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उल्हासनगर में स्ट्रीट लाइटों की बदहाल व्यवस्था पर उठे सवाल; सुबह जल्दी बंद और शाम को देर से चालू होने की शिकायत, महावितरण को तत्काल कार्रवाई की मांग।




 



उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर शहर की सड़कों पर स्ट्रीट लाइटों के समय से पहले बंद होने, शाम को देर से चालू होने और कुछ क्षेत्रों में लाइटें पूरी तरह बंद रहने की शिकायत को लेकर अब महावितरण कंपनी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है। प्रहार सामाजिक संघटना, ठाणे जिला के अध्यक्ष एडवोकेट स्वप्निल दिलीप पाटिल ने 12 अक्टूबर 2026 को महावितरण के संबंधित अधिकारियों सहित उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त को ईमेल भेजकर इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान देने और आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

शिकायत के अनुसार, उल्हासनगर के विभिन्न इलाकों में स्ट्रीट लाइटें सुबह जल्दी बंद हो रही हैं, जबकि शाम के समय निर्धारित समय पर चालू नहीं हो रही हैं। इसके अलावा, कुछ क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटों से संबंधित मीटर बंद होने के कारण विद्युत आपूर्ति बाधित होने और लाइटें शुरू नहीं होने की शिकायतें भी सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि, इन शिकायतों की वास्तविक स्थिति और तकनीकी कारणों की पुष्टि संबंधित विभागों की जांच के बाद ही हो सकेगी।

सुबह और रात के समय नागरिकों की सुरक्षा पर चिंता

एडवोकेट स्वप्निल पाटिल ने अपने पत्र में कहा है कि स्ट्रीट लाइटों की अनियमित व्यवस्था के कारण सुबह जल्दी काम पर जाने वाले नागरिकों, रात में यात्रा करने वाले लोगों तथा अन्य राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सड़कों पर पर्याप्त रोशनी नहीं होने से दुर्घटनाओं और चोरी जैसी घटनाओं का जोखिम बढ़ने की आशंका भी व्यक्त की गई है।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि शहर में धार्मिक कार्यक्रमों और उत्सवों के दौरान रात के समय नागरिकों तथा श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसी परिस्थितियों में सार्वजनिक सड़कों और प्रमुख आवागमन मार्गों पर पर्याप्त रोशनी बनाए रखना आवश्यक है। इसी आधार पर स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था को केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि नागरिक सुरक्षा और सार्वजनिक सुविधा से जुड़ा विषय बताया गया है।

मनपा के विद्युत विभाग के कामकाज पर भी असर पड़ने का दावा

पत्र में एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए कहा गया है कि दिन के समय स्ट्रीट लाइटों की विद्युत आपूर्ति बंद रहने के कारण उल्हासनगर महानगरपालिका के विद्युत अभियांत्रिकी विभाग को मरम्मत, मीटरों की जांच, कंट्रोल पैनल के निरीक्षण और आवश्यक तकनीकी परीक्षण करने में कठिनाई हो सकती है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, विद्युत आपूर्ति के अनियमित समय और संभावित बाधाओं का असर स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव तथा मरम्मत कार्यों पर पड़ रहा है। ऐसे में महावितरण कंपनी और महानगरपालिका के संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

हालांकि, विद्युत आपूर्ति बाधित होने के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं, क्या संबंधित मीटरों में तकनीकी खराबी है या टाइमर एवं नियंत्रण प्रणाली में कोई समस्या है, इस संबंध में अधिकारियों की ओर से जांच और स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है।

महावितरण के सामने रखीं प्रमुख मांगें

एडवोकेट स्वप्निल पाटिल ने अपने ईमेल के माध्यम से संबंधित अधिकारियों से निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की है:

- बंद मीटरों की तत्काल जांच: जिन क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटों के मीटर या संबंधित विद्युत आपूर्ति बंद होने की शिकायत है, वहां जांच कर आवश्यक आपूर्ति बहाल की जाए।

- निर्धारित समय पर रोशनी: महानगरपालिका द्वारा लगाए गए टाइमर के अनुसार स्ट्रीट लाइटें निर्धारित समय पर चालू और बंद हों, यह सुनिश्चित किया जाए।

- पूर्व सूचना की व्यवस्था: यदि किसी तकनीकी या अन्य कारण से विद्युत आपूर्ति बंद करना आवश्यक हो, तो महानगरपालिका के संबंधित विद्युत विभाग को पहले से सूचित किया जाए।

- तकनीकी निरीक्षण और मरम्मत: शहर में स्ट्रीट लाइटों, मीटरों और कंट्रोल पैनलों की मौजूदा स्थिति का निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत की जाए।

- स्थायी समाधान: भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए महावितरण और महानगरपालिका के संबंधित अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।

जवाबदेही तय करने की चेतावनी

अपने पत्र में एडवोकेट पाटिल ने स्पष्ट किया है कि स्ट्रीट लाइटों की विद्युत आपूर्ति बाधित होने से नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारी तत्काल आवश्यक कदम उठाएं।

पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि भविष्य में स्ट्रीट लाइटें बंद रहने के कारण कोई अप्रिय घटना होती है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की जाएगी। यह शिकायतकर्ता की ओर से व्यक्त की गई चेतावनी है; फिलहाल किसी अधिकारी की लापरवाही या जिम्मेदारी के संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

एडवोकेट स्वप्निल पाटिल ने चेतावनी दी है कि यदि नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े इस मुद्दे पर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो प्रहार सामाजिक संघटना विधायक बच्चू भाऊ कडू के मार्गदर्शन में बांद्रा स्थित प्रकाश गढ़ में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर सकती है।

उन्होंने अपने ईमेल की प्रतिलिपि उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त, महावितरण कंपनी के कल्याण परिमंडल के अधीक्षक अभियंता, उल्हासनगर के संबंधित अभियंताओं और महानगरपालिका के कार्यकारी अभियंता को भी भेजी है, ताकि मामले में आवश्यक कार्रवाई और विभागीय समन्वय सुनिश्चित किया जा सके।

अब संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया पर नजर

इस शिकायत के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि महावितरण कंपनी और उल्हासनगर महानगरपालिका इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं। क्या बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों और मीटरों की जांच की जाएगी? क्या टाइमर व्यवस्था को दुरुस्त कर निर्धारित समय पर रोशनी सुनिश्चित की जाएगी? और क्या भविष्य में विद्युत आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में दोनों विभागों के बीच समन्वय के लिए कोई स्थायी व्यवस्था बनाई जाएगी?

फिलहाल यह मामला शिकायतकर्ता द्वारा उठाए गए नागरिक सुरक्षा और सार्वजनिक सुविधा के मुद्दे के रूप में सामने आया है। संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया, तकनीकी जांच के निष्कर्ष और की गई कार्रवाई का विवरण सामने आने के बाद ही समस्या की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

जनहित का सवाल: शहर की सड़कों पर पर्याप्त रोशनी उपलब्ध कराना नागरिकों की सुरक्षा और सुचारु आवागमन के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में संबंधित विभागों से अपेक्षा है कि वे शिकायत की जांच कर आवश्यक कदम उठाएं और नागरिकों को नियमित स्ट्रीट लाइट व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई करें।
















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