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अहमदाबाद के प्रभावशाली चेहरे पवन सिंधी: भाजपा, आरएसएस और वीएचपी में मजबूत पकड़ की चर्चा, राजनीतिक गलियारों में बढ़ती पहचान।

अहमदाबाद: दिनेश मीरचंदानी

गुजरात की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों में समय-समय पर कुछ ऐसे नाम चर्चा का विषय बनते हैं, जिनकी संगठनात्मक पहुंच और प्रभाव को लेकर व्यापक चर्चाएं होती हैं। इन्हीं नामों में पवन सिंधी का भी उल्लेख किया जाता है। अहमदाबाद के निवासी पवन सिंधी को शहर की जानी-मानी हस्तियों में गिना जाता है और विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक मंचों पर उनकी सक्रियता चर्चा का विषय बनी रहती है।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, पवन सिंधी की गुजरात भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं और संगठन के पदाधिकारियों के साथ अच्छी पहचान और संपर्क बताए जाते हैं। यही वजह है कि उन्हें पार्टी के प्रभावशाली और सक्रिय समर्थकों में से एक माना जाता है। राजनीतिक हलकों में यह भी माना जाता है कि संगठनात्मक स्तर पर उनकी पहुंच काफी मजबूत है और कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों तथा सामाजिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी देखने को मिलती रही है।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी लंबे समय से होती रही है कि पवन सिंधी को भारत सरकार के गृह मंत्री अमित शाह के करीबी लोगों में से एक माना जाता है। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक वर्गों में उनके संपर्कों को लेकर अक्सर चर्चाएं होती रही हैं।

जानकारों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के विभिन्न कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों के बीच भी पवन सिंधी की अच्छी पहचान और मजबूत पकड़ मानी जाती है। सामाजिक, धार्मिक और संगठनात्मक कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय उपस्थिति के कारण उनका व्यापक संपर्क नेटवर्क विकसित हुआ है, जिससे वे गुजरात के विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक वर्गों में एक प्रभावशाली व्यक्तित्व के रूप में देखे जाते हैं।

सूत्रों के अनुसार, पवन सिंधी वर्षों से सामाजिक सेवा, संगठनात्मक गतिविधियों और जनसंपर्क के माध्यम से सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। यही कारण है कि अहमदाबाद सहित गुजरात के कई क्षेत्रों में उनकी पहचान लगातार मजबूत होती गई है और राजनीतिक हलकों में उनका नाम समय-समय पर चर्चा में बना रहता है।














उल्हासनगर के गोल मैदान क्रिकेट स्टेडियम परियोजना में कथित गड़बड़ियों पर उठे सवाल, शिवसेना (यूबीटी) के महानगर प्रमुख दिलीप मिश्रा ने मुख्यमंत्री समेत ED, CBI, EOW और ACB से निष्पक्ष जांच की मांग की।


 



उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के गोल मैदान में प्रस्तावित क्रिकेट स्टेडियम एवं सौंदर्यीकरण परियोजना को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में नया विवाद खड़ा हो गया है। दिलीप व. मिश्रा ने इस परियोजना में कथित वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री सहित कई केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय जांच एजेंसियों से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

दिलीप मिश्रा द्वारा 29 जून 2026 को उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में दावा किया गया है कि गोल मैदान में क्रिकेट स्टेडियम (स्पोर्ट्स ऑडिटोरियम/क्रिकेट क्लब) और सौंदर्यीकरण परियोजना के लिए लगभग ₹2.85 करोड़ का ठेका वर्ष 2022 में मैसर्स जय भारत कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया था। हालांकि, चार वर्ष बीत जाने के बाद भी परियोजना का कार्य अपेक्षित स्तर पर पूरा नहीं हुआ है और मौके पर उल्लेखनीय प्रगति दिखाई नहीं देती।

ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि बिना वास्तविक कार्य किए ₹1,00,08,652 का बिल मंजूरी के लिए लेखा विभाग को भेजा गया है। पत्र में कहा गया है कि यदि यह आरोप सही साबित होता है तो यह करदाताओं के धन के दुरुपयोग और गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला हो सकता है।

ज्ञापन में सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। विशेष रूप से इंजीनियर संदीप जाधव की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही परियोजना की वास्तविक प्रगति, स्वीकृत निधि, भुगतान और बिलों का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की भी मांग की गई है।

दिलीप मिश्रा ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक परियोजना से संबंधित किसी भी बिल का भुगतान या मंजूरी न दी जाए। यदि बिना कार्य किए अथवा अधूरे कार्य के आधार पर भुगतान की पुष्टि होती है, तो संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता एवं भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।

इसके साथ ही उन्होंने इस पूरे मामले की जांच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, आर्थिक अपराध शाखा तथा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो जैसी एजेंसियों से कराने की मांग की है, ताकि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो सके।

ज्ञापन की प्रतिलिपि शहर अभियंता, मुख्य लेखापरीक्षक, जनसंपर्क अधिकारी तथा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, ठाणे को भी भेजी गई है।

पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि मामले में समय रहते निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई, तो शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की ओर से उल्हासनगर महानगरपालिका मुख्यालय के सामने व्यापक जन आंदोलन किया जाएगा।

नोट: उपरोक्त आरोप ज्ञापन में लगाए गए आरोपों और मांगों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि या जांच के निष्कर्ष अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं।














उल्हासनगर मनपा के पीडब्ल्यूडी विभाग में लंबे समय से पदस्थ संदीप जाधव को लेकर सवाल तेज हो गए हैं। तबादला न होने और कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच नागरिकों ने मनपा आयुक्त मनीषा आव्हाले से जवाब और कार्रवाई की मांग की है।


(फाइल फोटो) 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के लोक निर्माण (PWD) विभाग में लंबे समय से कार्यरत अधिकारी संदीप जाधव को लेकर शहर में एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। स्थानीय नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से महानगरपालिका आयुक्त मनीषा आव्हाले से यह सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर संदीप जाधव की अब तक किसी अन्य विभाग में बदली क्यों नहीं की गई।

महाराष्ट्र सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (GR) में अधिकारियों के स्थानांतरण को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित हैं, जिनके तहत सामान्यतः तीन वर्ष की सेवा अवधि पूरी होने के बाद तबादला किया जाता है। ऐसे में उल्हासनगर महानगरपालिका के लोक निर्माण (PWD) विभाग में संदीप जाधव के लंबे समय से लगातार कार्यरत रहने पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि जब अन्य अधिकारियों का समय-समय पर स्थानांतरण होता है, तो संदीप जाधव की अब तक दूसरे विभाग में नियुक्ति क्यों नहीं की गई। इसी मुद्दे को लेकर प्रशासनिक पारदर्शिता और स्थानांतरण नीति के पालन पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, संदीप जाधव के खिलाफ पहले से ही एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा जांच किए जाने की बात कही जा रही है। उन पर भ्रष्टाचार से जुड़े विभिन्न आरोप लगाए गए हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि उनके नाम अथवा उनसे जुड़ी कथित संपत्तियों की भी जांच एजेंसी द्वारा पड़ताल की जा रही है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सूत्रों का यह भी आरोप है कि लोक निर्माण विभाग में होने वाली टेंडर प्रक्रिया के संचालन और प्रबंधन में संदीप जाधव की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। आरोप यह भी हैं कि वे कथित रूप से विवादित अथवा फर्जी बिलों पर हस्ताक्षर करते हैं। इसके अलावा कुछ बड़े ठेकेदारों के साथ टेंडर प्रक्रिया में उनकी कथित साझेदारी होने के भी आरोप लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों के समर्थन में अब तक कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया गया है और न ही संबंधित अधिकारी की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने आई है।

इन आरोपों और चर्चाओं के बीच अब शहर के नागरिकों की मांग है कि यदि किसी अधिकारी के खिलाफ जांच या गंभीर आरोप लंबित हैं, तो पारदर्शिता बनाए रखने के लिए संबंधित मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि स्थानांतरण नीति लागू होती है, तो उसका पालन सुनिश्चित किया जाए। नागरिकों का कहना है कि इससे प्रशासन की निष्पक्षता और जनता का विश्वास दोनों मजबूत होंगे।

वहीं, इस पूरे मामले में उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। संदीप जाधव की ओर से भी इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

(अस्वीकरण: इस समाचार में उल्लिखित भ्रष्टाचार, जांच, टेंडर प्रबंधन और अन्य सभी आरोप संबंधित सूत्रों एवं स्थानीय चर्चाओं पर आधारित हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारी या महानगरपालिका प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)














उल्हासनगर-2 के गजानंद मार्केट के पीछे स्थित टोक्यो मार्केट क्षेत्र में कथित ₹18–20 करोड़ के वीसी (चेक डिस्काउंट/वटाओं) घोटाले की चर्चा तेज, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

शहर के उल्हासनगर-2 इलाके में कथित तौर पर ₹18 से ₹20 करोड़ के वीसी (चेक डिस्काउंट/वटाओं) और मंथली कार्ड से जुड़े बड़े वित्तीय लेनदेन घोटाले की चर्चाएं इन दिनों तेजी से फैल रही हैं। स्थानीय स्तर पर यह मामला व्यापारिक और वित्तीय हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, इस पूरे प्रकरण की अब तक किसी भी सरकारी एजेंसी या पुलिस विभाग द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

सूत्रों के अनुसार, यह कथित वित्तीय लेनदेन गजानंद मार्केट के पीछे स्थित टोक्यो मार्केट और उसके आसपास के क्षेत्र से संचालित होने की चर्चा है। दावा किया जा रहा है कि लंबे समय से वीसी (चेक डिस्काउंट/वटाओं) और मंथली कार्ड के माध्यम से बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन किया जा रहा था, जिसमें करोड़ों रुपये के लेनदेन होने की बात सामने आ रही है। फिलहाल इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

जानकारी के मुताबिक, कथित घोटाले की रकम ₹18 से ₹20 करोड़ के बीच बताई जा रही है। यदि यह मामला सही पाया जाता है, तो यह उल्हासनगर के हाल के वर्षों के बड़े वित्तीय मामलों में से एक हो सकता है। सूत्रों का यह भी कहना है कि मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ कई प्रभावशाली लोगों और कारोबारियों के नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि इस कथित वित्तीय नेटवर्क में वीसी (चेक डिस्काउंट/वटाओं) के अलावा मंथली कार्ड प्रणाली के जरिए भी बड़े पैमाने पर धन का लेनदेन किया जाता था। हालांकि, इस संबंध में कोई दस्तावेज़ या आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किया गया है और न ही किसी जांच एजेंसी ने इसकी पुष्टि की है।

स्थानीय व्यापारिक वर्ग में इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कई लोग पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके। यदि आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं, तो कई लोगों पर कानूनी कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

फिलहाल यह मामला केवल सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं पर आधारित है। संबंधित प्रशासन, पुलिस अथवा किसी जांच एजेंसी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या पुष्टि जारी नहीं की गई है। मामले की पुष्टि होने के बाद ही किसी भी व्यक्ति या संस्था की भूमिका स्पष्ट मानी जाएगी।














उल्हासनगर पीडब्ल्यूडी विभाग पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, वरिष्ठ अधिकारी और उनके सहयोगी शंकर की भूमिका पर उठे सवाल।


(फाइल इमेज) 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के लोक निर्माण (पीडब्ल्यूडी) विभाग एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी और उनसे जुड़े कुछ लोगों पर अवैध वसूली, फर्जी बिल तैयार कराने तथा सरकारी नियमों के कथित उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों ने विभाग की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों में पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

आरोप है कि शंकर नामक एक व्यक्ति कथित रूप से विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के लिए अवैध वसूली का काम करता है, जबकि उसी व्यक्ति पर फर्जी बिल तैयार कराने में भी भूमिका निभाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, इन मामलों ने अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) का भी ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। वहीं संबंधित वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ पहले से ही एसीबी द्वारा जांच चलने की भी चर्चा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

पीडब्ल्यूडी विभाग में विकास कार्यों के संबंध में भी कई गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि अनेक कार्यों की शुरुआत से पहले तथा कार्य पूर्ण होने के बाद आवश्यक फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं कराई जा रही है, जबकि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके अलावा, थर्ड पार्टी बिल ऑडिट की प्रक्रिया का भी कथित रूप से पालन नहीं किए जाने के आरोप हैं, जिससे सरकारी धन के उपयोग पर सवाल उठ रहे हैं।

आरोप लगाने वालों का कहना है कि विभाग में बड़ी संख्या में फर्जी बिलों के माध्यम से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। साथ ही, विभागीय प्रक्रियाओं और वित्तीय नियमों के खुलेआम उल्लंघन के भी आरोप लगाए जा रहे हैं। यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

इन आरोपों के बीच उल्हासनगर महानगरपालिका की आयुक्त मनीषा आव्हाले से मांग की जा रही है कि वह पीडब्ल्यूडी विभाग के कामकाज, बिल भुगतान प्रक्रिया, विकास कार्यों की गुणवत्ता, दस्तावेजों तथा वित्तीय लेनदेन की व्यापक जांच कराएं, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई हो तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।

गौरतलब है कि इस समय महाराष्ट्र विधानसभा का सत्र चल रहा है। ऐसे में यदि विपक्ष या जनप्रतिनिधियों द्वारा इस मुद्दे को सदन में उठाया जाता है, तो उल्हासनगर महानगरपालिका के पीडब्ल्यूडी विभाग में कथित भ्रष्टाचार का मामला राज्य स्तर पर भी चर्चा का विषय बन सकता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इन आरोपों पर क्या रुख अपनाता है और क्या इनकी निष्पक्ष जांच कराई जाती है।














मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ओएसडी राजेंद्र साबळे पाटील की बढ़ती प्रशासनिक साख, प्रभावी कार्यशैली और मजबूत पकड़ की हर ओर चर्चा।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कार्यालय में ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) के रूप में कार्यरत राजेंद्र साबळे पाटील इन दिनों अपनी प्रभावी कार्यशैली, प्रशासनिक दक्षता और सरकारी कामकाज पर मजबूत पकड़ को लेकर चर्चा का विषय बने हुए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के महत्वपूर्ण कार्यों के संचालन, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया में उनकी भूमिका को प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में सराहा जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, राजेंद्र साबळे पाटील मुख्यमंत्री कार्यालय में आने वाले विभिन्न विभागों से जुड़े मामलों की निगरानी, समन्वय और त्वरित निष्पादन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। जटिल प्रशासनिक मामलों को व्यवस्थित ढंग से संभालने, विभागों के बीच संवाद को प्रभावी बनाने और लंबित कार्यों के शीघ्र निस्तारण की दिशा में उनकी कार्यशैली को काफी प्रभावशाली माना जा रहा है।

बताया जाता है कि मुख्यमंत्री कार्यालय की कार्यप्रणाली को अधिक गतिशील और परिणामोन्मुख बनाने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। विभिन्न सरकारी विभागों के साथ निरंतर संवाद, योजनाओं की प्रगति की समीक्षा तथा समयसीमा के भीतर कार्यों को पूरा कराने की उनकी कार्यशैली ने उन्हें प्रशासनिक व्यवस्था में एक भरोसेमंद अधिकारी के रूप में स्थापित किया है।

सरकारी और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि राजेंद्र साबळे पाटील ने अपनी मेहनत, अनुशासन, कार्यकुशलता और प्रशासनिक अनुभव के दम पर मुख्यमंत्री कार्यालय में अपनी अलग पहचान बनाई है। अधिकारियों के साथ बेहतर समन्वय और त्वरित निर्णय क्षमता के कारण उनकी प्रशासनिक पकड़ लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है।

जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय की कार्यक्षमता को और अधिक प्रभावी बनाने तथा जनहित से जुड़े मामलों के समयबद्ध समाधान में उनकी भूमिका भविष्य में भी महत्वपूर्ण बनी रह सकती है। यही कारण है कि उनकी कार्यशैली और प्रशासनिक सक्रियता को लेकर विभिन्न स्तरों पर सकारात्मक चर्चा लगातार तेज हो रही है।














उल्हासनगर महापालिका में एसीबी के शिकंजे में आ चुके अधिकारियों को अहम पदभार देने पर उठे सवाल, राष्ट्र कल्याण पार्टी के प्रमुख शैलेश तिवारी ने 8 जुलाई को यूएमसी आयुक्त कार्यालय के बाहर धरना आंदोलन की घोषणा की।


 



उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका में भ्रष्टाचार निरोधक विभाग (एसीबी) द्वारा पूर्व में कार्रवाई का सामना कर चुके अधिकारियों एवं कर्मचारियों को महत्वपूर्ण विभागों का पदभार दिए जाने के विरोध में राष्ट्र कल्याण पार्टी ने आंदोलन का ऐलान किया है। पार्टी के पदाधिकारी शैलेश तिवारी ने महापालिका प्रशासक को पत्र सौंपकर चेतावनी दी है कि यदि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से तत्काल पदभार नहीं हटाया गया, तो 8 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे आयुक्त कार्यालय के समक्ष धरना आंदोलन किया जाएगा तथा शासनादेश (जीआर) की प्रतीकात्मक होली जलाई जाएगी।

पत्र में आरोप लगाया गया है कि पिछले कई वर्षों से ऐसे अधिकारी और कर्मचारी, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार, आर्थिक अनियमितता अथवा एसीबी की कार्रवाई से जुड़े आरोप रहे हैं, उन्हें लगातार महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार सौंपा जा रहा है। इससे महापालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

गणेश शिंपी को लेकर सबसे गंभीर आरोप

राष्ट्र कल्याण पार्टी ने अपने पत्र में सबसे अधिक सवाल गणेश शिंपी को दिए गए विभिन्न पदभारों को लेकर उठाए हैं। आरोप है कि मूल रूप से लघुलेखक (स्टेनो) पद पर कार्यरत होने के बावजूद उन्हें उपआयुक्त (प्रभाग समिति क्रमांक-2), कर निर्धारक एवं संकलक, चुनाव विभाग प्रमुख, अतिक्रमण विभाग सहित कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई है।

पत्र में दावा किया गया है कि शहर में बढ़ रहे अनधिकृत निर्माण, अतिक्रमण संबंधी मामलों तथा खतरनाक इमारतों को तोड़ने की प्रक्रिया में कथित आर्थिक अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यह भी आरोप लगाया गया है कि पिछले कई वर्षों से अतिक्रमण विभाग में कार्यरत रहते हुए उन्होंने बड़े पैमाने पर आर्थिक लाभ अर्जित किया है, जिसकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

साथ ही यह प्रश्न भी उठाया गया है कि नोडल अधिकारी का पद समाप्त किए जाने के बावजूद उन्हें अन्य नामों से समान प्रकार की जिम्मेदारियां क्यों सौंपी गईं। संगठन ने मांग की है कि उनसे सभी अतिरिक्त पदभार वापस लेकर उन्हें उनके मूल पद पर ही नियुक्त किया जाए।

अन्य अधिकारियों पर भी लगाए गए गंभीर आरोप

पत्र में कई अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यकाल तथा विभागीय जिम्मेदारियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

अजीत गोवारी पर अनधिकृत निर्माण मामलों में कथित आर्थिक लाभ लेने का आरोप लगाते हुए उन्हें क्रीड़ा एवं उद्यान विभाग का प्रभार दिए जाने पर आपत्ति जताई गई है।

संजय पवार पर नगररचना विभाग में लंबे समय से कार्यरत रहते हुए निर्माण अनुमति प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है तथा उनके स्थानांतरण की मांग की गई है।

अनिल खतुराणी के संबंध में कर विभाग और प्रभाग समिति में कथित भ्रष्टाचार का उल्लेख करते हुए उन्हें महिला एवं बाल कल्याण विभाग का प्रमुख बनाए जाने पर सवाल उठाए गए हैं।

अंकुश कदग पर भंडार विभाग में खरीद-बिक्री संबंधी अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए उन्हें दिए गए पदभारों की समीक्षा की मांग की गई है।

राजा बुलानी के विरुद्ध विधि विभाग से जुड़े मामलों में कथित आर्थिक लेन-देन के आरोप लगाए गए हैं।

छाया डगळे और भानु परमार के संबंध में भी पूर्व में भ्रष्टाचार संबंधी मामलों का उल्लेख करते हुए उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपे जाने पर आपत्ति दर्ज की गई है।

23 अन्य कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की मांग

राष्ट्र कल्याण पार्टी ने दावा किया है कि एसीबी द्वारा कार्रवाई का सामना कर चुके लगभग 23 अन्य कर्मचारियों को भी विभिन्न विभागों में महत्वपूर्ण पदभार दिए गए हैं। संगठन ने मांग की है कि ऐसे सभी मामलों की उच्चस्तरीय जांच कर संबंधित कर्मचारियों को संवेदनशील पदों से हटाया जाए।

प्रशासन को दिया अल्टीमेटम

शैलेश तिवारी ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि 8 जुलाई तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो आयुक्त कार्यालय के समक्ष व्यापक धरना आंदोलन किया जाएगा। साथ ही शासनादेश की प्रतीकात्मक होली जलाकर महापालिका प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया जाएगा।

इस पूरे मामले ने उल्हासनगर महानगरपालिका की कार्यप्रणाली, पदभार वितरण प्रक्रिया और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इन आरोपों और मांगों पर क्या कदम उठाता है।