उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
उल्हासनगर शहर के दो महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं। सेक्शन-30 निवासी एवं सामाजिक कार्यकर्ता अमर जगियासी ने एक ओर वीटीसी ग्राउंड पर निर्माणाधीन बालासाहेब ठाकरे क्रीड़ा संकुल में हुए करोड़ों रुपये के भुगतान की पारदर्शी जांच की मांग उठाई है, वहीं दूसरी ओर उल्हासनगर-4 स्थित श्मशान भूमि से संबंधित आरक्षित जमीन को कथित अतिक्रमण से बचाने के लिए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
क्रीड़ा संकुल में 26.36 करोड़ रुपये के भुगतान पर उठे सवाल
विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उल्हासनगर महानगरपालिका द्वारा वीटीसी ग्राउंड पर निर्माणाधीन बालासाहेब ठाकरे क्रीड़ा संकुल के लिए संबंधित ठेकेदार को अब तक 26 करोड़ 36 लाख 66 हजार 923 रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
हालांकि, सूत्रों एवं स्थल पर किए गए आकलन के अनुसार, वर्तमान में परियोजना स्थल पर केवल भूतल सहित दो मंजिला ढांचा तथा लगभग 75 हजार वर्ग फुट आरसीसी एवं ईंट का निर्माण कार्य ही पूर्ण दिखाई देता है। निर्माण क्षेत्र के जानकारों द्वारा बाजार की प्रचलित दरों के आधार पर इस स्तर के कार्य की अनुमानित लागत लगभग 6 से 6.5 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
इसी कथित अंतर को देखते हुए अमर जगियासी ने उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त को लिखित शिकायत सौंपते हुए पूरे प्रकल्प की स्वतंत्र तृतीय पक्षीय तकनीकी एवं वित्तीय लेखा परीक्षा (थर्ड पार्टी टेक्निकल एवं फाइनेंशियल ऑडिट) कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि जब तक ऑडिट रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक संबंधित ठेकेदार को किसी भी प्रकार का अतिरिक्त भुगतान न किया जाए।
यदि अतिरिक्त भुगतान साबित हो तो राशि सड़क निर्माण में लगाने की मांग
जगियासी ने अपनी शिकायत में यह भी सुझाव दिया है कि यदि जांच में अतिरिक्त भुगतान या वित्तीय अनियमितता सामने आती है और उसकी वसूली होती है, तो उस राशि का उपयोग सेक्शन-30 मार्ग के निर्माण एवं सुधार कार्य में किया जाए।
उन्होंने कहा कि यही सड़क वीटीसी ग्राउंड का मुख्य प्रवेश मार्ग है, जहां प्रतिदिन पांच हजार से अधिक वाहन आवागमन करते हैं। सड़क की जर्जर स्थिति, गड्ढों और बरसात के दौरान जलभराव के कारण यहां आए दिन दुर्घटनाएं होने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। ऐसे में इस मार्ग का शीघ्र निर्माण जनहित में अत्यंत आवश्यक है।
श्मशान भूमि से जुड़ी आरक्षित जमीन पर कथित कब्जे की आशंका
दूसरे महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में अमर जगियासी ने उल्हासनगर-4 स्थित श्मशान भूमि के सामने मौजूद उस आरक्षित भूमि का मामला उठाया है, जिसे हिंदू मृत बच्चों के दफन संस्कार के लिए सुरक्षित बताया जाता है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, इस भूमि पर कुछ कथित भूमि माफिया द्वारा कब्जा करने का प्रयास किए जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है। इस संबंध में जगियासी पिछले तीन महीनों से उल्हासनगर महानगरपालिका के मालमता विभाग के साथ लगातार पत्राचार कर रहे हैं।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित भूमि का विधिवत सीमांकन (डिमार्केशन) कराया जाए तथा राजस्व अभिलेख (7/12) एवं नगर भूमि अभिलेखों में इस भूमि का स्वामित्व स्पष्ट रूप से उल्हासनगर महानगरपालिका के नाम दर्ज कराया जाए। उनका कहना है कि ऐसा होने से भविष्य में किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे या स्वामित्व विवाद की संभावना समाप्त हो जाएगी और सार्वजनिक संपत्ति सुरक्षित रहेगी।
स्थानीय नागरिकों का मिला समर्थन
सूत्रों के अनुसार, सेक्शन-30 सहित आसपास के क्षेत्रों के अनेक नागरिक अमर जगियासी द्वारा उठाए गए इन दोनों जनहित के मुद्दों का समर्थन कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा सार्वजनिक संपत्तियों को अतिक्रमण से बचाना प्रशासन और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
अब शहरवासियों की निगाहें उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वीटीसी ग्राउंड क्रीड़ा संकुल में किए गए भुगतान और निर्माण कार्य की जांच की मांग पर क्या निर्णय लिया जाता है तथा श्मशान भूमि से जुड़ी आरक्षित जमीन की सुरक्षा और सीमांकन को लेकर प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है।

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