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महाराष्ट्र में प्रीपेड स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं, महावितरण ने हाईकोर्ट में दी जानकारी।


नागपुर: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र में प्रीपेड इलेक्ट्रिक स्मार्ट मीटरों को लेकर चल रहे विरोध और आशंकाओं के बीच महावितरण (MSEDCL) ने मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए स्पष्ट किया है कि वर्तमान में राज्य में किसी भी उपभोक्ता के लिए प्रीपेड स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं हैं। कंपनी ने अदालत को बताया कि प्रीपेड मीटर केवल उन्हीं ग्राहकों को उपलब्ध कराए जाएंगे जो स्वयं इसकी मांग करेंगे।

महावितरण के इस बयान को लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि पिछले कुछ महीनों से राज्य के विभिन्न हिस्सों में स्मार्ट मीटरों को लेकर विरोध प्रदर्शन और जनजागरण अभियान चलाए जा रहे हैं।

जनहित याचिका के बाद अदालत में सुनवाई

यह मामला विदर्भ वीज ग्राहक संगठन द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से अदालत के समक्ष पहुंचा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रीपेड मीटर लागू करने का निर्णय बिना पर्याप्त अध्ययन और जनहित के व्यापक मूल्यांकन के लिया गया है।

न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की खंडपीठ के समक्ष हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता ने कहा कि प्रीपेड मीटर व्यवस्था से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा। यदि रिचार्ज समाप्त हो जाता है तो बिजली आपूर्ति स्वतः बंद हो सकती है, जिससे आम नागरिकों, वरिष्ठ नागरिकों और ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

याचिका में यह भी कहा गया कि राज्य के सभी नागरिक डिजिटल भुगतान या ऑनलाइन लेनदेन करने में सक्षम नहीं हैं। बड़ी संख्या में लोगों के पास स्मार्टफोन या इंटरनेट की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा स्मार्ट मीटर व्यवस्था के कारण मीटर रीडिंग लेने और बिजली बिल वितरित करने वाले हजारों कर्मचारियों के रोजगार पर भी असर पड़ सकता है।

फिलहाल केवल पोस्टपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं

महावितरण ने अदालत को बताया कि वर्तमान में राज्यभर में केवल पोस्टपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। इन मीटरों के माध्यम से उपभोक्ता पहले की तरह बिजली का उपयोग कर बाद में बिल का भुगतान करते हैं।

जानकारी के अनुसार राज्य में ठेकेदार कंपनियों द्वारा अब तक एक करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। बिजली मीटर तकनीक के विकास की प्रक्रिया में पहले इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक मीटर, फिर इलेक्ट्रॉनिक मीटर, उसके बाद डिजिटल और कम्युनिकेशन आधारित मीटर लगाए गए और अब स्मार्ट मीटरों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है।

उपभोक्ताओं के अधिकारों पर हाईकोर्ट के अहम सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने उपभोक्ताओं के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए। अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या किसी उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर लगाने से इनकार करने का कानूनी अधिकार प्राप्त है? क्या स्मार्ट मीटर स्थापित करने से पहले उपभोक्ता की अनुमति लेना अनिवार्य है? क्या ऐसा कोई स्पष्ट वैधानिक प्रावधान मौजूद है?

खंडपीठ ने इन सभी सवालों पर याचिकाकर्ता को आगामी सोमवार तक विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल आशंकाओं और निराधार आरोपों के आधार पर किसी योजना का विरोध करना उचित नहीं माना जा सकता।

राज्यभर में बहस तेज

स्मार्ट मीटरों को लेकर महाराष्ट्र में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है। विपक्षी दलों और विभिन्न उपभोक्ता संगठनों ने स्मार्ट मीटर योजना पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार और महावितरण इसे बिजली वितरण व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रहे हैं।

अब सभी की नजरें हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां उपभोक्ताओं के अधिकारों, स्मार्ट मीटरों की वैधता और प्रीपेड व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है।














महाराष्ट्र सरकार ने अवैध बांग्लादेशी नागरिकों पर कसी नकेल, निर्वासन प्रक्रिया होगी तेज: सीएम फडणवीस


(फाइल फोटो)

नागपुर/ मुंबई: दिनेश मीरचंदानी 

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि ऐसे नागरिकों की पहचान कर धरपकड़ तेज की जाएगी और उन्हें जल्द ही उनके देश वापस भेजा जाएगा। नागपुर में रविवार को मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रशासनिक स्तर पर इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से अंजाम देने के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।

फडणवीस ने स्पष्ट किया, "मुंबई समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। राज्य सरकार इस मसले पर पूरी तरह सख्त है और उन्हें निर्वासित करने की प्रक्रिया में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।"

धार्मिक स्थलों पर नियंत्रण को लेकर बड़ा बयान

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार अन्य धर्मों के धार्मिक स्थलों को सरकारी नियंत्रण में लेने की मांग पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा, "विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने यह मांग उठाई थी कि सिर्फ हिंदू मंदिर ही नहीं, बल्कि अन्य धर्मों के धार्मिक स्थलों को भी सरकारी प्रबंधन के तहत लाया जाए। यह जनता की मांग है और सरकार इस पर गहन अध्ययन के बाद उचित कदम उठाएगी।"

'भारत जोड़ो यात्रा' पर नक्सल संगठनों के समर्थन का आरोप

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को लेकर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि इस अभियान को नक्सलवाद से जुड़े कुछ प्रतिबंधित संगठनों का समर्थन प्राप्त था। विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान फडणवीस ने दावा किया कि ऐसे संगठनों के खिलाफ यूएपीए और अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई की जा चुकी है।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने मुख्यमंत्री से इन संगठनों के नाम सार्वजनिक करने की मांग की थी, जिस पर फडणवीस ने कहा कि इन संगठनों की पहचान पहले ही स्पष्ट हो चुकी है और कार्रवाई जारी है।

विशेष सार्वजनिक सुरक्षा विधेयक पर चर्चा को तैयार सरकार

राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा विधेयक, 2024 को लेकर हो रहे विरोध पर फडणवीस ने कहा कि इस कानून का मसौदा माओवादी प्रभावित राज्यों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। विधेयक को फिलहाल दोनों सदनों की 21 सदस्यीय संयुक्त चयन समिति (जेएससी) को भेजा गया है ताकि आपत्ति जताने वाले संगठनों को अपनी बात रखने का अवसर मिले।

फडणवीस ने कहा, "यह विधेयक कानून व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए आवश्यक है। हम सुनिश्चित करेंगे कि इसे पारित करने से पहले सभी संबंधित पक्षों से चर्चा की जाए।"

अवैध प्रवासियों और सुरक्षा पर सरकार सख्त

राज्य सरकार के ये कदम स्पष्ट संकेत देते हैं कि महाराष्ट्र में अवैध प्रवासियों और कानून व्यवस्था से संबंधित मामलों में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि राज्य की सुरक्षा और जनता के हितों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

निष्कर्ष:

महाराष्ट्र में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों पर कार्रवाई, धार्मिक स्थलों के नियंत्रण और विशेष सुरक्षा विधेयक पर सरकार का रुख यह दर्शाता है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस राज्य में सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर कोई समझौता नहीं करेंगे। जनता की मांग और प्रशासनिक तैयारियों के साथ सरकार के ये फैसले राज्य में एक बड़े बदलाव की शुरुआत का संकेत दे रहे हैं।









नागपुर साउथ वेस्ट से चुनाव लड़ेंगे डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस, 28 अक्टूबर को भर सकते हैं नामांकन, सियासी हलचल तेज।


नागपुर: दिनेश मीरचंदानी 

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर साउथ वेस्ट विधानसभा सीट से फिर से चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक, वे 28 अक्टूबर को अपना नामांकन दाखिल करेंगे। यह सीट फडणवीस का अभेद्य किला मानी जाती है, जहां से वे 2009, 2014 और 2019 में लगातार बड़ी जीत दर्ज कर चुके हैं। उनके नामांकन की खबर ने महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ी हलचल मचा दी है।

नागपुर साउथ वेस्ट विधानसभा क्षेत्र से फडणवीस की उम्मीदवारी ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी के लिए मजबूत स्थिति बना दी है। यह सीट फडणवीस के राजनीतिक करियर का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है, और उनकी लगातार सफलताओं ने उन्हें इस क्षेत्र का अजेय नेता बना दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, फडणवीस का चुनावी मैदान में उतरना महाराष्ट्र की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा। हाल के समय में राज्य में कई राजनीतिक उठापटक देखने को मिली हैं, और ऐसे में फडणवीस की उम्मीदवारी से पार्टी को एक सशक्त स्थिति मिलने की उम्मीद है।

फडणवीस का नामांकन दाखिल करने का दिन न सिर्फ नागपुर बल्कि पूरे राज्य में चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है। उनके कद और प्रभाव को देखते हुए यह चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ी घटना साबित हो सकता है।







नागपुर में मोबाइल डिजिटल क्लिनिक और आयुष्मान भारत योजना का भव्य उद्घाटन, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया शुभारंभ।


 










नागपुर: दिनेश मीरचंदानी 

नागपुर में स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और प्रभावी बनाने के लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और अत्याधुनिक मोबाइल डिजिटल क्लिनिक की शुरुआत हुई। यह ऐतिहासिक कदम 7 अक्टूबर 2024 को त्रिकोणी मैदान, नागपुर में उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में हुआ। यह पहल नागरिकों को मुफ्त और उच्च गुणवत्ता की स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए उठाई गई है और इसे नागपुर के विकास में मील का पत्थर माना जा रहा है।

आठ विशेष मोबाइल वैन को नागपुर शहर के लिए नियुक्त किया गया है, जिनमें आयुष्मान कार्ड बनाए जाएंगे। इन कार्डों के माध्यम से नागपुर के निवासी मुफ्त में स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। यह उपक्रम विशेष रूप से गरीब और वंचित तबकों के लिए एक वरदान साबित होगा, जिनके लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पाना मुश्किल होता है।

उद्घाटन के मौके पर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि "इस पहल से राज्य के नागरिकों को अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उनके दरवाजे पर उपलब्ध होंगी। यह योजना देश के सबसे बड़े स्वास्थ्य सुधार कार्यक्रमों में से एक है, और इसे नागपुर से आरंभ किया जाना गर्व की बात है।"

कार्यक्रम की जानकारी:

स्थल: त्रिकोणी मैदान, माननीय उपमुख्यमंत्री के बंगले के सामने, नागपुर

समय: सुबह 9:00 बजे

तारीख: 7 अक्टूबर 2024

इस उपक्रम के प्रमुख डॉ. ओमप्रकाश स. शेटे, प्रमुख, आयुष्मान भारत - मिशन महाराष्ट्र समिति, ने कहा, "यह कार्यक्रम नागपुर के नागरिकों के लिए एक बड़ा बदलाव लेकर आएगा। इस पहल से स्वास्थ्य सेवाओं को आमजन तक पहुँचाने का हमारा सपना साकार हो रहा है।"

उद्घाटन के दौरान देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को और भी प्रेरणादायक बना दिया। यह योजना नागपुर के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ते हुए गरीब और जरूरतमंदों के जीवन को बेहतर बनाने का वादा करती है।







नागपुर पुलिस थाने में जुआ और धूम्रपान का वीडियो वायरल, देशभर में आलोचना पुलिसकर्मियों की अवैध गतिविधियों पर उठे सवाल, जांच के आदेश



नागपुर : दिनेश मीरचंदानी 

(वायरल वीडियो)

नागपुर के एक पुलिस थाने में पुलिसकर्मियों का जुआ खेलते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसने देशभर में आलोचना को जन्म दिया है। वीडियो में पुलिस अधिकारी थाने के परिसर में जुआ और धूम्रपान करते हुए दिख रहे हैं, जिससे जनता में आक्रोश फैल गया है।

पुलिस आयुक्त ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। लोगों ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।