मुंबई: दिनेश मीरचंदानी
महाराष्ट्र में जाति प्रमाणपत्रों की वैधता को लेकर की जा रही जांच के बीच एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक फैसला सामने आया है। मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की दो महिला पार्षदों की सदस्यता उनके जाति प्रमाणपत्र अमान्य पाए जाने के बाद समाप्त कर दी गई है। इस कार्रवाई में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता नवाब मलिक की भांजी सनोबर मलिक और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की पार्षद नाज़िया पटेल को अयोग्य घोषित किया गया है।
राज्य सरकार ने यह निर्णय सक्षम जाति सत्यापन समिति की रिपोर्ट के आधार पर लिया। समिति ने जांच के दौरान दोनों जनप्रतिनिधियों के अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के जाति प्रमाणपत्रों को वैध नहीं माना। इसके बाद महाराष्ट्र के संबंधित प्रावधानों के तहत उनकी पार्षद सदस्यता समाप्त करने का आदेश जारी किया गया।
सनोबर मलिक मुंबई महानगरपालिका के वार्ड क्रमांक 137, जबकि नाज़िया पटेल वार्ड क्रमांक 98 से निर्वाचित हुई थीं। दोनों वार्ड ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित थे। आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने के लिए वैध जाति प्रमाणपत्र और उसका सत्यापन अनिवार्य होता है। जाति प्रमाणपत्र अमान्य घोषित होने के बाद संबंधित निर्वाचित प्रतिनिधि की सदस्यता स्वतः समाप्त होने का प्रावधान है।
इस फैसले के बाद दोनों वार्डों की सीटें रिक्त हो गई हैं। माना जा रहा है कि निर्वाचन आयोग और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन सीटों पर उपचुनाव कराए जा सकते हैं। हालांकि, उपचुनाव की तारीखों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कार्रवाई का असर आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ने वाले अन्य जनप्रतिनिधियों पर भी पड़ सकता है। जाति प्रमाणपत्रों की जांच को लेकर राज्य में पहले भी कई जनप्रतिनिधियों की सदस्यता पर सवाल उठ चुके हैं और विभिन्न मामलों की सुनवाई जारी है।
यह फैसला एक बार फिर स्पष्ट करता है कि आरक्षित श्रेणी की सीटों पर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए जाति प्रमाणपत्र की वैधता और उसका विधिवत सत्यापन कानूनी रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि जांच में प्रमाणपत्र अमान्य पाया जाता है, तो निर्वाचित प्रतिनिधि की सदस्यता समाप्त की जा सकती है।

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