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भाजपा युवा मोर्चा मुंबई सचिव प्रणव सिंह ठाकुर को मिली बड़ी जिम्मेदारी, भाजपा युवा मोर्चा मुंबई के सोशल मीडिया प्रभारी नियुक्त।


 

मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

भारतीय जनता युवा मोर्चा, मुंबई में संगठनात्मक स्तर पर एक महत्वपूर्ण नियुक्ति की गई है। युवा मोर्चा मुंबई के अध्यक्ष दीपक सिंह ने प्रणव सिंह ठाकुर को भाजपा युवा मोर्चा, मुंबई के सोशल मीडिया प्रभारी पद पर नियुक्त किया है।

इस संबंध में 9 सितंबर 2026 को जारी नियुक्ति पत्र में दीपक सिंह ने प्रणव सिंह ठाकुर को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे संगठन द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी का सफलतापूर्वक निर्वहन करेंगे।

नियुक्ति पत्र में कहा गया है कि प्रणव सिंह ठाकुर को भाजपा युवा मोर्चा, मुंबई के सोशल मीडिया प्रभारी पद की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। साथ ही, उनके आगामी कार्यकाल के लिए हार्दिक शुभकामनाएं भी दी गई हैं।

सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए राजनीतिक संगठनों में डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में युवा मोर्चा के सोशल मीडिया विभाग की जिम्मेदारी संगठन की गतिविधियों, कार्यक्रमों और जनसंपर्क से जुड़ी जानकारी को डिजिटल माध्यमों तक पहुंचाने में अहम मानी जाती है।

यह नियुक्ति पत्र भारतीय जनता युवा मोर्चा, मुंबई के अध्यक्ष दीपक सिंह के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।


















‘एसएमएस इको क्लीन’ परियोजना पर बढ़ा विवाद, अनिल भोईर ने मांगी कानूनी और पर्यावरणीय पुनर्तपासणी।


अंबरनाथ: दिनेश मीरचंदानी

अंबरनाथ शहर में नागरिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को लेकर नगरपालिका की विशेष सभा आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न नागरिक एवं प्रशासनिक विषयों पर चर्चा हुई, लेकिन आनंदनगर औद्योगिक क्षेत्र में प्रस्तावित ‘एसएमएस इको क्लीन’ जैव-चिकित्सीय कचरा प्रक्रिया परियोजना को लेकर अपेक्षित चर्चा न होने का मुद्दा अब राजनीतिक और नागरिक स्तर पर उठने लगा है।

ठाकरे गुट के कल्याण उपजिलाप्रमुख एवं अंबरनाथ बचाव कृति समिति के अध्यक्ष अनिल भोईर ने इस मामले में महायुति से जुड़े स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए परियोजना के संबंध में सार्वजनिक रूप से स्पष्ट भूमिका सामने रखने की मांग की है।

विशेष सभा के एजेंडे में परियोजना क्यों नहीं?

अनिल भोईर के अनुसार, नगरपालिका की विशेष सभा में स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई, लेकिन नागरिकों के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण से सीधे जुड़े प्रस्तावित जैव-चिकित्सीय कचरा प्रक्रिया प्रकल्प को बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं किया गया।

भोईर का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि शहर के कचरा प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर अध्ययन एवं प्रशिक्षण दौरों में हिस्सा लेते हैं, तो ऐसे में प्रस्तावित परियोजना के संभावित प्रभावों पर भी सार्वजनिक और तथ्यात्मक चर्चा होनी चाहिए।

‘अध्ययन दौरा’ परियोजना स्थल से शुरू करने की मांग

परियोजना को लेकर वास्तविक स्थिति समझने के लिए जनप्रतिनिधियों द्वारा संबंधित स्थल का प्रत्यक्ष निरीक्षण किए जाने की मांग भी सामने आई है।

भोईर ने कहा कि यदि परियोजना के संबंध में अध्ययन किया जाना है, तो सबसे पहले मानसुदेवी-गोवड़ी परिसर स्थित प्रस्तावित ‘एसएमएस इको क्लीन’ परियोजना स्थल का दौरा कर वहां की मौजूदा परिस्थितियों का जायजा लिया जाना चाहिए।

उनके मुताबिक, परियोजना से स्थानीय क्षेत्र में पर्यावरण, यातायात, कचरा प्रबंधन और नागरिक स्वास्थ्य से जुड़े संभावित प्रभावों का स्वतंत्र रूप से आकलन किया जाना आवश्यक है।

कानूनी और पर्यावरणीय पहलुओं की दोबारा जांच की मांग

अनिल भोईर ने परियोजना की कानूनी, पर्यावरणीय और प्रशासनिक प्रक्रिया की पुनर्तपासणी करने की मांग की है। उनका कहना है कि परियोजना से संबंधित सभी आवश्यक अनुमतियों, पर्यावरणीय मानकों और नागरिक हितों से जुड़े पहलुओं की पारदर्शी तरीके से जांच होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सत्ता के विभिन्न स्तरों पर महायुति से जुड़े जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के बावजूद इस संवेदनशील विषय पर स्पष्टता क्यों नहीं सामने आ रही है।

नागरिकों की शंकाओं का समाधान जरूरी

परियोजना को लेकर स्थानीय नागरिकों में यदि किसी प्रकार की आशंका या चिंता है, तो उसका समाधान तथ्यों और अधिकृत जानकारी के आधार पर किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य एवं पर्यावरण से जुड़े विषयों पर निर्णय लेते समय विशेषज्ञों की राय, संबंधित विभागों की रिपोर्ट और लागू नियमों का भी संज्ञान लिया जाना जरूरी है।

भोईर ने मांग की है कि परियोजना को लेकर नागरिकों के सवालों का स्पष्ट जवाब प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों की ओर से दिया जाए।

आंदोलन की चेतावनी, संघर्ष जारी रखने का संकेत

अनिल भोईर ने परियोजना के खिलाफ नागरिकों के हित में संघर्ष जारी रखने का संकेत दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि नागरिकों की चिंताओं का समाधान नहीं होता और परियोजना के पर्यावरणीय एवं स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं पर पर्याप्त स्पष्टता नहीं मिलती है, तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है।

अब जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर नजर

जैव-चिकित्सीय कचरा प्रक्रिया परियोजना को लेकर उठे सवालों के बाद अब स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। आने वाली नगरपालिका बैठकों में क्या इस परियोजना पर विस्तृत चर्चा होती है, क्या परियोजना स्थल का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया जाता है और क्या इसके कानूनी एवं पर्यावरणीय पहलुओं की स्वतंत्र समीक्षा होगी—इन सवालों पर अंबरनाथ के नागरिकों की नजर बनी हुई है।

फिलहाल, ‘एसएमएस इको क्लीन’ परियोजना को लेकर उठी मांगों ने अंबरनाथ में नागरिक स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और जैव-चिकित्सीय कचरा प्रबंधन के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।





















‘पहले कानून, फिर प्रक्रिया’—महापौर अश्विनी निकम ने 7 मनोनीत सदस्यों के चुनाव पर लगाया विराम।


 


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका में 7 मनोनीत (नामनिर्देशित) सदस्यों के चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। महापौर अधिवक्ता अश्विनी कमलेश निकम ने मनोनीत सदस्यों के फॉर्म भरने सहित पूरी चुनाव प्रक्रिया को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया है।

महापौर द्वारा 4 सितंबर 2026 को आयुक्त/महापालिका सचिव को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि 31 अगस्त 2026 को विशेष महासभा की सूचना जारी कर 7 मनोनीत सदस्यों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके तहत 7 सितंबर को नामनिर्देशन फॉर्म भरने तथा 11 सितंबर 2026 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने का कार्यक्रम निर्धारित किया गया था।

हालांकि, इस मामले से संबंधित न्यायालयीन संदर्भ सामने आने के बाद महापौर ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले पूरे मामले में कानूनी स्थिति स्पष्ट करने और शासन से आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त करने की आवश्यकता व्यक्त की है।

‘न्यायालयीन मामला लंबित, इसलिए जल्दबाजी उचित नहीं’

अपने पत्र में महापौर निकम ने उल्लेख किया है कि उन्हें 3 सितंबर को अधिवक्ता रामचंद्र मंदाडकर तथा 4 सितंबर को अधिवक्ता विनोद वी. पाटिल द्वारा संबंधित पत्रों के माध्यम से मामले की न्यायालयीन स्थिति से अवगत कराया गया है।

महापौर ने कहा कि जब मामला न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है, ऐसे में चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने अथवा नहीं बढ़ाने के संबंध में शासन से स्पष्ट निर्देश प्राप्त करना आवश्यक है। इसी कारण उन्होंने 31 अगस्त को बुलाई गई विशेष महासभा के आधार पर शुरू की गई आगे की चुनाव प्रक्रिया को फिलहाल रोकने का निर्णय लिया है।

उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिया है कि संबंधित विषय पर सक्षम स्तर से राय एवं अभिप्राय प्राप्त होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया लागू की जाए। तब तक मनोनीत सदस्यों के चुनाव से संबंधित पूरी प्रक्रिया स्थगित रहेगी।

कानून और संवैधानिक व्यवस्था को प्राथमिकता

महापौर अधिवक्ता अश्विनी कमलेश निकम के इस निर्णय को महानगरपालिका की प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियों के बीच महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उनके निर्णय से यह संदेश गया है कि किसी भी संवेदनशील चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले कानूनी एवं संवैधानिक स्थिति को स्पष्ट करना जरूरी है।

उनके समर्थकों का कहना है कि महापौर ने इस मामले में जल्दबाजी करने के बजाय न्यायालयीन स्थिति और शासन के मार्गदर्शन को प्राथमिकता देकर कानून की मर्यादा तथा संवैधानिक प्रक्रिया का सम्मान किया है।

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब उल्हासनगर महानगरपालिका में मनोनीत सदस्यों की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज थी। अब शासन से मिलने वाले मार्गदर्शन और न्यायालयीन प्रक्रिया के अगले घटनाक्रम पर सभी की नजरें रहेंगी।

‘संविधान और कानून सर्वोपरि’ का संदेश

महापौर अधिवक्ता अश्विनी कमलेश निकम के इस फैसले को उनके समर्थकों द्वारा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के संविधानवादी विचारों के प्रति सम्मान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून की सर्वोच्चता के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही, उनके समर्थकों का कहना है कि वे छत्रपति शिवाजी महाराज के न्याय, प्रशासन और जनहित के आदर्शों को भी महत्व देती हैं।

हालांकि, इस निर्णय का अंतिम प्रभाव शासन के निर्देश और न्यायालयीन प्रक्रिया के आगे के परिणाम पर निर्भर करेगा। फिलहाल उल्हासनगर महानगरपालिका के 7 मनोनीत सदस्यों के चुनाव की पूरी प्रक्रिया अनिश्चित काल के लिए रोक दी गई है।


















टी.ओ.के./शिंदे गुट में मनोनीत नगरसेवक पद को लेकर खींचतान, संतोष पांडे के दावे की अग्निपरीक्षा।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

मनोनीत नगरसेवक पदों के चयन को लेकर उल्हासनगर की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। भाजपा के साथ-साथ टीम ओमी कालानी (टी.ओ.के.) और शिवसेना शिंदे गुट के हिस्से में आने वाले मनोनीत नगरसेवक पद को लेकर भी राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। खास तौर पर कालानी परिवार के साथ लंबे समय से सक्रिय रूप से जुड़े संतोष पांडे के नाम को लेकर राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा है।

संतोष पांडे को उत्तर भारतीय समाज की आवाज के रूप में देखा जाता है और बताया जाता है कि वह पिछले करीब 17 वर्षों से कालानी परिवार और संगठन के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी वर्षों की निष्ठा, संगठन के प्रति समर्पण और राजनीतिक योगदान को इस बार मनोनीत नगरसेवक पद के रूप में सम्मान मिलेगा या फिर बदलते राजनीतिक समीकरण किसी दूसरे नाम के पक्ष में जाएंगे।

चार-चार पदों के समीकरण से बदली पूरी तस्वीर

बताया जाता है कि शुरुआत में भाजपा और शिवसेना शिंदे गुट के हिस्से में चार-चार मनोनीत नगरसेवक पद जाने की संभावना को लेकर राजनीतिक गणित तैयार किया जा रहा था। लेकिन शिवसेना शिंदे गुट से जुड़े पूजा भोईर और विक्की लबाना के जाति प्रमाणपत्र से संबंधित मामले में उनके पद निरस्त होने के बाद मनोनीत नगरसेवक पदों का पूरा समीकरण बदल गया है।

इसी बदले हुए राजनीतिक गणित के बीच अब विभिन्न नामों को लेकर अंदरखाने चर्चा तेज हो गई है।

 पूर्व महापौर पंचम कालानी ओर संतोष पांडे के नाम चर्चा में?

सूत्रों के हवाले से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी सामने आ रही है कि संतोष पांडे या पूर्व महापौर पंचम कालानी सूत्रों के अनुसार मनोनीत नगरसेवक बनाने की पंचम कालानी की तैयारी रहा है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और अंतिम निर्णय सामने आना बाकी है।

यदि वास्तव में ऐसा निर्णय लिया जाता है, तो लंबे समय से संगठन के साथ जुड़े कार्यकर्ताओं और कालानी समर्थक खेमे के भीतर राजनीतिक असंतोष पैदा होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। खासकर 17 वर्षों से संगठन के लिए सक्रिय रहे संतोष पांडे के समर्थक इस निर्णय को किस रूप में लेते हैं, यह भी आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगा।

भाजपा में भी दावेदारों की लंबी कतार

दूसरी ओर भाजपा के कोटे से मनोनीत नगरसेवक पद के लिए भी कई नामों को लेकर जोरदार लॉबिंग की चर्चा है। सूत्रों के अनुसार धनंजय बोड़ारे, हेमा पिंजानी, मनु खेमचंदानी और प्रदीप रामचंदानी और प्रमुख दावेदारों में बताए जा रहे हैं।

इन प्रमुख नामों के अलावा करीब 20 भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी मनोनीत नगरसेवक पद के लिए अपनी इच्छा शीर्ष नेतृत्व के समक्ष व्यक्त की है। ऐसे में भाजपा नेतृत्व के सामने भी अंतिम नाम तय करना आसान नहीं माना जा रहा है।

11 सितंबर पर टिकी सभी की निगाहें

अब इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण दिन 11 सितंबर माना जा रहा है। इसी दिन होने वाले चयन से स्पष्ट होगा कि भाजपा अपने संभावित दावेदारों में से किसे अवसर देती है और टी.ओ.के./शिवसेना शिंदे गुट संतोष पांडे की करीब 17 वर्षों की राजनीतिक निष्ठा एवं संगठनात्मक योगदान को सम्मान देता है या फिर बदलते राजनीतिक समीकरणों के चलते किसी अन्य नाम पर मुहर लगती है।

मनोनीत नगरसेवक पद को लेकर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या इस बार निष्ठा और संगठनात्मक योगदान की जीत होगी या राजनीतिक समीकरण भारी पड़ेंगे?

11 सितंबर को होने वाला फैसला न केवल नए मनोनीत नगरसेवकों के नाम तय करेगा, बल्कि स्थानीय राजनीति में आने वाले दिनों के नए समीकरणों के संकेत भी दे सकता है।



















2029 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर उल्हासनगर में सियासी हलचल तेज, शिवसेना से कमलेश निकम के नाम की चर्चा। BJP-शिवसेना का गठबंधन नहीं हुआ तो बदल सकते हैं समीकरण, डॉ. श्रीकांत शिंदे की नजरों में कमलेश निकम का बढ़ता कद।

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र में 2029 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से राजनीतिक चर्चाएं तेज होने लगी हैं। खासतौर पर उल्हासनगर विधानसभा क्षेत्र में शिवसेना की ओर से संभावित उम्मीदवारों को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, यदि 2029 के विधानसभा चुनाव में BJP और शिवसेना के बीच गठबंधन नहीं होता है और दोनों दल अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरते हैं, तो शिवसेना की ओर से उल्हासनगर में एक नए चेहरे को मौका दिए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

सूत्रों का दावा है कि कल्याण लोकसभा क्षेत्र के शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे की नजरों में उल्हासनगर के शिवसेना नेता कमलेश निकम लगातार अपनी मजबूत जगह बना रहे हैं। निकम पिछले कुछ समय से उल्हासनगर में संगठन को मजबूत करने और शिवसैनिकों के साथ बेहतर समन्वय बनाने के लिए सक्रिय नजर आ रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर शिवसेना के कार्यक्रमों, संगठनात्मक गतिविधियों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संपर्क के चलते कमलेश निकम की सक्रियता चर्चा में है। बताया जा रहा है कि वे पार्टी के छोटे-बड़े कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी के साथ-साथ शिवसैनिकों के बीच अपना तालमेल और जनसंपर्क भी लगातार बढ़ा रहे हैं।

शिवसैनिकों में भी उत्साह का माहौल

कमलेश निकम की बढ़ती सक्रियता का असर स्थानीय शिवसैनिकों के बीच भी दिखाई देने की बात कही जा रही है। पार्टी संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं में उनके नाम को लेकर सकारात्मक माहौल बनने की चर्चा है। ऐसे में यदि आगामी विधानसभा चुनाव में शिवसेना और BJP अलग-अलग चुनाव लड़ती हैं, तो उल्हासनगर सीट पर पार्टी किस चेहरे पर भरोसा जताएगी, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

टिकट को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं

हालांकि, 2029 के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों को लेकर अभी काफी समय बाकी है और शिवसेना की ओर से कमलेश निकम के नाम की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक, पार्टी संगठन में उनकी बढ़ती सक्रियता और डॉ. श्रीकांत शिंदे के साथ बेहतर समन्वय को देखते हुए उनका नाम संभावित दावेदारों में चर्चा में आ सकता है।

आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति और महायुति के समीकरण किस दिशा में जाते हैं, यह तय करेगा कि 2029 में उल्हासनगर विधानसभा सीट पर मुकाबला किस तरह का होगा। फिलहाल कमलेश निकम के संभावित विधानसभा टिकट को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।


















उज्ज्वल निकम बनेंगे केंद्रीय मंत्री? अमित शाह से मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में अटकलें तेज।

नई दिल्ली: दिनेश मीरचंदानी

केंद्रीय मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार को लेकर सियासी हलचल के बीच भाजपा के राज्यसभा सांसद और देश के वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में निकम को केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने की अटकलें तेज हो गई हैं।

बताया जा रहा है कि संसद के मौजूदा सत्र के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में विस्तार की संभावना को लेकर चर्चा चल रही है। ऐसे में अमित शाह और उज्ज्वल निकम के बीच हुई मुलाकात को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, निकम को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने को लेकर अभी तक सरकार या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

मुंबई से दिल्ली तक पहुंची सकारात्मक रिपोर्ट!

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, उज्ज्वल निकम के राजनीतिक और सामाजिक कामकाज को लेकर मुंबई से दिल्ली तक सकारात्मक रिपोर्ट पहुंची है। इसी वजह से उन्हें केंद्र सरकार में कोई महत्वपूर्ण मंत्रालय या अहम जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

निकम का नाम देश के चर्चित सरकारी वकीलों में प्रमुखता से लिया जाता है। लंबे समय तक उन्होंने कई हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील आपराधिक मामलों में सरकार की ओर से पैरवी की है। आतंकवाद और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में उनकी प्रभावी पैरवी के कारण उन्हें देशभर में पहचान मिली।

कई चर्चित मामलों में कर चुके हैं पैरवी

उज्ज्वल निकम ने 1993 मुंबई बम धमाके, 26/11 मुंबई आतंकी हमला, गुलशन कुमार हत्याकांड, प्रमोद महाजन हत्याकांड और कोपर्डी बलात्कार-हत्या मामले समेत कई चर्चित मामलों में सरकारी पक्ष का प्रतिनिधित्व किया है।

उनकी कानूनी विशेषज्ञता और लंबे सार्वजनिक जीवन को देखते हुए अब उनके संभावित राजनीतिक दायित्व को लेकर चर्चा हो रही है। अमित शाह के साथ उनकी हालिया मुलाकात ने इन अटकलों को और हवा दे दी है।

2025 में राज्यसभा के लिए हुए मनोनीत

उज्ज्वल निकम को वर्ष 2025 में राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया था। इससे पहले उन्हें वर्ष 2016 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है।

अब केंद्रीय मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार के बीच अमित शाह से मुलाकात के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उज्ज्वल निकम को मोदी सरकार में मंत्री पद या कोई बड़ी संवैधानिक/राजनीतिक जिम्मेदारी मिलने जा रही है?

फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन निकम की अमित शाह से मुलाकात ने महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है।

















महाराष्ट्र नगरपालिका विधेयक 2026: लोकप्रतिनिधियों के रिश्तेदारों की प्रशासन में दखलंदाजी पर अब सख्ती होगी। पति-पत्नी, बच्चों या अन्य रिश्तेदारों द्वारा अधिकारियों पर दबाव बनाना अपराध माना जाएगा। CM देवेंद्र फडणवीस सरकार का बड़ा कदम।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र में स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के प्रशासन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। महानगरपालिकाओं, नगरपालिकाओं, नगर पंचायतों और औद्योगिक नगरियों के कामकाज में लोकप्रतिनिधियों के रिश्तेदारों के बढ़ते हस्तक्षेप को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है।

महाराष्ट्र नगर परिषद विधेयक 2026 में ऐसे प्रावधान किए गए हैं, जिनके तहत लोकप्रतिनिधियों की ओर से उनके पति-पत्नी, बच्चों या अन्य रिश्तेदारों द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाना अथवा सरकारी कामकाज में अनुचित हस्तक्षेप करना अपराध माना जा सकता है।

सरकार का मानना है कि स्थानीय निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत महत्वपूर्ण है, लेकिन उनके नाम पर परिवार के सदस्यों या अन्य रिश्तेदारों द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव डालना व्यवस्था की निष्पक्षता और पारदर्शिता को प्रभावित कर सकता है।

प्रस्तावित प्रावधानों का उद्देश्य स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के प्रशासन को अनावश्यक राजनीतिक और पारिवारिक दबाव से मुक्त रखना है। इससे अधिकारियों को नियमों के अनुसार स्वतंत्र रूप से काम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में लाए जा रहे महाराष्ट्र नगर परिषद विधेयक 2026 में प्रशासनिक कामकाज में अनुचित हस्तक्षेप पर नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति लोकप्रतिनिधि के नाम या उनकी ओर से प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया जा सकता है।

इस कदम से स्थानीय निकायों में अधिकारियों और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच अधिकारों की स्पष्ट सीमा तय होने की उम्मीद है। साथ ही, सरकारी निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

Maharashtra Municipal Council Bill 2026 | Bill No. 251SP















🚩 शिवसेना संगठन को और मजबूत करने के उद्देश्य से नगरसेवकों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया है। इसी शिविर में शामिल होने के लिए उल्हासनगर के शिवसेना नगरसेवक कलानी महल से रवाना हुए।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

शिवसेना संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करने तथा जनसेवा को प्रभावी बनाने की दिशा में पार्टी की ओर से महत्वपूर्ण पहल की गई है। उपमुख्यमंत्री श्री एकनाथ शिंदे के आदेश एवं सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के मार्गदर्शन में उल्हासनगर महानगरपालिका के नगरसेवकों के लिए रामभाऊ म्हालगी प्रशिक्षण प्रबोधिनी, उत्तन (भाईंदर) में विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया है।

9 अगस्त से 11 अगस्त 2026 तक आयोजित होने वाले इस प्रशिक्षण शिविर के लिए आज कलानी महल से नगरसेवकों ने प्रस्थान किया। शिविर का उद्घाटन सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के शुभहस्ते किया जाएगा, जबकि 11 अगस्त को शाम 5 बजे होने वाले समापन कार्यक्रम में मंत्री श्री संजय शिरसाट उपस्थित रहेंगे।

प्रशिक्षण शिविर के दौरान नगरसेवकों को संगठनात्मक कार्यप्रणाली, प्रशासनिक व्यवस्था, जनप्रतिनिधि के दायित्व और प्रभावी जनसेवा से जुड़े विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण शिवसेना के नगरसेवकों को भविष्य में बेहतर तरीके से जनता के बीच काम करने और संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस अवसर पर शिवसेना नेता कमलेश निकम ने संगठन को मजबूत करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पार्टी संगठन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए भविष्य में भी इसी तरह के प्रयास लगातार जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि मजबूत संगठन के माध्यम से जनसेवा को और प्रभावी बनाया जा सकता है तथा कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है।

यह प्रशिक्षण शिविर विशेष रूप से नगरसेवकों के लिए आयोजित किया गया है और सभी नगरसेवकों की उपस्थिति अनिवार्य रखी गई है।

इस आयोजन में आनंद परांजपे, संगठन प्रमुख महाराष्ट्र राज्य, तथा गोपाल लांडगे, जिलाप्रमुख कल्याण सहित संगठन के पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

शिवसेना की ओर से संगठनात्मक क्षमता बढ़ाने, जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करने और जमीनी स्तर पर जनसेवा को और प्रभावी बनाने की दिशा में इस प्रशिक्षण शिविर को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

उल्हासनगर के शिवसेना नेता कमलेश निकम ने विश्वास जताया कि इस प्रशिक्षण शिविर के बाद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और कार्यसम्राट सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के कुशल नेतृत्व में शिवसेना संगठन को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में शिवसेना पूरे महाराष्ट्र में नंबर वन पार्टी के रूप में उभरेगी।


















उल्हासनगर की सियासत में AKK की तिकड़ी का बढ़ता दबदबा, अरुण आशान, कमलेश निकम और कलवंत सिंह की जोड़ी की शहरभर में चर्चा।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर की स्थानीय राजनीति में इन दिनों AKK की तिकड़ी—अरुण आशान, कमलेश निकम और कलवंत सिंह को लेकर राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच तक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। महानगरपालिका की सत्ता और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में इस तिकड़ी की बढ़ती सक्रियता को लेकर शहर में तरह-तरह की राजनीतिक चर्चाएं सामने आ रही हैं।

स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अरुण आशान, कमलेश निकम और कलवंत सिंह के बीच बढ़ता राजनीतिक तालमेल उल्हासनगर की राजनीति में एक नए समीकरण की ओर इशारा कर रहा है। यही वजह है कि इन तीनों नेताओं की गतिविधियों और उनके बीच दिखाई देने वाली नजदीकियों पर राजनीतिक जानकारों के साथ-साथ आम नागरिकों की भी नजर बनी हुई है।

महानगरपालिका की सत्ता में प्रभाव को लेकर चर्चा

उल्हासनगर महानगरपालिका की सत्ता से जुड़े विभिन्न राजनीतिक फैसलों और गतिविधियों के बीच AKK की तिकड़ी के प्रभाव को लेकर चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं। शहर की स्थानीय राजनीति में यह सवाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि आने वाले समय में यह राजनीतिक समीकरण महानगरपालिका की सत्ता और संगठनात्मक स्तर पर किस तरह की भूमिका निभाता है।

डॉ. श्रीकांत शिंदे के करीबी माने जाने की चर्चा

राजनीतिक हलकों में अरुण आशान, कमलेश निकम और कलवंत सिंह को शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के करीबी नेताओं में भी माना जाता है। इसी राजनीतिक नजदीकी के चलते उल्हासनगर में AKK की तिकड़ी को लेकर चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया है।

हालांकि, इस तिकड़ी की राजनीतिक भूमिका और भविष्य की रणनीति को लेकर अभी कई बातें राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित हैं। आने वाले दिनों में इनके बीच तालमेल और स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों का असर उल्हासनगर की राजनीति पर कितना पड़ता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

फिलहाल, AKK की तिकड़ी उल्हासनगर की राजनीति में चर्चा का नया केंद्र बन गई है और शहर के राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच तक इनके नाम और राजनीतिक समीकरण को लेकर चर्चाएं जारी हैं।


















“15 साल बनाम 5 महीने”: विधायक कुमार ऐलानी पर बरसे शिव सेना नेता कमलेश निकम, विकास कार्यों को लेकर किया बड़ा दावा।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

शिवसेना नेता कमलेश निकम ने उल्हासनगर के विधायक कुमार ऐलानी पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए उनके कार्यकाल और शहर के विकास को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। निकम ने आरोप लगाया कि विधायक कुमार ऐलानी करीब 15 वर्षों से राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन इस लंबे कार्यकाल के बावजूद उल्हासनगर के विकास के लिए कोई उल्लेखनीय काम दिखाई नहीं देता।

कमलेश निकम ने कहा कि महापौर के महज पांच महीने के कार्यकाल में 500 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों को गति दी गई है। उन्होंने दावा किया कि शहर में बुनियादी सुविधाओं, परिवहन और अन्य विकास कार्यों को लेकर महापौर की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

15 अगस्त से 30 नई बस सेवाओं का दावा

निकम ने कहा कि महापौर के प्रयासों से आगामी 15 अगस्त को उल्हासनगर शहरवासियों को 30 नई बस सेवाओं की सौगात मिलने जा रही है। उन्होंने इसे शहर के सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

उन्होंने कहा कि शहर की बढ़ती आबादी और नागरिकों की परिवहन संबंधी जरूरतों को देखते हुए नई बस सेवाएं शुरू होना आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती हैं।

“ऐलानी सिर्फ एंटीलिया और साहूकारों के विधायक”

विधायक कुमार ऐलानी पर निशाना साधते हुए कमलेश निकम ने आरोप लगाया कि “कुमार ऐलानी केवल एंटीलिया इमारत और साहूकारों के विधायक बनकर रह गए हैं।” उन्होंने कहा कि विधायक को शहर के आम नागरिकों, उनकी समस्याओं और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

विधानसभा में उल्हासनगर की आवाज नहीं उठाने का आरोप

निकम ने आगे आरोप लगाया कि महाराष्ट्र विधानसभा के मौजूदा सत्रों में भी विधायक कुमार ऐलानी ने उल्हासनगर के महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रभावी तरीके से नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि शहर में सड़क, यातायात, सार्वजनिक परिवहन, पानी, स्वास्थ्य और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जिन्हें विधानसभा में मजबूती से उठाने की आवश्यकता है।

कमलेश निकम ने कहा कि “उल्हासनगर की जनता अब केवल राजनीतिक दावों पर नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाले विकास कार्यों पर विश्वास करेगी।”

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में शहर की जनता यह तय करेगी कि कौन जनहित के मुद्दों के लिए काम कर रहा है और कौन केवल राजनीति तक सीमित है।

हालांकि, निकम द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर विधायक कुमार ऐलानी की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।


















उल्हासनगर में 'RRR' की तिकड़ी फिर एकजुट, राजेंद्रसिंह भुल्लर, राजेंद्र चौधरी और रमेश चव्हाण के साथ आने से शिवसैनिकों में उत्साह की नई लहर।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर की राजनीति में गुरुवार को उस समय एक भावनात्मक और चर्चित क्षण देखने को मिला, जब वरिष्ठ शिवसैनिक राजेंद्रसिंह भुल्लर (महाराज), राजेंद्र चौधरी और रमेश चव्हाण एक साथ दिखाई दिए। तीनों नेताओं की एक साथ मौजूदगी की तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसके बाद अनेक शिवसैनिकों और समर्थकों ने इसे संगठन की मजबूती और एकता का प्रतीक बताते हुए स्वागत किया।

शिवसैनिकों के बीच यह त्रिमूर्ति लंबे समय से संगठन के संघर्ष, समर्पण और नेतृत्व का प्रतीक मानी जाती रही है। समर्थकों का कहना है कि जब उल्हासनगर में अपराध, दहशत और अस्थिरता का माहौल था, उस दौर में शिवसेना से जुड़ना आसान नहीं था। ऐसे समय में हिंदूहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे के विचारों से प्रेरित होकर तथा धर्मवीर आनंद दिघे के मार्गदर्शन में इन वरिष्ठ नेताओं ने संगठन को मजबूत करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई।

समर्थकों के अनुसार, राजेंद्रसिंह भुल्लर (महाराज), राजेंद्र चौधरी और रमेश चव्हाण ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में शिवसेना का संगठन खड़ा करने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और भगवा विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। उनका दावा है कि वर्षों के संघर्ष, संगठनात्मक मेहनत और नेतृत्व के कारण आगे चलकर उल्हासनगर महानगरपालिका में शिवसेना-भाजपा की सत्ता स्थापित होने की राह भी मजबूत हुई।

शिवसैनिकों का कहना है कि संगठन के शुरुआती दौर में अनेक कार्यकर्ताओं को विरोध, हमलों और धमकियों का सामना करना पड़ा तथा कई वरिष्ठ शिवसैनिकों ने संघर्ष के दौरान बलिदान भी दिया। इसके बावजूद संगठन के प्रति उनकी निष्ठा और संकल्प कमजोर नहीं पड़ा। उस समय "आदेश दिघे साहेब का... और प्रेरणा बाळासाहेब की" का संदेश कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का प्रमुख आधार माना जाता था।

बीते वर्षों में संगठन के भीतर समय-समय पर मतभेदों और दूरियों की चर्चाएं भी सामने आती रहीं। हालांकि, तीनों वरिष्ठ नेताओं के एक साथ दिखाई देने के बाद समर्थकों का मानना है कि यह तस्वीर संगठन में सकारात्मक संदेश देने वाली है। सोशल मीडिया पर कई कार्यकर्ताओं ने इसे "RRR की वापसी" बताते हुए संगठन के लिए शुभ संकेत बताया।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि सत्ता और पद समय के साथ बदलते रहते हैं, लेकिन वरिष्ठ नेताओं की एकजुटता संगठन को नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और दिशा प्रदान करती है। उनका मानना है कि यदि यह एकता आगे भी बनी रहती है तो संगठन को भविष्य में और मजबूती मिलेगी।

समर्थकों ने यह भी आशा व्यक्त की कि हिंदूहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे के विचारों, धर्मवीर आनंद दिघे के संस्कारों तथा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में संगठन की एकजुटता निरंतर बनी रहेगी और कार्यकर्ताओं को इसी प्रकार प्रेरणा मिलती रहेगी।

हालांकि, इस पुनर्मिलन को लेकर संबंधित नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक राजनीतिक घोषणा या संयुक्त बयान सामने नहीं आया है। फिलहाल, उनकी एक साथ आई तस्वीर ने उल्हासनगर के राजनीतिक और संगठनात्मक हलकों में चर्चा का विषय जरूर बना दिया है।



















उल्हासनगर में सियासी चर्चाओं का दौर तेज! क्या 2029 विधानसभा चुनाव की तैयारी में हैं शिवसेना नेता कमलेश निकम.?


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर शहर के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों शिवसेना नेता कमलेश निकम को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। राजनीतिक हलकों में ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि निकम ने वर्ष 2029 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपनी राजनीतिक गतिविधियों को तेज कर दिया है। हालांकि, इस संबंध में अब तक न तो कमलेश निकम और न ही शिवसेना की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि की गई है।

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, कमलेश निकम वर्ष 2029 में शिवसेना के टिकट पर उल्हासनगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के इच्छुक हो सकते हैं। इसी वजह से वे संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बढ़ाने और जनता के बीच अपनी सक्रियता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि चुनावी राजनीति में संभावित उम्मीदवार अक्सर वर्षों पहले से अपनी रणनीति पर काम शुरू कर देते हैं। ऐसे में कमलेश निकम की बढ़ती राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता को भी आगामी विधानसभा चुनाव की संभावित तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

सूत्रों का दावा है कि हाल के समय में कमलेश निकम विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों में लगातार भागीदारी कर रहे हैं तथा आम नागरिकों और कार्यकर्ताओं के साथ उनका संपर्क भी बढ़ा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

उल्हासनगर विधानसभा क्षेत्र हमेशा से राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। चुनाव नजदीक आने के साथ संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाएं तेज होना स्वाभाविक माना जाता है। ऐसे में कमलेश निकम का नाम भी संभावित दावेदारों में प्रमुखता से लिया जा रहा है।

फिलहाल, वर्ष 2029 के विधानसभा चुनाव को लेकर शिवसेना ने किसी भी उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए कमलेश निकम के चुनाव लड़ने की चर्चाओं को फिलहाल केवल राजनीतिक अटकलों और सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

आने वाले समय में यदि शिवसेना या कमलेश निकम की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा की जाती है, तो उल्हासनगर की राजनीति में नए समीकरण और नई राजनीतिक हलचल देखने को मिल सकती है।




















अंबरनाथ में शिवसेना की अंदरूनी खींचतान फिर आई सामने, शिवसेना के वरिष्ठ नेता अरविंद वाळेकर ने विधायक डॉ. बालाजी किणीकर पर जमकर निशाना साधा; राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज।


अंबरनाथ: दिनेश मीरचंदानी

अंबरनाथ की राजनीति में शिवसेना (शिंदे गुट) के भीतर बढ़ते मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नगराध्यक्ष अरविंद वाळेकर ने अपने हालिया बयान में बिना किसी का नाम लिए विधायक डॉ. बालाजी किणीकर के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

अरविंद वाळेकर ने कहा कि अंबरनाथ की जनता आज भी पानी, बिजली, सड़क, सफाई और अन्य मूलभूत नागरिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रही है। उनका आरोप है कि जनप्रतिनिधियों का पूरा ध्यान इन समस्याओं के समाधान पर केंद्रित होने के बजाय राजनीतिक गतिविधियों और शक्ति प्रदर्शन पर अधिक दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि जनता विकास और जवाबदेही चाहती है, लेकिन उसे केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं।

वाळेकर ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि लंबे समय तक आम नागरिकों की समस्याओं की अनदेखी करने वाले जनप्रतिनिधियों को अब जनता लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और उचित समय आने पर अपना फैसला सुनाएगी।

उनके इस बयान को शिवसेना के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर संगठन के भीतर नेतृत्व और कार्यशैली को लेकर असंतोष धीरे-धीरे खुलकर सामने आ रहा है। पार्टी के नेताओं के सार्वजनिक बयान संगठन के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकते हैं।

हालांकि शिवसेना नेतृत्व पहले भी अंबरनाथ में किसी प्रकार की गुटबाजी से इनकार करता रहा है, लेकिन समय-समय पर सामने आने वाले नेताओं के बयानों ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अरविंद वाळेकर के ताजा बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा तेज हो गई है कि अंबरनाथ इकाई में सब कुछ सामान्य नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि संगठन के भीतर मतभेदों को समय रहते दूर नहीं किया गया, तो इसका असर आगामी चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है। फिलहाल वाळेकर के बयान ने अंबरनाथ की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और अब सभी की नजरें शिवसेना नेतृत्व की संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।


















उल्हासनगर के नगरसेवकों का गुवाहाटी दौरा विवादों में, 65 लाख रुपये के प्रशिक्षण खर्च के साथ परिवारों के खर्च पर भी उठे सवाल.!


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

असम के गुवाहाटी में नवनिर्वाचित नगरसेवकों के लिए आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर अब राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का विषय बन गया है। आर्थिक तंगी से जूझ रही उल्हासनगर महानगरपालिका (यूएमसी) द्वारा इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए करीब 65 लाख रुपये खर्च करने की प्रशासनिक मंजूरी दिए जाने के बाद विपक्ष ने पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि जब नगरसेवकों के आधिकारिक खर्च का वहन महानगरपालिका ने किया, तब उनके साथ गए परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के यात्रा, ठहरने और अन्य खर्च का भुगतान किसने किया, इसकी स्पष्ट जानकारी प्रशासन को सार्वजनिक करनी चाहिए।

जानकारी के अनुसार, 22 से 26 जुलाई के बीच अखिल भारतीय स्थानीय स्वराज्य संस्था की ओर से गुवाहाटी में नवनिर्वाचित नगरसेवकों के लिए प्रशासनिक कार्यप्रणाली, स्थानीय स्वशासन और विकास योजनाओं से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस प्रशिक्षण में भाग लेने के लिए 75 में से 71 नगरसेवकों ने सहमति दी थी। महानगरपालिका ने नगरसेवकों के हवाई यात्रा, आवास, भोजन तथा दैनिक भत्ते सहित पूरे आधिकारिक खर्च का वहन किया।

हालांकि, विवाद तब शुरू हुआ जब यह सामने आया कि कई नगरसेवक अपने परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों को भी इस दौरे पर साथ ले गए थे। सोशल मीडिया पर विमान के अंदर नगरसेवकों और उनके परिजनों की तस्वीरें वायरल होने के बाद विपक्ष ने इस दौरे की पारदर्शिता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। हैरानी की बात यह भी रही कि प्रशिक्षण कार्यक्रम से संबंधित एक भी आधिकारिक तस्वीर या वीडियो सार्वजनिक नहीं किया गया, जिससे यह चर्चा और तेज हो गई कि आखिर प्रशिक्षण कार्यक्रम में वास्तविक रूप से क्या गतिविधियां हुईं।

विपक्ष का कहना है कि यदि यह दौरा पूरी तरह प्रशिक्षण के उद्देश्य से आयोजित किया गया था, तो परिवार के सदस्यों की इसमें क्या भूमिका थी और उनके यात्रा एवं ठहरने का खर्च किस स्रोत से वहन किया गया। विपक्ष ने प्रशासन से पूरे खर्च का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक करने तथा इस मामले की पारदर्शी जांच कराने की मांग की है।

इस पूरे विवाद के बीच एक और तथ्य चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारी के अनुसार, नगरसेवकों और उनके परिवारों के ठहरने की व्यवस्था उसी आलीशान होटल में की गई थी, जहां वर्ष 2022 में शिवसेना में राजनीतिक विभाजन के दौरान उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले बागी विधायक कई दिनों तक ठहरे थे। इस वजह से भी यह दौरा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

इस मामले में महानगरपालिका की प्रभारी सचिव एवं उपायुक्त दीपाली चौगुले द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि गुवाहाटी में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में 60 से 70 नगरसेवकों ने भाग लिया। हालांकि, प्रशासन ने अब तक प्रशिक्षण में शामिल नगरसेवकों की सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं की है। इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि जब पूरे कार्यक्रम पर लाखों रुपये खर्च किए गए, तो प्रतिभागियों की सही संख्या और खर्च का विस्तृत विवरण सार्वजनिक करने में देरी क्यों हो रही है।

अब विपक्ष ने महानगरपालिका प्रशासन से मांग की है कि गुवाहाटी प्रशिक्षण दौरे पर हुए प्रत्येक खर्च का हिसाब सार्वजनिक किया जाए, नगरसेवकों के साथ गए परिजनों के खर्च का स्रोत स्पष्ट किया जाए तथा यदि सरकारी धन का किसी भी प्रकार से दुरुपयोग हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। फिलहाल यह मामला उल्हासनगर की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

















उल्हासनगर में सड़कें बदहाल, पानी-सीवरेज संकट बरकरार... फिर भी नगरसेवकों का गुवाहाटी दौरा! 65 लाख रुपये के प्रशिक्षण खर्च पर उठे सवाल।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर शहर में सड़कों की दुर्दशा, गड्ढों की भरमार, दूषित पेयजल, सीवरेज व्यवस्था की बदहाली और वित्तीय संकट जैसी गंभीर समस्याओं के बीच उल्हासनगर महानगरपालिका के नगरसेवकों का गुवाहाटी प्रशिक्षण दौरा अब बड़े विवाद का विषय बन गया है। इस चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम पर महानगरपालिका के खजाने से लगभग 65 लाख रुपये खर्च किए जाने की प्रशासनिक मंजूरी दी गई, जिसके बाद शहरभर में इसकी आलोचना तेज हो गई है।

नागरिकों का कहना है कि जिन जनप्रतिनिधियों को शहर की बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए मैदान में होना चाहिए था, वे मानसून के दौरान गुवाहाटी के पांच सितारा होटल में प्रशिक्षण लेने पहुंचे। ऐसे समय में जब महानगरपालिका आर्थिक संकट से गुजर रही है और विकास कार्यों के लिए धन की कमी बताई जा रही है, तब इस खर्च को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

22 से 26 जुलाई तक चला प्रशिक्षण, रेडिसन ब्लू होटल में हुई व्यवस्था

महानगरपालिका के सचिव कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 22 जुलाई से 26 जुलाई के बीच आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का आयोजन गुवाहाटी स्थित पांच सितारा रेडिसन ब्लू होटल में किया गया था।

चार दिवसीय कार्यक्रम के दौरान नगरसेवकों के लिए चार बार चाय-नाश्ता, पांच बार दोपहर का भोजन, चार बार रात्रि भोजन, पांच दिनों तक स्थानीय परियोजनाओं के निरीक्षण के लिए वाहन, सभागार, स्टेशनरी और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई थी। इन व्यवस्थाओं पर प्रति नगरसेवक ₹52,980 खर्च निर्धारित किया गया।

इसके अलावा मुंबई–गुवाहाटी–मुंबई हवाई यात्रा के लिए ₹21,740 प्रति व्यक्ति का प्रावधान किया गया। इस प्रकार एक नगरसेवक पर कुल अनुमानित खर्च ₹74,720 बैठता है। सचिव कार्यालय के अनुसार इस पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए करीब ₹65 लाख के व्यय को प्रशासनिक मंजूरी दी गई थी।

प्रशिक्षण कम, पर्यटन ज्यादा? सोशल मीडिया से बढ़ा विवाद

हालांकि यह प्रशिक्षण 76 नगरसेवकों के लिए आयोजित किया गया था, लेकिन जानकारी के अनुसार सभी नगरसेवक इसमें शामिल नहीं हुए। इस बीच सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों ने पूरे मामले को और अधिक विवादास्पद बना दिया।

इन तस्वीरों में कई नगरसेवक अपने परिवार के सदस्यों के साथ दिखाई दिए, जिसके बाद शहर में यह चर्चा शुरू हो गई कि यह वास्तव में प्रशिक्षण कार्यक्रम था या मानसून पर्यटन। नागरिकों ने सवाल उठाया कि यदि परिवार के सदस्य भी इस यात्रा में शामिल थे तो उनका खर्च किसने वहन किया। क्या यह निजी खर्च था या किसी अन्य माध्यम से इसका भुगतान किया गया? इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

मुंबई की संस्था, फिर प्रशिक्षण गुवाहाटी में क्यों?

महानगरपालिका के जनसंपर्क अधिकारी प्राजक्त कुलकर्णी के अनुसार यह प्रशिक्षण मुंबई स्थित अखिल भारतीय स्थानीय स्वराज्य संस्था द्वारा आयोजित किया गया था। प्रशिक्षण में संवाद कौशल, कार्यालयीन कार्यप्रणाली, प्रस्तावों और प्रश्नों की प्रस्तुति, अभिलेख तैयार करना, प्रभाग विकास और नियोजन जैसे विषय शामिल थे।

हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब प्रशिक्षण देने वाली संस्था स्वयं मुंबई में स्थित है, तो कार्यक्रम गुवाहाटी में आयोजित करने की आवश्यकता क्या थी। कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों का कहना है कि यही प्रशिक्षण मुंबई या उल्हासनगर में आयोजित किया जा सकता था, जिससे लाखों रुपये के सार्वजनिक धन की बचत होती।

700 करोड़ से अधिक का बकाया, फिर भी खर्च पर सवाल

उल्हासनगर महानगरपालिका पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रही है। जानकारी के अनुसार पालिका पर 700 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। ठेकेदारों के भुगतान लंबित हैं और एमआईडीसी को पानी आपूर्ति का भुगतान करने में भी आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

संपत्ति कर की वसूली अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रही है, जिसके कारण राजस्व पर लगातार दबाव बना हुआ है। दूसरी ओर शहर की अधिकांश सड़कें गड्ढों से भरी हुई हैं, जलनिकासी और सीवरेज व्यवस्था पर लगातार शिकायतें मिल रही हैं तथा पेयजल आपूर्ति को लेकर भी नागरिक परेशान हैं।

स्थिति यह है कि महानगरपालिका के स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए दो महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अनेक छात्रों को अब तक आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है।

जनता पूछ रही है—प्राथमिकता शहर या पर्यटन?

इस पूरे घटनाक्रम के बाद शहर में यह बहस तेज हो गई है कि आखिर सार्वजनिक धन का उपयोग किस प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये की आर्थिक तंगी का हवाला देकर विकास कार्यों में कटौती की जा रही है, तो फिर लाखों रुपये खर्च कर दूर-दराज़ राज्यों में प्रशिक्षण आयोजित करने की क्या आवश्यकता थी।

अब लोगों की नजर इस बात पर है कि महानगरपालिका प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस विवाद पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं तथा भविष्य में ऐसे खर्चों को लेकर क्या नीति अपनाई जाएगी। दूसरी ओर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने भी पूरे मामले की पारदर्शी जांच और खर्च का विस्तृत विवरण सार्वजनिक करने की मांग तेज कर दी है।

नोट: नगरसेवक ऐश में, उल्हासनगर की जनता त्रस्त।





















15 डिब्बों वाली लोकल ट्रेनों को मंजूरी मिलने पर विधायक किसन कथोरे ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का आभार जताया। इस फैसले से लाखों यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी।


 


बदलापुर: दिनेश मीरचंदानी

बदलापुर से मुंबई के बीच प्रतिदिन नौकरी, व्यवसाय, शिक्षा और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों के लिए बड़ी राहत देने वाला निर्णय सामने आया है। वर्षों से चली आ रही 15 डिब्बों वाली उपनगरीय (लोकल) ट्रेनों की मांग को मंजूरी मिलने के बाद क्षेत्र में खुशी का माहौल है। इस महत्वपूर्ण निर्णय पर भाजपा विधायक किसन कथोरे ने केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए इसे बदलापुर सहित पूरे ठाणे जिले के रेल यात्रियों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।

विधायक किसन कथोरे ने कहा कि बदलापुर महाराष्ट्र के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में शामिल है। बढ़ती आबादी और रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि के कारण लंबे समय से 15 डिब्बों वाली लोकल ट्रेनों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। अब इस मांग को स्वीकृति मिलने से यात्रियों को भीड़भाड़ से राहत मिलेगी, ट्रेनों की यात्री क्षमता बढ़ेगी और दैनिक सफर अधिक सुरक्षित, सुगम एवं आरामदायक बनेगा।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय केवल एक रेल सुविधा का विस्तार नहीं, बल्कि लाखों यात्रियों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। इससे बदलापुर, अंबरनाथ, उल्हासनगर, कल्याण और आसपास के क्षेत्रों से मुंबई आने-जाने वाले यात्रियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

विधायक कथोरे ने इस महत्वपूर्ण मांग को मंजूरी देने के लिए भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव तथा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस का बदलापुर क्षेत्र के सभी यात्रियों की ओर से हार्दिक अभिनंदन एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से महाराष्ट्र की रेल व्यवस्था लगातार आधुनिक, सुरक्षित और यात्री-केंद्रित बन रही है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी बदलापुर और ठाणे जिले की रेल अवसंरचना को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए इसी प्रकार सकारात्मक निर्णय लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि रेल नेटवर्क के विस्तार, आधुनिक सुविधाओं और यात्रियों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने की दिशा में सरकार निरंतर कार्य कर रही है, जिसका लाभ आने वाले समय में इस पूरे क्षेत्र को मिलेगा।

इस अवसर पर भाजपा कोंकण विभाग आईटी सेल के संयोजक एवं ठाणे जिला ग्रामीण के उपाध्यक्ष श्री मिलिंद धारवाडकर ने भी इस निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बदलापुर के नागरिकों, विशेषकर प्रतिदिन लोकल ट्रेनों से यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों ने वर्षों तक धैर्य और संयम के साथ इस मांग के पूरा होने का इंतजार किया। उनका यह धैर्य और संघर्ष सराहनीय है।

उन्होंने कहा कि 15 डिब्बों वाली लोकल ट्रेनों की शुरुआत से न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि भीड़ का दबाव भी कम होगा और दैनिक यात्रा पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित तथा सुरक्षित बनेगी। यह निर्णय बदलापुर क्षेत्र के समग्र विकास और बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।


















शिवसेना वैद्यकीय सहायता कक्ष में नई जिम्मेदारी: मीना (ताई) सोंडे को कल्याण जिला कक्ष प्रमुख नियुक्त, गरीब मरीजों को मिलेगा उपचार और आर्थिक सहायता का लाभ।


 


उल्हासनगर/कल्याण: दिनेश मीरचंदानी

गरीब, जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बालासाहेब ठाकरे शिवसेना वैद्यकीय सहायता कक्ष ने संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण नियुक्ति की है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के निर्देश एवं मंगेश नरसिंह चिवटे के मार्गदर्शन में श्रीमती मीना (ताई) सोंडे को कल्याण जिला कक्ष प्रमुख (उल्हासनगर एवं अंबरनाथ) पद पर छह माह के लिए नियुक्त किया गया है।

जारी नियुक्ति पत्र के अनुसार, मीना (ताई) सोंडे को शिवसेना वैद्यकीय सहायता कक्ष के माध्यम से गरीब एवं जरूरतमंद मरीजों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और चिकित्सा सहायता सुविधाओं का लाभ दिलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस नियुक्ति के तहत वे धर्मार्थ अस्पतालों में उपलब्ध 10 प्रतिशत आरक्षित कोटा के माध्यम से मरीजों को उपचार दिलाने, निजी अस्पतालों में जरूरतमंद मरीजों की निःशुल्क अथवा रियायती दरों पर सर्जरी कराने में सहायता करेंगी। साथ ही महात्मा फुले जन आरोग्य योजना के अंतर्गत पंजीकृत अस्पतालों में पात्र मरीजों को निःशुल्क इलाज एवं शल्य चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन भी देंगी।

नियुक्ति पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि गंभीर एवं महंगी सर्जरी की आवश्यकता वाले आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को सहायता दिलाने के लिए प्रधानमंत्री चिकित्सा सहायता निधि, मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता निधि, श्री सिद्धिविनायक ट्रस्ट, टाटा ट्रस्ट सहित विभिन्न सहायता निधियों एवं ट्रस्टों के माध्यम से आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इसके लिए बालासाहेब भवन स्थित केंद्रीय कार्यालय से समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

पत्र पर संस्थापक एवं अध्यक्ष मंगेश नरसिंह चिवटे तथा कार्यालय प्रमुख रामहरी भीमराव राजन के हस्ताक्षर हैं। नियुक्ति पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नियुक्ति के बाद अधिकृत पदाधिकारियों को अपने लेटरहेड के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क अथवा रियायती चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए अधिकृत किया जाएगा।

इस नियुक्ति से कल्याण, उल्हासनगर और अंबरनाथ क्षेत्र के गरीब एवं जरूरतमंद मरीजों को स्वास्थ्य योजनाओं, चिकित्सा सहायता और आर्थिक सहयोग तक पहुंच आसान होने की उम्मीद जताई जा रही है।





















उल्हासनगर मनपा के मैन्युअल टेंडर विवाद ने पकड़ा तूल: भाजपा नगरसेवक संजय सिंह ने आयुक्त पर नियमों के उल्लंघन का लगाया आरोप।


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका में मैन्युअल पद्धति से जारी किए गए टेंडरों को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। भारतीय जनता पार्टी के नगरसेवक एवं स्थायी समिति सदस्य संजय अयोध्याप्रसाद सिंह ने महानगरपालिका आयुक्त को एक लिखित पत्र भेजकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि विभिन्न विकास कार्यों के लिए मैन्युअल प्रणाली से जारी की गई निविदाओं (टेंडरों) की जानकारी नियमानुसार स्थायी समिति को नहीं दी जा रही, जिससे महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन हो रहा है।

संजय सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम की धारा 73 के अनुसार आयुक्त द्वारा किए गए ऐसे अनुबंध, जिनकी राशि निर्धारित सीमा के अंतर्गत आती है, उनकी जानकारी अनुबंध किए जाने की तारीख से 15 दिनों के भीतर स्थायी समिति को देना अनिवार्य है। उनका आरोप है कि प्रशासन इस कानूनी प्रावधान का पालन नहीं कर रहा है और स्थायी समिति को अंधेरे में रखकर कार्यवाही की जा रही है।

पत्र में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर न केवल अधिनियम की अवहेलना की जा रही है, बल्कि स्थायी समिति का भी अपमान किया जा रहा है। साथ ही, स्थायी समिति के सदस्यों को गुमराह करने का भी आरोप लगाया गया है।

इन आरोपों के आधार पर संजय सिंह ने आयुक्त मनीषा आव्हाले से मांग की है कि मैन्युअल पद्धति से जारी किए गए सभी टेंडरों का भुगतान तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाए, जब तक कि पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कर नियमों के अनुसार जानकारी स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुत नहीं की जाती।

उन्होंने अपने पत्र की प्रतिलिपि मुख्य लेखा अधिकारी, मुख्य लेखा परीक्षक तथा शहर अभियंता को भी भेजी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मामला केवल प्रशासनिक पत्राचार तक सीमित न रहकर वित्तीय और तकनीकी विभागों के संज्ञान में भी लाया गया है।

उल्हासनगर महानगरपालिका में पिछले कुछ समय से टेंडर प्रक्रिया, विकास कार्यों और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में संजय सिंह द्वारा उठाया गया यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर नई बहस को जन्म दे सकता है। यदि इस मामले की जांच होती है और आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।

फिलहाल इस मामले में उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासन का पक्ष आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।















अहमदाबाद के प्रभावशाली चेहरे पवन सिंधी: भाजपा, आरएसएस और वीएचपी में मजबूत पकड़ की चर्चा, राजनीतिक गलियारों में बढ़ती पहचान।

अहमदाबाद: दिनेश मीरचंदानी

गुजरात की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों में समय-समय पर कुछ ऐसे नाम चर्चा का विषय बनते हैं, जिनकी संगठनात्मक पहुंच और प्रभाव को लेकर व्यापक चर्चाएं होती हैं। इन्हीं नामों में पवन सिंधी का भी उल्लेख किया जाता है। अहमदाबाद के निवासी पवन सिंधी को शहर की जानी-मानी हस्तियों में गिना जाता है और विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक मंचों पर उनकी सक्रियता चर्चा का विषय बनी रहती है।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, पवन सिंधी की गुजरात भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं और संगठन के पदाधिकारियों के साथ अच्छी पहचान और संपर्क बताए जाते हैं। यही वजह है कि उन्हें पार्टी के प्रभावशाली और सक्रिय समर्थकों में से एक माना जाता है। राजनीतिक हलकों में यह भी माना जाता है कि संगठनात्मक स्तर पर उनकी पहुंच काफी मजबूत है और कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों तथा सामाजिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी देखने को मिलती रही है।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी लंबे समय से होती रही है कि पवन सिंधी को भारत सरकार के गृह मंत्री अमित शाह के करीबी लोगों में से एक माना जाता है। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक वर्गों में उनके संपर्कों को लेकर अक्सर चर्चाएं होती रही हैं।

जानकारों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के विभिन्न कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों के बीच भी पवन सिंधी की अच्छी पहचान और मजबूत पकड़ मानी जाती है। सामाजिक, धार्मिक और संगठनात्मक कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय उपस्थिति के कारण उनका व्यापक संपर्क नेटवर्क विकसित हुआ है, जिससे वे गुजरात के विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक वर्गों में एक प्रभावशाली व्यक्तित्व के रूप में देखे जाते हैं।

सूत्रों के अनुसार, पवन सिंधी वर्षों से सामाजिक सेवा, संगठनात्मक गतिविधियों और जनसंपर्क के माध्यम से सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। यही कारण है कि अहमदाबाद सहित गुजरात के कई क्षेत्रों में उनकी पहचान लगातार मजबूत होती गई है और राजनीतिक हलकों में उनका नाम समय-समय पर चर्चा में बना रहता है।














मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ओएसडी राजेंद्र साबळे पाटील की बढ़ती प्रशासनिक साख, प्रभावी कार्यशैली और मजबूत पकड़ की हर ओर चर्चा।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कार्यालय में ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) के रूप में कार्यरत राजेंद्र साबळे पाटील इन दिनों अपनी प्रभावी कार्यशैली, प्रशासनिक दक्षता और सरकारी कामकाज पर मजबूत पकड़ को लेकर चर्चा का विषय बने हुए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के महत्वपूर्ण कार्यों के संचालन, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया में उनकी भूमिका को प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में सराहा जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, राजेंद्र साबळे पाटील मुख्यमंत्री कार्यालय में आने वाले विभिन्न विभागों से जुड़े मामलों की निगरानी, समन्वय और त्वरित निष्पादन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। जटिल प्रशासनिक मामलों को व्यवस्थित ढंग से संभालने, विभागों के बीच संवाद को प्रभावी बनाने और लंबित कार्यों के शीघ्र निस्तारण की दिशा में उनकी कार्यशैली को काफी प्रभावशाली माना जा रहा है।

बताया जाता है कि मुख्यमंत्री कार्यालय की कार्यप्रणाली को अधिक गतिशील और परिणामोन्मुख बनाने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। विभिन्न सरकारी विभागों के साथ निरंतर संवाद, योजनाओं की प्रगति की समीक्षा तथा समयसीमा के भीतर कार्यों को पूरा कराने की उनकी कार्यशैली ने उन्हें प्रशासनिक व्यवस्था में एक भरोसेमंद अधिकारी के रूप में स्थापित किया है।

सरकारी और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि राजेंद्र साबळे पाटील ने अपनी मेहनत, अनुशासन, कार्यकुशलता और प्रशासनिक अनुभव के दम पर मुख्यमंत्री कार्यालय में अपनी अलग पहचान बनाई है। अधिकारियों के साथ बेहतर समन्वय और त्वरित निर्णय क्षमता के कारण उनकी प्रशासनिक पकड़ लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है।

जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय की कार्यक्षमता को और अधिक प्रभावी बनाने तथा जनहित से जुड़े मामलों के समयबद्ध समाधान में उनकी भूमिका भविष्य में भी महत्वपूर्ण बनी रह सकती है। यही कारण है कि उनकी कार्यशैली और प्रशासनिक सक्रियता को लेकर विभिन्न स्तरों पर सकारात्मक चर्चा लगातार तेज हो रही है।