उल्हासनगर: दिनेश मीरचदानी
उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) में प्रशासनिक पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर में चर्चा का विषय बना एक दावा यह है कि भ्रष्टाचार निरोधक विभाग (ACB) द्वारा विभिन्न मामलों में रंगे हाथों पकड़े गए लगभग 23 कर्मचारी और अधिकारी आज भी महानगरपालिका में कार्यरत हैं। इस मुद्दे ने प्रशासनिक जवाबदेही, अनुशासनात्मक कार्रवाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकारी नीति की प्रभावशीलता पर बहस छेड़ दी है।
स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी को ACB ने रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है, तो ऐसे मामलों में विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई समयबद्ध तरीके से होना आवश्यक है। लेकिन आरोप है कि कई मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया लंबित है, जिसके कारण संबंधित अधिकारी-कर्मचारी निर्भय होकर अपने पदों पर कार्य कर रहे हैं।
नागरिकों का सवाल: भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ सिर्फ नारा?
शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि राज्य सरकार और प्रशासन भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति की बात करते हैं, लेकिन यदि रिश्वतखोरी के मामलों में पकड़े गए कर्मचारी वर्षों तक सेवा में बने रहते हैं, तो इससे आम जनता के बीच गलत संदेश जाता है।
नागरिकों का सवाल है कि—
ACB द्वारा पकड़े गए कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच की वर्तमान स्थिति क्या है?
कितने कर्मचारियों को निलंबित किया गया?
कितनों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हुए?
कितनों पर अंतिम कार्रवाई हुई?
और कितने कर्मचारी आज भी संवेदनशील पदों पर कार्यरत हैं?
प्रशासन की भूमिका पर उठे प्रश्न
इस पूरे मामले में मनपा प्रशासन की भूमिका भी चर्चा के केंद्र में है। आलोचकों का आरोप है कि भ्रष्टाचार के मामलों में कठोर कार्रवाई न होने से कर्मचारियों में जवाबदेही की भावना कमजोर पड़ती है। वहीं प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ अंतिम कार्रवाई कानूनन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव होती है और प्रत्येक मामले को नियमों के अनुसार देखा जाता है।
सामाजिक संगठनों ने मांगी पारदर्शिता
कई सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि मनपा प्रशासन ACB मामलों से जुड़े सभी कर्मचारियों की स्थिति सार्वजनिक करे। उनका कहना है कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि भ्रष्टाचार के आरोपों में पकड़े गए अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई और उनकी वर्तमान नियुक्ति की स्थिति क्या है।
जनता के बीच चर्चा का विषय बना मामला
शहर में यह मुद्दा सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चाओं का विषय बना हुआ है। नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि यदि भ्रष्टाचार के मामलों में पकड़े गए कर्मचारी बिना किसी कठोर कार्रवाई के सेवा में बने रहते हैं, तो भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का लक्ष्य कैसे हासिल होगा?
अब निगाहें उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन और आयुक्त मनीषा आव्हाले पर टिकी हैं। जनता यह जानना चाहती है कि ACB के मामलों में फंसे कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है और भविष्य में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन क्या ठोस कदम उठाने वाला है।
(नोट: यह रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से प्रसारित दावों और उठाए गए सवालों पर आधारित है। संबंधित कर्मचारियों अथवा प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

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