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मुंबई: दिनेश मिरचंदानी

बॉम्बे हाई कोर्ट ने पासपोर्ट रिन्यूअल से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण और नागरिक अधिकारों को मजबूत करने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल किसी आपराधिक मामले के लंबित होने भर से किसी व्यक्ति के पासपोर्ट के नवीनीकरण (Passport Renewal) पर स्वतः रोक नहीं लगाई जा सकती। कोर्ट ने कहा कि किसी नागरिक के यात्रा करने और आजीविका कमाने के अधिकार को केवल तकनीकी और प्रक्रियात्मक अड़चनों के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता।

29 अप्रैल को दिए गए अपने आदेश में हाई कोर्ट ने उन परिस्थितियों पर गंभीर चिंता जताई, जिनमें आवेदकों को पासपोर्ट रिन्यूअल के लिए आपराधिक अदालतों से “नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट” (NOC) लेने के लिए मजबूर किया जाता है। अदालत ने कहा कि कई मामलों में न तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ समन जारी हुआ होता है और न ही अदालत द्वारा मामले पर औपचारिक संज्ञान लिया गया होता है, इसके बावजूद NOC की शर्त लगाना नागरिकों के लिए अनावश्यक देरी और परेशानी का कारण बनता है।

कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी संकेत दिया कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को इस तरह लागू नहीं किया जाना चाहिए जिससे किसी व्यक्ति के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हों। अदालत के अनुसार, केवल लंबित जांच या प्रारंभिक स्तर के मामलों के आधार पर पासपोर्ट रिन्यूअल रोकना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कोई स्पष्ट न्यायिक आदेश मौजूद न हो।

इस फैसले को उन हजारों लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिनके खिलाफ विभिन्न स्तरों पर आपराधिक मामले लंबित हैं और जिन्हें नौकरी, व्यवसाय, शिक्षा या अन्य कारणों से विदेश यात्रा करनी पड़ती है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में पासपोर्ट अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के लिए भी महत्वपूर्ण मार्गदर्शक साबित हो सकता है।















डायबिटीज मरीजों में पैरों से जुड़ी बढ़ती बीमारियों को ध्यान में रखते हुए उल्हासनगर में 10 मई को शिवसेना नगरसेविका मीना सोंडे की पहल पर निशुल्क विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाया जाएगा।


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

डायबिटीज के मरीजों में तेजी से बढ़ रही पैरों से जुड़ी गंभीर समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उल्हासनगर में एक विशेष “डायबिटिक फुट कैंप” का आयोजन किया जा रहा है। यह स्वास्थ्य शिविर 10 मई 2026 को फिनिक्स हॉस्पिटल, कुर्ला कैंप रोड, बाबासाई नगर, उल्हासनगर में आयोजित होगा, जहां मुंबई के प्रसिद्ध डायबिटिक फुट विशेषज्ञ मरीजों की जांच और परामर्श देंगे।

डॉक्टरों के अनुसार डायबिटीज का असर केवल शुगर लेवल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समय पर उपचार न मिलने पर पैरों में सूजन, जलन, झुनझुनी, न भरने वाले घाव, बार-बार संक्रमण और गैंग्रीन जैसी गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। कई मामलों में मरीजों को पैर काटने तक की नौबत आ जाती है। ऐसे में जागरूकता और समय पर उपचार बेहद जरूरी है।

इस विशेष कैंप में डायबिटिक फुट सर्जरी और उपचार के क्षेत्र के विशेषज्ञ डॉ. अरुण बाल और उनकी टीम मरीजों को मार्गदर्शन देंगे। कैंप में कंसल्टेंट डायबिटिक फुट सर्जन डॉ. सचिन विल्हेकर और डॉ. अर्चित चिटणीस भी उपस्थित रहेंगे। साथ ही उल्हासनगर महानगरपालिका की सभापति डॉ. मीना सोंडे की भी उपस्थिति रहेगी।

कैंप में पैरों की सूजन, लालिमा, कॉर्न, कैलोसिटी, न भरने वाले घाव, तेज दर्द, ऐंठन, टखनों की विकृति, अंदर की ओर मुड़ने वाले नाखून और गैंग्रीन जैसी समस्याओं की जांच की जाएगी। विशेषज्ञ मरीजों को उचित उपचार और भविष्य में सावधानी बरतने संबंधी सलाह भी देंगे।

यह कैंप सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक आयोजित किया जाएगा। आयोजकों ने बताया कि कैंप में शामिल होने के लिए पूर्व पंजीकरण अनिवार्य है। इच्छुक मरीज 88 79 88 28 32 और 91 67 67 67 90 नंबर पर संपर्क कर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।

इस स्वास्थ्य शिविर का आयोजन एस.एल. रहेजा हॉस्पिटल (ए फोर्टिस एसोसिएट), माहिम, मुंबई द्वारा किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के कैंप डायबिटीज मरीजों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकते हैं और समय रहते गंभीर जटिलताओं से बचाव संभव है।














यूरोप से उल्हासनगर पहुंचा ड्रग्स नेटवर्क! मुंबई के गोरेगांव नेस्को ड्रग्स केस की जांच में सामने आए कई सनसनीखेज खुलासे।


मुंबई/उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को ग्राउंड में आयोजित म्यूजिक कॉन्सर्ट के दौरान दो MBA छात्रों की कथित ड्रग ओवरडोज से हुई मौत के मामले में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। मामले की जांच में अब अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए किए गए भुगतान का खुलासा हुआ है, जिसने इस पूरे केस को और गंभीर बना दिया है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस मामले के मुख्य आरोपी महेश खेमलानी ने यूरोप में मौजूद अपने संपर्कों के जरिए करीब 4,000 एक्स्टेसी पिल्स मंगवाई थीं। जांच में यह भी सामने आया है कि ड्रग्स की यह खेप दो अलग-अलग चरणों में महाराष्ट्र लाई गई और बाद में उल्हासनगर तक पहुंचाई गई।

अधिकारियों के अनुसार, पहली खेप में करीब 3,000 एक्स्टेसी गोलियां भेजी गई थीं, जबकि दूसरी खेप में 1,000 गोलियां शामिल थीं। दोनों खेप कथित तौर पर कूरियर सेवा के माध्यम से आरोपी के साथी आयुष साहित्य के परिचित के पते पर पहुंचाई गईं। पुलिस अब इस सप्लाई नेटवर्क में शामिल अन्य संदिग्धों और स्थानीय संपर्कों की पहचान करने में जुटी हुई है।

जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि ड्रग सप्लायर को भुगतान पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली से नहीं, बल्कि टेथर (Tether) नामक क्रिप्टोकरेंसी के जरिए किया गया था। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल का उद्देश्य लेन-देन को छिपाना और जांच एजेंसियों से बचना था।

सूत्रों के अनुसार, मामले में अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट, डार्क वेब नेटवर्क और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन एंगल की भी गहन जांच की जा रही है। केंद्रीय एजेंसियां अब विदेशी संपर्कों, ड्रग सप्लाई चैन और फंडिंग नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हैं।

इस हाई-प्रोफाइल मामले में आने वाले दिनों में कई और अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, पुलिस ने संकेत दिए हैं कि जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा तथा ड्रग नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है।















फर्जीवाड़े और विवादों पर लगेगी रोक: महाराष्ट्र सरकार लाएगी प्रॉपर्टी कार्ड व्यवस्था।


मुंबई: दिनेश मिरचंदानी

महाराष्ट्र सरकार ने तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहे गांवों में जमीन संबंधी प्रक्रियाओं को आधुनिक और सुगम बनाने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। राज्य के राजस्व मंत्री Chandrashekhar Bawankule ने घोषणा की है कि अब शहरीकृत गांवों में पारंपरिक 7/12 उतारे (सातबारा) की जगह प्रॉपर्टी कार्ड जारी किए जाएंगे। सरकार के इस फैसले को भूमि अभिलेख व्यवस्था में बड़ा सुधार माना जा रहा है।

राज्य सरकार के अनुसार, कई गांव अब शहरों का स्वरूप ले चुके हैं, लेकिन वहां अब भी ग्रामीण भूमि रिकॉर्ड प्रणाली लागू है। इससे नागरिकों को जमीन खरीद-बिक्री, नामांतरण, बैंक लोन, निर्माण अनुमति और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन से जुड़ी सभी जानकारी एकीकृत और डिजिटल रूप में उपलब्ध होगी।

सरकार का मानना है कि प्रॉपर्टी कार्ड प्रणाली लागू होने से जमीन की सीमाएं, स्वामित्व और रिकॉर्ड अधिक स्पष्ट होंगे। इससे फर्जीवाड़ा, दोहरे रिकॉर्ड और जमीन विवादों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है। साथ ही नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर भी कम लगाने पड़ेंगे।

राजस्व विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, शहरीकृत क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती आबादी और रियल एस्टेट गतिविधियों को देखते हुए यह बदलाव आवश्यक हो गया था। प्रॉपर्टी कार्ड प्रणाली पहले से ही कई शहरी क्षेत्रों में लागू है और अब इसे शहरीकृत गांवों तक विस्तारित किया जाएगा। इसके तहत भूमि अभिलेखों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा, जिससे रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला भविष्य में स्मार्ट शहरी नियोजन और पारदर्शी भूमि प्रबंधन की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है। इससे निवेशकों, घर खरीदने वालों और आम नागरिकों को अधिक भरोसेमंद और स्पष्ट दस्तावेज मिलेंगे।

राज्य सरकार जल्द ही इस प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि इस फैसले से महाराष्ट्र के हजारों शहरीकृत गांवों के लाखों नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।














उल्हासनगर पर ड्रग्स नेटवर्क का साया: भविष्य में ‘हब’ बनने की आशंका, आईआरएस अधिकारी Sameer Wankhede की सख्त चेतावनी।


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को ड्रग्स मामले में उल्हासनगर का नाम सामने आने के बाद इस शहर को लेकर चिंताएं गहराने लगी हैं। आईआरएस अधिकारी Sameer Wankhede ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि समय रहते सख्त और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो उल्हासनगर भविष्य में ड्रग्स का बड़ा हब बन सकता है।

उल्हासनगर में आयोजित एक ड्रग्स जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वानखेड़े ने कहा कि हालिया घटनाओं ने इस क्षेत्र को न केवल राज्य स्तर पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में ला दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि ड्रग्स नेटवर्क की जड़ें तेजी से फैल रही हैं, जो समाज के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही हैं।

अपने संबोधन में उन्होंने ड्रग्स के बढ़ते प्रभाव और इसके सामाजिक, आर्थिक व मानसिक दुष्परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने खासतौर पर युवाओं को आगाह करते हुए कहा कि नशे की लत न केवल व्यक्तिगत जीवन को बर्बाद करती है, बल्कि परिवार और समाज पर भी इसका गहरा असर पड़ता है। वानखेड़े ने युवाओं से नशे से दूर रहने और जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ड्रग्स का मुद्दा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ एक व्यापक सामाजिक संकट है। इस चुनौती से निपटने के लिए प्रशासन, पुलिस, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों के बीच समन्वय बेहद आवश्यक है।

वानखेड़े ने जोर देकर कहा कि जागरूकता अभियान, खुफिया निगरानी को मजबूत करना और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई ही इस समस्या पर अंकुश लगाने के प्रभावी उपाय हैं। उन्होंने चेताया कि यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में स्थिति और अधिक गंभीर रूप ले सकती है।














उल्हासनगर कैम्प-5 में अवैध डंपिंग ग्राउंड के खिलाफ बड़ा आंदोलन: साईं हीरालाल जी बने नवगठित समिति के अध्यक्ष।


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर के कैम्प-5 क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से बने अवैध डंपिंग ग्राउंड को हटाने को लेकर स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अब संगठित रूप से आवाज बुलंद कर दी है। इसी कड़ी में सोमवार, 4 मई को संत प्रभाराम मंदिर, उल्हासनगर-5 में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें इस गंभीर समस्या के समाधान हेतु एक नवगठित समिति का गठन किया गया।

बैठक में सर्वसम्मति से साईं वसनशाह दरबार के साईं हीरालाल जी को समिति के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपने का प्रस्ताव रखा गया। उपस्थित सभी सदस्यों के विशेष आग्रह पर साईं हीरालाल जी ने यह जिम्मेदारी स्वीकार की। उनके नेतृत्व में अब इस मुद्दे को लेकर व्यापक जनआंदोलन खड़ा करने की रणनीति बनाई जा रही है।

समिति के अन्य प्रमुख सदस्यों में प्रकाश गोविंदराम लुंड (पिकी), मनीष नारा, राजकुमार कुकरेजा, राजेश चांगलानी, विजय वाधवा, मनीष ठाकुर, रॉकी शर्मा, नरेश आहुजा, निल शर्मा, जैकी सुखेजा और शशिकांत दायमा शामिल हैं। सभी सदस्यों ने एक स्वर में अवैध डंपिंग ग्राउंड को तत्काल हटाने की मांग की।

बैठक में यह भी गंभीर रूप से उठाया गया कि उक्त डंपिंग ग्राउंड में मृत पशुओं को फेंका जा रहा है, जिससे क्षेत्र में असहनीय दुर्गंध और स्वास्थ्य संबंधी खतरे उत्पन्न हो रहे हैं। इस अमानवीय स्थिति को देखते हुए समिति ने मृत पशुओं के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए शवदाहिनी (इंसीनरेटर) की व्यवस्था किए जाने की मांग भी उठाई है।

इसके अलावा, क्षेत्र में फैल रहे धुएं, प्रदूषण और बदबू की समस्या से निपटने के लिए ठोस उपाययोजनाओं की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। समिति ने निर्णय लिया कि इस पूरे मुद्दे को लेकर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए व्यापक स्तर पर मुहिम चलाई जाएगी।

बैठक में उपस्थित नागरिकों ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस प्रदूषण और अव्यवस्था के लिए संबंधित अधिकारी और जनप्रतिनिधि जिम्मेदार हैं। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

स्थानीय स्तर पर बढ़ते जनआक्रोश को देखते हुए यह मामला अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में समिति की अगुवाई में इस मुद्दे पर बड़े स्तर पर आंदोलन होने की संभावना जताई जा रही है।














शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने उल्हासनगर में किया अहम बदलाव, दिलीप मिश्रा महानगर प्रमुख नियुक्त।


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अपने संगठन को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम निर्णय लेते हुए उल्हासनगर महानगर प्रमुख पद पर दिलीप मिश्रा की नियुक्ति की है। पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर की गई इस नियुक्ति को आगामी चुनावों से पहले संगठनात्मक मजबूती के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दिलीप मिश्रा लंबे समय से पार्टी से जुड़े हुए एक सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं। स्थानीय स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी के भीतर उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है, जो कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करने और संगठन को जमीनी स्तर पर विस्तार देने की क्षमता रखते हैं।

सूत्रों के अनुसार, मिश्रा को उल्हासनगर में पार्टी की गतिविधियों को तेज करने, नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत बनाने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही उन्हें स्थानीय जनसमस्याओं को प्रमुखता से उठाने और आम जनता के बीच पार्टी की नीतियों और विचारधारा को प्रभावी तरीके से पहुंचाने की जिम्मेदारी भी दी गई है।

राजनीतिक दृष्टिकोण से यह नियुक्ति खास मायने रखती है। उल्हासनगर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में संगठन को मजबूत करना किसी भी पार्टी के लिए रणनीतिक रूप से अहम होता है। ऐसे में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में यह कदम पार्टी की आगामी चुनावी तैयारियों का संकेत भी माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले के जरिए शिवसेना (यूबीटी) ने स्पष्ट कर दिया है कि वह शहरी क्षेत्रों में अपनी पकड़ को और मजबूत करने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रही है। दिलीप मिश्रा की नियुक्ति से न केवल संगठन में नई ऊर्जा का संचार होने की उम्मीद है, बल्कि स्थानीय स्तर पर पार्टी की सक्रियता भी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

उल्हासनगर की नियुक्तियां

उपज़िलाप्रमुख उल्हासनगर विधानसभा व महानगरपालिका क्षेत्र - राजेंद्र शाहू, महानगरप्रमुख - दिलीप मिश्रा, विधानसभा क्षेत्रप्रमुख - राजन वेलकर, विधानसभा क्षेत्र संगठक - कृष्णा पुजारी, शहरप्रमुख - शिवाजी जावळे, शहर संगठक - भगवान मोहिते।

उपशहरप्रमुख

 सुरेश पाटिल (कैम्प नं. 1)

 अवतार सिंह गिल (कैम्प नं. 2)

 शिवाजी हावळे (कैम्प नं. 3)

 दशरथ चौधरी (कैम्प नं. 3)

 विभागप्रमुख:

 करीम शेख (कैम्प नं. 1)

 अशोक सातपुते (कैम्प नं. 2)

 आदिनाथ पालवे (कैम्प नं. 3)

 संतोष यादव (कैम्प नं. 3)

उपविभागप्रमुख:

संतोष गवारे, भास्कर शिंदे, नरेंद्र हिंगोरानी, अशोक जाधव, साहेबराव ससाणे (सभी कैम्प नं. 3)

हकीम शेख (कैम्प नं. 1)













उल्हासनगर सेंट्रल हॉस्पिटल में संदिग्ध निर्माण पर उठे सवाल: बिना बोर्ड, बिना जानकारी जारी कामकाज।


 


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर-3 स्थित सेंट्रल हॉस्पिटल उल्हासनगर परिसर में एक निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल के शवगृह (मॉर्चरी) के समीप स्थित एक खुला मैदान(जगह) पड़ी इमारत में कथित रूप से निर्माण कार्य जारी है, लेकिन इस पूरे प्रोजेक्ट को लेकर आवश्यक जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराई गई है।

इससे पहले भी सेंट्रल हॉस्पिटल उल्हासनगर-3 के सिविल सर्जन डॉ. बनसोडे पर मनमानी तरीके से काम करने के आरोप लग चुके हैं। करोड़ों रुपये के विभिन्न कार्यों में गड़बड़ी और अनियमितताओं की बात सामने आई है। आरोप है कि ऑक्सीजन प्लांट को लोगों के घरों के सामने स्थापित किया गया, साथ ही सोलर सिस्टम, जनरेटर और MGPAY से जुड़े करोड़ों रुपये के कामों में भी धांधली की गई है।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, जिस इमारत में निर्माण हो रहा है, वहां न तो संबंधित ठेकेदार कंपनी का नाम दर्शाने वाला बोर्ड लगाया गया है और न ही यह स्पष्ट किया गया है कि निर्माण कार्य का प्लान संबंधित प्राधिकरण से विधिवत स्वीकृत है या नहीं। आमतौर पर किसी भी सरकारी या सार्वजनिक परियोजना में प्लान पास होने की जानकारी, प्रोजेक्ट की लागत, ठेकेदार का नाम और समयसीमा का उल्लेख अनिवार्य होता है, लेकिन यहां इस तरह की कोई पारदर्शिता नजर नहीं आ रही है।

इसके अलावा यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि जिस जमीन पर यह निर्माण हो रहा है, वह आधिकारिक रूप से अस्पताल के नाम पर दर्ज है या नहीं। इस संबंध में किसी प्रकार के भूमि स्वामित्व या दस्तावेजों की जानकारी भी स्थल पर प्रदर्शित नहीं की गई है। नियमों के अनुसार, निर्माण कार्य शुरू करने से पहले तहसीलदार या प्रांत कार्यालय में रॉयल्टी और अन्य सरकारी शुल्क जमा करना अनिवार्य होता है, लेकिन इन प्रक्रियाओं के पालन को लेकर भी संदेह व्यक्त किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य “चुपचाप” तरीके से किया जा रहा है, जिससे पूरे मामले में अनियमितताओं की आशंका और गहरा गई है। नागरिकों का यह भी कहना है कि यदि यह एक वैध और सार्वजनिक हित का प्रोजेक्ट है, तो फिर इसे लेकर इतनी गोपनीयता क्यों बरती जा रही है।

हैरानी की बात यह भी है कि अब तक किसी भी जनप्रतिनिधि या स्थानीय नेता ने इस मुद्दे पर खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दी है। न तो किसी ने निर्माण कार्य का निरीक्षण किया और न ही उद्घाटन या आधिकारिक घोषणा की गई, जिससे राजनीतिक चुप्पी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

इस पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। नागरिकों ने मांग की है कि संबंधित विभाग इस निर्माण कार्य की तत्काल जांच करे, सभी आवश्यक दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं और यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

(नोट: यह रिपोर्ट स्थानीय नागरिकों द्वारा उठाए गए सवालों और स्थल पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। प्रशासनिक पक्ष सामने आने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।)























कल्याण-उल्हासनगर बेल्ट में फिर सक्रिय हुए अवैध जींस वॉश कारखाने, नदियों पर मंडराया गंभीर प्रदूषण संकट।


कल्याण/उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

कल्याण, उल्हासनगर और अंबरनाथ के ग्रामीण इलाकों में अवैध रूप से संचालित जींस वॉश (धुलाई) कारखाने एक बार फिर बड़े पैमाने पर सक्रिय हो गए हैं। नियमों और पर्यावरणीय मानकों को दरकिनार करते हुए चल रही इन इकाइयों के कारण क्षेत्र की प्रमुख नदियाँ—उल्हास, मुकी, गवर और कासाडी—गंभीर प्रदूषण की चपेट में आ गई हैं। इससे न सिर्फ पर्यावरण बल्कि स्थानीय नागरिकों और किसानों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडराने लगा है।

जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2017 में प्रशासन द्वारा उल्हासनगर क्षेत्र से सैकड़ों जींस वॉश यूनिट्स को हटाया गया था। उस समय इसे एक बड़ी कार्रवाई माना गया था। हालांकि अब वही यूनिट संचालक अंबरनाथ और कल्याण ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को आर्थिक प्रलोभन देकर फिर से इन कारखानों को स्थापित कर रहे हैं।

प्रदूषण का बढ़ता दायरा

इन कारखानों से निकलने वाला रासायनिक युक्त गंदा पानी बिना किसी शोधन प्रक्रिया के सीधे जमीन और जल स्रोतों में छोड़ा जा रहा है। कई स्थानों पर पानी की आपूर्ति के लिए सैकड़ों बोरवेल खोदे गए हैं, जिनसे अब दूषित और बदबूदार पानी निकलने की शिकायतें मिल रही हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो भूजल भी पूरी तरह से प्रदूषित हो सकता है।

प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल

स्थानीय नागरिकों, किसानों और सामाजिक संगठनों द्वारा कई बार इस मुद्दे को उठाया गया है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) और संबंधित प्रशासनिक विभागों को बार-बार शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई है। नोटिस जारी करने के बावजूद इन यूनिट्स का संचालन बेरोकटोक जारी है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सिर्फ कागजी कार्रवाई का आरोप

सूत्रों के अनुसार, पहले की गई सख्त कार्रवाई के बाद ये कारखाने बंद हो गए थे, लेकिन कुछ समय बाद फिर से शुरू हो गए। आरोप है कि संबंधित विभाग केवल औपचारिकता निभा रहे हैं और जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। कई स्थानों पर केमिकल युक्त पानी को गड्ढों में जमा किया जा रहा है, जो धीरे-धीरे जमीन के भीतर समा रहा है।

एनजीओ की चेतावनी और मांग

पर्यावरण संरक्षण से जुड़े एक एनजीओ के प्रतिनिधियों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद अधिकारी केवल दिखावटी कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि इस गंभीर मुद्दे को न्यायिक स्तर पर ले जाकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और इन अवैध कारखानों को तत्काल बंद किया जाए।

निष्कर्ष

हालांकि प्रशासन द्वारा इन यूनिट्स के बिजली और पानी के कनेक्शन काटने के निर्देश दिए गए थे, इसके बावजूद ये जींस वॉश कारखाने खुलेआम संचालित हो रहे हैं। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह समस्या एक बड़े पर्यावरणीय संकट का रूप ले सकती है।














उल्हासनगर-5 के जींस मार्केट में डेनिम रोल (कपड़े) के व्यापारियों पर GST और आयकर विभाग की कड़ी नजर.!


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर-5 का मशहूर जींस मार्केट इन दिनों कर विभागों की सख्त निगरानी में आ गया है। जींस निर्माण और डेनिम कपड़े के थोक व्यापार के लिए जाना जाने वाला यह बाजार अब कथित तौर पर टैक्स अनियमितताओं और कच्चे लेनदेन के चलते चर्चा में है। प्रारंभिक सूचनाओं के अनुसार, यहां बड़े पैमाने पर “जींस रोल” यानी डेनिम कपड़े के थोक रोल का व्यापार किया जाता है, जिसमें टैक्स अनुपालन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

व्यापारिक सूत्रों के मुताबिक, उल्हासनगर के व्यापारी अहमदाबाद (गुजरात), इचलकरंजी (महाराष्ट्र) और भीलवाड़ा (राजस्थान) जैसे प्रमुख टेक्सटाइल हब से विधिवत GST भुगतान कर डेनिम कपड़ा खरीदते हैं। यह कपड़ा पूरी तरह से बिल और टैक्स के साथ शहर में लाया जाता है, जिससे प्रारंभिक स्तर पर लेनदेन पूरी तरह वैध दिखाई देता है।

हालांकि, स्थानीय बाजार में पहुंचने के बाद इसी कपड़े की बिक्री में कथित तौर पर दोहरी प्रणाली अपनाई जा रही है। जानकारी के अनुसार, कुछ माल को GST बिल के साथ बेचा जाता है, जबकि बड़ी मात्रा में कपड़ा बिना बिल यानी “कच्चे” रूप में खपाया जाता है। यह व्यवस्था टैक्स चोरी की ओर इशारा करती है और इसे लेकर विभागों की चिंता बढ़ गई है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का समानांतर कच्चा कारोबार न केवल कर कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि यह राज्य और केंद्र सरकार दोनों के लिए बड़े राजस्व नुकसान का कारण बन रहा है। अनुमान है कि यदि इस तरह की गतिविधियां लंबे समय तक जारी रहती हैं, तो यह नुकसान करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है।

इसके अलावा, यह स्थिति उन व्यापारियों के लिए भी चुनौती बन रही है जो नियमों के तहत ईमानदारी से GST का भुगतान करते हैं। कच्चे लेनदेन करने वाले व्यापारी कम कीमत पर माल बेचकर बाजार में अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा कर रहे हैं, जिससे व्यवस्थित कारोबार प्रभावित हो रहा है।

सूत्रों के अनुसार, GST विभाग और आयकर विभाग इस पूरे नेटवर्क पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। संदिग्ध व्यापारियों की सूची तैयार की जा रही है और जल्द ही संयुक्त कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। इसमें छापेमारी, खातों की जांच, ई-वे बिल और लेनदेन के रिकॉर्ड की पड़ताल शामिल हो सकती है।

स्थानीय प्रशासन और कर विभागों का कहना है कि कर चोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में इस पूरे मामले में बड़े खुलासे और कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है, जिससे जींस मार्केट के व्यापारिक ढांचे पर व्यापक असर पड़ सकता है।













उल्हासनगर में फैलता ड्रग्स नेटवर्क बना गंभीर चुनौती: सख्त कार्रवाई की मांग तेज, IRS अधिकारी समीर वानखेड़े कर सकते हैं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात।


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से फैलते ड्रग्स नेटवर्क ने कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। पिछले कुछ समय से लगातार सामने आ रही शिकायतों और स्थानीय स्तर पर बढ़ती गतिविधियों ने यह संकेत दिया है कि यह इलाका धीरे-धीरे नशे के कारोबार का केंद्र बनता जा रहा है।

स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और अभिभावकों के बीच इस स्थिति को लेकर गहरी चिंता देखी जा रही है। उनका कहना है कि नशे की बढ़ती उपलब्धता के कारण युवाओं और छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ रहा है, जिससे समाज पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

इसी बीच, सूत्रों के अनुसार IRS अधिकारी Sameer Wankhede इस गंभीर मुद्दे को राज्य सरकार के समक्ष उठाने की तैयारी में हैं। बताया जा रहा है कि वे जल्द ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis से मुलाकात कर सकते हैं। इस संभावित बैठक में ड्रग्स नेटवर्क के खिलाफ व्यापक और सख्त कार्रवाई की मांग किए जाने की संभावना है।

जानकारी के मुताबिक, प्रस्तावित चर्चा में राज्य स्तर पर विशेष अभियान चलाने, पुलिस और एंटी-नारकोटिक्स एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, तथा ड्रग्स सप्लाई चेन को जड़ से खत्म करने जैसे मुद्दों पर जोर दिया जा सकता है।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कई इलाकों में खुलेआम नशे की बिक्री हो रही है, जिससे कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में नियमित छापेमारी, सख्त निगरानी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर निर्णायक कदम नहीं उठाए गए, तो इसके सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणाम और भी गंभीर हो सकते हैं। ऐसे में राज्य सरकार, स्थानीय प्रशासन और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी परीक्षा बन गई है।

फिलहाल, पूरे मामले पर सभी की नजरें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि बढ़ते ड्रग्स नेटवर्क पर लगाम लगाने के लिए किस स्तर की कार्रवाई की जाती है।














उल्हासनगर में ड्रग्स नेटवर्क पर चिंता: Sameer Wankhede की सख्त अपील—नशे से दूर रहें युवा


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर में तेजी से बढ़ते नशे के मामलों के बीच भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के वरिष्ठ अधिकारी समीर वानखेड़े ने युवाओं को एक मजबूत और स्पष्ट संदेश दिया है—“ड्रग्स से दूर रहना ही सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी गारंटी है।”

हाल के समय में उल्हासनगर शहर और आसपास के क्षेत्रों में सामने आए ड्रग्स से जुड़े मामलों ने प्रशासन और समाज दोनों को चिंतित कर दिया है। इसी पृष्ठभूमि में वानखेड़े का यह बयान न केवल एक चेतावनी है, बल्कि युवाओं को सही दिशा दिखाने का प्रयास भी है।

उन्होंने कहा कि नशे की लत केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि उसके पूरे जीवन को प्रभावित करती है। “ड्रग्स एक ऐसी बुराई है जो धीरे-धीरे व्यक्ति के करियर, परिवार और सामाजिक प्रतिष्ठा को खत्म कर देती है। युवा अगर एक बार इस जाल में फंस जाएं, तो बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है,” उन्होंने कहा।

वानखेड़े ने यह भी रेखांकित किया कि आज के समय में कुछ युवा गलत संगत, सोशल मीडिया के प्रभाव और आसान पैसे के लालच में आकर नशे की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां इस तरह की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखे हुए हैं और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

कानूनी सख्ती और प्रशासनिक कार्रवाई

उन्होंने स्पष्ट किया कि ड्रग्स से जुड़े मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है और आने वाले समय में यह और तेज होगी। “कानून के तहत दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे, ताकि समाज में एक मजबूत संदेश जाए,” उन्होंने कहा।

परिवार और शिक्षकों की अहम भूमिका

समीर वानखेड़े ने अभिभावकों और शिक्षकों से भी अपील की कि वे बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान दें और उन्हें सही मार्गदर्शन दें। “युवाओं को सही दिशा देना केवल सरकार या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज का कर्तव्य है,” उन्होंने कहा।

समाज को एकजुट होने की जरूरत

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई तभी सफल हो सकती है जब समाज का हर वर्ग—परिवार, स्कूल, कॉलेज और प्रशासन—एक साथ मिलकर काम करे।

उल्हासनगर जैसे शहरों में बढ़ते नशे के मामलों के बीच यह संदेश युवाओं के लिए एक चेतावनी भी है और एक प्रेरणा भी—कि सही रास्ता चुनना ही असली सफलता और सुरक्षित भविष्य की पहचान है।














रक्षक की रक्षा कौन करेगा? Sameer Wankhede मामला बना राष्ट्रीय बहस — ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई करने वाले अधिकारियों की सुरक्षा पर उठे सवाल।

मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

भारत में बढ़ते ड्रग्स नेटवर्क और युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति के बीच कानून लागू करने वाली एजेंसियों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। लेकिन जब ड्रग्स माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने वाले अधिकारी ही विवादों और जांच के घेरे में आ जाएं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है — आखिर रक्षक की रक्षा कौन करेगा?

इसी संदर्भ में पूर्व Narcotics Control Bureau (NCB) अधिकारी समीर वानखेड़े का मामला राष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बन गया है। Juris Hour में प्रकाशित “Protect the Protector – NCB Sameer Wankhede” शीर्षक लेख में इस महत्वपूर्ण मुद्दे को विस्तार से उठाया गया है, जिसमें ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को कानूनी और संस्थागत सुरक्षा देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

हाई-प्रोफाइल कार्रवाई से सुर्खियों में आए समीर वानखेड़े

समीर वानखेड़े अपने कार्यकाल के दौरान कई बड़े और हाई-प्रोफाइल ड्रग्स मामलों में कार्रवाई के लिए जाने जाते रहे हैं। उनके नेतृत्व में NCB ने कई बड़े ड्रग्स नेटवर्क पर छापेमारी की और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया। इन कार्रवाइयों ने ड्रग्स सिंडिकेट को बड़ा झटका दिया और एजेंसी की सक्रियता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।

विशेष रूप से Aryan Khan से जुड़े क्रूज़ ड्रग्स मामले के बाद समीर वानखेड़े देशभर में चर्चा का केंद्र बन गए थे। इस मामले ने न केवल बॉलीवुड और हाई-प्रोफाइल सर्किल में ड्रग्स नेटवर्क पर सवाल खड़े किए, बल्कि पूरे देश में ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई को लेकर व्यापक चर्चा भी शुरू हुई।

इस कार्रवाई के बाद समीर वानखेड़े को एक सख्त और सक्रिय अधिकारी के रूप में देखा जाने लगा, लेकिन यही मामला आगे चलकर उनके लिए विवादों का कारण भी बना।

कार्रवाई के बाद आरोपों का दौर

हाई-प्रोफाइल कार्रवाई के बाद समीर वानखेड़े खुद गंभीर आरोपों में घिर गए। उनके खिलाफ रिश्वत मांगने, जांच प्रक्रिया में अनियमितता और अधिकारों के दुरुपयोग जैसे आरोप लगाए गए। इन आरोपों ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया।

इन आरोपों के आधार पर Central Bureau of Investigation (CBI) ने समीर वानखेड़े के खिलाफ जांच शुरू की। इस घटनाक्रम ने कानून लागू करने वाली एजेंसियों के भीतर कार्य करने वाले अधिकारियों की सुरक्षा और स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ दी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हर सख्त कार्रवाई के बाद अधिकारियों को कानूनी विवादों और आरोपों का सामना करना पड़े, तो इससे एजेंसियों का मनोबल कमजोर हो सकता है और भविष्य में अधिकारी सख्त कार्रवाई करने से हिचक सकते हैं।

अदालत से राहत, लेकिन जांच जारी

इस मामले में Bombay High Court ने समीर वानखेड़े को अंतरिम राहत प्रदान की। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने तक उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।

साथ ही अदालत ने CBI को निर्देश दिया कि जांच को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, ताकि किसी अधिकारी को लंबे समय तक अनिश्चितता और मानसिक दबाव की स्थिति में न रखा जाए।

समीर वानखेड़े ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को राजनीतिक प्रेरित और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की और ड्रग्स के खिलाफ सख्त अभियान चलाया।

“Protect the Protector” — राष्ट्रीय स्तर पर उठी बहस

Juris Hour के लेख में “Protect the Protector” यानी “रक्षक की रक्षा” की अवधारणा पर जोर दिया गया है। लेख में कहा गया है कि:

ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए

लगातार आरोपों और जांच के दबाव से एजेंसियों का मनोबल प्रभावित हो सकता है

यदि ईमानदार अधिकारियों को संरक्षण नहीं मिलेगा तो ड्रग्स के खिलाफ अभियान कमजोर पड़ सकता है

मीडिया ट्रायल और लंबी जांच प्रक्रिया से अधिकारियों की प्रतिष्ठा और करियर प्रभावित होते हैं

यह बहस केवल समीर वानखेड़े तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे कानून प्रवर्तन तंत्र से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।

ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में अधिकारियों की भूमिका

भारत में ड्रग्स नेटवर्क लगातार विस्तार कर रहे हैं और युवाओं को निशाना बना रहे हैं। महानगरों से लेकर छोटे शहरों तक नशे का कारोबार तेजी से फैल रहा है। ऐसे में नारकोटिक्स एजेंसियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को संस्थागत समर्थन, कानूनी सुरक्षा और निष्पक्ष जांच व्यवस्था दी जाए, तो नशे के खिलाफ अभियान अधिक प्रभावी और मजबूत हो सकता है।

निष्कर्ष : केवल एक अधिकारी का मामला नहीं

समीर वानखेड़े का मामला अब केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रहा। यह कानून लागू करने वाले अधिकारियों की स्वतंत्रता, सुरक्षा और निष्पक्षता का व्यापक मुद्दा बन गया है।

“Protect the Protector” का संदेश स्पष्ट है —

यदि देश को ड्रग्स मुक्त बनाना है, तो ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई करने वाले ईमानदार अधिकारियों को सुरक्षा, समर्थन और निष्पक्ष जांच व्यवस्था देना आवश्यक है।

क्योंकि यदि रक्षक ही असुरक्षित होंगे, तो समाज की सुरक्षा पर भी प्रश्नचिह्न लगना तय है।














मुंबई के गोरेगांव नेस्को ड्रग्स मामले में उल्हासनगर कनेक्शन गहराया — ड्रग्स का उभरता मुख्य केंद्र बनता उल्हासनगर.!


मुंबई/उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को सेंटर में सामने आए हाई-प्रोफाइल ड्रग्स मामले ने अब बेहद गंभीर मोड़ ले लिया है। जांच एजेंसियों को इस पूरे मामले में उल्हासनगर का मजबूत कनेक्शन मिलने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।

सूत्रों के अनुसार, इस ड्रग्स नेटवर्क का संचालन केवल मुंबई तक सीमित नहीं था, बल्कि उल्हासनगर से बड़े पैमाने पर ड्रग्स की सप्लाई होने की आशंका जताई जा रही है। जांच में सामने आया है कि पार्टी, कॉन्सर्ट और हाई-प्रोफाइल इवेंट्स में ड्रग्स की सप्लाई के लिए उल्हासनगर को एक प्रमुख हब के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।

उल्हासनगर बनता जा रहा ड्रग्स सप्लाई का नया हब

जांच एजेंसियों के मुताबिक, उल्हासनगर में पिछले कुछ महीनों से ड्रग्स से जुड़े मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। पुलिस सूत्रों का दावा है कि:

उल्हासनगर में छोटे-छोटे नेटवर्क बन चुके हैं

युवाओं को ड्रग्स सप्लाई के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है

मुंबई के हाई-प्रोफाइल इवेंट्स तक ड्रग्स पहुंचाई जा रही थी

व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम टेलीग्राम और स्नॅपचॅट प्लेटफॉर्म के जरिए सप्लाई नेटवर्क चलाया जा रहा था

यह भी सामने आया है कि ड्रग्स की डिलीवरी के लिए अलग-अलग शहरों के बीच कूरियर चैनल बनाए गए थे, जिससे पुलिस की निगरानी से बचा जा सके।

हाई-प्रोफाइल पार्टियों में सप्लाई का शक

जांच में यह भी सामने आया है कि गोरेगांव नेस्को सेंटर में आयोजित कॉन्सर्ट और निजी पार्टियों में ड्रग्स की सप्लाई की जाती थी। इस दौरान:

MDMA (एक्स्टेसी)

कोकीन

गांजा

सिंथेटिक ड्रग्स

जैसे नशीले पदार्थों की सप्लाई होने की आशंका जताई गई है।

सूत्रों के अनुसार, कुछ ड्रग्स सप्लायर सीधे उल्हासनगर से मुंबई पहुंचते थे और इवेंट के दौरान ग्राहकों को सप्लाई करते थे।

युवाओं को बनाया जा रहा निशाना

सबसे चिंताजनक बात यह सामने आई है कि इस नेटवर्क का मुख्य निशाना युवा वर्ग था। कॉलेज स्टूडेंट्स और पार्टी सर्कल में ड्रग्स तेजी से फैलने की जानकारी सामने आई है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था और धीरे-धीरे मुंबई महानगर क्षेत्र में अपना विस्तार कर रहा था।

पुलिस और एजेंसियां अलर्ट मोड पर

मुंबई पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टीम ने इस मामले में कई संदिग्धों की पहचान की है। पुलिस अब:

उल्हासनगर में छापेमारी की तैयारी कर रही है

ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े लोगों की सूची तैयार कर रही है

मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया डेटा की जांच कर रही है

सप्लाई चैन की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है

सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

स्थानीय लोगों में बढ़ी चिंता

उल्हासनगर में ड्रग्स नेटवर्क के बढ़ते प्रभाव को लेकर स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने चिंता जताई है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

मामला क्यों है बेहद गंभीर

ड्रग्स नेटवर्क का अंतर-शहर कनेक्शन

युवाओं को निशाना बनाया जा रहा

हाई-प्रोफाइल पार्टियों में सप्लाई

संगठित नेटवर्क का विस्तार

इन सभी कारणों से यह मामला बेहद गंभीर माना जा रहा है।

आगे क्या?

जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की कोशिश में जुटी हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं और उल्हासनगर से जुड़े बड़े नाम भी सामने आ सकते हैं।

🚨 यह मामला केवल एक ड्रग्स सप्लाई का नहीं, बल्कि शहरों में तेजी से फैलते संगठित ड्रग्स नेटवर्क का संकेत माना जा रहा है — जो आने वाले समय में कानून व्यवस्था और युवाओं के भविष्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।














मुंबई गोरेगांव नेस्को ड्रग्स मामला-"किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो" — मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का सख्त संदेश


मुंबई: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को परिसर में सामने आए हाई-प्रोफाइल ड्रग्स मामले को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि इस मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को राहत नहीं दी जाएगी, चाहे उसका राजनीतिक प्रभाव हो, आर्थिक ताकत हो या सामाजिक पहचान।

सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय समीक्षा की है और Mumbai Police समेत संबंधित जांच एजेंसियों को निष्पक्ष, पारदर्शी और कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि ड्रग्स से जुड़े मामलों में सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति है और दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

बताया जा रहा है कि Mumbai के गोरेगांव स्थित नेस्को परिसर में हुए इस हाई-प्रोफाइल मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पुलिस बैंक ट्रांजेक्शन, UPI भुगतान, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया संपर्क और संभावित राजनीतिक संबंधों की भी गहन जांच कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में कई संदिग्ध लोगों की पहचान की गई है और आने वाले दिनों में कुछ लोगों को पूछताछ के लिए तलब किया जा सकता है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल था और इसका दायरा कितना बड़ा है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय स्तर पर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है। इस बीच पुलिस और अन्य एजेंसियों को जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जल्द से जल्द पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ कहा —

"कानून से ऊपर कोई नहीं है। जो भी इस मामले में दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।"

मुख्यमंत्री के इस सख्त रुख के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। वहीं जांच एजेंसियों ने भी कार्रवाई की गति बढ़ा दी है और आने वाले दिनों में बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

📍 फिलहाल मामले की जांच जारी है और जल्द ही इस हाई-प्रोफाइल ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आने की संभावना है।














नेस्को ड्रग्स केस में बड़ी कार्रवाई: फरार मुख्य आरोपी आयुष साहित्य रायगढ़ के पोलादपुर से गिरफ्तार, गोवा भागने की फिराक में था।


मुंबई: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई के NESCO Centre में हुए हाई-प्रोफाइल ड्रग्स मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस मामले का मुख्य फरार आरोपी आयुष साहित्य को पुलिस ने रायगढ़ जिले से गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी मामले की जांच में अब तक का सबसे बड़ा ब्रेकथ्रू मानी जा रही है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी को Poladpur में जाल बिछाकर पकड़ा गया, जब वह Goa भागने की तैयारी कर रहा था। यह संयुक्त ऑपरेशन Raigad Police, पोलादपुर पुलिस और स्थानीय क्राइम ब्रांच (LCB) द्वारा मिलकर अंजाम दिया गया।

गुप्त सूचना के आधार पर रची गई रणनीति

पुलिस को खुफिया जानकारी मिली थी कि नेस्को ड्रग्स केस का मुख्य आरोपी आयुष साहित्य मुंबई से फरार होने के बाद रायगढ़ जिले के पोलादपुर इलाके में छिपा हुआ है। साथ ही यह भी सूचना मिली थी कि वह जल्द ही गोवा भागने की तैयारी में है।

सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इलाके में निगरानी बढ़ा दी। कई टीमों को अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया गया और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी गई।

जैसे ही आरोपी अपनी लोकेशन से बाहर निकला, पुलिस ने उसे घेरकर गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के दौरान आरोपी ने बचने की कोशिश की, लेकिन पुलिस टीम ने उसे तुरंत काबू में कर लिया।

ड्रग नेटवर्क का मुख्य लिंक माना जा रहा आरोपी

जांच एजेंसियों के अनुसार, आयुष साहित्य को इस पूरे ड्रग नेटवर्क की अहम कड़ी माना जा रहा है। पुलिस को शक है कि आरोपी का संबंध मुंबई, उल्हासनगर और आसपास के इलाकों में सक्रिय ड्रग सप्लाई चेन से जुड़ा हुआ है।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि:

कॉन्सर्ट और हाई-प्रोफाइल पार्टियों में ड्रग्स सप्लाई कैसे होती थी

आरोपी किन-किन लोगों के संपर्क में था

क्या इस नेटवर्क में और बड़े नाम शामिल हैं

ड्रग्स की सप्लाई किस माध्यम से की जाती थी

नेस्को ड्रग्स केस में बढ़ सकती हैं और गिरफ्तारियां

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि आयुष साहित्य की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे ड्रग रैकेट से जुड़े कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। साथ ही अन्य फरार आरोपियों तक पहुंचने में भी पुलिस को मदद मिलने की उम्मीद है।

जांच एजेंसियों का अनुमान है कि:

ड्रग सप्लाई नेटवर्क का बड़ा खुलासा हो सकता है

और आरोपियों की गिरफ्तारी संभव है

पार्टी ड्रग्स रैकेट का पर्दाफाश हो सकता है

मुंबई और आसपास के शहरों में सक्रिय नेटवर्क का खुलासा हो सकता है

मुंबई लाकर होगी विस्तृत पूछताछ

पुलिस अब आरोपी को मुंबई लाकर विस्तृत पूछताछ करेगी। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान कई नए नाम सामने आ सकते हैं और ड्रग्स नेटवर्क के बड़े खुलासे हो सकते हैं।

इस गिरफ्तारी को नेस्को ड्रग्स केस में अब तक की सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। पुलिस जल्द ही इस मामले में आधिकारिक बयान जारी कर सकती है।

जांच फिलहाल जारी है और पुलिस इस पूरे ड्रग नेटवर्क की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। 






















मुंबई नेस्को ड्रग ओवरडोज़ मामले में पुलिस की जांच तेज, आठवां आरोपी शुभ अग्रवाल गिरफ्तार — उल्हासनगर का मुख्य सप्लायर आयुष साहित्य फरार, उल्हासनगर से ड्रग नेटवर्क के तार गहराए।

मुंबई/उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को सेंटर ड्रग ओवरडोज़ मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आठवें आरोपी शुभ अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी को मामले में अहम सफलता माना जा रहा है। वानराई पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद अब ड्रग सप्लाई नेटवर्क के कई नए तार सामने आने लगे हैं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले का मुख्य सप्लायर उल्हासनगर निवासी आयुष साहित्य अभी भी फरार है। जांच एजेंसियों को Snapchat चैट, डिजिटल ट्रेल, मोबाइल लोकेशन और UPI लेनदेन से जुड़े अहम सबूत मिले हैं, जिनके आधार पर पुलिस ड्रग नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हुई है।

गिरफ्तार आरोपी शुभ अग्रवाल को अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उसे 20 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी से ड्रग सप्लाई चेन, पार्टी नेटवर्क और अन्य आरोपियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।

उल्हासनगर कनेक्शन गहराया, कई संदिग्ध रडार पर

जांच के दौरान उल्हासनगर कनेक्शन सामने आने के बाद पुलिस की जांच और तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, उल्हासनगर निवासी साहिल, मोहित, दीपेश और धीरज का नाम भी संदेह के दायरे में आया है।

पुलिस को शक है कि ये सभी कथित तौर पर ड्रग सप्लाई, पार्टी नेटवर्क और युवाओं तक ड्रग्स पहुंचाने में शामिल हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस इन सभी की गतिविधियों और संपर्कों की जांच कर रही है।

उल्हासनगर की कुछ युवतियों की भूमिका की भी जांच

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले में उल्हासनगर की कुछ युवतियों की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, ये युवतियां कथित तौर पर पार्टी नेटवर्क और ड्रग वितरण चैनल से जुड़ी हो सकती हैं।

हालांकि पुलिस ने अभी तक इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और जांच जारी है।

गिरफ्तारी के डर से कई संदिग्ध अंडरग्राउंड

सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, वे गिरफ्तारी के डर से अंडरग्राउंड हो गए हैं। पुलिस की टीमें उनकी तलाश में लगातार छापेमारी, तकनीकी सर्विलांस और लोकेशन ट्रैकिंग कर रही हैं।

मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया अकाउंट, डिजिटल ट्रांजैक्शन और संपर्कों की भी गहन जांच की जा रही है। 

हाई-प्रोफाइल पार्टी नेटवर्क की जांच

जांच एजेंसियां अब इस एंगल से भी जांच कर रही हैं कि यह नेटवर्क केवल नेस्को सेंटर में आयोजित एक म्यूज़िक कॉन्सर्ट तक सीमित था या फिर मुंबई के अन्य हाई-प्रोफाइल पार्टियों और इवेंट्स तक फैला हुआ है।

पुलिस को शक है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, खासकर Snapchat, के जरिए ड्रग्स की डीलिंग की जा रही थी, जबकि UPI और डिजिटल पेमेंट के माध्यम से लेनदेन किया जा रहा था।

मामले की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 11 अप्रैल को गोरेगांव स्थित नेस्को सेंटर में आयोजित म्यूज़िक कॉन्सर्ट के दौरान संदिग्ध ड्रग ओवरडोज़ से दो मैनेजमेंट छात्रों की मौत हो गई थी, जिसके बाद यह मामला हाई-प्रोफाइल बन गया।

घटना के बाद मुंबई पुलिस ने जांच शुरू की और धीरे-धीरे ड्रग सप्लाई नेटवर्क की कई परतें सामने आने लगीं।

आगे और गिरफ्तारियों की संभावना

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। ड्रग सप्लाई चेन, फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन और पार्टी नेटवर्क को लेकर जांच तेज कर दी गई है।

मुंबई पुलिस का कहना है कि पूरे ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश होने तक कार्रवाई जारी रहेगी।

🚨 अब तक की स्थिति

8 आरोपी गिरफ्तार

मुख्य सप्लायर आयुष साहित्य फरार

कई संदिग्ध अंडरग्राउंड

उल्हासनगर ड्रग नेटवर्क की जांच तेज

Snapchat और UPI लेनदेन जांच के दायरे में

🚨 मुंबई नेस्को ड्रग ओवरडोज़ केस में आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।














 

मुंबई को ड्रग्स मुक्त बनाने की मांग तेज, RPI (रामदास आठवले गुट) की CM फडणवीस से अपील — समीर वानखेड़े को नारकोटिक्स विभाग में तैनात करें।


 


मुंबई: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई में हाल ही में सामने आए गोरेगांव नेस्को ड्रग्स मामले के बाद शहर में ड्रग्स के बढ़ते खतरे को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। इसी बीच RPI (रामदास आठवले गुट) और मुंबई की आम जनता ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से हाथ जोड़कर अपील की है कि IRS अधिकारी समीर वानखेड़े को मुंबई के नारकोटिक्स विभाग में तत्काल तैनात किया जाए, ताकि ड्रग्स माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।

यह मांग ऐसे समय में उठी है जब नेस्को ड्रग्स मामले ने युवाओं में फैलते नशे के नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और प्रशासन पर कड़े कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है।

मुंबई और महाराष्ट्र को ड्रग्स मुक्त बनाने की मांग

RPI (रामदास आठवले गुट) के पदाधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि मुंबई में ड्रग्स का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है, जिससे युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ता जा रहा है।

गोरेगांव स्थित नेस्को सेंटर में हुए हाई-प्रोफाइल ड्रग्स मामले ने इस खतरे को और गंभीर बना दिया है। संगठन ने कहा कि यदि अभी सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले समय में स्थिति और चिंताजनक हो सकती है।

संगठन की ओर से जारी अपील में कहा गया:

> "हम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से हाथ जोड़कर विनती करते हैं कि IRS अधिकारी समीर वानखेड़े को मुंबई के नारकोटिक्स विभाग में तैनात किया जाए, ताकि ड्रग्स माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके और मुंबई को ड्रग्स मुक्त बनाया जा सके।"

समीर वानखेड़े की कार्यशैली पर भरोसा

RPI नेताओं और मुंबई की जनता का मानना है कि समीर वानखेड़े ने पहले भी ड्रग्स और अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर अपनी मजबूत छवि बनाई है।

उनकी कार्यशैली को लेकर लोगों में भरोसा है कि यदि उन्हें मुंबई में नारकोटिक्स विभाग में जिम्मेदारी दी जाती है, तो ड्रग्स माफिया पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि शहर में बढ़ते ड्रग्स नेटवर्क को रोकने के लिए अनुभवी और सख्त अधिकारियों की जरूरत है।

नेस्को जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की मांग

गोरेगांव के नेस्को सेंटर में सामने आए ड्रग्स मामले ने पूरे महाराष्ट्र को झकझोर दिया था। इस घटना के बाद लोगों ने प्रशासन से कड़े कदम उठाने की मांग की है।

RPI (रामदास आठवले गुट) और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार के सामने निम्न मांगें रखीं:

मुंबई को ड्रग्स मुक्त बनाया जाए

युवाओं को ड्रग्स के जाल से बचाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए

बड़े इवेंट्स और कॉन्सर्ट्स पर सख्त निगरानी रखी जाए

ड्रग्स सप्लाई चेन पर कड़ी कार्रवाई की जाए

गोरेगांव नेस्को जैसी घटना दोबारा न हो

सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग

RPI (रामदास आठवले गुट) और मुंबई की जनता ने मुख्यमंत्री से इस मुद्दे पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की है।

उनका कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो ड्रग्स का नेटवर्क और फैल सकता है, जो युवाओं के भविष्य के लिए बेहद खतरनाक साबित होगा।

मुंबई की जनता का साफ संदेश है —

> "मुंबई को ड्रग्स मुक्त बनाना जरूरी है और इसके लिए समीर वानखेड़े जैसे सख्त अधिकारी की तैनाती बेहद आवश्यक है।"

बढ़ता जनदबाव, सरकार के फैसले पर नजर

गोरेगांव नेस्को ड्रग्स मामले के बाद लगातार सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और नागरिकों की ओर से सख्त कार्रवाई की मांग तेज होती जा रही है।

अब सभी की नजर राज्य सरकार और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अगले कदम पर टिकी हुई है कि क्या सरकार इस मांग पर निर्णय लेकर मुंबई को ड्रग्स मुक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाती है या नहीं।






















मुंबई नेस्को ड्रग्स केस में बड़ा खुलासा: उल्हासनगर के आयुष साहित्य आरोपी का नाम आया सामने, मुंबई पुलिस की कई टीमें तलाश में जुटीं।


मुंबई/उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को सेंटर में आयोजित हाई-प्रोफाइल म्यूज़िक कॉन्सर्ट में सामने आए ड्रग्स ओवरडोज़ मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। जांच के दौरान उल्हासनगर निवासी आयुष साहित्य का नाम आरोपी के रूप में सामने आया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आयुष साहित्य फिलहाल फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए मुंबई पुलिस ने कई विशेष टीमें गठित कर दी हैं।

यह मामला पहले ही दो युवाओं की मौत के कारण सुर्खियों में था, और अब नए नाम सामने आने से जांच का दायरा और व्यापक हो गया है।

क्या है पूरा मामला

11 अप्रैल को मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को सेंटर में एक हाई-प्रोफाइल म्यूज़िक कॉन्सर्ट आयोजित किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लिया था। कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर ड्रग्स का सेवन किया गया, जिसके बाद दो मैनेजमेंट छात्रों की संदिग्ध ड्रग ओवरडोज़ से मौत हो गई। 

इसके अलावा एक अन्य युवक की तबीयत भी बिगड़ गई थी, जिसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया और मुंबई पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी।

जांच में सामने आया नया नाम

पुलिस जांच के दौरान ड्रग्स सप्लाई चेन से जुड़े कई लोगों के नाम सामने आए हैं। इसी क्रम में अब उल्हासनगर निवासी आयुष साहित्य का नाम भी सामने आया है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आयुष साहित्य की भूमिका ड्रग्स नेटवर्क से जुड़ी होने की आशंका है। जांच एजेंसियों को शक है कि कॉन्सर्ट में ड्रग्स उपलब्ध कराने या सप्लाई चेन में उसकी सक्रिय भूमिका हो सकती है। हालांकि पुलिस ने अभी तक उसकी भूमिका को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।

गिरफ्तारी के लिए कई जगह छापेमारी

आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उल्हासनगर, मुंबई और आसपास के कई इलाकों में छापेमारी शुरू कर दी है। पुलिस आयुष साहित्य के मोबाइल फोन की लोकेशन, कॉल डिटेल्स और संपर्कों की भी गहन जांच कर रही है।

सूत्रों के अनुसार, आरोपी के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है और पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

अब तक कितनी हुई गिरफ्तारी

नेस्को ड्रग्स मामले में अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ड्रग्स सप्लाई चेन से जुड़े पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है। जांच एजेंसियां इस मामले को संगठित ड्रग्स नेटवर्क से जोड़कर भी देख रही हैं।

सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में और नाम सामने आने की संभावना है, जिससे इस हाई-प्रोफाइल मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

पुलिस का आधिकारिक बयान

पुलिस अधिकारियों ने मामले को लेकर कहा है कि,

"जांच के दौरान सामने आने वाले हर व्यक्ति की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। फरार आरोपियों की तलाश जारी है और जल्द ही मामले में और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।"

हाई-प्रोफाइल पार्टियों पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना ने एक बार फिर हाई-प्रोफाइल पार्टियों और म्यूज़िक कॉन्सर्ट में ड्रग्स के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि महंगे टिकट, निजी टेबल और वीआईपी पास वाले ऐसे आयोजनों में ड्रग्स का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है, जो युवाओं के लिए खतरनाक साबित हो रहा है।

मुंबई पुलिस अब इस मामले में आयोजकों, सप्लाई चेन और शामिल लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

⚠️ जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।














डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जयंती पर नशा मुक्त भारत का संकल्प: सांसद उज्ज्वल निकम और IRS अधिकारी समीर वानखेड़े ने युवाओं को किया प्रेरित।


 

मुंबई: दिनेश मिरचंदानी

भारत रत्न डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर की जयंती के अवसर पर नशा मुक्त भारत के संकल्प को लेकर एक भव्य और प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर माननीय सांसद उज्ज्वल निकम तथा आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े ने अभिभावकों और युवाओं को संबोधित करते हुए नशा मुक्त समाज के निर्माण का आह्वान किया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने अपने जीवन में शिक्षा, अनुशासन, आत्मसम्मान और सामाजिक जागरूकता को सबसे अधिक महत्व दिया। आज की युवा पीढ़ी को इन मूल्यों को अपनाने की आवश्यकता है, विशेष रूप से उस समय जब समाज में नशे की प्रवृत्ति युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।

माननीय सांसद उज्ज्वल निकम ने अपने संबोधन में कहा कि बाबासाहेब को सच्ची श्रद्धांजलि केवल उनकी जयंती मनाने से नहीं, बल्कि उनके विचारों को जीवन में उतारने से होगी। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को सही मार्गदर्शन दें और युवाओं से नशे से दूर रहने का संकल्प लेने का आग्रह किया।

वहीं आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है। उन्होंने युवाओं को अनुशासन, शिक्षा और आत्मसम्मान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हुए कहा कि देश का भविष्य युवा पीढ़ी के हाथों में है, और यदि युवा नशे से दूर रहेंगे तो देश मजबूत और विकसित बनेगा।

इस अवसर पर पंचशील के महत्वपूर्ण सिद्धांत को भी विशेष रूप से याद किया गया:

“सुरामेरय मज्ज पमादट्ठाना वेरमणि सिक्खापदं समाधियामि”

अर्थात — मैं नशा और मादक पदार्थों से दूर रहने का संकल्प लेता हूं, क्योंकि यह लापरवाही और पतन का कारण बनते हैं।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अभिभावकों और युवाओं ने सामूहिक रूप से “नशा मुक्त भारत” का संकल्प लिया। “Say NO to Nasha… Say YES to Life, Discipline & Self-Respect” का संदेश पूरे कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा, जिसे सभी ने उत्साहपूर्वक समर्थन दिया।

इस प्रेरणादायी कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए चंद्रशेखर कांबले को विशेष धन्यवाद एवं सराहना दी गई। उपस्थित लोगों ने इस आयोजन को समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती केवल उत्सव का अवसर नहीं बल्कि समाज में बदलाव लाने का संकल्प लेने का दिन है। यदि युवा नशे से दूर रहकर शिक्षा, अनुशासन और आत्मसम्मान के मार्ग पर चलें, तो यही बाबासाहेब को सच्ची श्रद्धांजलि होगी और एक मजबूत, जागरूक और नशा मुक्त भारत का निर्माण संभव होगा। 🇮🇳✨