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उल्हासनगर में बढ़ रही जनआक्रोश की भावना: आयुक्त मनीषा आव्हाले से मुलाकात नहीं होने पर नागरिकों ने जताई नाराजगी.!


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका की आयुक्त मनीषा आव्हाले से आम नागरिकों की नियमित मुलाकात नहीं हो पाने के कारण शहर में असंतोष का माहौल बनता दिखाई दे रहा है। नागरिकों का कहना है कि महानगरपालिका प्रशासन द्वारा प्रत्येक मंगलवार को दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक आयुक्त से मिलने का समय निर्धारित किया गया है, ताकि लोग अपनी समस्याएं, शिकायतें और सुझाव सीधे प्रशासन के सर्वोच्च अधिकारी तक पहुंचा सकें। हालांकि, पिछले कई सप्ताहों से नागरिकों को आयुक्त से मुलाकात का अवसर नहीं मिल पा रहा है।

शिकायत लेकर महानगरपालिका मुख्यालय पहुंचने वाले नागरिकों का आरोप है कि कई बार उन्हें आयुक्त कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा बताया जाता है कि आयुक्त मंत्रालय में किसी बैठक के लिए गई हैं, जबकि कुछ अवसरों पर अन्य सरकारी कार्यों में व्यस्त होने का कारण बताया जाता है। इसके चलते दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले नागरिकों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है।

शहर के कई नागरिकों का कहना है कि वे जलापूर्ति, सड़क मरम्मत, सफाई व्यवस्था, अवैध निर्माण, संपत्ति कर, स्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों को लेकर आयुक्त से मिलने पहुंचते हैं, लेकिन लगातार मुलाकात नहीं हो पाने से उनकी समस्याओं के समाधान में देरी हो रही है। इससे लोगों में यह भावना बढ़ रही है कि उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं है।

नागरिकों के बीच अब यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि यदि महानगरपालिका आयुक्त से ही मुलाकात संभव नहीं हो पा रही है, तो वे अपनी समस्याओं और शिकायतों के निराकरण के लिए किस अधिकारी के पास जाएं। कई लोगों का मानना है कि जनसुनवाई की व्यवस्था का उद्देश्य नागरिकों और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करना होता है, लेकिन यदि निर्धारित समय पर भी अधिकारी उपलब्ध नहीं रहते, तो इस व्यवस्था का महत्व कम हो जाता है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों का कहना है कि महानगरपालिका प्रशासन को इस विषय पर स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। यदि आयुक्त किसी कारणवश निर्धारित समय पर उपलब्ध नहीं हैं, तो नागरिकों की शिकायतें सुनने और उन पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए किसी वरिष्ठ अधिकारी को अधिकृत किया जाना चाहिए। साथ ही नागरिकों को पूर्व सूचना देने की व्यवस्था भी होनी चाहिए, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

इस पूरे मुद्दे को लेकर शहर में चर्चा का माहौल है और नागरिक उम्मीद कर रहे हैं कि महानगरपालिका प्रशासन जनसुनवाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाएगा, ताकि आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो सके और प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत बना रहे।















उल्हासनगर के ज्वलंत मुद्दों को लेकर FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे से मुलाकात की तैयारी, सामाजिक संगठन और बुद्धिजीवी होंगे एकजुट।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर के कई सामाजिक संगठन, नागरिक मंच और शहर के कुछ प्रमुख बुद्धिजीवी जल्द ही FDA आयुक्त Tukaram Munde से मुलाकात कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि इस प्रस्तावित बैठक में शहर से जुड़े विभिन्न जनहित के मुद्दों, प्रशासनिक चुनौतियों तथा नागरिकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल शहर में खाद्य सुरक्षा, अवैध गुटखा कारोबार, जनस्वास्थ्य से जुड़े विषयों तथा आम नागरिकों को प्रभावित करने वाले अन्य मुद्दों पर आयुक्त का ध्यान आकर्षित करेगा। इसके अलावा, विभिन्न संगठनों द्वारा तैयार किए गए शिकायत पत्र और सुझाव भी आयुक्त के समक्ष प्रस्तुत किए जा सकते हैं।

सूत्रों का कहना है कि हाल के दिनों में FDA द्वारा राज्यभर में चलाए जा रहे सख्त अभियान और आयुक्त तुकाराम मुंढे की सक्रिय कार्यशैली को देखते हुए स्थानीय संगठनों ने सीधे संवाद का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है। इस मुलाकात के माध्यम से शहर की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कार्रवाई की मांग किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि, इस प्रस्तावित बैठक की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन शहर के सामाजिक और नागरिक संगठनों के बीच इसे लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। यदि यह बैठक होती है, तो उल्हासनगर से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को राज्य स्तर पर प्रभावी ढंग से उठाने का अवसर मिल सकता है।

फिलहाल सभी की निगाहें इस संभावित मुलाकात पर टिकी हैं, जिससे शहर की विभिन्न समस्याओं के समाधान को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।














भारत गौरव एक्सीलेंस अवॉर्ड 2026 से सम्मानित हुए डॉ. सागर प्रकाश घाडगे समाजसेवा, श्रमिक कल्याण, मानवाधिकार संरक्षण एवं राष्ट्रहित में उत्कृष्ट योगदान को मिली राष्ट्रीय पहचान।


नई दिल्ली/मुंबई : दिनेश मीरचंदानी

समाजसेवा, श्रमिक कल्याण, मानवाधिकार संरक्षण, जनजागरण तथा राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में अपने उल्लेखनीय और प्रेरणादायी योगदान के लिए अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त समाजसेवक, श्रमिक नेता, मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं बहु-विश्व रिकॉर्ड धारक डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को प्रतिष्ठित "भारत गौरव एक्सीलेंस अवॉर्ड 2026" से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान समाज और राष्ट्र के प्रति उनके दीर्घकालिक समर्पण, उत्कृष्ट नेतृत्व तथा जनकल्याण के लिए किए गए अथक प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति और सराहना का प्रतीक है।

डॉ. घाडगे को प्राप्त यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए भी गौरव का विषय है जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए निरंतर कार्यरत हैं।

समाज परिवर्तन के सशक्त सूत्रधार

डॉ. सागर प्रकाश घाडगे ने अपना जीवन समाज के वंचित, पीड़ित, श्रमिक, उपेक्षित और जरूरतमंद वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित किया है। श्रमिक अधिकारों की रक्षा, मानवाधिकार संरक्षण, उपभोक्ता जागरूकता, सामाजिक न्याय और जनकल्याण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उन्होंने उल्लेखनीय कार्य करते हुए समाज में एक विशिष्ट पहचान स्थापित की है।

उनके नेतृत्व में अनेक जनहितकारी अभियानों, जागरूकता कार्यक्रमों और सामाजिक पहलों को सफलतापूर्वक संचालित किया गया, जिनसे हजारों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट कर सामाजिक सद्भाव, जनसहभागिता और सामुदायिक विकास को नई दिशा प्रदान की है।

नशामुक्ति, अपराध नियंत्रण और आतंकवाद विरोधी जनजागरण में महत्वपूर्ण योगदान

डॉ. घाडगे ने सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध प्रभावी जनजागरण अभियान चलाकर समाज को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विशेष रूप से नशामुक्ति अभियान, अपराध विरोधी जागरूकता अभियान तथा आतंकवाद विरोधी जनजागरण कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने युवाओं और नागरिकों को राष्ट्रहित, सामाजिक उत्तरदायित्व और कानून के प्रति सम्मान का संदेश दिया है।

उनके प्रयासों ने अनेक युवाओं को नशे, अपराध और असामाजिक गतिविधियों से दूर रहकर सकारात्मक जीवन मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया है। सामाजिक सुरक्षा, राष्ट्रीय एकता और जनजागरूकता के क्षेत्र में उनका योगदान अत्यंत सराहनीय माना जाता है।

उल्लेखनीय उपलब्धियाँ

डॉ. सागर प्रकाश घाडगे की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं—

• श्रमिकों के अधिकारों, सम्मान और कल्याण के लिए निरंतर संघर्ष एवं प्रभावी नेतृत्व।

• मानवाधिकार संरक्षण और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय जनजागरण अभियान।

• उपभोक्ता अधिकारों और नागरिक जागरूकता को बढ़ावा देने हेतु उल्लेखनीय कार्य।

• वंचित एवं उपेक्षित वर्गों के सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयास।

• नशामुक्ति, अपराध नियंत्रण और आतंकवाद विरोधी जनजागरण अभियानों में सक्रिय योगदान।

• पशु कल्याण एवं पर्यावरण संरक्षण से संबंधित सामाजिक उपक्रमों में महत्वपूर्ण सहभागिता।

• युवाओं में नेतृत्व क्षमता, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने हेतु प्रेरणादायी कार्य।

• राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न सामाजिक पहलों के माध्यम से जनजागरूकता और सकारात्मक परिवर्तन को बढ़ावा देना।

• बहु-विश्व रिकॉर्ड धारक के रूप में समाजहित से जुड़े नवाचारपूर्ण अभियानों का सफल संचालन।

राष्ट्रीय सम्मान से बढ़ा गौरव

"भारत गौरव एक्सीलेंस अवॉर्ड 2026" देश के प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक है, जो विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को प्रदान किया जाता है। डॉ. घाडगे को यह सम्मान मिलना समाजसेवा और जनकल्याण के क्षेत्र में उनके अथक प्रयासों की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मान्यता माना जा रहा है।

सामाजिक, शैक्षणिक, औद्योगिक तथा मानवाधिकार क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तियों, संगठनों और नागरिकों ने इस उपलब्धि पर डॉ. घाडगे को शुभकामनाएँ देते हुए उनके योगदान की भूरि-भूरि प्रशंसा की है।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

डॉ. सागर प्रकाश घाडगे की दूरदृष्टि, संघर्षशीलता, नेतृत्व क्षमता और समाजहित के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने उन्हें एक प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया है। उनका जीवन इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि समर्पण, सेवा और दृढ़ संकल्प के माध्यम से समाज में व्यापक एवं स्थायी परिवर्तन लाया जा सकता है।

समाज के सर्वांगीण विकास, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक न्याय और जनकल्याण के लिए उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी एवं मार्गदर्शक सिद्ध होगा।

"आपकी दृष्टि हमारी प्रेरणा है, आपकी सेवा समाज की शक्ति है।"

भारत गौरव एक्सीलेंस अवॉर्ड 2026 की इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए अनंत शुभकामनाएँ।














उल्हासनगर में विकास पर ब्रेक! प्रशासन और नगरसेवकों के बीच बढ़ी खींचतान, विकास कार्यों की रफ्तार थमी, वार्डों में अटकी योजनाएं; जनता में बढ़ रहा असंतोष।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका में इन दिनों प्रशासन और नव-निर्वाचित नगरसेवकों के बीच बढ़ती खींचतान का सीधा असर शहर के विकास कार्यों पर दिखाई देने लगा है। विभिन्न वार्डों में सड़क मरम्मत, नाला सफाई, पानी आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कई प्रस्ताव लंबित पड़े हैं, जिससे नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, कई नगरसेवकों का आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर फाइलों को जानबूझकर धीमी गति से आगे बढ़ाया जा रहा है, जबकि अधिकारियों का कहना है कि नियमों और वित्तीय प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक है। इसी टकराव के चलते अनेक विकास योजनाओं की मंजूरी और कार्यादेश अटक गए हैं।

नगरसेवकों का दावा है कि चुनाव के दौरान जनता से किए गए विकास के वादों को पूरा करने में प्रशासनिक अड़चनें सबसे बड़ी बाधा बन रही हैं। कई जनप्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा उनके सुझावों और प्रस्तावों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पारदर्शिता और नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। बिना तकनीकी और वित्तीय मंजूरी के किसी भी काम को जल्दबाजी में शुरू नहीं किया जा सकता। अधिकारियों का यह भी तर्क है कि पिछली कई परियोजनाओं में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने के बाद सतर्कता बढ़ाई गई है।

इस खींचतान का सबसे अधिक असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। कई इलाकों में अधूरे विकास कार्य, खराब सड़कें, जलभराव और सफाई समस्याओं को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच चल रही रस्साकशी में शहर का विकास पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले समय में यह विवाद और गहरा सकता है। वहीं, शहर के नागरिक अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से टकराव खत्म कर विकास कार्यों को गति देने की मांग कर रहे हैं।














उल्हासनगर मनपा में चुनावी घोटाले की चर्चा तेज, आयुक्त ने अधिकारियों-कर्मचारियों को जारी किया ‘कारण बताओ नोटिस’


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के आम चुनाव के लिए खरीदी गई चुनावी सामग्री में करोड़ों रुपये के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आने से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान खरीदी गई सामग्री को बाजार मूल्य से कहीं अधिक दरों पर खरीदने तथा चुनाव समाप्त होने के बाद उसे महानगरपालिका के रिकॉर्ड और कब्जे में जमा न कर निजी स्तर पर ठिकाने लगाने के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए महानगरपालिका आयुक्त मनीषा आव्हाले ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर जवाब तलब किया है।

सूत्रों के अनुसार, चुनाव विभाग के माध्यम से कंप्यूटर, कैमरे, पेन-कागज, टेबल-कुर्सियां, डस्टबिन, मंडप, पानी की बोतलें समेत अन्य आवश्यक सामग्री की बड़े पैमाने पर खरीद की गई थी। आरोप है कि इन वस्तुओं की खरीद में नियमों को दरकिनार करते हुए बाजार भाव से अधिक कीमतें दिखाई गईं, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया।

सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह सामग्री महानगरपालिका के स्वामित्व में वापस जमा होना अपेक्षित था, लेकिन बड़ी मात्रा में सामग्री का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इससे यह आशंका गहरा गई है कि कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से चुनावी सामग्री का गैरकानूनी तरीके से निपटारा किया गया।

बताया जा रहा है कि चुनाव विभाग के खर्चों का नियमित ऑडिट न होने का फायदा उठाकर वित्तीय गड़बड़ियों को अंजाम दिया गया। जब यह मामला आयुक्त मनीषा आव्हाले के संज्ञान में आया, तब उन्होंने तत्काल उस समय चुनाव विभाग में कार्यरत अतिरिक्त आयुक्त, उपायुक्त, संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस जारी कर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा।

आयुक्त की इस कार्रवाई के बाद महानगरपालिका परिसर में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक और आपराधिक कार्रवाई की मांग उठाई है।

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में यदि अनियमितताएं साबित होती हैं, तो प्रशासन दोषियों पर कितनी सख्त कार्रवाई करता है और करोड़ों रुपये के कथित घोटाले की परतें कब तक खुलती हैं।














मराठवाड़ा में भाजपा का बड़ा दांव? क्या विधान परिषद जाएंगे डॉ. ओमप्रकाश शेटे, मुखमंत्री देवेंद्र फडणवीस की नई रणनीति पर चर्चा तेज।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े राजनीतिक समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है। आगामी बीड, लातूर और धाराशिव स्थानीय स्वराज्य संस्था विधान परिषद चुनाव को लेकर भाजपा के भीतर रणनीतिक हलचल दिखाई दे रही है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, बीड जिले के भूमिपुत्र और भाजपा से जुड़े प्रमुख चेहरे डॉ. ओमप्रकाश शेटे को विधान परिषद में भेजे जाने की संभावना को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis अपनी चर्चित “सरप्राइज रणनीति” के तहत मराठवाड़ा में भाजपा का नया राजनीतिक समीकरण तैयार कर सकते हैं। स्वर्गीय Vinayak Mete के बाद मराठवाड़ा और विशेष रूप से बीड जिले में नेतृत्व के नए चेहरे की तलाश के बीच डॉ. शेटे का नाम तेजी से उभरकर सामने आ रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने हमेशा संगठन और प्रशासनिक स्तर पर काम करने वाले भरोसेमंद सहयोगियों को आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। इससे पहले अभिमन्यु पवार, सुमित वानखेड़े और Shrikant Bharatiya जैसे नेताओं को महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसर दिए जा चुके हैं। ऐसे में अब डॉ. ओमप्रकाश शेटे को भी भाजपा नेतृत्व की “गुडबुक” में माना जा रहा है।

मराठवाड़ा में भाजपा का नया चेहरा बनने की चर्चा

सूत्रों की मानें तो भाजपा आगामी स्थानीय निकाय और विधान परिषद चुनावों के जरिए मराठवाड़ा में अपनी पकड़ और मजबूत करने की तैयारी में है। बीड, लातूर और धाराशिव क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने के लिए नए नेतृत्व को आगे लाने की रणनीति पर काम चल रहा है। इसी कड़ी में डॉ. शेटे का नाम गंभीरता से लिया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि भाजपा डॉ. शेटे को विधान परिषद का मौका देती है, तो यह केवल एक राजनीतिक नियुक्ति नहीं बल्कि मराठवाड़ा की राजनीति में नए शक्ति संतुलन का संकेत माना जाएगा।

प्रशासनिक जिम्मेदारी और सरकारी आदेशों पर भी उठे सवाल

इस बीच खबर में प्रशासनिक प्रक्रियाओं और सरकारी आदेशों में होने वाली त्रुटियों को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है। कानूनी और प्रशासनिक दस्तावेजों में छोटी-छोटी लिपिकीय गलतियों के कारण कई बार गंभीर परिणाम सामने आते हैं। इससे आम नागरिकों को न्याय मिलने में देरी होती है और सरकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होते हैं।

ऐसे मामलों को देखते हुए सरकारी आदेश जारी करने से पहले अधिक सतर्कता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग जोर पकड़ रही है। अब जनता की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासनिक लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।

भाजपा की अगली चाल पर सबकी नजर

फिलहाल मराठवाड़ा की राजनीति में भाजपा किसे आगे बढ़ाती है और विधान परिषद चुनाव में कौन सा नया चेहरा सामने आता है, इस पर राजनीतिक गलियारों में उत्सुकता बढ़ गई है। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री फडणवीस का फैसला मराठवाड़ा की राजनीति की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।














प्रॉपर्टी टैक्स बकाया पर दुकान-गोदाम सील नहीं कर सकती उल्हासनगर महानगर पालिका - बॉम्बे हाईकोर्ट


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी वैधानिक प्रावधान के अभाव में नगर निकाय बकाया संपत्ति कर वसूलने के लिए किसी परिसर को सील नहीं कर सकते। अदालत ने मंगलवार को उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) को निर्देश दिया कि वह कथित टैक्स बकाया के कारण सील किए गए एक फास्ट-फूड आउटलेट और गोदाम को तुरंत खोल दे।

जस्टिस गौतम अंखाड और जस्टिस संदीप डी. पाटिल की अवकाशकालीन पीठ ने यह आदेश दुकान मालिक लछमन दुसेजा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। दुसेजा की संपत्तियों को 30 मार्च को सील किया गया था।

पीठ ने कहा,

“प्रतिवादी निगम के वकील हमें ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं दिखा सके, जो संपत्ति कर का भुगतान न होने पर परिसर सील करने का अधिकार देता हो।”

अदालत ने UMC को दुसेजा के गोदाम और दुकान को तुरंत अनसील करने का आदेश दिया।

दुसेजा के अनुसार, UMC अधिकारियों ने 30 मार्च को उनके परिसरों का दौरा किया और दोनों संपत्तियों को सील करने से पहले अटैचमेंट आदेश जारी किया। निगम ने गोदाम पर ₹5.64 लाख और दुकान पर ₹1.30 लाख संपत्ति कर बकाया होने का दावा किया था।

दुसेजा की ओर से पेश अधिवक्ता एस.बी. राव ने दलील दी कि महाराष्ट्र म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट, 1949 और उसके तहत बनाए गए नियम नगर निकायों को संपत्ति कर वसूली के लिए परिसर सील करने का अधिकार नहीं देते। उन्होंने इस मुद्दे पर हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों का भी हवाला दिया।

अदालत ने यह दलील स्वीकार कर ली, क्योंकि UMC के वकील सुरेश कांबले इस कार्रवाई के समर्थन में कोई वैधानिक प्रावधान पेश नहीं कर सके।

दुसेजा ने अदालत को बताया कि वह संपत्ति कर चुकाने को तैयार हैं, लेकिन नगर निकाय द्वारा लगाए गए जुर्माने और विलंब शुल्क का विरोध कर रहे हैं।

हाईकोर्ट ने उन्हें बकाया कर जमा करने की अनुमति दी और मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को तय की।