मुंबई: दिनेश मीरचंदानी
महाराष्ट्र विधानसभा में निर्वाचित विधायकों की कुल संख्या केवल 288 है, लेकिन राज्यभर की सड़कों पर 'MLA' (विधायक) स्टिकर लगी गाड़ियों की बड़ी संख्या लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। मुंबई, ठाणे, पुणे, नासिक, नागपुर, कल्याण-डोंबिवली, उल्हासनगर समेत कई शहरों में बड़ी संख्या में ऐसे वाहन दिखाई देते हैं, जिन पर 'MLA', 'Government of Maharashtra', 'On Duty' या अन्य वीआईपी पहचान वाले स्टिकर लगे होते हैं।
इसी को लेकर अब आम नागरिकों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि जब पूरे राज्य में केवल 288 विधायक हैं, तो आखिर इतनी बड़ी संख्या में 'MLA' स्टिकर लगी गाड़ियां किसकी हैं? क्या इन सभी वाहनों का उपयोग वास्तव में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों द्वारा किया जा रहा है, या फिर प्रभाव जमाने और विशेष पहचान दिखाने के लिए इन स्टिकरों का अनधिकृत इस्तेमाल किया जा रहा है?
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी यह मुद्दा समय-समय पर चर्चा में रहा है। जानकारों का कहना है कि सार्वजनिक पदों और संवैधानिक पहचान का अनधिकृत उपयोग कानून के शासन के लिए चुनौती बन सकता है। इससे न केवल आम लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है, बल्कि कई बार ऐसे स्टिकरों का इस्तेमाल ट्रैफिक नियमों से बचने, सरकारी प्रतिष्ठानों में अनावश्यक प्रभाव दिखाने या वीआईपी होने का आभास देने के लिए भी किया जाता है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को बिना वैधानिक अधिकार के सरकारी पद अथवा जनप्रतिनिधि का संकेत देने वाले स्टिकर या प्रतीक का उपयोग नहीं करना चाहिए। यदि ऐसा किया जाता है तो संबंधित विभाग आवश्यक कार्रवाई कर सकता है। इसी कारण पुलिस और परिवहन विभाग समय-समय पर विशेष अभियान चलाकर अनधिकृत वीआईपी स्टिकर, हूटर, फ्लैशर लाइट और अन्य अवैध पहचान चिह्नों के खिलाफ कार्रवाई करते रहे हैं।
हालांकि, इसके बावजूद सड़कों पर ऐसे वाहनों की संख्या कम होती दिखाई नहीं देती। कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों का मानना है कि इस विषय पर व्यापक स्तर पर अभियान चलाकर नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि वीआईपी संस्कृति पर अंकुश लगाया जा सके और सभी नागरिकों के लिए समान कानून की भावना मजबूत हो।
इस बीच सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा जमकर वायरल हो रहा है। एक व्यंग्यात्मक पोस्ट में लिखा गया—
"महाराष्ट्र में विधायक 288, लेकिन 'MLA' स्टिकर वाली गाड़ियां लाखों! लगता है राज्य में विधायक कम और विधायकों की गाड़ियां ज्यादा हैं… हर घर विधायक योजना!"
यह पोस्ट लोगों के बीच तेजी से साझा की जा रही है और वीआईपी संस्कृति पर कटाक्ष के रूप में देखी जा रही है।
हालांकि, सोशल मीडिया पर प्रचलित 2,80,000 'MLA' स्टिकर लगी गाड़ियों का दावा आधिकारिक रूप से प्रमाणित नहीं है। यह संख्या व्यंग्य और जनचर्चा के संदर्भ में साझा की जाती है। बावजूद इसके, अनधिकृत वीआईपी स्टिकरों का मुद्दा लंबे समय से सार्वजनिक बहस का विषय बना हुआ है और नागरिकों की मांग है कि इस पर प्रभावी एवं समान रूप से कानून का पालन सुनिश्चित किया जाए।

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