BREAKING NEWS
national

सियासत

politics

अंबरनाथ में शिवसेना की अंदरूनी खींचतान फिर आई सामने, शिवसेना के वरिष्ठ नेता अरविंद वाळेकर ने विधायक डॉ. बालाजी किणीकर पर जमकर निशाना साधा; राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज।


अंबरनाथ: दिनेश मीरचंदानी

अंबरनाथ की राजनीति में शिवसेना (शिंदे गुट) के भीतर बढ़ते मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नगराध्यक्ष अरविंद वाळेकर ने अपने हालिया बयान में बिना किसी का नाम लिए विधायक डॉ. बालाजी किणीकर के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

अरविंद वाळेकर ने कहा कि अंबरनाथ की जनता आज भी पानी, बिजली, सड़क, सफाई और अन्य मूलभूत नागरिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रही है। उनका आरोप है कि जनप्रतिनिधियों का पूरा ध्यान इन समस्याओं के समाधान पर केंद्रित होने के बजाय राजनीतिक गतिविधियों और शक्ति प्रदर्शन पर अधिक दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि जनता विकास और जवाबदेही चाहती है, लेकिन उसे केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं।

वाळेकर ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि लंबे समय तक आम नागरिकों की समस्याओं की अनदेखी करने वाले जनप्रतिनिधियों को अब जनता लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और उचित समय आने पर अपना फैसला सुनाएगी।

उनके इस बयान को शिवसेना के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर संगठन के भीतर नेतृत्व और कार्यशैली को लेकर असंतोष धीरे-धीरे खुलकर सामने आ रहा है। पार्टी के नेताओं के सार्वजनिक बयान संगठन के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकते हैं।

हालांकि शिवसेना नेतृत्व पहले भी अंबरनाथ में किसी प्रकार की गुटबाजी से इनकार करता रहा है, लेकिन समय-समय पर सामने आने वाले नेताओं के बयानों ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अरविंद वाळेकर के ताजा बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा तेज हो गई है कि अंबरनाथ इकाई में सब कुछ सामान्य नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि संगठन के भीतर मतभेदों को समय रहते दूर नहीं किया गया, तो इसका असर आगामी चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है। फिलहाल वाळेकर के बयान ने अंबरनाथ की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और अब सभी की नजरें शिवसेना नेतृत्व की संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।


















विराट अंबे स्पोर्ट्स क्लब के कथित बोर्ड रेजोल्यूशन पर नया विवाद, निदेशक तरुण हिरानंदानी ने हस्ताक्षर बताए फर्जी; 29 मार्च 2025 की बैठक के अस्तित्व पर भी उठाए सवाल।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

विराट अंबे स्पोर्ट्स क्लब के कथित 29 मार्च 2025 के बोर्ड रेजोल्यूशन को लेकर विवाद और गहरा गया है। क्लब के निदेशक तरुण हिरानंदानी ने एक विस्तृत लिखित बयान जारी करते हुए दावा किया है कि उक्त बोर्ड प्रस्ताव पर उनके नाम से दर्शाए गए हस्ताक्षर उनके नहीं हैं, बल्कि पूरी तरह से फर्जी (Forged) हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी भी उस बोर्ड प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए और न ही उसे अपनी स्वीकृति प्रदान की।

तरुण हिरानंदानी ने अपने बयान में स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह 29 मार्च 2025 को कंपनी की किसी भी बोर्ड बैठक के आयोजन से भी पूरी तरह इनकार करते हैं। उनका कहना है कि उनकी जानकारी और विश्वास के अनुसार उस दिन कंपनी की कोई बोर्ड बैठक आयोजित ही नहीं हुई थी। ऐसे में उस बैठक के आधार पर तैयार किए गए किसी भी बोर्ड रेजोल्यूशन की वैधता और प्रामाणिकता स्वतः संदेह के घेरे में आ जाती है।

उन्होंने कहा कि यदि कंपनी यह दावा करती है कि 29 मार्च 2025 को विधिवत बोर्ड बैठक आयोजित हुई थी, तो उसे इस दावे के समर्थन में ठोस और दस्तावेजी साक्ष्य सार्वजनिक करने चाहिए। इसके लिए उन्होंने कंपनी से चार महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत करने की मांग की है।

इनमें सबसे पहले बोर्ड बैठक की कार्यवाही (Minutes of Meeting) की प्रमाणित प्रति, दूसरे यदि उपलब्ध हो तो बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग या वीडियोग्राफी, तीसरे बैठक में उपस्थित निदेशकों और सदस्यों का उपस्थिति रजिस्टर अथवा अन्य कोई दस्तावेज जिससे यह सिद्ध हो सके कि वह स्वयं बैठक में उपस्थित थे, तथा चौथे भवन परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, जिससे यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित हो सके कि 29 मार्च 2025 को उन्होंने कार्यालय परिसर में प्रवेश किया था और कथित बोर्ड बैठक में भाग लिया था।

तरुण हिरानंदानी ने यह भी कहा कि कंपनी का कार्यालय ऐसे भवन में स्थित है जहाँ सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। यदि वास्तव में उस दिन बोर्ड बैठक आयोजित हुई थी और वह उसमें शामिल हुए थे, तो कंपनी के लिए संबंधित सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत करना कठिन नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि ऐसे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य इस पूरे विवाद की सच्चाई सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने अपने बयान में आगे कहा कि यदि कंपनी उपरोक्त में से कोई भी दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहती है, तो यह स्पष्ट माना जाना चाहिए कि 29 मार्च 2025 को कोई बोर्ड बैठक आयोजित नहीं हुई थी। साथ ही उन्होंने दोहराया कि कथित बोर्ड रेजोल्यूशन पर उनके नाम से किए गए हस्ताक्षर पूरी तरह फर्जी, मनगढ़ंत और धोखाधड़ीपूर्वक उनके ज्ञान एवं सहमति के बिना तैयार किए गए हैं।

तरुण हिरानंदानी ने स्पष्ट किया कि वह उक्त बोर्ड प्रस्ताव की वैधता, प्रामाणिकता और सत्यता को पूरी तरह अस्वीकार करते हैं तथा भविष्य में इस संबंध में उपलब्ध कानूनी अधिकारों का उपयोग करने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।

इस मामले में अब सबकी निगाहें कंपनी के आधिकारिक पक्ष पर टिकी हुई हैं। यदि कंपनी बोर्ड बैठक और बोर्ड रेजोल्यूशन की वैधता का दावा करती है, तो उसके समक्ष संबंधित दस्तावेज, उपस्थिति रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण होगा। वहीं, यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो इस कथित बोर्ड रेजोल्यूशन को लेकर उठे सवाल और भी गंभीर हो सकते हैं।

नोट: विराट अंबे स्पोर्ट्स क्लब और सिंघानिया स्कूल के बीच हुए कथित समझौते में कई गंभीर अनियमितताओं और सवालों की बात सामने आ रही है। इस पूरे मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों और दस्तावेजों का खुलासा हमारे अगले अंक में किया जाएगा।



















शिवसेना नगरसेविका डॉ. मीना सोंडे एवं सोहम फाउंडेशन का अनूठा पहल, 'प्रकृति के साथ फ्रेंडशिप डे' पर 100 आशा कार्यकर्ताओं को रेनकोट और 50 पौधों का वितरण।


 




उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

फ्रेंडशिप डे के अवसर पर शिवसेना की नगरसेविका डॉ. मीना सोंडे एवं सोहम फाउंडेशन द्वारा सामाजिक सेवा और पर्यावरण संरक्षण को समर्पित एक विशेष कार्यक्रम "प्रकृति के साथ फ्रेंडशिप डे" का आयोजन किया गया। इस अवसर पर समाज में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली जमीनी स्तर पर कार्यरत 100 आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं को मानसून के दौरान उनकी सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेनकोट वितरित किए गए।

कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य का संदेश देते हुए 50 नीम एवं बेलपत्र के पौधों का भी वितरण किया गया। उपस्थित लोगों से इन पौधों का रोपण एवं संरक्षण करने का आह्वान किया गया, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और हरित वातावरण मिल सके।

इस अवसर पर नगरसेविका डॉ. मीना सोंडे ने कहा कि फ्रेंडशिप डे केवल लोगों के बीच मित्रता का पर्व नहीं है, बल्कि हमें प्रकृति के साथ अपने रिश्ते को भी मजबूत करने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ता हर परिस्थिति में लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का कार्य करती हैं, इसलिए उनका सम्मान और सहयोग करना समाज की जिम्मेदारी है।

उन्होंने नागरिकों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने और पर्यावरण संरक्षण के अभियान से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि "प्रकृति से प्रेम करें, क्योंकि प्रकृति हमारी सबसे बड़ी मित्र है। यदि प्रकृति सुरक्षित रहेगी, तभी हमारा भविष्य भी सुरक्षित रहेगा।"

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता, स्थानीय नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता तथा सोहम फाउंडेशन के पदाधिकारी एवं स्वयंसेवक उपस्थित रहे। सभी ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया।

























पूर्व एनसीबी अधिकारी समीर वानखेड़े ने नव-चयनित IAS, IPS, IRS और IFS अधिकारियों का किया सम्मान, विधान परिषद के उपसभापति सचिन अहीर समेत कई सांसद-विधायक रहे मौजूद।


 










मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवाओं में चयनित नव-नियुक्त IAS, IPS, IRS और IFS अधिकारियों के सम्मान में आयोजित भव्य समारोह में पूर्व एनसीबी के जोनल निदेशक एवं भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के वरिष्ठ अधिकारी समीर वानखेड़े ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। समारोह में विभिन्न राज्यों से चयनित युवा अधिकारियों का सम्मान किया गया और उन्हें राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को पूरी निष्ठा, ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ निभाने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति सचिन अहीर सहित कई सांसद, विधायक, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद और विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद रहीं। सभी अतिथियों ने नव-चयनित अधिकारियों को उनकी ऐतिहासिक सफलता पर बधाई देते हुए कहा कि देश के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत बनाने में युवा अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

मुख्य अतिथि समीर वानखेड़े ने अपने संबोधन में कहा कि सिविल सेवा केवल एक प्रतिष्ठित करियर नहीं, बल्कि संविधान के मूल्यों की रक्षा करते हुए देश और समाज की सेवा करने का सबसे बड़ा दायित्व है। उन्होंने कहा कि एक प्रशासनिक अधिकारी को हर परिस्थिति में निष्पक्षता, पारदर्शिता, ईमानदारी और कानून के शासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने नव-चयनित अधिकारियों से आग्रह किया कि वे अपने पद की गरिमा बनाए रखते हुए आम नागरिकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का हरसंभव प्रयास करें।

वानखेड़े ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने चयनित अधिकारियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने, निरंतर सीखते रहने तथा जनहित को सर्वोपरि रखते हुए कार्य करने की प्रेरणा दी।

इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने भी अपने संबोधन में चयनित अधिकारियों की उपलब्धियों की सराहना की और कहा कि देश की प्रशासनिक व्यवस्था में नई ऊर्जा, नई सोच और जनसेवा की भावना के साथ प्रवेश करने वाले ये युवा अधिकारी भारत के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव साबित होंगे।

समारोह के दौरान सभी नव-चयनित IAS, IPS, IRS और IFS अधिकारियों को स्मृति-चिन्ह एवं सम्मान-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान उत्साह, गौरव और प्रेरणा का वातावरण देखने को मिला। उपस्थित अतिथियों ने चयनित अधिकारियों के साथ संवाद भी किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य और सफल प्रशासनिक जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं।

यह समारोह न केवल नव-चयनित अधिकारियों के सम्मान का अवसर बना, बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा का भी केंद्र रहा। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि सिविल सेवाओं में पहुंचना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति बड़ी जिम्मेदारी का प्रारंभ है। समारोह का समापन सभी अधिकारियों के उज्ज्वल भविष्य और राष्ट्रहित में उत्कृष्ट योगदान की कामना के साथ हुआ।


















समीर वानखेड़े के खिलाफ NCB की विभागीय जांच पर बॉम्बे हाईकोर्ट की रोक, अदालत ने एजेंसी की कार्रवाई पर उठाए गंभीर सवाल।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के पूर्व मुंबई जोनल निदेशक समीर वानखेड़े को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच और पूछताछ की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने इस मामले की सुनवाई के दौरान एनसीबी की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल गुमनाम शिकायतों और उन आरोपियों के बयानों के आधार पर किसी जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि यदि जांच एजेंसियों के अधिकारियों को हर मामले में आरोपियों द्वारा लगाए गए आरोपों या अनाम शिकायतों के आधार पर जांच का सामना करना पड़ेगा, तो वे भविष्य में अपने कर्तव्यों का निष्पक्ष और निर्भीक होकर पालन नहीं कर पाएंगे। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति जांच एजेंसियों के मनोबल और उनकी स्वतंत्र कार्यप्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

समीर वानखेड़े ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि एनसीबी उनके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण और प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई कर रही है। उनका कहना है कि उनके द्वारा पूर्व में संभाले गए चर्चित मामलों के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और विभागीय जांच का उद्देश्य उन्हें परेशान करना है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी अधिकारी के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले उसके समर्थन में ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य होना आवश्यक है। केवल आरोपियों के आरोप या गुमनाम शिकायतें किसी निष्पक्ष जांच का पर्याप्त आधार नहीं बन सकतीं।

अदालत ने फिलहाल समीर वानखेड़े के खिलाफ जारी विभागीय पूछताछ और जांच की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी, जहां अदालत इस पूरे विवाद पर विस्तृत सुनवाई करेगी।

गौरतलब है कि समीर वानखेड़े अपने कार्यकाल के दौरान कई हाई-प्रोफाइल मादक पदार्थ मामलों की जांच को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे थे। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई को लेकर भी लंबे समय से विवाद बना हुआ है। हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश को उनके लिए महत्वपूर्ण कानूनी राहत माना जा रहा है।

















उल्हासनगर के कार गैलेरिया से जुड़े दो कारोबारी भाइयों पर ₹61 लाख की कथित ठगी का मामला, बदलापुर में केस दर्ज।

उल्हासनगर/बदलापुर: दिनेश मीरचंदानी

फ्रेंडली लोन के नाम पर ₹61 लाख की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। बदलापुर पश्चिम पुलिस ने उल्हासनगर स्थित कार गैलेरिया के दो कारोबारी भाइयों के खिलाफ एक बदलापुर निवासी से आर्थिक तंगी का हवाला देकर बड़ी रकम उधार लेने और बाद में वापस नहीं करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता रुपेश इरमाली (35), निवासी राधे पैराडाइज, बदलापुर पश्चिम, ने अपनी शिकायत में बताया है कि उल्हासनगर-4 के सेक्शन 30-ए निवासी नितिन अमरलाल बजाज और बंटी अमरलाल बजाज, जो कार गैलेरिया नाम से व्यवसाय संचालित करते हैं, ने अपने कारोबार में गंभीर आर्थिक संकट होने की बात कहकर उनसे फ्रेंडली लोन के रूप में पैसे मांगे थे।

शिकायत के अनुसार, 1 अप्रैल 2019 से 31 अक्टूबर 2020 के बीच आरोपियों ने अलग-अलग समय पर कुल ₹61 लाख उधार लिए। उन्होंने शिकायतकर्ता को भरोसा दिलाया था कि आर्थिक स्थिति सुधरते ही पूरी रकम वापस कर दी जाएगी। इसी विश्वास के आधार पर शिकायतकर्ता ने उन्हें यह राशि दी।

हालांकि, आरोप है कि निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी आरोपियों ने उधार ली गई रकम वापस नहीं की। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने कई बार पैसे लौटाने की मांग की, लेकिन हर बार टालमटोल की गई। आरोप है कि आरोपियों ने उधार ली गई राशि का उपयोग अपने निजी लाभ के लिए किया और जानबूझकर रकम लौटाने से परहेज किया, जिससे शिकायतकर्ता को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

शिकायत की जांच के बाद बदलापुर पश्चिम पुलिस स्टेशन में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 316(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता के साथ धोखाधड़ी की मंशा से रकम हासिल की थी या नहीं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की आगे की जांच पुलिस उपनिरीक्षक पल्लेवाड कर रहे हैं। जांच के दौरान लेन-देन से जुड़े दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जाएगी। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
























प्रहार संगठन के नेता एडवोकेट स्वप्निल पाटिल ने शुरू से उठाया मामला, तोड़फोड़ के बाद दोबारा निर्माण कराने के आरोप; कई नगरसेवकों के विरोध के बावजूद कार्रवाई पर सवाल।


 



उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

रिजेंसी परिसर में लगभग 30,000 वर्गफुट के कथित अवैध निर्माण को लेकर एक बार फिर प्रशासन की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। इस मामले में अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर अतिरिक्त आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों से विस्तृत एवं स्पष्ट रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने यह स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं कि इतने बड़े पैमाने पर हुए कथित अवैध निर्माण के बावजूद नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं की गई और इसमें किन अधिकारियों की क्या भूमिका रही।

मामले को लेकर नगररचनाकार विकास बिरारी पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि उन्होंने रिजेंसी के कथित अवैध निर्माण को बचाने का प्रयास किया, हालांकि यह प्रयास सफल नहीं हो सका। इस पूरे प्रकरण को लेकर प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय किए जाने की मांग भी तेज हो गई है।

बताया जा रहा है कि इस मामले को प्रहार संगठन के नेता एडवोकेट स्वप्निल पाटिल ने शुरुआत से ही लगातार उठाया। उन्होंने कथित अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन को कई बार शिकायतें दीं और कार्रवाई की मांग की। संगठन के लगातार विरोध और दबाव के बाद संबंधित निर्माण पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई थी।

हालांकि, प्रहार संगठन का आरोप है कि तोड़फोड़ के बाद भी मामला यहीं समाप्त नहीं हुआ। संगठन का दावा है कि नगररचनाकार विकास बिरारी की कथित मंजूरी से उसी स्थान पर दोबारा निर्माण कराया गया, जिससे पूरे मामले की निष्पक्षता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्रहार संगठन का यह भी आरोप है कि कई नगरसेवकों ने इस मामले का विरोध किया और कथित अनियमितताओं की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया, लेकिन उनके विरोध को नजरअंदाज कर दिया गया। संगठन का कहना है कि नगररचनाकार विकास बिरारी ने कथित रूप से नियमों की अनदेखी करते हुए अवैध निर्माण को संरक्षण देने का प्रयास किया।

संगठन ने यह भी दावा किया है कि उसने पूर्व नगररचनाकारों के कार्यकाल में हुई कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को भी लगातार उजागर किया है। प्रहार संगठन का कहना है कि यदि समय रहते इन मामलों पर सख्त कार्रवाई की जाती, तो इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

अब अतिरिक्त आयुक्त द्वारा रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद इस पूरे मामले में प्रशासनिक जिम्मेदारी तय होने और आगे की कार्रवाई को लेकर लोगों की नजरें प्रशासन पर टिकी हुई हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

नगररचनाकार विकास बिरारी के गैरव्यव्हार के खिलाफ संचालक नगररचनाकार पुणे मे सोमवार दिनांक १० अगस्ट २०२६ को होगा प्रहार का आंदोलन।