नई दिल्ली: दिनेश मीरचंदानी
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी समीर वानखेड़े की पदोन्नति से जुड़े मामले में केंद्र सरकार को बड़ा झटका देते हुए हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्राइब्यूनल (CAT) के फैसले को सही ठहराया गया था।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और अलोक अराड़े की पीठ ने केंद्र सरकार द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिकाओं (SLP) को खारिज कर दिया। इन याचिकाओं के जरिए अगस्त 2025 में आए दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें CAT के निर्णय को वैध माना गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहता। अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाओं की खारिजी का किसी अन्य लंबित या भविष्य की कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
गौरतलब है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने अगस्त 2025 में CAT के दिसंबर 2024 के फैसले को बरकरार रखा था। CAT ने अपने आदेश में कहा था कि यदि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने समीर वानखेड़े के नाम की अनुशंसा की है, तो उन्हें 1 जनवरी 2021 से अतिरिक्त आयुक्त (Additional Commissioner) के पद पर पदोन्नति दी जानी चाहिए।
केंद्र सरकार ने दलील दी थी कि वानखेड़े के खिलाफ कई मामले लंबित हैं, जिनमें CBI में दर्ज FIR, प्रवर्तन निदेशालय (ED) के तहत ECIR, और संभावित चार्जशीट शामिल हैं। इसी आधार पर उनकी पदोन्नति रोकी गई थी। हालांकि, CAT और दिल्ली हाई कोर्ट दोनों ने यह स्पष्ट किया कि अब तक न तो कोई चार्जशीट दाखिल हुई है और न ही कोई औपचारिक विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है, ऐसे में प्रमोशन रोकने का कोई वैध आधार नहीं बनता।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से समीर वानखेड़े की पदोन्नति का रास्ता साफ हो गया है और यह निर्णय सेवा मामलों में लंबित जांच के आधार पर प्रमोशन रोकने की नीति पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।

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