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उल्हासनगर में स्ट्रीट लाइटों की बदहाल व्यवस्था पर उठे सवाल; सुबह जल्दी बंद और शाम को देर से चालू होने की शिकायत, महावितरण को तत्काल कार्रवाई की मांग।




 



उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर शहर की सड़कों पर स्ट्रीट लाइटों के समय से पहले बंद होने, शाम को देर से चालू होने और कुछ क्षेत्रों में लाइटें पूरी तरह बंद रहने की शिकायत को लेकर अब महावितरण कंपनी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है। प्रहार सामाजिक संघटना, ठाणे जिला के अध्यक्ष एडवोकेट स्वप्निल दिलीप पाटिल ने 12 अक्टूबर 2026 को महावितरण के संबंधित अधिकारियों सहित उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त को ईमेल भेजकर इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान देने और आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

शिकायत के अनुसार, उल्हासनगर के विभिन्न इलाकों में स्ट्रीट लाइटें सुबह जल्दी बंद हो रही हैं, जबकि शाम के समय निर्धारित समय पर चालू नहीं हो रही हैं। इसके अलावा, कुछ क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटों से संबंधित मीटर बंद होने के कारण विद्युत आपूर्ति बाधित होने और लाइटें शुरू नहीं होने की शिकायतें भी सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि, इन शिकायतों की वास्तविक स्थिति और तकनीकी कारणों की पुष्टि संबंधित विभागों की जांच के बाद ही हो सकेगी।

सुबह और रात के समय नागरिकों की सुरक्षा पर चिंता

एडवोकेट स्वप्निल पाटिल ने अपने पत्र में कहा है कि स्ट्रीट लाइटों की अनियमित व्यवस्था के कारण सुबह जल्दी काम पर जाने वाले नागरिकों, रात में यात्रा करने वाले लोगों तथा अन्य राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सड़कों पर पर्याप्त रोशनी नहीं होने से दुर्घटनाओं और चोरी जैसी घटनाओं का जोखिम बढ़ने की आशंका भी व्यक्त की गई है।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि शहर में धार्मिक कार्यक्रमों और उत्सवों के दौरान रात के समय नागरिकों तथा श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसी परिस्थितियों में सार्वजनिक सड़कों और प्रमुख आवागमन मार्गों पर पर्याप्त रोशनी बनाए रखना आवश्यक है। इसी आधार पर स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था को केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि नागरिक सुरक्षा और सार्वजनिक सुविधा से जुड़ा विषय बताया गया है।

मनपा के विद्युत विभाग के कामकाज पर भी असर पड़ने का दावा

पत्र में एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए कहा गया है कि दिन के समय स्ट्रीट लाइटों की विद्युत आपूर्ति बंद रहने के कारण उल्हासनगर महानगरपालिका के विद्युत अभियांत्रिकी विभाग को मरम्मत, मीटरों की जांच, कंट्रोल पैनल के निरीक्षण और आवश्यक तकनीकी परीक्षण करने में कठिनाई हो सकती है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, विद्युत आपूर्ति के अनियमित समय और संभावित बाधाओं का असर स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव तथा मरम्मत कार्यों पर पड़ रहा है। ऐसे में महावितरण कंपनी और महानगरपालिका के संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

हालांकि, विद्युत आपूर्ति बाधित होने के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं, क्या संबंधित मीटरों में तकनीकी खराबी है या टाइमर एवं नियंत्रण प्रणाली में कोई समस्या है, इस संबंध में अधिकारियों की ओर से जांच और स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है।

महावितरण के सामने रखीं प्रमुख मांगें

एडवोकेट स्वप्निल पाटिल ने अपने ईमेल के माध्यम से संबंधित अधिकारियों से निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की है:

- बंद मीटरों की तत्काल जांच: जिन क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटों के मीटर या संबंधित विद्युत आपूर्ति बंद होने की शिकायत है, वहां जांच कर आवश्यक आपूर्ति बहाल की जाए।

- निर्धारित समय पर रोशनी: महानगरपालिका द्वारा लगाए गए टाइमर के अनुसार स्ट्रीट लाइटें निर्धारित समय पर चालू और बंद हों, यह सुनिश्चित किया जाए।

- पूर्व सूचना की व्यवस्था: यदि किसी तकनीकी या अन्य कारण से विद्युत आपूर्ति बंद करना आवश्यक हो, तो महानगरपालिका के संबंधित विद्युत विभाग को पहले से सूचित किया जाए।

- तकनीकी निरीक्षण और मरम्मत: शहर में स्ट्रीट लाइटों, मीटरों और कंट्रोल पैनलों की मौजूदा स्थिति का निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत की जाए।

- स्थायी समाधान: भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए महावितरण और महानगरपालिका के संबंधित अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।

जवाबदेही तय करने की चेतावनी

अपने पत्र में एडवोकेट पाटिल ने स्पष्ट किया है कि स्ट्रीट लाइटों की विद्युत आपूर्ति बाधित होने से नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारी तत्काल आवश्यक कदम उठाएं।

पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि भविष्य में स्ट्रीट लाइटें बंद रहने के कारण कोई अप्रिय घटना होती है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की जाएगी। यह शिकायतकर्ता की ओर से व्यक्त की गई चेतावनी है; फिलहाल किसी अधिकारी की लापरवाही या जिम्मेदारी के संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

एडवोकेट स्वप्निल पाटिल ने चेतावनी दी है कि यदि नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े इस मुद्दे पर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो प्रहार सामाजिक संघटना विधायक बच्चू भाऊ कडू के मार्गदर्शन में बांद्रा स्थित प्रकाश गढ़ में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर सकती है।

उन्होंने अपने ईमेल की प्रतिलिपि उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त, महावितरण कंपनी के कल्याण परिमंडल के अधीक्षक अभियंता, उल्हासनगर के संबंधित अभियंताओं और महानगरपालिका के कार्यकारी अभियंता को भी भेजी है, ताकि मामले में आवश्यक कार्रवाई और विभागीय समन्वय सुनिश्चित किया जा सके।

अब संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया पर नजर

इस शिकायत के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि महावितरण कंपनी और उल्हासनगर महानगरपालिका इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं। क्या बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों और मीटरों की जांच की जाएगी? क्या टाइमर व्यवस्था को दुरुस्त कर निर्धारित समय पर रोशनी सुनिश्चित की जाएगी? और क्या भविष्य में विद्युत आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में दोनों विभागों के बीच समन्वय के लिए कोई स्थायी व्यवस्था बनाई जाएगी?

फिलहाल यह मामला शिकायतकर्ता द्वारा उठाए गए नागरिक सुरक्षा और सार्वजनिक सुविधा के मुद्दे के रूप में सामने आया है। संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया, तकनीकी जांच के निष्कर्ष और की गई कार्रवाई का विवरण सामने आने के बाद ही समस्या की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

जनहित का सवाल: शहर की सड़कों पर पर्याप्त रोशनी उपलब्ध कराना नागरिकों की सुरक्षा और सुचारु आवागमन के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में संबंधित विभागों से अपेक्षा है कि वे शिकायत की जांच कर आवश्यक कदम उठाएं और नागरिकों को नियमित स्ट्रीट लाइट व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई करें।
















उल्हासनगर मनपा में RTI प्रकरण गरमाया, 8 अधिकारियों पर ₹2 लाख का दंड और आवेदक को मुआवजा देने का मामला चर्चा में।

उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर महानगरपालिका (मनपा) में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराने से जुड़े मामले में आठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कुल 2 लाख रुपये का दंड लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध समाचार विवरण के अनुसार, राज्य सूचना आयोग के आदेश के बाद संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के वेतन से दंड की राशि वसूलने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसी मामले में RTI आवेदक सुदेश रोहरा को 2 लाख रुपये का मुआवजा देने का विषय भी सामने आया है।

बताया गया है कि इस प्रकरण में आयुक्त एवं उपायुक्त (मुख्यालय) डॉ. दीपाली चौगुले की ओर से संबंधित अधिकारियों के वेतन से राशि वसूलने को मंजूरी दी गई है। हालांकि, दंड के आदेश, मुआवजे की स्वीकृति तथा वसूली की वर्तमान स्थिति से संबंधित मूल आधिकारिक दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

RTI जानकारी देने में देरी पर कार्रवाई

सूचना का अधिकार अधिनियम का उद्देश्य नागरिकों को सरकारी कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और सार्वजनिक प्राधिकरणों की जवाबदेही तय करना है। निर्धारित समय-सीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराने अथवा अधिनियम के प्रावधानों का पालन नहीं करने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

प्राप्त समाचार विवरण के मुताबिक, उल्हासनगर मनपा से जुड़े इस मामले में राज्य सूचना आयोग के आदेश के बाद आठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर अलग-अलग राशि का दंड निर्धारित किया गया है। कुल दंड की राशि 2 लाख रुपये बताई गई है। इस घटनाक्रम ने मनपा में RTI आवेदनों के निपटारे, विभागीय जवाबदेही और सूचना उपलब्ध कराने की प्रशासनिक व्यवस्था पर ध्यान आकर्षित किया है।

आठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर निर्धारित दंड का विवरण

1. उद्धव लुल्ला— कर निर्धारक एवं संकलक, यूनिट 1 से 4: ₹80,000

2. मनोज गोकलानी— कर निर्धारक एवं संकलक, यूनिट 5 से 8 तथा तत्कालीन जन सूचना अधिकारी: ₹30,000

3. संक्षिप्त शा. निकम — कर निरीक्षक एवं तत्कालीन जन सूचना अधिकारी: ₹20,000

4. चंदू एन. साववानी — कर निरीक्षक एवं तत्कालीन जन सूचना अधिकारी: ₹20,000

5. राम आयलानी— तत्कालीन कर निरीक्षक: ₹12,500

6. आनंद भानुशाली — तत्कालीन सेवानिवृत्त कर निरीक्षक: ₹12,500

7. भानू परमार — कर निरीक्षक: ₹12,500

8. सुंदर लांडगे— कर निरीक्षक: ₹12,500

उपलब्ध सूची में उल्लिखित राशियों का कुल योग 2 लाख रुपये होता है। हालांकि, प्रत्येक अधिकारी के विरुद्ध दंड लगाने के आधार, संबंधित आदेश की तारीख और वसूली की वास्तविक स्थिति को मूल आदेश से सत्यापित किया जाना जरूरी है।

आवेदक को ₹2 लाख मुआवजा देने का मामला

इस प्रकरण का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू RTI आवेदक सुदेश रोहरा को 2 लाख रुपये का मुआवजा देने से संबंधित है। समाचार विवरण के मुताबिक, इस भुगतान की जिम्मेदारी महानगरपालिका पर निर्धारित किए जाने की बात कही गई है।

यहां यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि अधिकारियों पर लगाया गया कुल 2 लाख रुपये का दंड और आवेदक को दिए जाने वाले 2 लाख रुपये के मुआवजे को एक ही राशि नहीं माना जाना चाहिए। दोनों की कानूनी प्रकृति, भुगतान का आधार और वसूली की प्रक्रिया अलग-अलग हो सकती है। मुआवजे के वास्तविक आदेश, भुगतान की स्थिति तथा संबंधित अधिकारियों से राशि वसूलने के आधार की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों से की जानी चाहिए।

प्रशासनिक अधिकारों के केंद्रीकरण पर भी चर्चा

इस कार्रवाई के बीच महानगरपालिका की निर्णय-प्रक्रिया और प्रशासनिक अधिकारों के वितरण को लेकर भी सवाल उठने की बात सामने आई है। कुछ अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि वित्तीय एवं प्रशासनिक निर्णय लेने के महत्वपूर्ण अधिकार आयुक्त मनीषा आव्हाले के स्तर पर केंद्रित हैं।

इन अधिकारियों का कथित तौर पर कहना है कि विभाग प्रमुखों को कामकाज की जिम्मेदारी तो सौंपी जाती है, लेकिन संबंधित निर्णय लेने के लिए आवश्यक अधिकार पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं होते। इस दावे के संबंध में यह भी कहा गया है कि आयुक्त से संपर्क करने के प्रयासों के बावजूद आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी।

हालांकि, प्रशासनिक अधिकारों के केंद्रीकरण से संबंधित इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन्हें संबंधित अधिकारियों के आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। वास्तविक स्थिति समझने के लिए मनपा के लागू अधिकार-विभाजन, वित्तीय स्वीकृति प्रक्रिया, विभागीय आदेशों और संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष की जानकारी आवश्यक होगी।

जवाबदेही और पारदर्शिता की कसौटी पर मनपा प्रशासन

RTI से जुड़े इस प्रकरण ने एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में सूचना उपलब्ध कराने की समय-सीमा, जन सूचना अधिकारियों की जिम्मेदारी और नागरिकों की शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था पर चर्चा को महत्वपूर्ण बना दिया है।

यदि संबंधित आदेशों के अनुसार दंड और मुआवजे की वसूली निर्धारित की गई है, तो उसके क्रियान्वयन की स्थिति भी सार्वजनिक हित में स्पष्ट होनी चाहिए। साथ ही, संबंधित अधिकारियों को अपना पक्ष रखने और प्रशासन को तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिलना चाहिए।

इस मामले में राज्य सूचना आयोग के मूल आदेश, मनपा के वसूली संबंधी निर्देश, मुआवजे की स्वीकृति और भुगतान की स्थिति सामने आने के बाद ही कार्रवाई की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

निष्कर्ष: उल्हासनगर मनपा में RTI से संबंधित इस मामले में आठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कुल 2 लाख रुपये का दंड निर्धारित किए जाने और आवेदक को 2 लाख रुपये का मुआवजा देने की खबर प्रशासनिक जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण है। हालांकि, दंड एवं मुआवजे के आदेशों के क्रियान्वयन और प्रशासनिक अधिकारों के केंद्रीकरण से जुड़े दावों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों और पक्षों की प्रतिक्रिया के आधार पर की जानी चाहिए।
















 



उल्हासनगर में NCP-SP को मिला जनसमर्थन! महेश तापसे और सीमा महेश आहूजा के नेतृत्व में 200 से अधिक लोगों ने थामा पार्टी का दामन।


 




उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर: शहर की राजनीतिक गतिविधियों के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी – शरदचंद्र पवार (NCP-SP) के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। महेश तापसे जी और सीमा महेश आहूजा जी के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम के दौरान 200 से अधिक लोगों के पार्टी में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। इस घटनाक्रम को स्थानीय स्तर पर पार्टी के संगठन विस्तार और जनसंपर्क की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पार्टी में शामिल होने वाले लोगों में बड़ी संख्या में दिव्यांग बंधु और युवा शामिल थे। बताया गया है कि इस जनसमूह में लगभग 70 से 80 दिव्यांगजन तथा 100 से 150 युवा मौजूद थे। इनकी भागीदारी को सामाजिक समावेशन और युवाओं की राजनीतिक गतिविधियों में बढ़ती रुचि के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

महेश तापसे और सीमा महेश आहूजा के नेतृत्व में आयोजन

इस कार्यक्रम में महेश तापसे जी और सीमा महेश आहूजा जी की प्रमुख भूमिका रही। बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता के चलते यह आयोजन स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन सकता है। पार्टी में शामिल हुए नए सदस्यों से संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने तथा जनसंपर्क गतिविधियों को गति देने की उम्मीद जताई जा रही है।

सहयोगियों के योगदान की सराहना

कार्यक्रम के सफल आयोजन और सहयोग के लिए टिकम उदासी, मनीष होतवानी, महेश चौहान और यूनुस अंसारी के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया गया। आयोजन से जुड़े लोगों के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए उनके सहयोग की सराहना की गई।

प्रमुख पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति

इस अवसर पर इमरान खान, वनिता रामरखानी, हमजा शेख, महेश आहूजा और ज्योति शेलके सहित अन्य प्रमुख लोगों की उपस्थिति का उल्लेख किया गया। उनकी मौजूदगी ने कार्यक्रम को संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाया।

स्थानीय राजनीति में क्या होगा असर?

उल्हासनगर जैसे राजनीतिक रूप से सक्रिय शहर में किसी भी पार्टी के साथ बड़ी संख्या में नए लोगों का जुड़ना संगठनात्मक विस्तार के लिहाज से अहम माना जाता है। NCP-SP में 200 से अधिक लोगों के शामिल होने की यह जानकारी पार्टी की स्थानीय गतिविधियों और जनाधार को लेकर चर्चा को बढ़ा सकती है।

हालांकि, इस घटनाक्रम का आगामी स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर कितना प्रभाव पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल, इस आयोजन को NCP-SP के स्थानीय संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण गतिविधि के रूप में देखा जा रहा है।













विधाधर महाले के बुलढाणा में शक्ति प्रदर्शन के बाद चुनाव लड़ने की अटकलें तेज! मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निजी सचिव महाले के VRS लेकर विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चा, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार।


बुलढाणा: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

महाराष्ट्र की राजनीति में बुलढाणा और चिखली विधानसभा क्षेत्रों को लेकर जारी राजनीतिक खींचतान के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निजी सचिव विधाधर महाले के शक्ति प्रदर्शन ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगा है कि क्या महाले प्रशासनिक सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर बुलढाणा विधानसभा चुनाव के मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं?

बुलढाणा में विधाधर महाले के शक्ति प्रदर्शन को स्थानीय राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। विधायक संजय गायकवाड़ की ओर से शुरू किए गए राजनीतिक पलटवार के बीच महाले की सक्रियता ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को और तेज कर दिया है। हालांकि, उनके चुनाव लड़ने या सरकारी सेवा से इस्तीफा देने के संबंध में अभी आधिकारिक घोषणा सामने आने की पुष्टि नहीं है।

बुलढाणा से मंत्रालय तक का सफर

विधाधर महाले का बुलढाणा जिले से पुराना संबंध बताया जाता है। शिक्षा पूरी करने और प्रतियोगी परीक्षा में सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने बुलढाणा जिला परिषद में जलस्वराज परियोजना से अपने प्रशासनिक करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं और आगे चलकर मंत्रालय में कार्य किया।

प्रशासनिक कामकाज में उनकी भूमिका और कार्यक्षमता को देखते हुए उन्हें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निजी सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस पद पर रहते हुए वे मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यों में शामिल रहे हैं।

अब उनके बुलढाणा में शक्ति प्रदर्शन के बाद यह सवाल चर्चा में है कि क्या वे अपने प्रशासनिक अनुभव को चुनावी राजनीति में बदलने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, इस संभावित राजनीतिक कदम को फिलहाल अटकलों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री कार्यालय से विधानसभा तक पहुंचने वाले नेताओं का उदाहरण

महाराष्ट्र की राजनीति में मुख्यमंत्री कार्यालय में निजी सचिव, विशेष कार्य अधिकारी (OSD) या अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के बाद सक्रिय राजनीति में प्रवेश करने वाले अधिकारियों और सहयोगियों के उदाहरण मौजूद हैं। ऐसे व्यक्तियों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं, सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी का लाभ मिल सकता है।

इसी पृष्ठभूमि में विधाधर महाले की संभावित राजनीतिक एंट्री की तुलना मुख्यमंत्री कार्यालय से विधानसभा तक पहुंचे कुछ नेताओं के सफर से की जा रही है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, प्रशासनिक अनुभव, स्थानीय संपर्क और विकास कार्यों की समझ किसी भी संभावित उम्मीदवार के लिए महत्वपूर्ण कारक हो सकते हैं। हालांकि, चुनावी सफलता अंततः राजनीतिक समीकरणों, पार्टी के निर्णय और मतदाताओं के समर्थन पर निर्भर करती है।

‘पीए से विधायक’ बनने की चर्चा में इन नामों का उल्लेख

1. अभिमन्यु पवार

अभिमन्यु पवार ने देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय में निजी सचिव और विशेष कार्यकारी अधिकारी के रूप में जिम्मेदारी निभाई थी। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और 2019 के विधानसभा चुनाव में लातूर जिले के औसा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक चुने गए। 2024 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने जीत दर्ज की।

2. सुमित वानखेड़े

सुमित वानखेड़े मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कार्यालय से जुड़े रहे हैं। उन्होंने 2024 के विधानसभा चुनाव में वर्धा जिले के आर्वी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उनके राजनीतिक सफर को भी मुख्यमंत्री कार्यालय से सक्रिय चुनावी राजनीति तक पहुंचने के उदाहरण के रूप में देखा जाता है।

3. श्रीकांत भारतीय

श्रीकांत भारतीय ने मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष कार्य अधिकारी के रूप में कार्य किया। बाद में वे भाजपा के माध्यम से महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य बने। उनका उदाहरण मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रशासनिक और राजनीतिक जिम्मेदारियां निभाने के बाद विधायी राजनीति में पहुंचने के संदर्भ में दिया जाता है।

4. संदीप जोशी

संदीप जोशी भी मुख्यमंत्री कार्यालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के बाद विधान परिषद तक पहुंचे। उनके राजनीतिक सफर का उल्लेख भी मुख्यमंत्री कार्यालय से विधायी राजनीति में प्रवेश करने वाले व्यक्तियों के उदाहरण के रूप में किया जाता है।

इन उदाहरणों के बीच अब विधाधर महाले के नाम की चर्चा हो रही है। हालांकि, प्रत्येक नेता का राजनीतिक सफर और चुनावी परिस्थितियां अलग रही हैं; इसलिए इन उदाहरणों को महाले के संभावित राजनीतिक भविष्य की पुष्टि नहीं माना जा सकता।

बुलढाणा और चिखली में महायुति के सामने क्या होगी चुनौती?

बुलढाणा और चिखली विधानसभा क्षेत्रों में स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चर्चा में है। ऐसे माहौल में यदि विधाधर महाले वास्तव में चुनावी राजनीति में उतरते हैं, तो इसका असर स्थानीय स्तर पर महायुति के भीतर उम्मीदवार चयन और राजनीतिक तालमेल पर पड़ सकता है।

यदि किसी निर्वाचन क्षेत्र में गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच सहमति नहीं बनती, तो मैत्रीपूर्ण मुकाबले या अलग-अलग उम्मीदवार उतारने जैसी संभावनाओं पर चर्चा हो सकती है। लेकिन बुलढाणा और चिखली में ऐसा कोई चुनावी निर्णय लिया गया है, इसकी आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

महाले की संभावित उम्मीदवारी को लेकर कई सवाल महत्वपूर्ण होंगे—क्या वे प्रशासनिक सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेंगे? क्या भाजपा उन्हें उम्मीदवार बनाने पर विचार करेगी? क्या स्थानीय नेताओं और गठबंधन सहयोगियों के बीच सहमति बन पाएगी? इन सवालों के जवाब आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम और आधिकारिक घोषणाओं से ही स्पष्ट होंगे।

फिलहाल अटकलें, आधिकारिक घोषणा का इंतजार

विधाधर महाले का बुलढाणा में शक्ति प्रदर्शन और उनके संभावित राजनीतिक प्रवेश की चर्चा महाराष्ट्र के स्थानीय राजनीतिक परिदृश्य में एक नया विषय बन गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय से विधानसभा तक पहुंचे अन्य नेताओं के उदाहरणों ने इन अटकलों को और हवा दी है।

फिलहाल, महाले के VRS लेने, बुलढाणा विधानसभा से चुनाव लड़ने या किसी राजनीतिक दल से उम्मीदवारी मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इस घटनाक्रम को संभावित राजनीतिक बदलाव के रूप में देखना उचित होगा, न कि किसी तय चुनावी निर्णय के रूप में।

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विधाधर महाले प्रशासनिक सेवा में ही अपनी भूमिका जारी रखेंगे या भविष्य में बुलढाणा की चुनावी राजनीति में नई पारी की शुरुआत करेंगे।



















आगरा में ‘नशा मुक्त युवा–रन फॉर यूनिटी वॉकाथॉन’; IRS अधिकारी समीर वानखेड़े आमंत्रित। 1 नवंबर 2026 को सरदार पटेल जयंती पर नशामुक्ति और राष्ट्रीय एकता का संदेश।




 




आगरा: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश के आगरा में ‘विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा–रन फॉर यूनिटी वॉकाथॉन’ का आयोजन किया जाएगा। भारत सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल के मार्गदर्शन एवं सहयोग से प्रस्तावित इस कार्यक्रम में पूर्व नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) अधिकारी समीर वानखेड़े, आईआरएस को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है।

इस संबंध में हिमांशु शर्मा, अतिरिक्त निजी सचिव, राज्य मंत्री की ओर से 8 अक्टूबर 2026 को समीर वानखेड़े को औपचारिक आमंत्रण पत्र भेजा गया है। पत्र में कार्यक्रम के दौरान उनकी गरिमामयी उपस्थिति के साथ युवाओं और प्रतिभागियों को संबोधित करने का अनुरोध किया गया है।

नशामुक्त भारत और युवाओं की भूमिका पर रहेगा फोकस

आमंत्रण पत्र के अनुसार, यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की नशामुक्त एवं सशक्त भारत की सोच से प्रेरित बताई गई है। कार्यक्रम में विशेष रूप से युवाओं और Gen Z को मादक पदार्थों के सेवन से दूर रहने तथा राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया जाएगा।

आयोजकों के अनुसार, वॉकाथॉन के माध्यम से राष्ट्रीय एकता, सामाजिक जिम्मेदारी, स्वस्थ जीवनशैली और नशामुक्त समाज का संदेश जनता तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही सरदार वल्लभभाई पटेल के राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए दिए गए योगदान एवं उनके आदर्शों को भी स्मरण किया जाएगा।

समीर वानखेड़े के अनुभव को युवाओं के लिए प्रेरणादायी बताया

आमंत्रण पत्र में नारकोटिक्स नियंत्रण और नशीली दवाओं के दुरुपयोग की रोकथाम के क्षेत्र में समीर वानखेड़े के कार्य एवं अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उनकी उपस्थिति कार्यक्रम में शामिल युवाओं और नागरिकों के लिए प्रेरणादायी हो सकती है।

राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल की ओर से उन्हें विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित करते हुए 2047 तक नशामुक्त भारत के लक्ष्य तथा एक सशक्त, एकजुट और विकसित भारत के निर्माण के महत्व पर प्रतिभागियों के साथ अपने विचार साझा करने का अनुरोध किया गया है।

1 नवंबर को आगरा में आयोजन

प्रस्तावित कार्यक्रम का आयोजन 1 नवंबर 2026 को आगरा, उत्तर प्रदेश में किया जाएगा। कार्यक्रम का आधिकारिक नाम ‘विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा–रन फॉर यूनिटी वॉकाथॉन’ रखा गया है।

आमंत्रण पत्र में कहा गया है कि जनहित और सामाजिक महत्व से जुड़े इस आयोजन में समीर वानखेड़े की उपस्थिति तथा मार्गदर्शन आयोजकों के लिए सम्मान का विषय होगा।

हालांकि, उपलब्ध पत्र के आधार पर फिलहाल इतना स्पष्ट है कि समीर वानखेड़े को कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। उनके द्वारा निमंत्रण स्वीकार किए जाने अथवा कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति की अंतिम पुष्टि अलग से होना बाकी है।




















उल्हासनगर के रिहायशी इलाकों में छोटे कारखानों के संचालन पर सवाल; सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बीच उल्हासनगर-5 जींस मार्केट, उल्हासनगर-2 समेत अन्य क्षेत्रों में भूमि उपयोग और वैध अनुमतियों की जांच की मांग।


उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

आवासीय क्षेत्रों में स्वीकृत उपयोग के विपरीत व्यावसायिक अथवा औद्योगिक गतिविधियों के संचालन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और मौजूदा नगर नियोजन नियमों की पृष्ठभूमि में अब उल्हासनगर में भी इस मुद्दे पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों में आवासीय परिसरों के भीतर छोटे सिलाई कारखाने, जींस से संबंधित कामकाज तथा अन्य प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की चर्चा सामने आती रही है।

विशेष रूप से उल्हासनगर-5 के जींस मार्केट, उल्हासनगर-2 तथा शहर के अन्य इलाकों में छोटे स्तर पर सिलाई एवं अन्य प्रकार के उत्पादन/व्यावसायिक कार्य संचालित होने की बात कही जाती रही है। हालांकि, किसी विशेष परिसर या प्रतिष्ठान के संबंध में यह निष्कर्ष निकालने से पहले उसके स्वीकृत भूमि उपयोग, मंजूर नक्शे, जोनिंग तथा संबंधित विभागों से प्राप्त अनुमतियों की आधिकारिक जांच आवश्यक है।

क्या Residential Property में Commercial या Industrial Activity की अनुमति है?

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जिन परिसरों का मूल या स्वीकृत उपयोग आवासीय है, वहां संचालित होने वाली व्यावसायिक अथवा उत्पादन संबंधी गतिविधियों के लिए क्या सक्षम प्राधिकरण से आवश्यक अनुमति प्राप्त की गई है?

क्या संबंधित परिसरों में Change of User की अनुमति ली गई है? क्या वहां संचालित गतिविधि स्थानीय Development Plan और लागू Development Control Regulations के अनुरूप है? क्या संबंधित प्रतिष्ठानों के पास आवश्यक लाइसेंस अथवा अन्य वैधानिक अनुमतियां उपलब्ध हैं?

इन सवालों का जवाब केवल स्थल निरीक्षण से नहीं, बल्कि महानगरपालिका के आधिकारिक रिकॉर्ड और स्वीकृत दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकता है।

उल्हासनगर में व्यापक सर्वे की जरूरत?

यदि किसी आवासीय क्षेत्र में स्वीकृत उपयोग से अलग गतिविधियां संचालित हो रही हैं, तो संबंधित महानगरपालिका विभागों द्वारा क्षेत्रवार सर्वेक्षण कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की आवश्यकता हो सकती है।

ऐसे सर्वेक्षण में प्रत्येक परिसर के Sanctioned Plan, Occupancy/Completion Certificate, Property Use, Zoning, Trade Licence, Change of User Permission तथा अन्य लागू अनुमतियों की जांच की जा सकती है।

इससे यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि कौन-सी गतिविधियां नियमों के तहत अनुमेय हैं और किन मामलों में अतिरिक्त अनुमति अथवा नियमानुसार कार्रवाई की आवश्यकता है।

सिर्फ सिलाई कारखाने ही नहीं, अन्य गतिविधियों की भी जांच का सवाल

यह मुद्दा केवल सिलाई कारखानों तक सीमित नहीं माना जा सकता। यदि आवासीय परिसरों में अन्य प्रकार की उत्पादन इकाइयां, गोदाम, वर्कशॉप अथवा बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं, तो उनके मामले में भी स्वीकृत उपयोग और वास्तविक उपयोग के बीच अंतर की जांच की जा सकती है।

हालांकि, प्रत्येक गतिविधि की वैधानिकता अलग-अलग नियमों और स्थानीय प्रावधानों पर निर्भर करेगी। इसलिए किसी भी प्रतिष्ठान को केवल उसके बाहरी स्वरूप या गतिविधि के आधार पर अवैध घोषित करना उचित नहीं होगा।

महानगरपालिका से स्पष्टता की अपेक्षा

अब मुख्य सवाल उल्हासनगर महानगरपालिका से जुड़ा है—क्या शहर के आवासीय क्षेत्रों में संचालित छोटे कारखानों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का कोई व्यापक सर्वेक्षण या रिकॉर्ड-आधारित जांच की गई है? यदि की गई है, तो कितने परिसरों को नियमों के अनुरूप पाया गया और कितने मामलों में नोटिस या अन्य वैधानिक कार्रवाई की गई?

नागरिकों की अपेक्षा है कि इस विषय पर कानून और उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर पारदर्शी कार्रवाई की जाए, ताकि वैध रूप से संचालित व्यवसायों और नियमों के विपरीत संचालित गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर किया जा सके।

महत्वपूर्ण: किसी भी विशेष क्षेत्र, दुकान, कारखाने या व्यक्ति के संबंध में अवैधता का निष्कर्ष संबंधित सरकारी रिकॉर्ड, निरीक्षण और सक्षम प्राधिकरण की आधिकारिक कार्रवाई के बिना नहीं निकाला जा सकता। इस संबंध में उल्हासनगर महानगरपालिका की आधिकारिक प्रतिक्रिया और उपलब्ध रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे।

















अंबरनाथ MIDC में ‘Cluster-2’ की कथित प्लॉटिंग पर सवाल; 400 KV लाइन के सुरक्षा क्षेत्र की जांच की मांग।


अंबरनाथ: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

अंबरनाथ के अतिरिक्त औद्योगिक क्षेत्र स्थित आनंदनगर MIDC परिसर में हाई-वोल्टेज विद्युत लाइन और टावरों के आसपास प्रस्तावित औद्योगिक विकास को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत एवं RTI आवेदन में आरोप लगाया गया है कि 400 KV अतिरिक्त उच्चदाब विद्युत लाइन के कथित सुरक्षा क्षेत्र के आसपास औद्योगिक भूखंडों के आवंटन तथा ‘Cluster-2’ के नाम पर लगभग 100 से 120 प्लॉट विकसित किए जाने की प्रक्रिया चल रही है।

मामले में अब मुख्य सवाल यह है कि संबंधित भूखंडों और प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं को मंजूरी देते समय विद्युत सुरक्षा मानकों, लागू नियमों, स्वीकृत लेआउट और संबंधित NOC की तकनीकी वैधता की जांच किस स्तर पर की गई।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। उपलब्ध शिकायत/RTI मसौदे के आधार पर उठाए गए सवालों का वास्तविक उत्तर संबंधित मंजूरी फाइल, NOC, तकनीकी रिपोर्ट, स्थल निरीक्षण और अधिकृत विभागीय रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

400 KV लाइन के पास 200 वर्ग मीटर भूखंड आवंटन का दावा

शिकायत में दावा किया गया है कि महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) की ओर से M/s Arul Cluster Association को 200 वर्ग मीटर का भूखंड आवंटित किया गया है और इस प्रक्रिया में संबंधित विद्युत प्राधिकरण की NOC का महत्व बताया गया है।

अब यह जांच का विषय है कि उक्त भूखंड 400 KV अतिरिक्त उच्चदाब विद्युत लाइन के Right of Way अथवा निर्धारित सुरक्षा क्षेत्र के भीतर या उसके निकट आता है या नहीं।

शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया है कि यदि संबंधित क्षेत्र विद्युत सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील है, तो NOC जारी करने से पहले क्या प्रत्यक्ष स्थल निरीक्षण किया गया था? क्या वास्तविक सुरक्षा दूरी मापी गई? क्या टावर की स्थिति और विद्युत लाइन का लेआउट स्वीकृत नक्शे से मिलाया गया? और क्या MIDC ने संबंधित NOC का स्वतंत्र तकनीकी सत्यापन किया?

‘Cluster-2’ में 100 से 120 प्लॉट विकसित करने का आरोप

MIDC के चीफ इंजीनियर प्रकाश चव्हाण को दिए गए एक पत्र में अनिल लक्ष्मण भोईर की ओर से आरोप लगाया गया है कि एन्व्हेंशिया कंपनी के सामने से आर.आर. सर्कल तथा आर.आर. सर्कल से ठाकुरपाड़ा क्षेत्र तक हाई-वोल्टेज विद्युत लाइनों और टावरों के आसपास बड़े पैमाने पर प्लॉटिंग किए जाने की जानकारी सामने आई है।

पत्र में दावा किया गया है कि ‘Cluster-2’ के नाम पर लगभग 100 से 120 प्लॉट विकसित किए जा रहे हैं और भविष्य में इन पर विभिन्न कंपनियों तथा औद्योगिक निर्माणों की संभावना है।

हालांकि, इस कथित प्लॉटिंग की आधिकारिक मंजूरी, स्वीकृत लेआउट, भूखंडों की वास्तविक संख्या और विद्युत सुरक्षा मानकों के अनुपालन की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

ऐसे में प्रमुख सवाल है कि यदि यह प्लॉटिंग अधिकृत है तो उसका स्वीकृत लेआउट क्या है और क्या उसे मंजूरी देते समय 400 KV लाइन के सुरक्षा क्षेत्र को ध्यान में रखा गया था?

GNP परियोजना पर भी उठे सवाल, लेकिन आरोपों की पुष्टि बाकी

मामले में GNP कंपनी, निखिल लटके और उदय ढाले की कथित भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में यह आरोप लगाया गया है कि संबंधित परियोजना को मंजूरी दिलाने में इनकी भूमिका रही तथा कुछ MIDC अधिकारियों की कथित मिलीभगत से मंजूरी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

हालांकि, यह एक गंभीर आरोप है और बिना आधिकारिक रिकॉर्ड या जांच के इसे स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

इसलिए अब जांच के लिए यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि—

- GNP परियोजना का प्रस्ताव किस संस्था या व्यक्ति ने प्रस्तुत किया?

- परियोजना की जांच किन अधिकारियों ने की?

- निखिल लटके और उदय ढाले की आधिकारिक भूमिका क्या थी?

- क्या उनके नाम किसी फाइल, प्रस्ताव, बैठक, अनुशंसा या मंजूरी रिकॉर्ड में दर्ज हैं?

- परियोजना को मंजूरी देते समय विद्युत सुरक्षा से संबंधित कौन-सी तकनीकी रिपोर्ट उपलब्ध थी?

- अंतिम मंजूरी किस अधिकारी ने और किस आधार पर दी?

इन सवालों का उत्तर संबंधित सरकारी रिकॉर्ड से ही मिल सकता है।

‘MIDC अधिकारियों की मिलीभगत’ के आरोप की भी होगी दस्तावेजों से जांच

शिकायत में MIDC अधिकारियों की कथित मिलीभगत से परियोजना को मंजूरी देने का आरोप लगाया गया है। लेकिन किसी अधिकारी की भूमिका या कथित मिलीभगत स्थापित करने के लिए केवल शिकायत अथवा आरोप पर्याप्त नहीं हैं।

इसके लिए पूरी फाइल की जांच आवश्यक होगी—मसलन प्रस्ताव किस स्तर से शुरू हुआ, किस अधिकारी ने परीक्षण किया, किस तकनीकी विभाग ने रिपोर्ट दी, NOC किस अधिकारी ने स्वीकार की, स्थल निरीक्षण किसने किया और अंतिम मंजूरी किस स्तर पर दी गई।

यदि फाइल रिकॉर्ड में नियमों के अनुरूप प्रक्रिया का पालन पाया जाता है, तो प्रशासन की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। वहीं, यदि दस्तावेजों में गंभीर विसंगति या नियमों के उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित जिम्मेदारी तय करने का आधार बन सकता है।

RTI के जरिए मांगे गए महत्वपूर्ण दस्तावेज

इस मामले में RTI के माध्यम से कथित रूप से पूरी मंजूरी प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज हासिल करने का प्रयास किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से—

- M/s Arul Cluster Association द्वारा प्रस्तुत NOC की प्रमाणित प्रति

- NOC के सत्यापन से संबंधित रिपोर्ट और फाइल नोटिंग

- भूखंड आवंटन की पूरी नोटशीट और मंजूरी फाइल

- संबंधित अधिकारियों की टिप्पणियां एवं अनुमोदन

- 24 नवंबर 2023 की बैठक के मिनट्स एवं रेजोल्यूशन

- Arul Cluster Association का पंजीकरण, संविधान और पदाधिकारियों की जानकारी

- सुरक्षा क्षेत्र में भूखंड आवंटन से संबंधित MIDC नियम, सरकारी आदेश एवं नीतिगत प्रावधान

- संबंधित लेआउट एवं तकनीकी दस्तावेज

- स्थल निरीक्षण और सुरक्षा जांच रिपोर्ट

मांगी गई हैं।

इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मंजूरी प्रक्रिया वास्तव में किस आधार पर पूरी की गई थी।

NOC की वैधता से ज्यादा महत्वपूर्ण उसका तकनीकी आधार

इस पूरे मामले में NOC सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में से एक बनकर सामने आ रही है।

सिर्फ NOC मौजूद होना पर्याप्त नहीं है। यह देखना भी आवश्यक है कि NOC किस अधिकारी ने जारी की, कब जारी की गई, किस स्थल निरीक्षण के आधार पर जारी हुई और क्या उस समय वास्तविक सुरक्षा दूरी का तकनीकी परीक्षण किया गया था।

विशेष रूप से यह जांच जरूरी होगी कि—

क्या टावर की वास्तविक स्थिति का सर्वे किया गया था?

क्या विद्युत लाइन की स्थिति और प्रस्तावित निर्माण के बीच दूरी मापी गई थी?

क्या स्वीकृत लेआउट में विद्युत सुरक्षा क्षेत्र दर्शाया गया है?

क्या संबंधित विद्युत प्राधिकरण की तकनीकी सहमति उपलब्ध है?

और क्या MIDC ने NOC का स्वतंत्र सत्यापन किया?

400 KV लाइन के सुरक्षा कॉरिडोर पर तकनीकी जांच जरूरी

शिकायत में Central Electricity Authority (CEA) Regulations, 2022 और संबंधित भारतीय मानकों का हवाला दिया गया है। मसौदे में 400 KV ट्रांसमिशन लाइन के संदर्भ में लगभग 46 से 52 मीटर के Right of Way/सुरक्षा कॉरिडोर का उल्लेख भी किया गया है।

हालांकि, वास्तविक लागू सुरक्षा दूरी केवल किसी एक आंकड़े के आधार पर निर्धारित नहीं की जा सकती। यह संबंधित तकनीकी परिस्थितियों, टावर की संरचना, लाइन की व्यवस्था और उस समय लागू आधिकारिक नियमों के अनुसार संबंधित सक्षम तकनीकी प्राधिकरण द्वारा निर्धारित की जानी चाहिए।

इसलिए इस मामले में कागजी दावे के बजाय संयुक्त स्थल सर्वेक्षण और आधिकारिक तकनीकी माप अधिक निर्णायक साबित होंगे।

BCC जारी करने से पहले संयुक्त स्थल निरीक्षण की मांग

अनिल भोईर की ओर से दिए गए पत्र में निर्माणों को Building Completion Certificate (BCC) देने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।

मांग की गई है कि कार्यकारी अभियंता, अंबरनाथ; चीफ इंजीनियर, अंधेरी तथा संबंधित विद्युत विभाग के अधिकारियों द्वारा संयुक्त स्थल निरीक्षण किया जाए।

इसके बाद—

1. विद्युत लाइन और टावर से वास्तविक दूरी मापी जाए।

2. स्वीकृत लेआउट से मौके की स्थिति का मिलान किया जाए।

3. संबंधित NOC की तकनीकी जांच की जाए।

4. सुरक्षा मानकों के अनुपालन की रिपोर्ट तैयार की जाए।

5. रिपोर्ट के आधार पर ही BCC पर आगे निर्णय लिया जाए।

“BCC जरूरी है या मजदूरों की सुरक्षा?”—उठाया गया सवाल

शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि औद्योगिक विकास और रोजगार का विरोध नहीं है, लेकिन विकास के साथ श्रमिकों और आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

पत्र में यह सवाल भी उठाया गया है कि यदि हाई-वोल्टेज लाइन के आसपास निर्माण कार्य चल रहे हैं तो किसी संभावित दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी।

इसी संदर्भ में पत्र का संदेश है कि कागजी मंजूरी, NOC या BCC किसी दुर्घटना के बाद होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं कर सकते।

इसलिए मांग की गई है कि पहले वास्तविक सुरक्षा स्थिति का तकनीकी सत्यापन किया जाए और उसके बाद ही निर्माण संबंधी प्रमाणपत्रों पर निर्णय लिया जाए।

अनधिकृत प्लॉटिंग या नियम उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई की मांग

शिकायत में यह भी मांग की गई है कि यदि जांच में अनधिकृत प्लॉटिंग, नियम-विरुद्ध निर्माण अथवा विद्युत सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित भू-स्वामियों, डेवलपर्स, कंपनियों अथवा जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ लागू कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

यदि पहले से कोई NOC, लाइसेंस अथवा BCC जारी किया गया है, तो उसके आधार, निरीक्षण रिपोर्ट और तकनीकी अनुमोदन भी सार्वजनिक किए जाने की मांग की गई है।

दस्तावेज गलत पाए जाने पर कार्रवाई की मांग, लेकिन अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं

शिकायत के मसौदे में यह भी कहा गया है कि यदि जांच के दौरान कोई दस्तावेज फर्जी, गलत अथवा गलत जानकारी के आधार पर प्राप्त किया गया पाया जाता है, तो लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाए।

लेकिन वर्तमान उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी दस्तावेज के आधिकारिक रूप से फर्जी घोषित किए जाने या इस संबंध में कोई अपराध सिद्ध होने की पुष्टि नहीं है।

इसलिए फिलहाल इसे केवल जांच की मांग के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

15 दिनों में Action Taken Report की मांग

अनिल भोईर के पत्र में मामले की विस्तृत जांच कर 15 दिनों के भीतर लिखित Action Taken Report देने की मांग की गई है।

साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि संयुक्त स्थल निरीक्षण और सुरक्षा सत्यापन के बिना BCC देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है, तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जाएगा।

अब प्रशासन के सामने छह बड़े सवाल

इस पूरे मामले में दस्तावेज सामने आने तक निम्न सवाल महत्वपूर्ण बने हुए हैं—

1. ‘Cluster-2’ की आधिकारिक स्थिति और मंजूरी क्या है?

2. लगभग 100 से 120 प्लॉट की कथित प्लॉटिंग किस स्वीकृत लेआउट के आधार पर की गई है?

3. 400 KV विद्युत लाइन और प्रस्तावित निर्माणों के बीच वास्तविक सुरक्षा दूरी कितनी है?

4. संबंधित NOC किस स्थल निरीक्षण और तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर जारी की गई?

5. GNP परियोजना की मंजूरी में किन अधिकारियों ने फाइल की जांच की और अंतिम मंजूरी किस स्तर पर दी गई?

6. निखिल लटके और उदय ढाले की परियोजना में आधिकारिक भूमिका क्या थी?

RTI से सामने आएगी मंजूरी प्रक्रिया की पूरी तस्वीर?

अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका RTI से मिलने वाले दस्तावेजों की हो सकती है।

राजनीतिक आरोप, शिकायतें या मौखिक दावे अपनी जगह हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति का आकलन मूल फाइल, नोटशीट, NOC, तकनीकी रिपोर्ट, स्वीकृत लेआउट, बैठक के प्रस्ताव और स्थल निरीक्षण रिकॉर्ड के आधार पर ही किया जा सकता है।

यदि सभी मंजूरियां नियमानुसार हुई हैं, तो संबंधित प्रशासन के पास दस्तावेजों के जरिए स्थिति स्पष्ट करने का अवसर होगा। दूसरी ओर, यदि दस्तावेजों में नियमों के उल्लंघन, विसंगतियां या सुरक्षा संबंधी कमियां सामने आती हैं, तो आगे की जांच और जिम्मेदारी तय करने का आधार भी तैयार हो सकता है।

निष्कर्ष: औद्योगिक विकास जरूरी, लेकिन सुरक्षा से समझौता नहीं

अंबरनाथ MIDC में औद्योगिक विकास रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन हाई-वोल्टेज विद्युत लाइन और टावरों के आसपास प्रस्तावित निर्माण के मामले में सार्वजनिक एवं श्रमिक सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

‘Cluster-2’ की कथित प्लॉटिंग से लेकर 400 KV विद्युत कॉरिडोर, NOC, भूखंड आवंटन, GNP परियोजना और BCC तक—हर स्तर पर दस्तावेजी और तकनीकी सत्यापन आवश्यक दिखाई देता है।

इस पूरे प्रकरण में फिलहाल किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराने के बजाय यह जरूरी है कि MIDC और संबंधित विद्युत प्राधिकरण संयुक्त स्थल निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें और RTI के माध्यम से मांगे गए रिकॉर्ड उपलब्ध कराएं।

आखिर सवाल केवल यह नहीं है कि फाइल पर मंजूरी किसने दी, बल्कि यह भी है कि क्या मौके पर वास्तविक सुरक्षा मानकों का पालन हुआ?

कागज पर मंजूरी महत्वपूर्ण है या मजदूरों की सुरक्षा—इसका जवाब अब दस्तावेजों, तकनीकी जांच और प्रत्यक्ष स्थल निरीक्षण से ही सामने आना चाहिए।