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सेंचुरी रेयॉन टैक्स विवाद: ₹11.80 करोड़ से ₹2.65 करोड़ तक कटौती, कमेटी रिपोर्ट पर बढ़ा सस्पेंस, ₹9.15 करोड़ के कथित लाभ पर उठे सवाल, महापौर से हस्तक्षेप की मांग तेज।


 


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका की आय का प्रमुख स्रोत हाउस टैक्स है। प्रशासन बकाया कर वसूली के लिए सख्ती भी दिखा रहा है और कई संपत्तियों पर सीलिंग की कार्रवाई भी की जा रही है। इसी बीच सेंचुरी रेयॉन कंपनी के टैक्स मामले को लेकर शहर में गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

शहर के सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और नागरिकों ने मांग की है कि सेंचुरी रेयॉन टैक्स मामले में गठित कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। साथ ही इस पूरे मामले में महापौर अश्विनी कमलेश निकम से हस्तक्षेप कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग तेज हो गई है।

₹11.80 करोड़ से ₹2.65 करोड़ — टैक्स में बड़ी कटौती पर विवाद

करीब सवा साल पहले उल्हासनगर बीजेपी जिला अध्यक्ष राजेश वढारिया ने उल्हासनगर महानगरपालिका के टैक्स विभाग पर गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत में कहा गया था कि सेंचुरी रेयॉन कंपनी को कथित तौर पर करोड़ों रुपये का लाभ पहुंचाया गया।

आरोपों के अनुसार:

पहले सेंचुरी रेयॉन कंपनी पर लगभग 11 करोड़ 80 लाख रुपये टैक्स बकाया बताया गया

बाद में पुनर्मूल्यांकन (री-असेसमेंट) के नाम पर नया बिल जारी किया गया

संशोधित बिल में टैक्स घटाकर करीब 2 करोड़ 65 लाख रुपये कर दिया गया

इस तरह कंपनी को लगभग 9 करोड़ 15 लाख रुपये का लाभ मिलने का आरोप लगाया गया

इस पूरे मामले को लेकर तत्कालीन आयुक्त को लिखित शिकायत दी गई थी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई थी।

जांच के लिए बनी कमेटी, लेकिन रिपोर्ट अब तक गोपनीय

शिकायत के बाद तत्कालीन आयुक्त अज़ीज़ शेख द्वारा मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की गई थी। बताया गया कि कमेटी ने संपत्ति के पुनर्मूल्यांकन के आधार पर टैक्स राशि में संशोधन किया।

टैक्स विभाग की अधिकारी नीलम कदम ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि सेंचुरी रेयॉन कंपनी ने टैक्स असेसमेंट में त्रुटि होने की शिकायत की थी।

उनके अनुसार:

कंपनी ने असेसमेंट गलत होने की बात रखी

प्रशासन ने जांच के लिए कमेटी गठित की

कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर टैक्स राशि में संशोधन किया गया

हालांकि, कमेटी की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं किए जाने से पूरे मामले में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

6 बड़े सवाल, जिन पर सबकी नजर

इस मामले में शहर के नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कई अहम सवाल उठाए हैं:

1. री-असेसमेंट में कुल कितने लाख स्क्वेयर फीट का अंतर निकाला गया?

2. री-असेसमेंट के बाद टैक्स राशि में कितना अंतर आया?

3. कंपनी का संशोधित असेसमेंट आधिकारिक रूप से लागू किया गया या नहीं?

4. टैक्स वर्तमान वित्त वर्ष से लागू किया गया या पिछली तारीख से?

5. सेंचुरी रेयॉन कंपनी की सेल्फ री-असेसमेंट रिपोर्ट क्या थी?

6. क्या इस मामले में न्यायालय में कोई याचिका दायर हुई थी? यदि हां, तो अदालत का निर्णय क्या रहा?

इन सवालों के जवाब अब तक सामने नहीं आए हैं, जिससे मामले को लेकर संदेह और गहराता जा रहा है।

नागरिकों की मांग — रिपोर्ट सार्वजनिक कर हो पारदर्शिता

शहर के नागरिकों का कहना है कि जब महानगरपालिका आम नागरिकों से टैक्स वसूली के लिए सख्त कार्रवाई कर रही है, तो बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों के मामलों में भी पारदर्शिता जरूरी है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग:

कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए

पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए

यदि किसी अधिकारी की भूमिका संदिग्ध हो तो कार्रवाई की जाए

महापौर से हस्तक्षेप की मांग तेज

इस पूरे मामले को लेकर अब महापौर अश्विनी कमलेश निकम से हस्तक्षेप की मांग तेज हो गई है। नागरिकों का कहना है कि रिपोर्ट सार्वजनिक होने से पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।

फिलहाल, सेंचुरी रेयॉन टैक्स मामले में गठित कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक होने का इंतजार किया जा रहा है और इस पर शहरवासियों की नजर बनी हुई है।























उल्हासनगर मनपा के कर विभाग पर गंभीर आरोप दलालों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत, ‘चेंज ऑफ नेम’ समेत कई कार्यों में भेदभाव के आरोप — आयुक्त के हस्तक्षेप की मांग तेज।


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर महानगर पालिका के कर विभाग में अनियमितताओं और पक्षपात के गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायतों के अनुसार, विभाग में कुछ पुराने कर्मचारियों और दलालों की कथित मिलीभगत से ‘चेंज ऑफ नेम’ सहित कई महत्वपूर्ण कार्यों में भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। इससे आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बताया जा रहा है कि साधारण नागरिकों को अपने काम के लिए महीनों तक कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जबकि चुनिंदा दलालों के माध्यम से आने वाले मामलों का निपटारा तेजी से किया जा रहा है। इस कथित व्यवस्था के कारण पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं और विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कर विभाग में प्रक्रिया स्पष्ट होने के बावजूद जानबूझकर फाइलें लंबित रखी जा रही हैं। कई आवेदकों ने आरोप लगाया है कि बिना दलालों की मदद के कार्य समय पर नहीं हो पा रहे हैं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर अविश्वास बढ़ रहा है।

इस पूरे मामले को लेकर नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने उल्हासनगर महानगर पालिका आयुक्त मनीष अव्हाले से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई, तो भ्रष्टाचार और पक्षपात की यह प्रवृत्ति और बढ़ सकती है।

मामले ने तूल पकड़ने के बाद अब आयुक्त स्तर पर कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। नागरिकों ने मांग की है कि विभागीय कार्यप्रणाली की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और आम जनता के लिए पारदर्शी तथा समयबद्ध व्यवस्था लागू की जाए।

इस पूरे प्रकरण में कुछ पुराने अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत है जिनके नाम आनेवाले समय में सामने आने की संभावनाएं है, जो कई वर्षों से इसी विभाग में ढेरा जमाकर बैठे हैं। 

⚠️ फिलहाल, उल्हासनगर महानगर पालिका प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।














विवाहित महिला के साथ सहमति से बने संबंध हर बार रेप नहीं — Supreme Court of India का अहम फैसला।


नई दिल्ली | दिनेश मिरचंदानी

देश में शादी के वादे पर बने शारीरिक संबंधों को लेकर चल रही कानूनी बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और मार्गदर्शक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि विवाहित महिला के साथ सहमति से बने शारीरिक संबंधों को हर परिस्थिति में बलात्कार नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब महिला पहले से शादीशुदा हो और मामले की परिस्थितियां सहमति की ओर इशारा करती हों।

इस महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि शादी का वादा हर स्थिति में धोखा या बलात्कार का आधार नहीं बनता और ऐसे मामलों में प्रत्येक परिस्थिति का अलग-अलग मूल्यांकन आवश्यक है।

क्या था पूरा मामला?

मामले में शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने उससे शादी का वादा किया और इसी भरोसे पर दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने। बाद में आरोपी ने शादी से इनकार कर दिया, जिसके बाद महिला ने आरोपी के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कराया।

हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य सामने आया कि महिला पहले से विवाहित थी। इस महत्वपूर्ण तथ्य को ध्यान में रखते हुए अदालत ने मामले की परिस्थितियों का विस्तृत परीक्षण किया और पाया कि:

संबंध आपसी सहमति से बने थे

शादी का वादा परिस्थितियों में स्वतः धोखा साबित नहीं होता

महिला का पहले से विवाहित होना मामले को अलग कानूनी दृष्टिकोण देता है

इन आधारों पर सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार का मामला कायम रखने से इनकार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कई महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु स्पष्ट किए:

शादी का वादा हर स्थिति में धोखा नहीं माना जा सकता

सहमति से बने संबंधों को सीधे बलात्कार नहीं माना जा सकता

विवाहित महिला के मामले में शादी के वादे का दावा स्वतः वैध नहीं होता

हर मामले का निर्णय उसके तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर ही किया जाएगा

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि रेप कानून का दुरुपयोग रोकना भी न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी है, लेकिन साथ ही वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिलना भी उतना ही आवश्यक है।

कानूनी बहस को मिली नई दिशा

इस फैसले के बाद कई महत्वपूर्ण कानूनी सवाल फिर चर्चा में आ गए हैं:

सहमति और धोखे के बीच की सीमा क्या है?

शादी के वादे पर बने संबंधों की कानूनी स्थिति क्या है?

विवाहित महिला के मामलों में रेप कानून की व्याख्या कैसे होगी?

क्या ऐसे मामलों में आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए या नहीं?

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों की सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकता है।

क्यों अहम है यह फैसला?

यह निर्णय कई कारणों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है:

✔ सहमति और धोखे की कानूनी परिभाषा को स्पष्ट करता है

✔ शादी के वादे पर दर्ज मामलों के लिए मार्गदर्शन देता है

✔ विवाहित महिला से जुड़े मामलों में नई कानूनी दिशा प्रदान करता है

✔ अदालतों को परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेने पर जोर देता है। 

देशभर में शुरू हुई नई बहस

इस फैसले के बाद सहमति, व्यक्तिगत संबंध और रेप कानून की व्याख्या को लेकर देशभर में नई कानूनी और सामाजिक बहस शुरू हो गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला झूठे मामलों को रोकने और वास्तविक मामलों में न्याय सुनिश्चित करने — दोनों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

⚖️ यह फैसला आने वाले समय में शादी के वादे पर दर्ज होने वाले मामलों पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।














हाई-प्रोफाइल फर्जीवाड़ा: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का सलाहकार बनकर मंत्रालय में घूमता रहा युवक गिरफ्तार, 7 लोगों का रैकेट उजागर।


मुंबई/संगमनेर: दिनेश मिरचंदानी

महाराष्ट्र की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था को हिला देने वाला एक बेहद सनसनीखेज और हाई-प्रोफाइल फर्जीवाड़ा सामने आया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कथित सलाहकार बनकर मंत्रालय, विधानमंडल और अन्य संवेदनशील सरकारी परिसरों में बेखौफ आवाजाही करने वाले संगमनेर के एक युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान दत्तात्रय गुंजाळ के रूप में हुई है। इस मामले में पुलिस ने कुल 7 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिनमें से अब तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 2 आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।

मुख्यमंत्री का नाम लेकर बनाता था दबाव

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी दत्तात्रय गुंजाळ अहमदनगर जिले के संगमनेर का निवासी है। वह खुद को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का सलाहकार बताकर सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों पर प्रभाव जमाने की कोशिश करता था।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े होने का दावा कर कई सरकारी विभागों में फोन करता था, अधिकारियों पर दबाव बनाता था और कुछ मामलों में निजी लाभ लेने की भी कोशिश कर रहा था।

पुलिस को ऐसे कई मामलों के संकेत मिले हैं, जिनमें आरोपी ने अपने कथित प्रभाव का इस्तेमाल कर लोगों को धमकाने, काम निकलवाने और आर्थिक लाभ लेने की कोशिश की।

मंत्रालय और विधानमंडल में संदिग्ध आवाजाही से सुरक्षा पर सवाल

इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आरोपी मंत्रालय और विधानमंडल जैसे अति-संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाले परिसरों में फर्जी पहचान के आधार पर लगातार आवाजाही कर रहा था।

इस खुलासे के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी को प्रवेश कैसे मिला, किसने मदद की और क्या सुरक्षा प्रक्रिया में कहीं चूक हुई।

सूत्रों के अनुसार, आरोपी कई बार सरकारी बैठकों के आसपास भी देखा गया था, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

7 लोगों का संगठित रैकेट सामने आया

जांच के दौरान पुलिस को इस पूरे मामले में एक संगठित नेटवर्क के संकेत मिले हैं। आरोपी दत्तात्रय गुंजाळ अकेले नहीं था, बल्कि उसके साथ एक पूरा समूह सक्रिय था।

पुलिस ने इस मामले में कुल 7 लोगों की संलिप्तता सामने आने की पुष्टि की है। इनमें से 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि 2 अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस रैकेट का नेटवर्क कितना बड़ा है और क्या इसमें और लोग भी शामिल हैं।

किन-किन लोगों को ठगा, जांच तेज

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने मुख्यमंत्री के नाम का इस्तेमाल कर किन-किन लोगों से संपर्क किया, किन लोगों को ठगा और किन सरकारी विभागों में प्रभाव जमाने की कोशिश की।

जांच एजेंसियां आरोपी के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया और दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही इस हाई-प्रोफाइल फर्जीवाड़े से जुड़े और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

प्रशासन अलर्ट, सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा

इस घटना के सामने आने के बाद मंत्रालय और विधानमंडल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं और फर्जी पहचान के मामलों पर विशेष नजर रखने को कहा गया है।

पुलिस का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और फरार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

इस हाई-प्रोफाइल फर्जीवाड़े ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक प्रणाली और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, जबकि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।














महावीर जयंती 2026 पर समाज सेवा को सम्मान नरेश सुराना को “महावीर पुरस्कार 2026” से किया गया सम्मानित, जरूरतमंद मरीजों की सहायता कार्यों की हुई सराहना।


 

शिरडी | दिनेश मिरचंदानी

महावीर जयंती 2026 के पावन अवसर पर आयोजित भव्य एवं गरिमामय समारोह में समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए समाजसेवी नरेश सुराना को प्रतिष्ठित “महावीर पुरस्कार 2026” से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री सहायता निधि के माध्यम से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे एवं आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को निरंतर सहायता उपलब्ध कराने के उनके उल्लेखनीय कार्यों की इस अवसर पर विशेष सराहना की गई।

कार्यक्रम में उपस्थित जैन समाज के गणमान्य नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने नरेश सुराना द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।

सम्मान प्राप्त करने के बाद अपने संबोधन में नरेश सुराना ने इसे अपने जीवन का अत्यंत गौरवपूर्ण और भावनात्मक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि समाज सेवा का कार्य बिना किसी अपेक्षा के किया जाता है, लेकिन जब समाज स्वयं इस कार्य को पहचान देता है और सम्मानित करता है, तो यह सम्मान और अधिक प्रेरणा देने वाला बन जाता है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सहायता निधि के माध्यम से जरूरतमंद एवं गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का कार्य लगातार जारी है। जैन समाज द्वारा इस कार्य की सराहना किए जाने से उनके उत्साह में और वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि समाज से मिलने वाला यह सम्मान न केवल मनोबल बढ़ाता है, बल्कि सेवा कार्यों की जिम्मेदारी भी कई गुना बढ़ा देता है।

कार्यक्रम के दौरान नरेश सुराना ने महावीर जयंती समिति एवं संघपति पुखराजजी लोढ़ा का विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज द्वारा दिया गया यह सम्मान उन्हें भविष्य में और अधिक सेवा कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा तथा वे जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने के प्रयास और तेज करेंगे।

उन्होंने यह भी बताया कि समाज सेवा के इस कार्य को आगे बढ़ाने की प्रेरणा उन्हें महाराष्ट्र के माननीय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन से मिलती है। उनके सहयोग एवं प्रेरणा से जरूरतमंद मरीजों तक सहायता पहुंचाने का कार्य निरंतर जारी है और आने वाले समय में इसे और व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।

नरेश सुराना ने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी वे इसी प्रकार जरूरतमंद मरीजों की सहायता के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करते रहेंगे तथा समाज सेवा को अपने जीवन का प्रमुख उद्देश्य बनाए रखेंगे।

महावीर जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में जैन समाज के अनेक गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, व्यापारी वर्ग के प्रतिनिधि तथा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान समाज सेवा, मानवता और सहयोग की भावना को आगे बढ़ाने का सामूहिक संकल्प भी लिया गया।

यह सम्मान न केवल नरेश सुराना के कार्यों की सराहना है, बल्कि समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य कर रहे सभी लोगों के लिए एक प्रेरणास्रोत भी माना जा रहा है।














सोशल मीडिया यूजर्स को बड़ी राहत: पोस्ट पर कार्रवाई नहीं, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला।


न्यू दिल्ली: दिनेश मिरचंदानी

देशभर के सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के लिए राहत भरी और बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि केवल सोशल मीडिया पर पोस्ट करने या विचार व्यक्त करने के आधार पर किसी नागरिक के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान द्वारा दिया गया मौलिक अधिकार है और इसे मनमाने तरीके से सीमित नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को सोशल मीडिया युग में नागरिक अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक और लोकतंत्र को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।

धारा 66A पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने आईटी एक्ट की धारा 66A को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने वाला बताया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह धारा नागरिकों के मौलिक अधिकारों के खिलाफ है और इसका उपयोग सोशल मीडिया पर राय रखने वाले लोगों को डराने के लिए नहीं किया जा सकता।

गौरतलब है कि पहले इस धारा के तहत पुलिस को सोशल मीडिया पोस्ट, कमेंट या मैसेज के आधार पर लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार मिलता था। इसके कारण कई मामलों में नागरिकों को गिरफ्तार भी किया गया था, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल उठे थे।

अब सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद केवल सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई संभव नहीं होगी।

सोशल मीडिया यूजर्स को बड़ी राहत

इस फैसले से Facebook, Twitter, LinkedIn और WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म पर सक्रिय लाखों उपयोगकर्ताओं को बड़ी राहत मिली है।

अब नागरिक बिना डर अपनी राय रख सकेंगे और सरकार, प्रशासन या किसी भी सार्वजनिक मुद्दे पर खुलकर अपनी बात कह सकेंगे, बशर्ते वह कानून के अन्य प्रावधानों का उल्लंघन न करें।

पहले दर्ज हुए थे कई मामले

पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर कई लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे। कई नागरिकों को केवल टिप्पणी या पोस्ट के आधार पर पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा था।

इस फैसले के बाद ऐसे मामलों में पुलिस को पहले ठोस कानूनी आधार साबित करना होगा, तभी कार्रवाई संभव होगी।

विधि विशेषज्ञों ने बताया ऐतिहासिक फैसला

विधि आयोग के सदस्य एडवोकेट विजय सावंत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मजबूत करेगा और लोकतंत्र को और सशक्त बनाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया आज लोकतंत्र का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है और इस मंच पर नागरिकों की आवाज को दबाना संविधान की भावना के खिलाफ है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें

सोशल मीडिया पर विचार रखना अपराध नहीं

केवल पोस्ट के आधार पर गिरफ्तारी नहीं होगी

नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुरक्षित

पुलिस को कार्रवाई से पहले ठोस कानूनी आधार आवश्यक

लोकतांत्रिक अधिकारों को प्राथमिकता दी जाएगी

देशभर में फैसले की चर्चा

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद देशभर में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। कानूनी विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक इस निर्णय को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए बड़ी जीत बता रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए इस तरह के फैसले बेहद महत्वपूर्ण हैं। इससे नागरिकों को अपनी आवाज उठाने का अधिकार मिलेगा और लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा।














अंधेरी में ड्रग्स के खिलाफ विधायक मुरजी पटेल का बड़ा ऐलान। सूचना देने वालों को ₹10,000 इनाम, समीर वानखेड़े की NCB में वापसी की मांग।


मुंबई: दिनेश मिरचंदानी

अंधेरी विधानसभा क्षेत्र में बढ़ते ड्रग्स कारोबार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए विधायक मुरजी पटेल ने बड़ा अभियान शुरू किया है। उन्होंने ड्रग्स माफिया के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाने के साथ ही ड्रग्स कारोबार की सूचना देने वाले नागरिकों को ₹10,000 नकद इनाम देने की घोषणा की है।

विधायक मुरजी पटेल ने कहा कि अंधेरी क्षेत्र में युवाओं को ड्रग्स की लत से बचाने के लिए अब सख्त और सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि यदि उनके आसपास किसी भी प्रकार का ड्रग्स कारोबार, संदिग्ध गतिविधि या नशे से जुड़ा नेटवर्क दिखाई देता है, तो तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचित करें।

सूचना देने वालों की पहचान रहेगी गोपनीय

विधायक मुरजी पटेल ने स्पष्ट किया कि ड्रग्स कारोबार की जानकारी देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। विश्वसनीय सूचना देने वाले नागरिकों को ₹10,000 की नकद राशि देकर सम्मानित भी किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ यह लड़ाई केवल प्रशासन की नहीं बल्कि पूरे समाज की है। नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

युवाओं को बचाने के लिए शुरू किया अभियान

विधायक पटेल ने कहा कि ड्रग्स एक ऐसा जहर है जो धीरे-धीरे युवाओं को बर्बाद कर रहा है। इससे न केवल युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ता है, बल्कि पूरे परिवार और समाज पर भी इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है।

उन्होंने कहा कि अंधेरी को ड्रग्स-मुक्त क्षेत्र बनाने के लिए पुलिस, प्रशासन और जनता के संयुक्त प्रयास जरूरी हैं और इसी उद्देश्य से यह अभियान शुरू किया गया है।

समीर वानखेड़े की NCB में वापसी की मांग

ड्रग्स विरोधी कार्रवाई को और मजबूत करने के लिए विधायक मुरजी पटेल ने अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति की भी मांग की। उन्होंने राज्य सरकार से समीर वानखेड़े को दोबारा नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) में नियुक्त करने की मांग उठाने की बात कही।

विधायक पटेल ने कहा कि मुंबई में बढ़ते ड्रग्स नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई के लिए सख्त और अनुभवी अधिकारियों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समीर वानखेड़े ने पहले भी ड्रग्स के खिलाफ कई बड़ी कार्रवाइयाँ की हैं और उनकी वापसी से ड्रग्स माफिया पर लगाम लगाने में मदद मिल सकती है।

मुंबई को ड्रग्स मुक्त बनाने की अपील

विधायक पटेल ने कहा कि मुंबई को ड्रग्स मुक्त बनाने के लिए पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा। ड्रग्स माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई और निगरानी बढ़ाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा और अंधेरी को ड्रग्स मुक्त बनाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।