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मुलुंड के वी.पी.एम्स बी.आर. टोल इंग्लिश हाई स्कूल में धार्मिक, सांस्कृतिक एवं भारतीय भाषा उत्सव का भव्य आयोजन, संत परंपरा और नैतिक मूल्यों का दिया गया संदेश।


 


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

आषाढ़ी एकादशी के पावन अवसर पर मुलुंड (पूर्व) स्थित वी.पी.एम्स बी.आर. टोल इंग्लिश हाई स्कूल में धार्मिक आस्था, भारतीय संस्कृति और मातृभाषाओं के सम्मान को समर्पित एक भव्य धार्मिक, सांस्कृतिक एवं भारतीय भाषा उत्सव का आयोजन किया गया। पूरे विद्यालय परिसर में "विठ्ठल... विठ्ठल..." के जयघोष, संतों के अभंग, पारंपरिक नृत्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आध्यात्मिक वातावरण ने ऐसा समां बांधा कि उपस्थित विद्यार्थी, शिक्षक, अभिभावक एवं अतिथि भक्ति रस में सराबोर हो गए।

कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्री विठ्ठल माऊली की भव्य पालकी यात्रा के आगमन से हुआ। इसके बाद विद्यालय की प्रधानाचार्या अजीता नायर ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का विधिवत उद्घाटन किया। सामूहिक प्रार्थना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसके पश्चात विद्यार्थियों ने संत परंपरा पर आधारित मराठी अभंगों का मधुर गायन और वारकरी संप्रदाय की संस्कृति को जीवंत करती आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोह लिया। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कलाकार विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बन रहा था।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने भक्त पुंडलिक और भगवान विठ्ठल के जीवन प्रसंगों पर आधारित प्रभावशाली लघु नाटिका प्रस्तुत की, जिसमें सेवा, समर्पण और भक्ति का संदेश दिया गया। संत तुकाराम महाराज के विचारों पर आधारित प्रेरक प्रस्तुति, पारंपरिक भारुड, सामाजिक जागरूकता से ओतप्रोत पथनाट्य तथा भगवान विठ्ठल को समर्पित भावपूर्ण पत्र वाचन ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

विशेष रूप से प्रस्तुत किए गए पथनाट्य में विद्यार्थियों ने आधुनिक जीवनशैली के बीच पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण, पीढ़ियों के बीच संवाद, भारतीय संस्कृति की विरासत और मातृभाषाओं के महत्व को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि तकनीकी युग में भी अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव बनाए रखना समय की आवश्यकता है।

वारकरी संप्रदाय के प्रसिद्ध अभंगों और भगवान विठ्ठल के जयघोष से विद्यालय का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा। पारंपरिक मराठी वेशभूषा में सजे विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से महाराष्ट्र की समृद्ध लोक परंपरा और संत संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की। कार्यक्रम में प्रस्तुत प्रत्येक प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा और विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या अजीता नायर ने अपने संबोधन में कहा कि संतों की शिक्षाएं आज भी समाज के लिए उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी सदियों पहले थीं। उन्होंने विद्यार्थियों से संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम और अन्य संत महापुरुषों के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाएं हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं और उनका संरक्षण प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी और सांस्कृतिक गौरव की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि विद्यालय का उद्देश्य केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों से भी जोड़ना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए विद्यालय समय-समय पर ऐसे धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन करता है, ताकि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।

कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों ने भगवान विठ्ठल को समर्पित मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर पूरे समारोह को यादगार बना दिया। पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि शिक्षा तभी सार्थक है जब उसके साथ संस्कार, संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और मातृभाषा के प्रति सम्मान भी जुड़ा हो। आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर आयोजित यह भव्य उत्सव न केवल भक्ति और आस्था का प्रतीक बना, बल्कि भारतीय संस्कृति, संत परंपरा और भाषा संरक्षण के प्रति नई पीढ़ी को प्रेरित करने वाला एक अविस्मरणीय आयोजन भी साबित हुआ।



















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