उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
उल्हासनगर महानगरपालिका में निविदा प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। मनपा आयुक्त मनीषा आव्हाले की ओर से ऑनलाइन टेंडरिंग प्रक्रिया के संबंध में पत्र जारी किए जाने के बाद ठेकेदारों और प्रशासनिक स्तर पर इसे लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
ऑनलाइन टेंडरिंग को पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। हालांकि, कुछ छोटे ठेकेदारों की ओर से यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि नई प्रक्रिया में तकनीकी और आर्थिक शर्तों के कारण उनके लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में छोटे और स्थानीय ठेकेदारों के हितों को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट नियम और समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग उठ रही है।
मैनुअल टेंडरिंग के बाद अब ऑनलाइन प्रक्रिया पर नजर
मनपा में पूर्व में अपनाई जाने वाली मैनुअल टेंडरिंग प्रक्रिया को लेकर भी समय-समय पर अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी के आरोप लगाए जाते रहे हैं। अब ऑनलाइन प्रणाली लागू होने के बाद यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि नई व्यवस्था वास्तव में सभी योग्य ठेकेदारों को समान अवसर देती है या नहीं।
ठेकेदारों से जुड़े कुछ वर्गों का कहना है कि ऑनलाइन प्रक्रिया में तकनीकी पात्रता, दस्तावेजी शर्तों, टेंडर की जानकारी और समयसीमा जैसी सभी व्यवस्थाएं स्पष्ट एवं समान होनी चाहिए, ताकि किसी विशेष समूह या चुनिंदा ठेकेदारों को अनुचित लाभ मिलने की संभावना न रहे।
चुनिंदा ठेकेदारों को काम मिलने के आरोप
उल्हासनगर मनपा में कुछ ठेकेदारों को बार-बार काम मिलने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरी निविदा प्रक्रिया, पात्रता मानदंड, तकनीकी मूल्यांकन और वर्क ऑर्डर जारी करने की प्रक्रिया को सार्वजनिक एवं पारदर्शी रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यदि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या पक्षपात हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग भी सामने आ सकती है।
PWD विभाग की भूमिका पर भी चर्चा
पूरे मामले के बीच मनपा के PWD विभाग के एक वरिष्ठ कर्मचारी और एक महिला कर्मचारी की भूमिका को लेकर चर्चाएं सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि, किसी भी कर्मचारी के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों की फिलहाल आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और बिना ठोस दस्तावेज या जांच के किसी व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
ऑनलाइन टेंडरिंग की असली परीक्षा पारदर्शिता
जानकारों के अनुसार, ऑनलाइन टेंडरिंग का उद्देश्य प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धात्मक और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाना है। इसलिए यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि सभी योग्य ठेकेदारों को समान अवसर मिले, टेंडर की शर्तें स्पष्ट हों और पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड के आधार पर संचालित की जाए।
अब सवाल यह है कि क्या उल्हासनगर महानगरपालिका की नई ऑनलाइन टेंडरिंग व्यवस्था छोटे ठेकेदारों को भी समान अवसर देगी और क्या इससे निविदा प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित होगी?
इन सवालों का स्पष्ट जवाब आने वाले दिनों में निविदाओं की प्रक्रिया और प्रशासन की ओर से जारी होने वाली जानकारी से ही सामने आएगा।

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