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उल्हासनगर की निर्माणाधीन इमारतों के OC-CC को लेकर विवाद, स्वीकृत नक्शे और वास्तविक निर्माण में अंतर की जांच की मांग; बिल्डरों, आर्किटेक्ट्स और TPD विभाग की भूमिका पर भी सवाल।


उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर शहर में तेजी से हो रहे नए भवन निर्माण के बीच स्वीकृत प्लान, वास्तविक निर्माण और Occupancy Certificate (OC) तथा Completion Certificate (CC) जारी किए जाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शहर में निर्माणाधीन इमारतों को लेकर कथित तौर पर यह शिकायत सामने आ रही है कि निर्माण कार्य को स्वीकृत प्लान के अनुरूप पूर्ण दिखाने के बाद संबंधित प्रक्रिया के तहत OC और CC जारी किए जाते हैं, जबकि बाद के चरण में उन्हीं इमारतों में स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण या बदलाव किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

मामले को लेकर यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि यदि किसी इमारत को महानगरपालिका के संबंधित विभाग द्वारा OC या CC जारी किया गया है, तो उसके बाद वहां होने वाले कथित अतिरिक्त निर्माण, फेरबदल या प्लान से अलग किए गए कार्यों की निगरानी किस स्तर पर की जाती है।

बिल्डरों और आर्किटेक्ट्स की भूमिका पर भी सवाल

शिकायतों और उठाए जा रहे सवालों के केंद्र में निर्माणकर्ताओं (Builders), आर्किटेक्ट्स तथा उल्हासनगर महानगरपालिका के TPD विभाग की भूमिका भी बताई जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

जानकारों के अनुसार, किसी भी निर्माण परियोजना में स्वीकृत प्लान और मौके पर किए गए वास्तविक निर्माण के बीच समानता महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि किसी इमारत में स्वीकृत प्लान से अलग निर्माण किए जाने का आरोप है, तो संबंधित दस्तावेजों, मंजूर नक्शे, साइट निरीक्षण रिपोर्ट और जारी किए गए प्रमाणपत्रों की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

OC और CC जारी होने के बाद कथित उल्लंघन का मुद्दा

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि OC और CC जारी किए जाने के समय संबंधित इमारत की वास्तविक स्थिति क्या थी और क्या निर्माण कार्य स्वीकृत प्लान के अनुरूप था?

यदि प्रमाणपत्र जारी होने के बाद किसी इमारत में स्वीकृत प्लान से अलग निर्माण किया गया है, तो उसकी जिम्मेदारी और वैधानिक स्थिति अलग-अलग तथ्यों एवं दस्तावेजों की जांच के बाद ही निर्धारित की जा सकती है।

इसी वजह से शहर में कुछ नागरिकों और संबंधित शिकायतकर्ताओं की ओर से मांग उठाई जा रही है कि हाल के वर्षों में जारी किए गए OC और CC से जुड़े मामलों का दस्तावेजी और स्थल निरीक्षण के आधार पर ऑडिट किया जाए।

रिकॉर्ड की जांच से सामने आ सकती है वास्तविक तस्वीर

मामले की निष्पक्ष जांच के दौरान निम्न बिंदुओं की जांच महत्वपूर्ण मानी जा सकती है—

- संबंधित इमारत का मूल स्वीकृत प्लान क्या था?

- निर्माण के दौरान कितने संशोधित प्लान मंजूर किए गए?

- मौके पर वास्तविक निर्माण स्वीकृत प्लान के अनुरूप है या नहीं?

- OC और CC जारी करने से पहले संबंधित अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया था या नहीं?

- निरीक्षण के दौरान तैयार की गई रिपोर्ट में क्या उल्लेख किया गया है?

- प्रमाणपत्र जारी होने के बाद इमारत में कोई अतिरिक्त निर्माण या बदलाव किया गया या नहीं?

- यदि कोई कथित उल्लंघन पाया गया, तो महानगरपालिका द्वारा उस पर क्या कार्रवाई की गई?

इन सवालों के जवाब संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकते हैं।

प्रशासन से पारदर्शी जांच की अपेक्षा

उल्हासनगर में तेजी से बढ़ रहे निर्माण को देखते हुए OC और CC जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमानुसार निरीक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि किसी निर्माण परियोजना के संबंध में शिकायत प्राप्त होती है, तो संबंधित स्वीकृत प्लान, साइट की मौजूदा स्थिति और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया की जांच से विवाद की वास्तविकता सामने आ सकती है।

फिलहाल, बिल्डरों, आर्किटेक्ट्स अथवा महानगरपालिका के किसी अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को आधिकारिक रूप से सिद्ध नहीं माना जा सकता। इसलिए पूरे मामले में दस्तावेजी जांच और संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण रहेगा।

उल्हासनगर महानगरपालिका के TPD विभाग का आधिकारिक पक्ष और संबंधित बिल्डरों/आर्किटेक्ट्स की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

















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