उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
उल्हासनगर शहर में जमीन एवं संपत्ति से संबंधित सनद वितरण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर अब प्रशासनिक स्तर पर जांच के निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। सामाजिक कार्यकर्ता नोवेल साल्वे द्वारा उठाए गए इस मुद्दे के बाद राज्य सरकार की ओर से कोंकण आयुक्त और ठाणे जिलाधिकारी को मामले की जांच कर निर्धारित अवधि में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाने का दावा किया गया है।
उपलब्ध ठाणे जिला प्रशासन के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार श्री विजयानंद स्वानंद शर्मा उल्हासनगर के उपविभागीय अधिकारी (SDO) के पद पर कार्यरत हैं।
सनद वितरण में अनियमितताओं का आरोप
सामाजिक कार्यकर्ता नोवेल साल्वे ने आरोप लगाया है कि उल्हासनगर उपविभागीय अधिकारी कार्यालय के माध्यम से सनद वितरण की प्रक्रिया में कथित तौर पर अनियमितताएं हुई हैं। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने पहले कोंकण आयुक्त के समक्ष शिकायत रखते हुए विभागीय जांच की मांग की थी।
साल्वे का दावा है कि अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने राज्य सरकार का ध्यान इस मामले की ओर आकर्षित किया और मुंबई के आजाद मैदान में आंदोलन/अनिश्चितकालीन उपवास शुरू किया।
राज्य सरकार के हस्तक्षेप का दावा
साल्वे के अनुसार, उनके आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने मामले का संज्ञान लेते हुए कोंकण आयुक्त तथा ठाणे जिलाधिकारी को पत्र भेजा है। इसमें उल्हासनगर के SDO श्री विजयानंद शर्मा से संबंधित लगाए गए आरोपों की जांच कर 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए जाने की बात कही गई है।
यदि यह जांच औपचारिक रूप से शुरू होती है, तो सनद वितरण से संबंधित रिकॉर्ड, प्रक्रिया, संबंधित अधिकारियों की भूमिका तथा शिकायत में लगाए गए आरोपों की तथ्यात्मक जांच महत्वपूर्ण होगी।
निष्पक्ष जांच और संपत्ति की जांच की मांग
सामाजिक कार्यकर्ता नोवेल साल्वे ने राज्य सरकार से मांग की है कि सनद वितरण से जुड़े पूरे मामले की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए। उन्होंने कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ SDO विजयानंद शर्मा को निलंबित करने और उनकी व्यक्तिगत संपत्ति की जांच कराने की भी मांग की है।
साल्वे ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो वे दोबारा आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।
जांच पूरी होने तक आरोपों की पुष्टि नहीं
हालांकि, किसी भी अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को जांच पूरी होने और सक्षम प्राधिकारी के निष्कर्ष आने से पहले प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। राज्य सरकार द्वारा कथित तौर पर मांगी गई जांच की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी तथ्यात्मकता है और क्या किसी अधिकारी या कर्मचारी की प्रशासनिक अथवा अन्य स्तर पर जिम्मेदारी बनती है।
इस मामले में SDO विजयानंद शर्मा, कोंकण आयुक्त कार्यालय और ठाणे जिलाधिकारी प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी निष्पक्ष रूप से प्रकाशित किया जाना महत्वपूर्ण होगा।
नोट: सनद वितरण से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस समय उपलब्ध स्रोतों से नहीं हुई है। यह रिपोर्ट शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और कथित सरकारी जांच-निर्देशों के आधार पर तैयार की गई है।


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