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अंबरनाथ के शिवजी नगर पुलिस स्टेशन के आहते से जब्त ट्रक ले जाने की कथित कोशिश! मौके पर पकड़े जाने के बाद कार्रवाई को लेकर उठे सवाल.!


अंबरनाथ: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

अंबरनाथ पूर्व के शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा में है। सरकारी पानी की पाइपों की कथित चोरी के मामले में जब्त किए गए ट्रक को पुलिस स्टेशन परिसर से बाहर ले जाने की कोशिश किए जाने के आरोप सामने आए हैं। दावा है कि यह प्रयास दिनदहाड़े किया गया और संबंधित व्यक्ति को मौके पर पकड़ भी लिया गया। हालांकि, उसके खिलाफ बाद में क्या कानूनी कार्रवाई की गई, इसे लेकर अब सवाल उठ रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 1 अक्टूबर की शाम शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन के परिसर में खड़े सरकारी पानी की पाइपों से लदे जब्त ट्रक को कथित रूप से बाहर ले जाने का प्रयास किया गया। आरोप है कि संबंधित व्यक्ति ने किसी अधिकारी का नाम लेकर पुलिस पर प्रभाव डालने की कोशिश की। सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक प्रमोद पाटील ने मौके पर पहुंचकर संबंधित व्यक्ति को पकड़ लिया।

हालांकि, इस कथित घटना के बाद संबंधित व्यक्ति के खिलाफ रॉबरी, चोरी के माल को हटाने के प्रयास अथवा अन्य लागू कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया या नहीं, इसे लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इसी वजह से पुलिस की कार्रवाई और पूरे घटनाक्रम की जांच को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

27 सितंबर को कथित चोरी के मामले में ट्रक जब्त

इस मामले की पृष्ठभूमि 27 सितंबर की रात से जुड़ी बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, अंबरनाथ पूर्व क्षेत्र से सरकारी पानी की पाइपों की कथित चोरी के मामले में एक व्यक्ति को पुलिस ने पकड़ा था। एसीपी शैलेश काळे के मार्गदर्शन में पीएसआई केशव हसगोले की टीम द्वारा कार्रवाई किए जाने और पाइपों से लदे MH-01-EW-4252 नंबर के ट्रक को कब्जे में लेकर शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन परिसर में जमा किए जाने की जानकारी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि ट्रक में मौजूद सामग्री की जांच तथा उसके स्रोत और स्वामित्व को लेकर पुलिस द्वारा पड़ताल की जा रही थी। ऐसे में जांच के दायरे में मौजूद वाहन को पुलिस स्टेशन परिसर से बाहर ले जाने की कथित कोशिश ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

BNSS की धारा 35(1)(e) का भी उल्लेख

मामले से जुड़ी जानकारी में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 35(1)(e) का भी उल्लेख किया जा रहा है। इस प्रावधान के तहत पुलिस को ऐसी स्थिति में बिना वारंट कार्रवाई करने का अधिकार हो सकता है, जब किसी व्यक्ति के कब्जे में ऐसी वस्तु पाए जाने का उचित संदेह हो जो चोरी की संपत्ति हो।

हालांकि, इस प्रावधान का वास्तविक अनुप्रयोग मामले के उपलब्ध तथ्यों, पुलिस की जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करता है। इसलिए इस मामले में धारा 35(1)(e) के तहत हुई कार्रवाई और उसके बाद की प्रक्रिया की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

जब्त ट्रक को पर्सनल बॉण्ड पर छोड़े जाने की भी चर्चा

मामले में यह भी दावा किया जा रहा है कि जांच के दौरान न्यायालय के समक्ष संबंधित आवेदन प्रस्तुत किया गया था और जब्त ट्रक को जांच के दायरे में रखा गया था। इसके बावजूद बाद में ट्रक को पर्सनल बॉण्ड पर छोड़े जाने की जानकारी सामने आई है।

यदि ऐसा हुआ है, तो ट्रक को किस आदेश, किस प्रक्रिया और किन शर्तों के आधार पर छोड़ा गया, यह स्पष्ट होना आवश्यक है। साथ ही, पुलिस स्टेशन परिसर से उसी वाहन को दोबारा बाहर ले जाने के कथित प्रयास की स्थिति में पुलिस ने क्या कार्रवाई की, यह भी जांच का विषय हो सकता है।

₹1.70 लाख के कथित लेन-देन का आरोप

इस पूरे प्रकरण के बीच एक व्यक्ति द्वारा कथित तौर पर ₹1.70 लाख लिए जाने और बाद में रकम वापस किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। हालांकि, इस कथित आर्थिक लेन-देन की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

ऐसे आरोपों की सत्यता निर्धारित करने के लिए संबंधित व्यक्तियों के बयान, आर्थिक लेन-देन के रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।

सबसे बड़ा सवाल—पुलिस स्टेशन परिसर में सुरक्षा और जब्त माल की निगरानी पर

यदि पुलिस स्टेशन परिसर में जब्त वाहन को वास्तव में बाहर ले जाने का प्रयास किया गया था, तो यह केवल एक व्यक्ति की कथित हरकत तक सीमित मामला नहीं माना जा सकता। इससे जब्त संपत्ति की सुरक्षा, पुलिस स्टेशन की निगरानी व्यवस्था, सीसीटीवी रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी जैसे सवाल भी उठते हैं।

साथ ही यह भी स्पष्ट होना आवश्यक है कि कथित प्रयास में कौन-कौन लोग शामिल थे, वाहन को बाहर ले जाने का उद्देश्य क्या था और घटना के बाद पुलिस ने कौन-सी कानूनी कार्रवाई की।

डीसीपी स्तर पर जांच की मांग

घटना से जुड़े आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अब निगाहें उल्हासनगर जोन-4 के डीसीपी सचिन गोरे की ओर हैं। यदि आरोपों में तथ्यात्मक आधार है, तो पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि जब्त वाहन को पुलिस स्टेशन परिसर से बाहर ले जाने का प्रयास कैसे हुआ और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।

अब बड़ा सवाल यही है—पुलिस स्टेशन परिसर में जब्त वाहन को बाहर ले जाने की कथित कोशिश के मामले में आखिर आधिकारिक तौर पर क्या कार्रवाई हुई?





















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