उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
उल्हासनगर शहर में सड़कों की दुर्दशा, गड्ढों की भरमार, दूषित पेयजल, सीवरेज व्यवस्था की बदहाली और वित्तीय संकट जैसी गंभीर समस्याओं के बीच उल्हासनगर महानगरपालिका के नगरसेवकों का गुवाहाटी प्रशिक्षण दौरा अब बड़े विवाद का विषय बन गया है। इस चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम पर महानगरपालिका के खजाने से लगभग 65 लाख रुपये खर्च किए जाने की प्रशासनिक मंजूरी दी गई, जिसके बाद शहरभर में इसकी आलोचना तेज हो गई है।
नागरिकों का कहना है कि जिन जनप्रतिनिधियों को शहर की बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए मैदान में होना चाहिए था, वे मानसून के दौरान गुवाहाटी के पांच सितारा होटल में प्रशिक्षण लेने पहुंचे। ऐसे समय में जब महानगरपालिका आर्थिक संकट से गुजर रही है और विकास कार्यों के लिए धन की कमी बताई जा रही है, तब इस खर्च को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
22 से 26 जुलाई तक चला प्रशिक्षण, रेडिसन ब्लू होटल में हुई व्यवस्था
महानगरपालिका के सचिव कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 22 जुलाई से 26 जुलाई के बीच आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का आयोजन गुवाहाटी स्थित पांच सितारा रेडिसन ब्लू होटल में किया गया था।
चार दिवसीय कार्यक्रम के दौरान नगरसेवकों के लिए चार बार चाय-नाश्ता, पांच बार दोपहर का भोजन, चार बार रात्रि भोजन, पांच दिनों तक स्थानीय परियोजनाओं के निरीक्षण के लिए वाहन, सभागार, स्टेशनरी और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई थी। इन व्यवस्थाओं पर प्रति नगरसेवक ₹52,980 खर्च निर्धारित किया गया।
इसके अलावा मुंबई–गुवाहाटी–मुंबई हवाई यात्रा के लिए ₹21,740 प्रति व्यक्ति का प्रावधान किया गया। इस प्रकार एक नगरसेवक पर कुल अनुमानित खर्च ₹74,720 बैठता है। सचिव कार्यालय के अनुसार इस पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए करीब ₹65 लाख के व्यय को प्रशासनिक मंजूरी दी गई थी।
प्रशिक्षण कम, पर्यटन ज्यादा? सोशल मीडिया से बढ़ा विवाद
हालांकि यह प्रशिक्षण 76 नगरसेवकों के लिए आयोजित किया गया था, लेकिन जानकारी के अनुसार सभी नगरसेवक इसमें शामिल नहीं हुए। इस बीच सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों ने पूरे मामले को और अधिक विवादास्पद बना दिया।
इन तस्वीरों में कई नगरसेवक अपने परिवार के सदस्यों के साथ दिखाई दिए, जिसके बाद शहर में यह चर्चा शुरू हो गई कि यह वास्तव में प्रशिक्षण कार्यक्रम था या मानसून पर्यटन। नागरिकों ने सवाल उठाया कि यदि परिवार के सदस्य भी इस यात्रा में शामिल थे तो उनका खर्च किसने वहन किया। क्या यह निजी खर्च था या किसी अन्य माध्यम से इसका भुगतान किया गया? इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
मुंबई की संस्था, फिर प्रशिक्षण गुवाहाटी में क्यों?
महानगरपालिका के जनसंपर्क अधिकारी प्राजक्त कुलकर्णी के अनुसार यह प्रशिक्षण मुंबई स्थित अखिल भारतीय स्थानीय स्वराज्य संस्था द्वारा आयोजित किया गया था। प्रशिक्षण में संवाद कौशल, कार्यालयीन कार्यप्रणाली, प्रस्तावों और प्रश्नों की प्रस्तुति, अभिलेख तैयार करना, प्रभाग विकास और नियोजन जैसे विषय शामिल थे।
हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब प्रशिक्षण देने वाली संस्था स्वयं मुंबई में स्थित है, तो कार्यक्रम गुवाहाटी में आयोजित करने की आवश्यकता क्या थी। कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों का कहना है कि यही प्रशिक्षण मुंबई या उल्हासनगर में आयोजित किया जा सकता था, जिससे लाखों रुपये के सार्वजनिक धन की बचत होती।
700 करोड़ से अधिक का बकाया, फिर भी खर्च पर सवाल
उल्हासनगर महानगरपालिका पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रही है। जानकारी के अनुसार पालिका पर 700 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। ठेकेदारों के भुगतान लंबित हैं और एमआईडीसी को पानी आपूर्ति का भुगतान करने में भी आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
संपत्ति कर की वसूली अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रही है, जिसके कारण राजस्व पर लगातार दबाव बना हुआ है। दूसरी ओर शहर की अधिकांश सड़कें गड्ढों से भरी हुई हैं, जलनिकासी और सीवरेज व्यवस्था पर लगातार शिकायतें मिल रही हैं तथा पेयजल आपूर्ति को लेकर भी नागरिक परेशान हैं।
स्थिति यह है कि महानगरपालिका के स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए दो महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अनेक छात्रों को अब तक आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है।
जनता पूछ रही है—प्राथमिकता शहर या पर्यटन?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद शहर में यह बहस तेज हो गई है कि आखिर सार्वजनिक धन का उपयोग किस प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये की आर्थिक तंगी का हवाला देकर विकास कार्यों में कटौती की जा रही है, तो फिर लाखों रुपये खर्च कर दूर-दराज़ राज्यों में प्रशिक्षण आयोजित करने की क्या आवश्यकता थी।
अब लोगों की नजर इस बात पर है कि महानगरपालिका प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस विवाद पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं तथा भविष्य में ऐसे खर्चों को लेकर क्या नीति अपनाई जाएगी। दूसरी ओर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने भी पूरे मामले की पारदर्शी जांच और खर्च का विस्तृत विवरण सार्वजनिक करने की मांग तेज कर दी है।
नोट: नगरसेवक ऐश में, उल्हासनगर की जनता त्रस्त।

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