंदोलन जल्द ही महाराष्ट्र के हर कोने तक पहुंचेगा।












"एक फोन, एक जीवन: आयुष्मान भारत मिशन महाराष्ट्र समिती के प्रमुख डॉ. ओमप्रकाश शेटे की तत्परता से बची मरीज की जान"


परभणी: दिनेश मीरचंदानी 

राज्यभर में बढ़ते गंभीर रोगों और अस्पतालों के व्यावसायीकरण के दौर में भी, आयुष्मान भारत मिशन के अध्यक्ष डॉ. ओमप्रकाश शेटे जरूरतमंद मरीजों के लिए आशा की किरण और जीवनदाता बनकर सामने आ रहे हैं। अपने सक्रिय हस्तक्षेप और त्वरित कार्रवाई से उन्होंने न केवल अपने पद की गरिमा बढ़ाई, बल्कि मरीजों को समय पर न्याय और उपचार भी दिलाया।

मामला 1 अगस्त 2025 का है — परभणी जिले के ग्रामीण इलाके से आए एक मरीज को गंभीर मस्तिष्क रोग था। डॉ. विखे पाटील मेमोरियल हॉस्पिटल में भर्ती इस मरीज के इलाज में लापरवाही बरती जा रही थी। इसकी जानकारी पत्रकार सिद्धेश्वर गिरी ने तत्काल डॉ. ओमप्रकाश शेटे और मुंबई स्थित वरिष्ठ अधिकारी श्रीकांत पवार को दी।

सूचना मिलते ही डॉ. शेटे ने बिना समय गंवाए सीधे अस्पताल प्रबंधन से संपर्क किया और जरूरी निर्देश दिए। आदेश मिलते ही अस्पताल की पूरी टीम हरकत में आ गई, मरीज का उचित इलाज तुरंत शुरू हुआ और आवश्यक शल्य चिकित्सा की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया गया।

एक मात्र फोन कॉल से अस्पताल में मची इस हलचल ने मरीज के परिजनों के चेहरों पर मुस्कान लौटा दी। परिजनों ने भावुक होकर कहा — "डॉ. शेटे जैसे अधिकारी ही सच में इस पद के योग्य हैं, जिन्होंने समय पर मदद कर हमारे प्रियजन की जान बचाई।"

राज्य सरकार द्वारा मरीजों के हित में बनाई गई योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बनाई गई यह व्यवस्था, डॉ. शेटे जैसे संवेदनशील और कर्मठ नेतृत्व के कारण ही आमजन के लिए सच्चे मायनों में वरदान साबित हो रही है














देश के जननायक: IRS अधिकारी समीर वानखेड़े के जीवन पर बनेगी मेगा बजट बॉलीवुड फिल्म।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी 

देश के चर्चित और निर्भीक भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी समीर वानखेड़े के जीवन पर अब बॉलीवुड में मेगा बजट फिल्म बनने जा रही है। फिल्म का शीर्षक "देश के जननायक" रखा गया है, जिसमें उनके संघर्ष, साहस और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को बड़े पर्दे पर उतारा जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, यह फिल्म वास्तविक घटनाओं पर आधारित होगी और दर्शकों को यह दिखाएगी कि किस तरह समीर वानखेड़े ने दबावों और चुनौतियों के बावजूद अपने कर्तव्यों का पालन किया। बताया जा रहा है कि फिल्म का निर्माण बड़े स्तर पर किया जाएगा और इसके लिए शीर्ष स्तर के निर्देशक और कलाकारों से बातचीत जारी है।

फिल्म के निर्माता का कहना है कि “देश के जननायक” न सिर्फ एक अफसर की कहानी होगी, बल्कि यह न्याय, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश भी देगी। शूटिंग की शुरुआत इसी वर्ष होने की संभावना है और यह फिल्म अगले वर्ष बड़े पर्दे पर रिलीज हो सकती है।












कल्याण में नशामुक्ति आंदोलन को मिली नई गति — समीर वानखेडे छात्रों को करेंगे जागरूक, मिशन 'नशामुक्त कल्याण' का भव्य आयोजन।


कल्याण: दिनेश मिरचंदानी

कल्याण शहर में नशामुक्त समाज की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल होने जा रही है। कल्याण विकास फाउंडेशन और यंग इंडिया कल्याण द्वारा संयुक्त रूप से "MISSION: नशामुक्त कल्याण" अभियान का आयोजन किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य स्कूली एवं महाविद्यालयीन विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराना और उन्हें जीवन में सकारात्मक दिशा प्रदान करना है।

इस जागरूकता कार्यक्रम की विशेषता यह है कि इसमें भारत सरकार के प्रतिष्ठित अधिकारी और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (मुंबई) के पूर्व निदेशक IRS अधिकारी समीर वानखेडे मुख्य वक्ता के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित करेंगे। श्री वानखेडे की पहचान न केवल एक सख्त और ईमानदार अधिकारी के रूप में है, बल्कि वे युवाओं के लिए एक प्रेरणास्त्रोत भी हैं, जिन्होंने देशभर में ड्रग्स के खिलाफ कई बड़ी कार्रवाईयों का नेतृत्व किया है।

🔷 कार्यक्रम की प्रमुख झलकियाँ:

विद्यार्थियों के लिए विशेष व्याख्यान

मादक पदार्थों के सेवन से उत्पन्न सामाजिक और मानसिक दुष्परिणामों पर चर्चा

नशे से मुक्ति की दिशा में युवा सहभागिता पर जोर

समीर वानखेडे जैसे प्रखर वक्ता का मार्गदर्शन

📅 कार्यक्रम विवरण:

दिन: शनिवार, 2 अगस्त 2025

समय: सुबह 11:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक

स्थान: के.सी. गांधी हाईस्कूल ऑडिटोरियम, डी-मार्ट के सामने, बैलबाजार, कल्याण (पश्चिम)

इस अभियान को लेकर कल्याण शहर के शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और अभिभावकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। आयोजकों ने उम्मीद जताई है कि यह कार्यक्रम केवल एक जागरूकता सत्र नहीं बल्कि एक सामाजिक आंदोलन की शुरुआत बनेगा।

👉 आयोजकों ने शहर के सभी स्कूलों, कॉलेजों, युवाओं, शिक्षकों और अभिभावकों से अनुरोध किया है कि वे इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में भाग लें और नशामुक्त कल्याण के संकल्प को सशक्त बनाएं।





















व्यसनमुक्त भारत के दो प्रेरणास्रोत बने आंदोलन की पहचान । "अमृता फडणवीस और IRS समीर वानखेडे: व्यसनमुक्त महाराष्ट्र के असली ब्रांड एम्बेसडर"


 




मुंबई: दिनेश मीरचंदानी 

महाराष्ट्र में व्यसनमुक्ति अभियान अब सिर्फ एक सरकारी पहल नहीं रहा, बल्कि यह एक जनआंदोलन बन चुका है — और इस आंदोलन के दो सबसे मजबूत स्तंभ हैं श्रीमती अमृता फडणवीस और IRS अधिकारी समीर वानखेडे।

इन दोनों शख्सियतों ने समाज के हर तबके में जागरूकता फैलाकर, युवाओं को नशे के अंधेरे से बाहर निकालने की दिशा में अनुकरणीय कार्य किया है।

जहां अमृता फडणवीस ने संगीत, समाजसेवा और रचनात्मक अभियानों के माध्यम से युवा पीढ़ी में सामाजिक चेतना जागृत की, वहीं IRS समीर वानखेडे ने कानून और प्रशासनिक शक्ति के ज़रिए ड्रग माफिया के खिलाफ निर्णायक मोर्चा खोला — और अनेक चर्चित मामलों में कठोर कार्रवाई कर एक सशक्त उदाहरण पेश किया।

इनकी कर्मठता, निष्ठा और समाजहित में दिखाई गई प्रतिबद्धता ने महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे भारत में उन्हें व्यसनमुक्त आंदोलन का चेहरा बना दिया है।

सिर्फ पद नहीं, प्रेरणा हैं ये दोनों नाम।
सिर्फ हस्ताक्षर नहीं, संकल्प हैं ये दोनों चेहरे।
और सबसे बढ़कर — "व्यसनमुक्त भारत" के सच्चे और जीवंत प्रतीक हैं।

🔴 आने वाली पीढ़ियां इन्हें याद रखेंगी —

एक ऐसे युगदूत के रूप में जिन्होंने “नशा मुक्त भारत” के सपने को आंदोलन की शक्ल दी, और हजारों युवाओं को नई दिशा दी।




















उल्हासनगर में 'व्यसनमुक्त भारत अभियान' का ऐतिहासिक आयोजन IRS अधिकारी समीर वानखेड़े ने युवाओं को दिया प्रेरणा का संदेश।


 






उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर के प्रतिष्ठित एस.एस.टी. कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स में आज 'व्यसनमुक्त भारत अभियान' के तहत एक भव्य और प्रेरणादायक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश के चर्चित और कर्तव्यनिष्ठ IRS अधिकारी समीर वानखेड़े मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जिनका कॉलेज के प्राचार्य डॉ जे.सी पुरुस्वानी, समस्त शिक्षकगण एवं शहर के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता कुमार मेंघवानी,विक्की मेंघवानी,वकील संस्कार शिंदे,दिनेश मीरचंदानी ने सम्मानपूर्वक स्वागत किया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशा, शराब, तंबाकू और अन्य व्यसनों से दूर रहने हेतु जागरूक करना और उन्हें समाज के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी का बोध कराना था।

समीर वानखेड़े ने अपने ओजस्वी और विचारोत्तेजक संबोधन में कहा:

"नशा सिर्फ शरीर नहीं, समाज को भी खोखला करता है। हर युवा यदि ठान ले कि वह नशे से दूर रहेगा और दूसरों को भी प्रेरित करेगा, तो व्यसनमुक्त भारत का सपना जल्द साकार होगा।"

उन्होंने युवाओं से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, सकारात्मक सोच रखने, और राष्ट्रनिर्माण में भागीदार बनने का आह्वान किया।

कॉलेज के प्राचार्य ने भी कहा कि छात्रों में व्यसन के खिलाफ चेतना जगाने की दिशा में यह कार्यक्रम एक मील का पत्थर साबित होगा।

इस आयोजन में सैकड़ों छात्र-छात्राएं, शिक्षकगण, अभिभावक, और समाजसेवी संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत की गई सांस्कृतिक झांकियाँ और नारों ने भी जनचेतना को गहराई से छुआ।

कार्यक्रम के अंत में एक सर्वसम्मति प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें सभी ने नशामुक्त भारत के संकल्प को दोहराया और इस मुहिम को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक क्रांति की शुरुआत थी — जो युवाओं को नई दिशा, नया जोश और एक स्वच्छ समाज की ओर ले जाने का माध्यम बनेगा।























उल्हासनगर-5 में अवैध गारमेंट कारखानों पर कब गिरेगी गाज? रेजिडेंशियल एरिया में चल रहे जींस और गाउन की अवैध सिलाई यूनिटों पर उल्हासनगर प्रशासन और पुलिस कब लेंगे एक्शन?


(फाइल इमेज)

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

उल्हासनगर-5 के शांत रेजिडेंशियल इलाकों में अवैध जींस और गाउन सिलाई कारखानों का जाल दिनोंदिन फैलता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों की मानें तो इन क्षेत्रों को योजनाबद्ध तरीके से व्यावसायिक गतिविधियों का अड्डा बना दिया गया है, जिससे न केवल क्षेत्र की मूल संरचना प्रभावित हो रही है, बल्कि आम जनजीवन भी संकट में है।

🏭 अवैध कारखाने, वैध सवाल

इन अवैध गारमेंट यूनिटों में:

बिना अनुमति निर्माण और कमर्शियल उपयोग किया जा रहा है।

न तो फायर सेफ्टी के इंतजाम हैं और न ही कोई स्ट्रक्चरल ऑडिट होता है।

बाहर से आए श्रमिकों का कोई पुलिस वेरिफिकेशन नहीं — जिससे आपराधिक घटनाओं की आशंका बनी रहती है।

🛑 नागरिकों की परेशानी:

लगातार ट्रैफिक जाम और ध्वनि प्रदूषण।

पानी और बिजली की चोरी जैसी समस्याएं।

अव्यवस्थित जनसंख्या और सुरक्षा संकट।

❓ प्रशासनिक चुप्पी क्यों?

उल्हासनगर महानगरपालिका और पुलिस प्रशासन की चुप्पी से नागरिकों में गुस्सा है। अब तक न कोई अतिक्रमण विरोधी मुहिम चलाई गई, न कोई सख्त कार्रवाई की गई। सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदारी कौन लेगा?

✅ नागरिकों की पांच प्रमुख मांगें:

1. रेजिडेंशियल एरिया से अवैध गारमेंट यूनिटों को तत्काल हटाया जाए।

2. बाहर से आए कारीगरों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य किया जाए।

3. उल्हासनगर महानगर पालिका नियोजन के उल्लंघन पर नियमित निरीक्षण व कार्रवाई हो।

4. खतरनाक इमारतों की फायर सेफ्टी और स्ट्रक्चरल जांच कर उन्हें सील किया जाए।

5 यह सब अवैध जींस और गाउन सिलाई कारखाने कब इंडस्ट्रियल जोन में जाएंगे।

🔍 सवाल यही है:

क्या प्रशासन की नींद टूटेगी? या फिर एक हादसे का इंतजार है?

उल्हासनगर महानगरपालिका और पुलिस प्रशासन को अब "कार्रवाई" शब्द को सिर्फ फाइलों से निकालकर जमीनी हकीकत में बदलना होगा — इससे पहले कि यह संकट और गहरा हो जाए।












उल्हासनगर SDO कार्यालय में ‘राठौर राज’? "मेरे बिना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता!" — एक रहस्यमयी राठौर का दावा!


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

उल्हासनगर के उपविभागीय अधिकारी (SDO) कार्यालय में इन दिनों एक चौंकाने वाला मामला गरमा रहा है। एक व्यक्ति, जो खुद को राठौर बताता है, खुलेआम दावा कर रहा है कि "पूरा SDO ऑफिस मैं चला रहा हूँ, और मेरी मर्जी के बिना यहां एक पत्ता भी नहीं हिल सकता!"

यह बयान प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। राठौर नामक यह व्यक्ति आखिर कौन है? क्या वह किसी प्रभावशाली अधिकारी या राजनेता से जुड़ा है? या फिर सरकारी तंत्र में उसकी गहरी पैठ है?

सूत्रों के मुताबिक:

राठौर SDO कार्यालय के कई कार्यों में सीधे दखल देता है।

सनद(सीडी), सीडी वेरीफिकेशन और अन्य दस्तावेजों की प्रक्रिया में उसका कथित हस्तक्षेप आम है।

कई आवेदकों को यह कहा गया कि “राठौर से बात करो, तभी काम होगा।”

जनता का आक्रोश: स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पूरे घटनाक्रम पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि एक आम आदमी सरकारी ऑफिस को अपने नियंत्रण में बताकर दबंगई कर रहा है, और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।

प्रमुख सवाल जो उठ रहे हैं:

क्या राठौर वास्तव में SDO कार्यालय में ‘सुपर अफसर’ बना बैठा है?

क्या यह अधिकारियों की मिलीभगत का मामला है?

प्रशासन कब जागेगा और इस मामले में जांच कराएगा?

👉 जनता की मांग:

उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर इस कथित 'राठौर राज' का पर्दाफाश किया जाए और दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई।

📌 यह मामला सिर्फ एक ऑफिस की साख का नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना का सवाल है।












हिंदुस्तान के शेरदिल आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े 19 जुलाई 2025 को उल्हासनगर में, विशेष कार्यक्रम में होंगे शामिल।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

देश के जाने-माने और अपने निडर कार्यशैली के लिए प्रसिद्ध भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारी समीर वानखेड़े आगामी 19 जुलाई, 2025 को उल्हासनगर का दौरा करेंगे। इस बहुप्रतीक्षित दौरे पर, समीर वानखेड़े विशेष कार्यक्रम में शामिल होंगे, जिसकी तैयारी उल्हासनगर में बड़े पैमाने पर की जा रही है।

अपनी सख्त और बेबाक छवि के लिए पहचाने जाने वाले समीर वानखेड़े ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) में अपने कार्यकाल के दौरान कई हाई-प्रोफाइल मामलों को संभाला है, जिसने उन्हें पूरे देश में एक 'शेरदिल' अधिकारी के रूप में पहचान दिलाई है। उनके कार्यकाल में ड्रग्स विरोधी अभियानों और माफिया के खिलाफ की गई कठोर कार्रवाई ने उन्हें जनमानस में नायक का दर्जा दिलाया है।

कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया कि समीर वानखेड़े युवाओं को प्रेरणा देने और देश सेवा के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से इस आयोजन में शिरकत करेंगे। सूत्रों के अनुसार, वे भ्रष्टाचार, ड्रग्स के खतरे और राष्ट्र निर्माण में नागरिक भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं।

श्री वानखेड़े का यह दौरा न केवल उल्हासनगर के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है, बल्कि यह देश के युवाओं और नागरिकों को ईमानदारी, साहस और कर्तव्यनिष्ठा के प्रति प्रेरित करने का भी एक प्रयास है। 19 जुलाई 2025 का यह दिन उल्हासनगर के इतिहास में एक यादगार तारीख बनने वाला है, जब एक सच्चे राष्ट्रसेवक का आगमन होगा।












यूएमसी में लेखा विभाग में घोटाले की बू! ट्रांसफर के बावजूद पुराने अधिकारी काम पर, नए अधिकारियों को चार्ज नहीं मिल रहा!


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

उल्हासनगर महानगरपालिका (यूएमसी) में लेखा विभाग को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। महाराष्ट्र सरकार के स्पष्ट शासन निर्णय (GR) के बावजूद, यूएमसी की आयुक्त मनीषा आव्हाळे ने पुराने अधिकारियों को पद पर बनाए रखा है, जो न सिर्फ नियमों के खिलाफ है बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं की भी अनदेखी करता है।

सूत्रों के अनुसार, लेखा अधिकारी किरण भिल्लाडे और ऑडिटर देशमुख का कार्यकाल पूर्ण होने के बाद जून 2025 में उनका स्थानांतरण किया गया था। महाराष्ट्र शासन के अनुसार किसी भी लेखा अधिकारी को एक ही पद पर अधिकतम तीन वर्षों से अधिक नहीं रखा जा सकता। परंतु, ट्रांसफर ऑर्डर जारी होने और नए लेखा अधिकारी पांडे के यूएमसी पहुंचने के बावजूद उन्हें चार्ज नहीं दिया जा रहा है।

आश्चर्यजनक बात यह है कि यूएमसी कमिश्नर मनीषा आव्हाळे न केवल स्थानांतरित अधिकारियों को अवैध रूप से कार्यरत रख रही हैं, बल्कि उन्हें सरकारी भुगतान जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को निभाने की अनुमति भी दे रही हैं।

वर्तमान में स्थानांतरित लेखा अधिकारी किरण भिल्लाडे शासन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनका ट्रांसफर आदेश रद्द किया जाए और कार्यकाल में विस्तार दिया जाए। यह बात प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।

❗प्रमुख सवाल जो उठ रहे हैं:

जब नया अधिकारी चार्ज लेने के लिए उपस्थित है तो चार्ज क्यों नहीं दिया जा रहा?

महाराष्ट्र शासन के नियमों की यूएमसी में खुलेआम अनदेखी क्यों की जा रही है?

क्या यह किसी बड़े वित्तीय घोटाले को छिपाने का प्रयास है?

किसके दबाव में कार्यकाल पूरा कर चुके अधिकारियों को बनाए रखा जा रहा है?

अगर यह परंपरा बन गई तो क्या भविष्य में शासन के ट्रांसफर नियम केवल दिखावा बनकर रह जाएंगे?

नए अधिकारी पहले ही आ चुके हैं, फिर भी उन्हें चार्ज नहीं दिया जा रहा है।

नए अधिकारी को रोका क्यों जा रहा है❓

पहली बार...

यूएमसी आयुक्त की मनमानी!

यह पहली बार हो रहा है जब यूएमसी में ट्रांसफर ऑर्डर के बावजूद पुराने अधिकारी अवैध रूप से पद पर बने हुए हैं और नए अधिकारियों को चार्ज नहीं सौंपा जा रहा है। यह एक अत्यंत गंभीर और ऐतिहासिक उल्लंघन है जो पूरे प्रशासन की नीयत पर सवाल खड़ा करता है।

अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार इस अवैध कृत्य के विरुद्ध कब और क्या ठोस कदम उठाती है।

इस मामले में तत्काल उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की जा रही है।