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2029 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर उल्हासनगर में सियासी हलचल तेज, शिवसेना से कमलेश निकम के नाम की चर्चा। BJP-शिवसेना का गठबंधन नहीं हुआ तो बदल सकते हैं समीकरण, डॉ. श्रीकांत शिंदे की नजरों में कमलेश निकम का बढ़ता कद।

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र में 2029 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से राजनीतिक चर्चाएं तेज होने लगी हैं। खासतौर पर उल्हासनगर विधानसभा क्षेत्र में शिवसेना की ओर से संभावित उम्मीदवारों को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, यदि 2029 के विधानसभा चुनाव में BJP और शिवसेना के बीच गठबंधन नहीं होता है और दोनों दल अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरते हैं, तो शिवसेना की ओर से उल्हासनगर में एक नए चेहरे को मौका दिए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

सूत्रों का दावा है कि कल्याण लोकसभा क्षेत्र के शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे की नजरों में उल्हासनगर के शिवसेना नेता कमलेश निकम लगातार अपनी मजबूत जगह बना रहे हैं। निकम पिछले कुछ समय से उल्हासनगर में संगठन को मजबूत करने और शिवसैनिकों के साथ बेहतर समन्वय बनाने के लिए सक्रिय नजर आ रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर शिवसेना के कार्यक्रमों, संगठनात्मक गतिविधियों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संपर्क के चलते कमलेश निकम की सक्रियता चर्चा में है। बताया जा रहा है कि वे पार्टी के छोटे-बड़े कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी के साथ-साथ शिवसैनिकों के बीच अपना तालमेल और जनसंपर्क भी लगातार बढ़ा रहे हैं।

शिवसैनिकों में भी उत्साह का माहौल

कमलेश निकम की बढ़ती सक्रियता का असर स्थानीय शिवसैनिकों के बीच भी दिखाई देने की बात कही जा रही है। पार्टी संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं में उनके नाम को लेकर सकारात्मक माहौल बनने की चर्चा है। ऐसे में यदि आगामी विधानसभा चुनाव में शिवसेना और BJP अलग-अलग चुनाव लड़ती हैं, तो उल्हासनगर सीट पर पार्टी किस चेहरे पर भरोसा जताएगी, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

टिकट को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं

हालांकि, 2029 के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों को लेकर अभी काफी समय बाकी है और शिवसेना की ओर से कमलेश निकम के नाम की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक, पार्टी संगठन में उनकी बढ़ती सक्रियता और डॉ. श्रीकांत शिंदे के साथ बेहतर समन्वय को देखते हुए उनका नाम संभावित दावेदारों में चर्चा में आ सकता है।

आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति और महायुति के समीकरण किस दिशा में जाते हैं, यह तय करेगा कि 2029 में उल्हासनगर विधानसभा सीट पर मुकाबला किस तरह का होगा। फिलहाल कमलेश निकम के संभावित विधानसभा टिकट को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।


















दूध-पनीर समेत खाद्य पदार्थों में मिलावट पर महाराष्ट्र सरकार सख्त, MCOCA की तैयारी। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे को मिलावटखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।

मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र में दूध, पनीर और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ सरकार ने अब सख्त रुख अपना लिया है। आम नागरिकों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट कर लोगों की जान और स्वास्थ्य को खतरे में डालने वालों के खिलाफ किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे को निर्देश दिया है कि दूध, पनीर सहित अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ व्यापक और प्रभावी कार्रवाई की जाए। संदिग्ध खाद्य पदार्थों की जांच, नमूने लेने, छापेमारी और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया को और तेज करने पर जोर दिया गया है।

संगठित मिलावटखोरी पर MCOCA का शिकंजा

सरकार की ओर से गंभीर और संगठित तरीके से मिलावट का कारोबार चलाने वालों के खिलाफ MCOCA के तहत कार्रवाई किए जाने के भी निर्देश दिए गए हैं। इस कदम का उद्देश्य उन लोगों और गिरोहों पर शिकंजा कसना है, जो बड़े पैमाने पर मिलावटी खाद्य पदार्थों का कारोबार कर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

दूध-पनीर की गुणवत्ता पर विशेष नजर

दूध और पनीर जैसे रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थ सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े हैं। ऐसे में इन उत्पादों में मिलावट की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई को और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

सरकार के निर्देशों के बाद FDA द्वारा मिलावटखोरों के खिलाफ जांच और कार्रवाई तेज किए जाने की संभावना है। मिलावट पाए जाने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मिलावटखोरों को सरकार की दो टूक चेतावनी

सरकार के इस सख्त रुख से खाद्य पदार्थों में मिलावट का अवैध कारोबार करने वालों में हड़कंप मचने की संभावना है। प्रशासन का संदेश साफ है कि मुनाफे के लिए लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

दूध, पनीर और अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आने वाले दिनों में राज्यभर में जांच और कार्रवाई का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
















उज्ज्वल निकम बनेंगे केंद्रीय मंत्री? अमित शाह से मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में अटकलें तेज।

नई दिल्ली: दिनेश मीरचंदानी

केंद्रीय मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार को लेकर सियासी हलचल के बीच भाजपा के राज्यसभा सांसद और देश के वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में निकम को केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने की अटकलें तेज हो गई हैं।

बताया जा रहा है कि संसद के मौजूदा सत्र के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में विस्तार की संभावना को लेकर चर्चा चल रही है। ऐसे में अमित शाह और उज्ज्वल निकम के बीच हुई मुलाकात को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, निकम को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने को लेकर अभी तक सरकार या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

मुंबई से दिल्ली तक पहुंची सकारात्मक रिपोर्ट!

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, उज्ज्वल निकम के राजनीतिक और सामाजिक कामकाज को लेकर मुंबई से दिल्ली तक सकारात्मक रिपोर्ट पहुंची है। इसी वजह से उन्हें केंद्र सरकार में कोई महत्वपूर्ण मंत्रालय या अहम जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

निकम का नाम देश के चर्चित सरकारी वकीलों में प्रमुखता से लिया जाता है। लंबे समय तक उन्होंने कई हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील आपराधिक मामलों में सरकार की ओर से पैरवी की है। आतंकवाद और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में उनकी प्रभावी पैरवी के कारण उन्हें देशभर में पहचान मिली।

कई चर्चित मामलों में कर चुके हैं पैरवी

उज्ज्वल निकम ने 1993 मुंबई बम धमाके, 26/11 मुंबई आतंकी हमला, गुलशन कुमार हत्याकांड, प्रमोद महाजन हत्याकांड और कोपर्डी बलात्कार-हत्या मामले समेत कई चर्चित मामलों में सरकारी पक्ष का प्रतिनिधित्व किया है।

उनकी कानूनी विशेषज्ञता और लंबे सार्वजनिक जीवन को देखते हुए अब उनके संभावित राजनीतिक दायित्व को लेकर चर्चा हो रही है। अमित शाह के साथ उनकी हालिया मुलाकात ने इन अटकलों को और हवा दे दी है।

2025 में राज्यसभा के लिए हुए मनोनीत

उज्ज्वल निकम को वर्ष 2025 में राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया था। इससे पहले उन्हें वर्ष 2016 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है।

अब केंद्रीय मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार के बीच अमित शाह से मुलाकात के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उज्ज्वल निकम को मोदी सरकार में मंत्री पद या कोई बड़ी संवैधानिक/राजनीतिक जिम्मेदारी मिलने जा रही है?

फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन निकम की अमित शाह से मुलाकात ने महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है।

















🏆*पत्रकारिता जगत में नई जिम्मेदारी: नीतू विश्वकर्मा को VOM इंटरनेशनल फोरम में महाराष्ट्र राज्य संयोजक नियुक्त किया गया* *पत्रकारों के हितों, मीडिया की स्वतंत्रता और पत्रकारिता के विकास के लिए निभाएंगी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी*


 




ठाणे/महाराष्ट्र: दिनेश मीरचंदानी

पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य, सामाजिक सक्रियता, संगठनात्मक योगदान तथा पत्रकारों के हितों के लिए निरंतर प्रयासों को देखते हुए नीतू विश्वकर्मा को Voice of Media (VOM) International Forum में महाराष्ट्र राज्य संयोजक के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया है।

VOM इंटरनेशनल फोरम की ओर से जारी नियुक्तिपत्र के अनुसार यह नियुक्ति 9 अगस्त 2026 को की गई है। नियुक्तिपत्र में नीतू विश्वकर्मा के पत्रकारिता क्षेत्र में किए गए कार्यों, सामाजिक गतिविधियों तथा पत्रकारों के हित में किए गए प्रयासों को महत्वपूर्ण माना गया है।

🔥 पत्रकारों की आवाज को मजबूत करने की जिम्मेदारी

नियुक्तिपत्र में उल्लेख किया गया है कि संगठन के उद्देश्यों, नीतियों और पत्रकारिता से जुड़े उपक्रमों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए नीतू विश्वकर्मा से महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की अपेक्षा है।

नई जिम्मेदारी के तहत वे महाराष्ट्र में पत्रकारों को संगठित करने, पत्रकारों की समस्याओं एवं प्रश्नों को प्रभावी मंच तक पहुंचाने, पत्रकारिता क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक पहल करने तथा संगठनात्मक गतिविधियों को मजबूत करने में योगदान देंगी।

यह जिम्मेदारी केवल एक पद नहीं, बल्कि पत्रकारों की आवाज को मजबूती देने और मीडिया जगत के हितों के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का महत्वपूर्ण दायित्व भी है।

📰 मीडिया जगत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह नियुक्ति?

आज के दौर में पत्रकारों के सामने कार्यस्थल की चुनौतियां, पत्रकारिता की स्वतंत्रता, डिजिटल मीडिया की बदलती भूमिका, पत्रकारों की सुरक्षा, आर्थिक एवं व्यावसायिक समस्याएं और विश्वसनीय पत्रकारिता को बनाए रखने जैसी अनेक चुनौतियां हैं।

ऐसे समय में महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य में राज्य संयोजक की जिम्मेदारी संगठन और पत्रकार समुदाय के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

🎉 नीतू विश्वकर्मा को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!

Shaurya Times परिवार की ओर से नीतू विश्वकर्मा को इस महत्वपूर्ण एवं सम्मानजनक जिम्मेदारी के लिए हार्दिक बधाई।

हमें विश्वास है कि वे अपनी पत्रकारिता के अनुभव, निर्भीक सोच, संगठनात्मक क्षमता और सक्रिय कार्यशैली के माध्यम से महाराष्ट्र के पत्रकार समुदाय की आवाज को और अधिक प्रभावी बनाएंगी तथा VOM इंटरनेशनल फोरम के उद्देश्यों को मजबूती से आगे बढ़ाएंगी।

नई जिम्मेदारी के लिए ढेरों शुभकामनाएं—यह पद पत्रकारिता के प्रति आपकी जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता को और मजबूत करे। 🇮🇳📰

📌 नियुक्ति की मुख्य जानकारी

विवरण जानकारी संगठन:

Voice of Media (VOM) International Forum

नियुक्त व्यक्ति: नीतू विश्वकर्मा

पद : महाराष्ट्र राज्य संयोजक

नियुक्ति दिनांक

9 अगस्त 2026

क्षेत्र महाराष्ट्र नियुक्तिपत्र



















महाराष्ट्र नगरपालिका विधेयक 2026: लोकप्रतिनिधियों के रिश्तेदारों की प्रशासन में दखलंदाजी पर अब सख्ती होगी। पति-पत्नी, बच्चों या अन्य रिश्तेदारों द्वारा अधिकारियों पर दबाव बनाना अपराध माना जाएगा। CM देवेंद्र फडणवीस सरकार का बड़ा कदम।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र में स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के प्रशासन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। महानगरपालिकाओं, नगरपालिकाओं, नगर पंचायतों और औद्योगिक नगरियों के कामकाज में लोकप्रतिनिधियों के रिश्तेदारों के बढ़ते हस्तक्षेप को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है।

महाराष्ट्र नगर परिषद विधेयक 2026 में ऐसे प्रावधान किए गए हैं, जिनके तहत लोकप्रतिनिधियों की ओर से उनके पति-पत्नी, बच्चों या अन्य रिश्तेदारों द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाना अथवा सरकारी कामकाज में अनुचित हस्तक्षेप करना अपराध माना जा सकता है।

सरकार का मानना है कि स्थानीय निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत महत्वपूर्ण है, लेकिन उनके नाम पर परिवार के सदस्यों या अन्य रिश्तेदारों द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव डालना व्यवस्था की निष्पक्षता और पारदर्शिता को प्रभावित कर सकता है।

प्रस्तावित प्रावधानों का उद्देश्य स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के प्रशासन को अनावश्यक राजनीतिक और पारिवारिक दबाव से मुक्त रखना है। इससे अधिकारियों को नियमों के अनुसार स्वतंत्र रूप से काम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में लाए जा रहे महाराष्ट्र नगर परिषद विधेयक 2026 में प्रशासनिक कामकाज में अनुचित हस्तक्षेप पर नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति लोकप्रतिनिधि के नाम या उनकी ओर से प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया जा सकता है।

इस कदम से स्थानीय निकायों में अधिकारियों और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच अधिकारों की स्पष्ट सीमा तय होने की उम्मीद है। साथ ही, सरकारी निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

Maharashtra Municipal Council Bill 2026 | Bill No. 251SP















उल्हासनगर में 58 वर्षीय महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, पुलिस ने परिजनों की तलाश शुरू की।


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर-3 के मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन क्षेत्र में 58 वर्षीय महिला की मौत का मामला सामने आया है। पुलिस द्वारा इसे अकस्मात मृत्यु के रूप में दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। मृत महिला की पहचान पुष्पा रमेश पवार (58) के रूप में हुई है। पुलिस ने महिला के परिजनों या परिचितों की जानकारी रखने वाले लोगों से पुलिस स्टेशन से संपर्क करने की अपील की है।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पुष्पा रमेश पवार बैरक नंबर 1132, इमली पाड़ा, फॉरेस्ट लाइन, उल्हासनगर-3, जिला ठाणे की निवासी थीं। बताया गया है कि उनकी तबीयत 26 मार्च 2026 से खराब चल रही थी और वह ठीक से खाना-पीना नहीं कर रही थीं।

पुलिस के मुताबिक, 27 जुलाई 2026 की शाम करीब 7:45 बजे एक महिला उनसे मिलने पहुंची। उस दौरान पुष्पा पवार के शरीर में कोई हलचल दिखाई नहीं दी। इसके बाद आसपास के लोगों और पुलिस की मदद से उन्हें मध्यवर्ती अस्पताल, उल्हासनगर-3 ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद करीब रात 8:45 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया।

महिला का हुलिया

पुलिस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, मृतका की उम्र 58 वर्ष, कद करीब 5 फीट 3 इंच और रंग सांवला था। उनकी कद-काठी मजबूत थी। बाल काले-सफेद तथा दांत साबुत थे। शरीर पर किसी विशेष पहचान चिन्ह या गोदने की जानकारी नहीं मिली है। दोनों पैरों में घुटनों के नीचे पुरानी चोटों के निशान बताए गए हैं। मृत्यु के समय उन्होंने फूलों के डिजाइन वाली काले, भगवा और नीले रंग की कुर्ती पहन रखी थी।

पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया महिला की मौत किसी शारीरिक बीमारी के कारण होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, मामले में आवश्यक पुलिस प्रक्रिया और जांच जारी है।

परिजनों से संपर्क की अपील

मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को पुष्पा रमेश पवार के परिजनों, रिश्तेदारों या परिचितों के बारे में कोई जानकारी हो, तो वह तत्काल पुलिस से संपर्क करे, ताकि मृतका के परिवार तक सूचना पहुंचाई जा सके।

📞 मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन, उल्हासनगर-3:

0251-2706900 / 8108112242


















उल्हासनगर महानगरपालिका के शिक्षा विभाग में स्टाफ की कमी से कामकाज प्रभावित, व्यवस्था पर उठे सवाल।

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के शिक्षा विभाग में कर्मचारियों की कमी के कारण विभागीय कामकाज प्रभावित होने की चर्चा सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं होने के कारण कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्य समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं, जिससे आम नागरिकों और संबंधित कर्मचारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बताया जा रहा है कि शिक्षा विभाग में लंबे समय से स्टाफ की कमी बनी हुई है। आवश्यक संख्या में कर्मचारियों की उपलब्धता नहीं होने के कारण कार्यालयीन कामकाज पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। कई मामलों में फाइलों और दस्तावेजों से संबंधित कार्यों के साथ-साथ अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी प्रभावित होने की बात कही जा रही है।

सेवानिवृत्त शिक्षकों को कार्यालय में बैठाने की चर्चा

वहीं, सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आ रही है कि कुछ सेवानिवृत्त शिक्षकों को कार्यालय में बुलाकर बैठाया गया है और उनसे कार्यालयीन कार्यों से संबंधित जिम्मेदारियां लिए जाने की चर्चा है। इस व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं और इसे नियमों के अनुरूप है या नहीं, इस पर स्पष्टता की मांग की जा रही है। 

हालांकि, सेवानिवृत्त शिक्षकों को कार्यालय में बैठाने और उनसे किसी प्रकार का कार्य लिए जाने संबंधी दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

आयुक्त से हस्तक्षेप की मांग

उल्हासनगर की जनता ने महानगरपालिका आयुक्त मनीषा आव्हाले से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि शिक्षा विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभाग में पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था होना आवश्यक है, ताकि विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम नागरिकों से जुड़े कार्य समय पर पूरे हो सकें।

जनता की मांग है कि शिक्षा विभाग में कर्मचारियों की वास्तविक स्थिति की समीक्षा कर आवश्यकतानुसार स्टाफ की नियुक्ति या उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और यदि नियमों के विपरीत किसी प्रकार की व्यवस्था की गई है तो उसकी भी जांच की जाए।

उल्हासनगर महानगरपालिका के शिक्षा विभाग में एक अलग ही स्थिति सामने आने की चर्चा है। जानकारी के मुताबिक, सेवानिवृत्त कर्मचारी कार्यालय में काम कर रहे हैं, जबकि स्कूलों में नियुक्त शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के बजाय कार्यालयीन कार्यों में लगाए जा रहे हैं।

सूत्रों का दावा है कि शिक्षकों को कार्यालय में काम करने के लिए कोई लिखित आदेश भी जारी नहीं किया गया है। ऐसे में बिना लिखित आदेश शिक्षकों से कार्यालयीन काम करवाए जाने को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

अब देखना होगा कि उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन और आयुक्त मनीषा आव्हाले इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को सुचारु बनाने के लिए क्या निर्णय लिया जाता है।















🚩 शिवसेना संगठन को और मजबूत करने के उद्देश्य से नगरसेवकों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया है। इसी शिविर में शामिल होने के लिए उल्हासनगर के शिवसेना नगरसेवक कलानी महल से रवाना हुए।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

शिवसेना संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करने तथा जनसेवा को प्रभावी बनाने की दिशा में पार्टी की ओर से महत्वपूर्ण पहल की गई है। उपमुख्यमंत्री श्री एकनाथ शिंदे के आदेश एवं सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के मार्गदर्शन में उल्हासनगर महानगरपालिका के नगरसेवकों के लिए रामभाऊ म्हालगी प्रशिक्षण प्रबोधिनी, उत्तन (भाईंदर) में विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया है।

9 अगस्त से 11 अगस्त 2026 तक आयोजित होने वाले इस प्रशिक्षण शिविर के लिए आज कलानी महल से नगरसेवकों ने प्रस्थान किया। शिविर का उद्घाटन सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के शुभहस्ते किया जाएगा, जबकि 11 अगस्त को शाम 5 बजे होने वाले समापन कार्यक्रम में मंत्री श्री संजय शिरसाट उपस्थित रहेंगे।

प्रशिक्षण शिविर के दौरान नगरसेवकों को संगठनात्मक कार्यप्रणाली, प्रशासनिक व्यवस्था, जनप्रतिनिधि के दायित्व और प्रभावी जनसेवा से जुड़े विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण शिवसेना के नगरसेवकों को भविष्य में बेहतर तरीके से जनता के बीच काम करने और संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस अवसर पर शिवसेना नेता कमलेश निकम ने संगठन को मजबूत करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पार्टी संगठन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए भविष्य में भी इसी तरह के प्रयास लगातार जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि मजबूत संगठन के माध्यम से जनसेवा को और प्रभावी बनाया जा सकता है तथा कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है।

यह प्रशिक्षण शिविर विशेष रूप से नगरसेवकों के लिए आयोजित किया गया है और सभी नगरसेवकों की उपस्थिति अनिवार्य रखी गई है।

इस आयोजन में आनंद परांजपे, संगठन प्रमुख महाराष्ट्र राज्य, तथा गोपाल लांडगे, जिलाप्रमुख कल्याण सहित संगठन के पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

शिवसेना की ओर से संगठनात्मक क्षमता बढ़ाने, जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करने और जमीनी स्तर पर जनसेवा को और प्रभावी बनाने की दिशा में इस प्रशिक्षण शिविर को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

उल्हासनगर के शिवसेना नेता कमलेश निकम ने विश्वास जताया कि इस प्रशिक्षण शिविर के बाद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और कार्यसम्राट सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के कुशल नेतृत्व में शिवसेना संगठन को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में शिवसेना पूरे महाराष्ट्र में नंबर वन पार्टी के रूप में उभरेगी।


















बांद्रा में फिर समीर वानखेडे!14 अगस्त को गेटी-गैलेक्सी के बाहर ‘भव्य नशामुक्ति अभियान’ होगा, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल होंगे।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

ड्रग्स और नशे के खिलाफ युवाओं में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार की ओर से 14 अगस्त 2026 को मुंबई के बांद्रा में ‘भव्य नशामुक्ति अभियान’ आयोजित किया जा रहा है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में होने वाले इस अभियान में पूर्व NCB अधिकारी समीर वानखेडे भी शामिल होंगे।

कार्यक्रम का आयोजन 14 अगस्त की सुबह 10:30 बजे बांद्रा स्थित गेटी-गैलेक्सी सिनेमा के बाहर किया जाएगा। अभियान में बड़ी संख्या में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों को आमंत्रित किया गया है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे की बढ़ती समस्या के प्रति जागरूक करना और उन्हें ड्रग्स से दूर रहने का संदेश देना है।

बांद्रा और समीर वानखेडे का पुराना कनेक्शन

समीर वानखेडे की बांद्रा में मौजूदगी इसलिए भी चर्चा का विषय बन रही है, क्योंकि कुछ वर्ष पहले अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान से जुड़े ड्रग्स मामले के दौरान वानखेडे राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आए थे। उस मामले की जांच और उससे जुड़ी कार्रवाई को लेकर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस देखने को मिली थी।

अब कई वर्षों बाद उसी बांद्रा इलाके में ड्रग्स के खिलाफ आयोजित एक बड़े जनजागरूकता अभियान में वानखेडे की मौजूदगी एक बार फिर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है।

युवाओं को नशे से दूर रखने पर रहेगा जोर

‘भव्य नशामुक्ति अभियान’ के दौरान विद्यार्थियों और युवाओं को ड्रग्स के स्वास्थ्य, सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाएगा। अभियान के जरिए युवाओं से नशे से दूर रहने और समाज को नशामुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील किए जाने की उम्मीद है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्रों की भागीदारी को देखते हुए इसे युवाओं के बीच नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने की एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

14 अगस्त पर टिकी नजरें

समीर वानखेडे की मौजूदगी के कारण इस कार्यक्रम को लेकर सार्वजनिक और मीडिया स्तर पर भी उत्सुकता बढ़ गई है। हालांकि, कार्यक्रम का घोषित उद्देश्य नशामुक्ति और जनजागरूकता है और फिलहाल किसी नए विवाद या कार्रवाई की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

ऐसे में 14 अगस्त को बांद्रा के गेटी-गैलेक्सी के बाहर होने वाला यह अभियान युवाओं में नशे के खिलाफ जागरूकता के साथ-साथ समीर वानखेडे की मौजूदगी के कारण भी चर्चा में रहने की संभावना है।















उल्हासनगर की सियासत में AKK की तिकड़ी का बढ़ता दबदबा, अरुण आशान, कमलेश निकम और कलवंत सिंह की जोड़ी की शहरभर में चर्चा।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर की स्थानीय राजनीति में इन दिनों AKK की तिकड़ी—अरुण आशान, कमलेश निकम और कलवंत सिंह को लेकर राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच तक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। महानगरपालिका की सत्ता और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में इस तिकड़ी की बढ़ती सक्रियता को लेकर शहर में तरह-तरह की राजनीतिक चर्चाएं सामने आ रही हैं।

स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अरुण आशान, कमलेश निकम और कलवंत सिंह के बीच बढ़ता राजनीतिक तालमेल उल्हासनगर की राजनीति में एक नए समीकरण की ओर इशारा कर रहा है। यही वजह है कि इन तीनों नेताओं की गतिविधियों और उनके बीच दिखाई देने वाली नजदीकियों पर राजनीतिक जानकारों के साथ-साथ आम नागरिकों की भी नजर बनी हुई है।

महानगरपालिका की सत्ता में प्रभाव को लेकर चर्चा

उल्हासनगर महानगरपालिका की सत्ता से जुड़े विभिन्न राजनीतिक फैसलों और गतिविधियों के बीच AKK की तिकड़ी के प्रभाव को लेकर चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं। शहर की स्थानीय राजनीति में यह सवाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि आने वाले समय में यह राजनीतिक समीकरण महानगरपालिका की सत्ता और संगठनात्मक स्तर पर किस तरह की भूमिका निभाता है।

डॉ. श्रीकांत शिंदे के करीबी माने जाने की चर्चा

राजनीतिक हलकों में अरुण आशान, कमलेश निकम और कलवंत सिंह को शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के करीबी नेताओं में भी माना जाता है। इसी राजनीतिक नजदीकी के चलते उल्हासनगर में AKK की तिकड़ी को लेकर चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया है।

हालांकि, इस तिकड़ी की राजनीतिक भूमिका और भविष्य की रणनीति को लेकर अभी कई बातें राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित हैं। आने वाले दिनों में इनके बीच तालमेल और स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों का असर उल्हासनगर की राजनीति पर कितना पड़ता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

फिलहाल, AKK की तिकड़ी उल्हासनगर की राजनीति में चर्चा का नया केंद्र बन गई है और शहर के राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच तक इनके नाम और राजनीतिक समीकरण को लेकर चर्चाएं जारी हैं।


















“15 साल बनाम 5 महीने”: विधायक कुमार ऐलानी पर बरसे शिव सेना नेता कमलेश निकम, विकास कार्यों को लेकर किया बड़ा दावा।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

शिवसेना नेता कमलेश निकम ने उल्हासनगर के विधायक कुमार ऐलानी पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए उनके कार्यकाल और शहर के विकास को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। निकम ने आरोप लगाया कि विधायक कुमार ऐलानी करीब 15 वर्षों से राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन इस लंबे कार्यकाल के बावजूद उल्हासनगर के विकास के लिए कोई उल्लेखनीय काम दिखाई नहीं देता।

कमलेश निकम ने कहा कि महापौर के महज पांच महीने के कार्यकाल में 500 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों को गति दी गई है। उन्होंने दावा किया कि शहर में बुनियादी सुविधाओं, परिवहन और अन्य विकास कार्यों को लेकर महापौर की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

15 अगस्त से 30 नई बस सेवाओं का दावा

निकम ने कहा कि महापौर के प्रयासों से आगामी 15 अगस्त को उल्हासनगर शहरवासियों को 30 नई बस सेवाओं की सौगात मिलने जा रही है। उन्होंने इसे शहर के सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

उन्होंने कहा कि शहर की बढ़ती आबादी और नागरिकों की परिवहन संबंधी जरूरतों को देखते हुए नई बस सेवाएं शुरू होना आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती हैं।

“ऐलानी सिर्फ एंटीलिया और साहूकारों के विधायक”

विधायक कुमार ऐलानी पर निशाना साधते हुए कमलेश निकम ने आरोप लगाया कि “कुमार ऐलानी केवल एंटीलिया इमारत और साहूकारों के विधायक बनकर रह गए हैं।” उन्होंने कहा कि विधायक को शहर के आम नागरिकों, उनकी समस्याओं और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

विधानसभा में उल्हासनगर की आवाज नहीं उठाने का आरोप

निकम ने आगे आरोप लगाया कि महाराष्ट्र विधानसभा के मौजूदा सत्रों में भी विधायक कुमार ऐलानी ने उल्हासनगर के महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रभावी तरीके से नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि शहर में सड़क, यातायात, सार्वजनिक परिवहन, पानी, स्वास्थ्य और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जिन्हें विधानसभा में मजबूती से उठाने की आवश्यकता है।

कमलेश निकम ने कहा कि “उल्हासनगर की जनता अब केवल राजनीतिक दावों पर नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाले विकास कार्यों पर विश्वास करेगी।”

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में शहर की जनता यह तय करेगी कि कौन जनहित के मुद्दों के लिए काम कर रहा है और कौन केवल राजनीति तक सीमित है।

हालांकि, निकम द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर विधायक कुमार ऐलानी की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।


















IRS अधिकारी समीर वानखेड़े ने त्रिची के प्रसिद्ध रॉकफोर्ट शिव मंदिर में किए दर्शन, विधिवत पूजा-अर्चना कर लिया भगवान शिव का आशीर्वाद।



त्रिची, तमिलनाडु: दिनेश मीरचंदानी

IRS अधिकारी समीर वानखेड़े ने आज तमिलनाडु के त्रिची (तिरुचिरापल्ली) स्थित प्रसिद्ध रॉकफोर्ट शिव मंदिर पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन किए। मंदिर पहुंचने के बाद उन्होंने श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया।

ऐतिहासिक रॉकफोर्ट पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर त्रिची के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों में अपनी विशेष पहचान रखता है। मंदिर की प्राचीन वास्तुकला, धार्मिक महत्व और पहाड़ी पर स्थित होने के कारण यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

समीर वानखेड़े ने मंदिर परिसर में पहुंचकर धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए देश और समाज की सुख-समृद्धि एवं शांति की कामना की।

धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक स्थल का किया अनुभव

रॉकफोर्ट मंदिर की यात्रा के दौरान समीर वानखेड़े ने मंदिर परिसर की धार्मिक एवं ऐतिहासिक विशेषताओं का भी अनुभव किया। त्रिची का रॉकफोर्ट क्षेत्र अपनी ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है तथा तमिलनाडु के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में शामिल है।

समीर वानखेड़े की मंदिर यात्रा से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद यह दौरा सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना। उनकी इस धार्मिक यात्रा को आस्था और आध्यात्मिक जुड़ाव से जुड़े एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

भगवान शिव के दर्शन के साथ समीर वानखेड़े ने मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा और ऐतिहासिक विरासत का अनुभव किया।































उल्हासनगर में 'RRR' की तिकड़ी फिर एकजुट, राजेंद्रसिंह भुल्लर, राजेंद्र चौधरी और रमेश चव्हाण के साथ आने से शिवसैनिकों में उत्साह की नई लहर।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर की राजनीति में गुरुवार को उस समय एक भावनात्मक और चर्चित क्षण देखने को मिला, जब वरिष्ठ शिवसैनिक राजेंद्रसिंह भुल्लर (महाराज), राजेंद्र चौधरी और रमेश चव्हाण एक साथ दिखाई दिए। तीनों नेताओं की एक साथ मौजूदगी की तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसके बाद अनेक शिवसैनिकों और समर्थकों ने इसे संगठन की मजबूती और एकता का प्रतीक बताते हुए स्वागत किया।

शिवसैनिकों के बीच यह त्रिमूर्ति लंबे समय से संगठन के संघर्ष, समर्पण और नेतृत्व का प्रतीक मानी जाती रही है। समर्थकों का कहना है कि जब उल्हासनगर में अपराध, दहशत और अस्थिरता का माहौल था, उस दौर में शिवसेना से जुड़ना आसान नहीं था। ऐसे समय में हिंदूहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे के विचारों से प्रेरित होकर तथा धर्मवीर आनंद दिघे के मार्गदर्शन में इन वरिष्ठ नेताओं ने संगठन को मजबूत करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई।

समर्थकों के अनुसार, राजेंद्रसिंह भुल्लर (महाराज), राजेंद्र चौधरी और रमेश चव्हाण ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में शिवसेना का संगठन खड़ा करने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और भगवा विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। उनका दावा है कि वर्षों के संघर्ष, संगठनात्मक मेहनत और नेतृत्व के कारण आगे चलकर उल्हासनगर महानगरपालिका में शिवसेना-भाजपा की सत्ता स्थापित होने की राह भी मजबूत हुई।

शिवसैनिकों का कहना है कि संगठन के शुरुआती दौर में अनेक कार्यकर्ताओं को विरोध, हमलों और धमकियों का सामना करना पड़ा तथा कई वरिष्ठ शिवसैनिकों ने संघर्ष के दौरान बलिदान भी दिया। इसके बावजूद संगठन के प्रति उनकी निष्ठा और संकल्प कमजोर नहीं पड़ा। उस समय "आदेश दिघे साहेब का... और प्रेरणा बाळासाहेब की" का संदेश कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का प्रमुख आधार माना जाता था।

बीते वर्षों में संगठन के भीतर समय-समय पर मतभेदों और दूरियों की चर्चाएं भी सामने आती रहीं। हालांकि, तीनों वरिष्ठ नेताओं के एक साथ दिखाई देने के बाद समर्थकों का मानना है कि यह तस्वीर संगठन में सकारात्मक संदेश देने वाली है। सोशल मीडिया पर कई कार्यकर्ताओं ने इसे "RRR की वापसी" बताते हुए संगठन के लिए शुभ संकेत बताया।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि सत्ता और पद समय के साथ बदलते रहते हैं, लेकिन वरिष्ठ नेताओं की एकजुटता संगठन को नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और दिशा प्रदान करती है। उनका मानना है कि यदि यह एकता आगे भी बनी रहती है तो संगठन को भविष्य में और मजबूती मिलेगी।

समर्थकों ने यह भी आशा व्यक्त की कि हिंदूहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे के विचारों, धर्मवीर आनंद दिघे के संस्कारों तथा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में संगठन की एकजुटता निरंतर बनी रहेगी और कार्यकर्ताओं को इसी प्रकार प्रेरणा मिलती रहेगी।

हालांकि, इस पुनर्मिलन को लेकर संबंधित नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक राजनीतिक घोषणा या संयुक्त बयान सामने नहीं आया है। फिलहाल, उनकी एक साथ आई तस्वीर ने उल्हासनगर के राजनीतिक और संगठनात्मक हलकों में चर्चा का विषय जरूर बना दिया है।



















उल्हासनगर-3 में सप्तध्यान फाउंडेशन व सुरेखा क्रिटिकेयर हॉस्पिटल का संयुक्त स्वास्थ्य अभियान, निःशुल्क नेत्र जांच शिविर 7 अगस्त 2026 को।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

सामाजिक संस्था सप्तध्यान फाउंडेशन द्वारा सुरेखा क्रिटिकेयर हॉस्पिटल के सहयोग से 7 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को निःशुल्क नेत्र जांच एवं मोतियाबिंद स्क्रीनिंग शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक सुरेखा क्रिटिकेयर हॉस्पिटल, इंडियन बैंक के पास, सेंट्रल हॉस्पिटल रोड, उल्हासनगर-3 में आयोजित होगा।

शिविर का उद्देश्य नागरिकों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को समय रहते आंखों की बीमारियों की जांच की सुविधा उपलब्ध कराना तथा मोतियाबिंद जैसी गंभीर समस्या की प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर उचित उपचार के लिए जागरूक करना है।

आयोजकों के अनुसार, नियमित नेत्र जांच से मोतियाबिंद का समय पर पता लगाया जा सकता है, दृष्टि हानि से बचाव होता है, आंखों की रोशनी सुरक्षित रहती है तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है। इसी उद्देश्य के साथ नागरिकों से इस निःशुल्क शिविर का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की गई है।

शिविर में आने वाले मरीजों की विशेषज्ञों द्वारा नेत्र जांच की जाएगी तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें आगे के उपचार और परामर्श की भी जानकारी दी जाएगी।

अपॉइंटमेंट एवं अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:

योगाचार्य सतीश शर्मा: 9011808012

नेत्र विशेषज्ञ (आई स्पेशलिस्ट) डॉ. मनीष मिरानी: 8108098576

सुरेखा क्रिटिकेयर हॉस्पिटल: 8237898959

"अच्छी दृष्टि, बेहतर जीवन" के संदेश के साथ आयोजित इस शिविर के माध्यम से आयोजकों ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे स्वयं भी अपनी आंखों की जांच कराएं और अपने परिवार के बुजुर्गों एवं जरूरतमंद लोगों को भी इस निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करें।

"स्वास्थ्य, शिक्षा और मानवता के लिए साथ मिलकर – आपकी दृष्टि, हमारा मिशन। आज का एक छोटा कदम, कल का उज्ज्वल भविष्य।"



















उल्हासनगर-2 के गोल मैदान क्रिकेट ग्राउंड के कथित ₹1 करोड़ के फर्जी बिल को लेकर विवाद गहराया। यूएमसी के पीडब्ल्यूडी विभाग के डिप्टी इंजीनियर संदीप जाधव पर कथित फर्जी बिल के उपर हस्ताक्षर के आरोप लगे हैं। नागरिकों ने यूएमसी आयुक्त मनीषा आव्हाले से निष्पक्ष जांच कर भुगतान पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका (यूएमसी) के लोक निर्माण विभाग (PWD) में कथित फर्जी बिलों और भुगतान प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर सामने आए तथ्यों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर कई प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। स्थानीय नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा संबंधित बिलों का भुगतान तत्काल प्रभाव से रोकने की मांग महानगरपालिका आयुक्त मनीषा आव्हाले से की है।

प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2022 में उल्हासनगर-2 स्थित गोल मैदान में क्रिकेट ग्राउंड के निर्माण एवं सौंदर्यीकरण कार्य के लिए लोक निर्माण विभाग द्वारा मेसर्स जय भारत कंस्ट्रक्शन को कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) जारी किया गया था। इस परियोजना की स्वीकृत लागत लगभग ₹2.85 करोड़ थी तथा कार्य छह माह में पूरा किया जाना था। दस्तावेजों में पांच वर्ष की दोष दायित्व अवधि (Defect Liability Period) का भी उल्लेख है।

बताया जाता है कि इसी कार्य के संबंध में मेसर्स जय भारत कंस्ट्रक्शन्स ने 26 मई 2026 को लगभग ₹1,00,08,652.94 का बिल प्रस्तुत किया। इसके बाद 13 जुलाई 2026 को उक्त बिल भुगतान की प्रक्रिया के लिए लेखा विभाग को भेज दिया गया। इसी भुगतान प्रक्रिया को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है।

सूत्रों के अनुसार, संबंधित बिल पर पीडब्ल्यूडी विभाग के डिप्टी इंजीनियर संदीप जाधव के कथित फर्जी बिल के उपर हस्ताक्षर किए जाने की आशंका जताई जा रही है। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि संदीप जाधव और शंकर नामक व्यक्ति ने मिलकर विभाग में कई कथित फर्जी बिल तैयार किए हैं। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम जांच एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

स्थानीय नागरिकों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि संबंधित निर्माण स्थल का तत्काल निरीक्षण कराया जाए। उनका आरोप है कि जिस कार्य के लिए करोड़ों रुपये के बिल प्रस्तुत किए गए हैं, उस स्थल पर अपेक्षित निर्माण कार्य दिखाई नहीं देता और साइट की स्थिति पहले जैसी ही बनी हुई है। उनका कहना है कि भुगतान से पहले कार्य की वास्तविक प्रगति का स्वतंत्र तकनीकी सत्यापन कराया जाना आवश्यक है।

सूत्रों का यह भी दावा है कि डिप्टी इंजीनियर संदीप जाधव द्वारा कार्यस्थल का नियमित निरीक्षण नहीं किया जाता। साथ ही, महाराष्ट्र शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्माण कार्य की प्रगति से संबंधित आवश्यक फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी भी कथित रूप से नहीं कराई गई जाती है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो विभागीय कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।

मामले से जुड़े लोगों का यह भी आरोप है कि पिछले कई वर्षों से पीडब्ल्यूडी विभाग का समुचित ऑडिट नहीं हुआ है। उनका मानना है कि यदि स्वतंत्र वित्तीय और तकनीकी ऑडिट कराया जाए तो कई अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। इसी कारण नागरिकों ने आयुक्त मनीषा आव्हाले से पूरे विभाग की व्यापक जांच कराने की मांग की है।

सूत्रों के अनुसार, शंकर नामक व्यक्ति पर पहले भी पीडब्ल्यूडी विभाग के तत्कालीन डिप्टी इंजीनियर महेश सीतलानी के कार्यकाल के दौरान कथित फर्जी बिल तैयार करने में संलिप्त रहने के आरोप लगते रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि आज भी विभाग में कथित फर्जी बिलों के मामलों में शंकर की भूमिका महत्वपूर्ण है और इस पहलू की भी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।

नागरिकों ने मांग की है कि संबंधित बिल का भुगतान जांच पूरी होने तक रोका जाए, कार्यस्थल का संयुक्त निरीक्षण कराया जाए, तकनीकी विशेषज्ञों से निर्माण कार्य का मूल्यांकन कराया जाए तथा यदि किसी स्तर पर अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।

'मंत्रालय टाइम्स' का कहना है कि जनहित से जुड़े इस कथित फर्जी बिल प्रकरण की पड़ताल आगे भी जारी रहेगी। उपलब्ध दस्तावेजों, संबंधित अभिलेखों तथा जांच से जुड़े तथ्यों को क्रमवार प्रकाशित किया जाएगा ताकि पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सके।



















उल्हासनगर महानगरपालिका में अकाउंट ऑफिसर का पदभार अटका, तीन दिनों से नितल लव्हाले को नहीं मिला चार्ज; प्रशासनिक प्रक्रिया पर उठे सवाल।


 
उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) में अकाउंट ऑफिसर के पदभार को लेकर प्रशासनिक स्तर पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। बताया जा रहा है कि नियुक्ति आदेश जारी होने के बावजूद पिछले तीन दिनों से नितल लव्हाले को अब तक अकाउंट ऑफिसर का विधिवत पदभार नहीं सौंपा गया है। इस देरी को लेकर महानगरपालिका के कर्मचारियों और शहर के विभिन्न हलकों में चर्चा का माहौल है।

सूत्रों के अनुसार, अकाउंट ऑफिसर का पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि महानगरपालिका की वित्तीय व्यवस्था, भुगतान, बजट और लेखा संबंधी कार्य इसी विभाग के माध्यम से संचालित होते हैं। ऐसे में पदभार सौंपने में हो रही देरी को लेकर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं।

चर्चाओं के बीच यह सवाल भी सामने आ रहा है कि पूर्व अकाउंट ऑफिसर किरण भिलारे का प्रभाव अब भी बना हुआ है या नहीं। कुछ लोग यह भी प्रश्न उठा रहे हैं कि आखिर नितल लव्हाले को समय पर चार्ज क्यों नहीं दिया जा रहा है और इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से स्पष्टता क्यों नहीं दी जा रही।

हालांकि, इन चर्चाओं और सवालों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। महानगरपालिका प्रशासन या आयुक्त की ओर से इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।

अब कर्मचारियों और नागरिकों की निगाहें महानगरपालिका प्रशासन पर टिकी हैं। सभी यह जानना चाहते हैं कि नितल लव्हाले को अकाउंट ऑफिसर का पदभार कब सौंपा जाएगा और पदभार में हो रही देरी के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं। यदि प्रशासन इस विषय पर आधिकारिक जानकारी जारी करता है, तो स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।





















उल्हासनगर में सियासी चर्चाओं का दौर तेज! क्या 2029 विधानसभा चुनाव की तैयारी में हैं शिवसेना नेता कमलेश निकम.?


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर शहर के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों शिवसेना नेता कमलेश निकम को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। राजनीतिक हलकों में ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि निकम ने वर्ष 2029 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपनी राजनीतिक गतिविधियों को तेज कर दिया है। हालांकि, इस संबंध में अब तक न तो कमलेश निकम और न ही शिवसेना की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि की गई है।

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, कमलेश निकम वर्ष 2029 में शिवसेना के टिकट पर उल्हासनगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के इच्छुक हो सकते हैं। इसी वजह से वे संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बढ़ाने और जनता के बीच अपनी सक्रियता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि चुनावी राजनीति में संभावित उम्मीदवार अक्सर वर्षों पहले से अपनी रणनीति पर काम शुरू कर देते हैं। ऐसे में कमलेश निकम की बढ़ती राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता को भी आगामी विधानसभा चुनाव की संभावित तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

सूत्रों का दावा है कि हाल के समय में कमलेश निकम विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों में लगातार भागीदारी कर रहे हैं तथा आम नागरिकों और कार्यकर्ताओं के साथ उनका संपर्क भी बढ़ा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

उल्हासनगर विधानसभा क्षेत्र हमेशा से राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। चुनाव नजदीक आने के साथ संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाएं तेज होना स्वाभाविक माना जाता है। ऐसे में कमलेश निकम का नाम भी संभावित दावेदारों में प्रमुखता से लिया जा रहा है।

फिलहाल, वर्ष 2029 के विधानसभा चुनाव को लेकर शिवसेना ने किसी भी उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए कमलेश निकम के चुनाव लड़ने की चर्चाओं को फिलहाल केवल राजनीतिक अटकलों और सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

आने वाले समय में यदि शिवसेना या कमलेश निकम की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा की जाती है, तो उल्हासनगर की राजनीति में नए समीकरण और नई राजनीतिक हलचल देखने को मिल सकती है।




















'गोल मैदान' क्रिकेट प्रोजेक्ट पर विवाद गहराया, सामाजिक कार्यकर्ता मनोज साधवानी ने ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए वर्क ऑर्डर रद्द करने, भुगतान रोकने और ब्लैकलिस्ट करने की मांग की।


 









उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) के अंतर्गत 'गोल मैदान' में क्रिकेट मैदान के निर्माण एवं सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। सामाजिक कार्यकर्ता मनोज साधवानी ने महानगरपालिका आयुक्त को विस्तृत शिकायत-पत्र सौंपकर संबंधित वर्क ऑर्डर को तत्काल रद्द करने, ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने तथा करोड़ों रुपये के कथित भुगतान पर रोक लगाने की मांग की है।

शिकायत के अनुसार, वर्क ऑर्डर क्रमांक UMC/PWD/EE/2022-23/230 दिनांक 21 जुलाई 2022 को जारी किया गया था। पत्र में दावा किया गया है कि इस परियोजना के लिए निधि पैनल क्रमांक 5 की पूर्व नगरसेविका गीता साधवानी के प्रयासों से स्वीकृत हुई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ठेकेदार ने वर्क ऑर्डर और निविदा की शर्तों का पालन नहीं किया तथा निर्धारित छह माह की अवधि समाप्त होने के बाद भी परियोजना का 5 प्रतिशत कार्य भी पूरा नहीं किया।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मौके पर जो कार्य किया गया है, वह अत्यंत निम्न गुणवत्ता का है और उसे स्वीकृत एस्टिमेट तथा तकनीकी ड्रॉइंग के अनुरूप नहीं किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि इससे परियोजना की गुणवत्ता और सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

शिकायत-पत्र में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि संबंधित ठेकेदार मेसर्स जय भारत कंस्ट्रक्शन्स ने 26 मई 2026 को लगभग ₹1,00,08,652.94 का बिल प्रस्तुत किया, जिसे 13 जुलाई 2026 को भुगतान के लिए लेखा विभाग भेज दिया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि वास्तविकता में इस मूल्य का कार्य स्थल पर नहीं हुआ है और इसलिए प्रस्तुत बिल पूरी तरह फर्जी एवं बनावटी है।

पत्र में आगे आरोप लगाया गया है कि यह कथित बिल मेसर्स अनिरुद्ध नखावा तथा उल्हासनगर महानगरपालिका के लोक निर्माण विभाग (PWD) के कुछ अभियंताओं और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से तैयार किया गया। शिकायतकर्ता ने इन आरोपों की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराने की मांग भी की है।

मनोज साधवानी ने आयुक्त से मांग की है कि संबंधित वर्क ऑर्डर को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए, ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाए तथा मुख्य लेखा अधिकारी को निर्देश दिए जाएं कि विस्तृत जांच पूरी होने तक किसी भी बिल का भुगतान न किया जाए। उनका कहना है कि यदि जांच से पहले भुगतान किया गया तो इससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंच सकता है और इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों पर होगी।

शिकायत-पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि जांच पूरी किए बिना भुगतान किया गया तो वे इस मामले को माननीय मुंबई उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से उठाएंगे।

शिकायत के साथ कथित तौर पर कार्यस्थल के फोटोग्राफ भी संलग्न किए गए हैं, जिन्हें शिकायतकर्ता ने अपने आरोपों के समर्थन में प्रस्तुत किया है। शिकायत की प्रतिलिपि नगर विकास विभाग, मंत्रालय, जिलाधिकारी ठाणे, उल्हासनगर के महापौर, उप-आयुक्त (मुख्यालय) तथा मुख्य लेखा अधिकारी को भी भेजी गई है।

अब इस पूरे मामले में निगाहें उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है और संबंधित वर्क ऑर्डर तथा भुगतान प्रक्रिया पर क्या निर्णय लिया जाता है।

(नोट: यह समाचार शिकायत-पत्र में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)यदि चाहें, मैं इसे और अधिक अखबार की खोजी (Investigative) शैली या ब्रेकिंग न्यूज़ शैली में भी तैयार कर सकता हूँ।
















UMC के PWD विभाग में डेप्युटी इंजीनियर संदीप जाधव और कर्मचारी दीप्ति लाडे की बदली को लेकर नागरिकों ने आयुक्त मनीषा आव्हाले से पूछा— आखिर उनका तबादला कब होगा?


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) के लोक निर्माण विभाग (PWD) में वर्षों से कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को लेकर एक बार फिर शहर में चर्चा तेज हो गई है। नागरिकों ने आयुक्त मनीषा आव्हाले से सवाल किया है कि PWD विभाग में डेप्युटी इंजीनियर संदीप जाधव और कर्मचारी दीप्ति लाडे का स्थानांतरण आखिर अब तक क्यों नहीं किया गया और उनकी बदली कब होगी?

स्थानीय नागरिकों का दावा है कि दोनों पिछले 20 से अधिक वर्षों से इसी विभाग में कार्यरत हैं। इसे लेकर लोगों का कहना है कि लंबे समय तक एक ही विभाग में पदस्थ रहने से प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उनका मानना है कि समय-समय पर स्थानांतरण होने से प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी और निष्पक्ष बनी रहती है।

नागरिकों का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार के स्थानांतरण संबंधी प्रचलित सरकारी आदेश (GR) के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को तीन वर्ष से अधिक एक ही विभाग या पद पर नहीं रखा जाना चाहिए। निर्धारित कार्यकाल पूरा होने के बाद उसका स्थानांतरण किया जाना अपेक्षित होता है, ताकि प्रशासनिक संतुलन और कार्यप्रणाली की पारदर्शिता बनी रहे।

इसी आधार पर शहर के लोगों का सवाल है कि यदि यह नीति अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों पर लागू होती है, तो PWD विभाग में कार्यरत इन दोनों कर्मचारियों के मामले में अब तक इसका पालन क्यों नहीं किया गया। नागरिकों का कहना है कि यदि किसी विशेष प्रशासनिक कारण से उनका स्थानांतरण नहीं किया गया है, तो इसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए, जिससे किसी प्रकार की भ्रम या चर्चा की स्थिति समाप्त हो सके।

शहर के कई नागरिकों का मानना है कि स्थानांतरण नीति का उद्देश्य केवल कर्मचारियों का तबादला करना नहीं, बल्कि प्रशासन में निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी है। ऐसे में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के लंबे समय तक एक ही विभाग में बने रहने पर स्वाभाविक रूप से सवाल उठना लाज़िमी है।

नागरिकों ने आयुक्त मनीषा आव्हाले से मांग की है कि इस पूरे मामले पर स्पष्ट रुख अपनाया जाए और यह बताया जाए कि संदीप जाधव एवं दीप्ति लाडे की बदली अब तक क्यों नहीं हुई। साथ ही, यदि स्थानांतरण संबंधी नियम लागू होते हैं, तो उनके अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

अब देखना यह होगा कि उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन इस मामले पर क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या स्थानांतरण नीति के अनुरूप आगे कोई कार्रवाई की जाती है। फिलहाल, यह मुद्दा शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और नागरिक प्रशासन के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

















उल्हासनगर महानगरपालिका मुख्यालय बना 'खतरे की इमारत'! 50 साल पुरानी जर्जर बिल्डिंग में रोजाना मेयर, 78 पार्षद और 1,000 अधिकारी-कर्मचारियों की जान जोखिम में।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) का करीब 50 वर्ष पुराना मुख्यालय अब गंभीर रूप से जर्जर और असुरक्षित स्थिति में पहुंच चुका है। इमारत की खराब हालत ने न केवल जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यहां रोजाना आने वाले हजारों नागरिकों के लिए भी बड़ा खतरा पैदा कर दिया है।

उल्हासनगर महानगरपालिका मुख्यालय में प्रतिदिन शहर के मेयर, 78 पार्षद, लगभग 1,000 अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में नागरिक अपने विभिन्न प्रशासनिक कार्यों के लिए पहुंचते हैं। लेकिन भवन की लगातार बिगड़ती स्थिति के कारण किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका जताई जा रही है। कई स्थानों पर दीवारों में दरारें, छत और प्लास्टर के टूटने जैसी समस्याएं भवन की जर्जर हालत को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं।

सूत्रों के अनुसार, इमारत की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने नई  उल्हासनगर महानगर पालिका इमारत के निर्माण की प्रक्रिया को गति देने के साथ-साथ मुख्यालय को अस्थायी रूप से किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की तैयारियां भी तेज कर दी हैं। इसका उद्देश्य कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस भवन से पूरे शहर का प्रशासन संचालित होता है, वही अब सुरक्षा के लिहाज से सबसे बड़ा चिंता का विषय बन गया है। उनका मानना है कि किसी संभावित दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय प्रशासन को तत्काल प्रभाव से आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

अब सभी की उल्हासनगर महानजर पालिका प्रशासन के अगले फैसले पर टिकी है कि नई इमारत का निर्माण और कार्यालय का स्थानांतरण कितनी तेजी से पूरा किया जाता है, ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।