उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
उल्हासनगर शहर में कथित बोगस सनद (फर्जी प्रमाणपत्र) प्रकरण को लेकर एक बार फिर राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। पत्रकार एवं अन्याय विरोधी संघर्ष समिति के अध्यक्ष दिलीप मालवणकर ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि वर्षों से चल रही कथित अनियमितताओं के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है।
मालवणकर का आरोप है कि उल्हासनगर महानगरपालिका का टाउन प्लानिंग विभाग लंबे समय से विवादों के घेरे में रहा है। बिना वैध अनुमति निर्मित इमारतों को नियमित करने, एफएसआई (फ्लोर स्पेस इंडेक्स) में कथित हेरफेर तथा टीडीआर (ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स) से जुड़े मामलों में समय-समय पर गंभीर आरोप सामने आते रहे हैं। उनका कहना है कि विभाग में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति और पदस्थापन को लेकर भी प्रतिस्पर्धा रहती है तथा इन पदों के लिए बड़े पैमाने पर लेनदेन होने की चर्चाएं लंबे समय से होती रही हैं।
पूर्व प्रशासक के कार्यकाल पर सवाल
दिलीप मालवणकर ने आरोप लगाया कि पूर्व प्रशासक जगतसिंह गिरासे के कार्यकाल के दौरान कथित रूप से सैकड़ों गैरकानूनी सनदें जारी की गईं, जिनकी विभागीय जांच अब तक पूरी नहीं हो सकी है। उनका दावा है कि इन मामलों में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने बाकी हैं और जांच लंबित रहने से अनेक प्रश्न अनुत्तरित बने हुए हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान प्रांत अधिकारी (एसडीओ) विजयानंद शर्मा के कार्यकाल में भी कथित रूप से इसी प्रकार की प्रक्रिया जारी है। मालवणकर का कहना है कि यदि पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हो सकते हैं।
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणपत्र जारी होने का आरोप
मालवणकर के अनुसार, कई मामलों में प्रस्तुत दस्तावेजों की प्रामाणिकता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। उनका आरोप है कि कथित रूप से फर्जी या संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणपत्र जारी किए गए, जिससे सरकारी नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन हुआ। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ मामलों में अपील स्तर तक कथित लेनदेन की व्यवस्था होने की चर्चाएं सामने आई हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के दुरुपयोग का आरोप
दिलीप मालवणकर ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2005 से पूर्व के लंबित मामलों के निपटारे को लेकर दिए गए निर्देशों का कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से दुरुपयोग किया गया। आरोप है कि इसी प्रावधान का सहारा लेकर संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर आवेदन प्रस्तुत किए गए और बाद में प्रमाणपत्र प्राप्त किए गए।
मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय जांच की मांग
मालवणकर ने मुख्यमंत्री तथा राज्य के महसूल मंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि पूर्व प्रशासक जगतसिंह गिरासे और वर्तमान प्रांत अधिकारी विजयानंद शर्मा के कार्यकाल में जारी सभी सनदों और प्रमाणपत्रों की विस्तृत जांच कराई जाए। उन्होंने संबंधित कार्यालयों की सीसीटीवी फुटेज की जांच, दस्तावेजों का सत्यापन, आर्थिक लेनदेन की पड़ताल तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इन आरोपों को लेकर संबंधित अधिकारियों या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, इस मुद्दे ने शहर की राजनीति, प्रशासनिक व्यवस्था और नागरिकों के बीच नई बहस को जन्म दे दिया है। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तो यह मामला उल्हासनगर के सबसे बड़े कथित प्रशासनिक और राजस्व घोटालों में से एक साबित हो सकता है।







