मुंबई/नई दिल्ली: दिनेश मीरचंदानी
देश के सबसे चर्चित ऑनलाइन सट्टेबाजी मामलों में शामिल महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप प्रकरण में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। महादेव ऐप के कथित मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर को इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के बाद ओमान से गिरफ्तार कर लिया गया है। माना जा रहा है कि जल्द ही उसे भारत लाकर पूछताछ की जाएगी। इस गिरफ्तारी को ऑनलाइन सट्टेबाजी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के खिलाफ अब तक की सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, महादेव बेटिंग ऐप के माध्यम से देशभर में हजारों करोड़ रुपये के अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी कारोबार का संचालन किए जाने के आरोप हैं। इस मामले में पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच एजेंसियां तथा अन्य संबंधित संस्थाएं मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला लेन-देन और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क की गहन जांच कर रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का दायरा और व्यापक होने की संभावना है। एजेंसियां उन व्यक्तियों, ऑपरेटरों और कथित बुकी नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही हैं, जिनके माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों में ऑनलाइन सट्टेबाजी का संचालन किए जाने की आशंका है। डिजिटल भुगतान, बैंक खातों, हवाला चैनलों, विदेशी कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी गहन जांच की जा रही है।
उल्हासनगर के कथित सट्टा नेटवर्क पर भी उठे सवाल
जांच के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि महाराष्ट्र के उल्हासनगर से जुड़े कुछ कथित सट्टा संचालकों और बुकी नेटवर्क की गतिविधियां भी जांच एजेंसियों के रडार पर आ सकती हैं। सूत्रों के अनुसार, इन नेटवर्कों के गोवा, दुबई और अन्य विदेशी ठिकानों से कथित संपर्कों की भी जांच किए जाने की संभावना जताई जा रही है। यदि वित्तीय लेन-देन और डिजिटल ट्रेल में कोई कड़ी मिलती है, तो जांच एजेंसियां संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ कर सकती हैं।
हालांकि, अब तक किसी भी व्यक्ति, बुकी या संगठन का नाम ईडी, सीबीआई, पुलिस अथवा किसी अन्य जांच एजेंसी द्वारा आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता की पुष्टि इस समय नहीं की जा सकती।
पूरे नेटवर्क की परतें खुलने की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। इससे देशभर में फैले ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट, हवाला नेटवर्क, फर्जी कंपनियों, बैंकिंग चैनलों तथा कथित सहयोगियों की भूमिका पर भी नया खुलासा होने की संभावना है। जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क के आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय पहलुओं की गहराई से जांच कर रही हैं।
फिलहाल जांच जारी है और एजेंसियों की ओर से आधिकारिक रूप से जितनी जानकारी साझा की जाएगी, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई और खुलासे सामने आएंगे।

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