उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
उल्हासनगर शहर में सनद वितरण से जुड़े कथित भ्रष्टाचार का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता नोवेल साल्वे ने महाराष्ट्र शासन के राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर उल्हासनगर के उपविभागीय अधिकारी विजयानंद शर्मा के खिलाफ कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कराने की मांग की है। उन्होंने अधिकारी को निलंबित करने, उनकी संपत्ति की जांच कराने और पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग उठाई है। साल्वे ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे 28 अक्टूबर 2026 से मुंबई के आजाद मैदान में दोबारा अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करेंगे।
पहले भी कर चुके हैं अनशन, शासन के निर्देशों का दिया हवाला
नोवेल साल्वे के पत्र के अनुसार, उन्होंने सनद वितरण में कथित भ्रष्टाचार की विभागीय जांच कराने के लिए कोंकण आयुक्त से लेकर महाराष्ट्र शासन तक कई बार पत्राचार किया था। उनका आरोप है कि लगातार पत्राचार के बावजूद उन्हें कोई ठोस कार्रवाई होती हुई दिखाई नहीं दी। इसी के विरोध में उन्होंने 23 सितंबर 2026 को मुंबई के आजाद मैदान में जनहित के मुद्दे पर अनिश्चितकालीन अनशन किया था।
साल्वे का दावा है कि उनके अनशन का संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार ने कोंकण आयुक्त और ठाणे जिलाधिकारी को निर्धारित समयसीमा में मामले की जांच कर रिपोर्ट शासन को सौंपने के निर्देश दिए थे। हालांकि, उनके अनुसार, अब तक इस मामले में अपेक्षित और पारदर्शी कार्रवाई सामने नहीं आई है।
इस संबंध में शासन की ओर से जारी निर्देशों, जांच की वर्तमान स्थिति और संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
सैकड़ों करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार की आशंका जताई
सनद वितरण से संबंधित मामलों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताते हुए नोवेल साल्वे ने मामले की गहराई से जांच कराने की मांग की है। उनके पत्र में इस कथित प्रकरण में सैकड़ों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार की आशंका व्यक्त की गई है।
हालांकि, भ्रष्टाचार की कथित राशि और आरोपों की वास्तविकता की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों, आधिकारिक जांच तथा सक्षम एजेंसियों की रिपोर्ट से ही हो सकेगी। फिलहाल, इन आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
साल्वे की प्रमुख मांगों में उपविभागीय अधिकारी विजयानंद शर्मा का निलंबन, उनकी संपत्ति की जांच और सनद वितरण से संबंधित सभी मामलों की सीबीआई से जांच कराना शामिल है। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच से कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी और जिम्मेदारी तय करने में मदद मिलेगी।
15 दिनों का अल्टीमेटम, 28 अक्टूबर से आंदोलन की चेतावनी
राजस्व विभाग को भेजे गए पत्र में साल्वे ने स्पष्ट किया है कि पत्र प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे 28 अक्टूबर 2026 से मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करेंगे। उन्होंने कहा है कि यह आंदोलन मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा।
पत्र में अनशन के दौरान किसी अप्रिय घटना की स्थिति में महाराष्ट्र शासन के राजस्व विभाग को जिम्मेदार ठहराने की बात भी कही गई है। इस चेतावनी के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और शासन स्तर पर पहले दिए गए कथित जांच निर्देशों की स्थिति क्या है।
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल, जवाब का इंतजार
यह मामला केवल एक अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही, सनद वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से भी जुड़ा है।
यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं, तो सक्षम जांच एजेंसी के माध्यम से तथ्यों की निष्पक्ष जांच कराना महत्वपूर्ण होगा। वहीं, संबंधित अधिकारी को भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और नियमों के अनुरूप हो।
फिलहाल प्रमुख सवाल यही हैं:
क्या राजस्व विभाग इस मामले में पहले दिए गए जांच निर्देशों की स्थिति स्पष्ट करेगा? क्या शिकायतकर्ता को जांच की प्रगति से अवगत कराया जाएगा? और क्या 28 अक्टूबर से प्रस्तावित अनशन से पहले प्रशासन कोई ठोस कदम उठाएगा?
इन सवालों के जवाब संबंधित विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच की स्थिति सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
नोट: यह समाचार सामाजिक कार्यकर्ता नोवेल साल्वे द्वारा प्रस्तुत पत्र और उसमें किए गए दावों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित अधिकारी एवं प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।



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