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उल्हासनगर मनपा के पीडब्ल्यूडी विभाग में लंबे समय से पदस्थ संदीप जाधव को लेकर सवाल तेज हो गए हैं। तबादला न होने और कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच नागरिकों ने मनपा आयुक्त मनीषा आव्हाले से जवाब और कार्रवाई की मांग की है।


(फाइल फोटो) 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के लोक निर्माण (PWD) विभाग में लंबे समय से कार्यरत अधिकारी संदीप जाधव को लेकर शहर में एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। स्थानीय नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से महानगरपालिका आयुक्त मनीषा आव्हाले से यह सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर संदीप जाधव की अब तक किसी अन्य विभाग में बदली क्यों नहीं की गई।

महाराष्ट्र सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (GR) में अधिकारियों के स्थानांतरण को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित हैं, जिनके तहत सामान्यतः तीन वर्ष की सेवा अवधि पूरी होने के बाद तबादला किया जाता है। ऐसे में उल्हासनगर महानगरपालिका के लोक निर्माण (PWD) विभाग में संदीप जाधव के लंबे समय से लगातार कार्यरत रहने पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि जब अन्य अधिकारियों का समय-समय पर स्थानांतरण होता है, तो संदीप जाधव की अब तक दूसरे विभाग में नियुक्ति क्यों नहीं की गई। इसी मुद्दे को लेकर प्रशासनिक पारदर्शिता और स्थानांतरण नीति के पालन पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, संदीप जाधव के खिलाफ पहले से ही एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा जांच किए जाने की बात कही जा रही है। उन पर भ्रष्टाचार से जुड़े विभिन्न आरोप लगाए गए हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि उनके नाम अथवा उनसे जुड़ी कथित संपत्तियों की भी जांच एजेंसी द्वारा पड़ताल की जा रही है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सूत्रों का यह भी आरोप है कि लोक निर्माण विभाग में होने वाली टेंडर प्रक्रिया के संचालन और प्रबंधन में संदीप जाधव की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। आरोप यह भी हैं कि वे कथित रूप से विवादित अथवा फर्जी बिलों पर हस्ताक्षर करते हैं। इसके अलावा कुछ बड़े ठेकेदारों के साथ टेंडर प्रक्रिया में उनकी कथित साझेदारी होने के भी आरोप लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों के समर्थन में अब तक कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया गया है और न ही संबंधित अधिकारी की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने आई है।

इन आरोपों और चर्चाओं के बीच अब शहर के नागरिकों की मांग है कि यदि किसी अधिकारी के खिलाफ जांच या गंभीर आरोप लंबित हैं, तो पारदर्शिता बनाए रखने के लिए संबंधित मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि स्थानांतरण नीति लागू होती है, तो उसका पालन सुनिश्चित किया जाए। नागरिकों का कहना है कि इससे प्रशासन की निष्पक्षता और जनता का विश्वास दोनों मजबूत होंगे।

वहीं, इस पूरे मामले में उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। संदीप जाधव की ओर से भी इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

(अस्वीकरण: इस समाचार में उल्लिखित भ्रष्टाचार, जांच, टेंडर प्रबंधन और अन्य सभी आरोप संबंधित सूत्रों एवं स्थानीय चर्चाओं पर आधारित हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारी या महानगरपालिका प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)














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